तरुण विजय

बॉलीवुड की फिल्मी बेईमानी

तरुण विजय

किसी के जीवन का अतिशय दारुण दुख बॉलीवुड के मसाले में लिपटकर जो पाखंडी चरित्र अपना लेता है, वह उस अतिशय दुख से भी बढ़कर चुभनेवाला सिद्ध होता है. फिल्म छपाक एक ऐसी लड़की की कारुणिक और बहादुरी मिश्रित कथा है, जो समाज के राõक्षसों से लड़ते हुए जिंदगी से हारी नहीं, बल्कि उसने जीत का प्रेरक परचम भी फहराया.

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द्विपक्षीय संबंधों में दूरदर्शिता जरूरी

पुष्पेश पंत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा को लेकर वैसा उत्साह नहीं है, जैसा ऐसे किसी राजकीय ...

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दो महीने बाद शाहीन बाग

रवि भूषण

दिसंबर के मध्य से आरंभ हुए दिल्ली के शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन के दो महीने पूरे हो चुके हैं. इस ...

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कब मिलेगा निर्भया को न्याय

आशुतोष चतुर्वेदी

न्याय में देरी, अन्याय है- न्याय के क्षेत्र में अक्सर इस सूत्र वाक्य का प्रयोग होता है. इसका ...

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जयंती पर विशेष : वीर बुधू भगत के प्रति चेतना

महादेव टोप्पो

कुछ महीने पहले अरगोड़ा चौक, रांची में एक दुर्घटना से आदिवासी समाज आक्रोशित हो उठा था. घटना यह थी कि ...

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