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Film Review : जानें कैसी हैं संजय दत्‍त की 'प्रस्‍थानम'
फ़िल्म ''प्रस्थानम'' साउथ की फ़िल्म तेलुगु का हिंदी रीमेक है लेकिन फ़िल्म देखते हुए यह महाकाव्य महाभारत की याद दिलाता है. फ़िल्म की कहानी की बात करें तो फ़िल्म बलदेव प्रताप सिंह (संजय दत्त) की है जो एक सफल बाहुबली राजनेता है. सत्ता पाने के लिए बलदेव को निजी जिंदगी में कई समझौते करने पड़े हैं. उन्होंने दो बच्चों की मां विधवा सरोज ( मनीषा कोइराला) से शादी की है. सरोज से बलदेव का भी एक बेटा विवान (सत्यजीत दुबे) हुआ है. अब दो बेटे हैं तो अच्छे और बुरे वाली जंग भी होगी. सत्ता किसकी होगी ये भी मारपीट है.
Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'द जोया फैक्‍टर'
अव्वल नंबर से धौनी तक अब तक रुपहले परदे पर क्रिकेट से जुड़े जुनून, लगन और हीरोज की कहानियां आयी है. ''द जोया फैक्टर'' क्रिकेट से जुड़े अंधविश्वास, टोटके सिंपल शब्दों में कहें तो लकी चार्म की बात करता है. क्रिकेटर्स से जुड़ी अंधविश्वास और टोटकों की कहानियां लंबी है. सुनील गावस्कार मैदान में हमेशा राइट साइड़ से चलते हुए एंट्री करते थे तो वही सचिन तेंदुलकर अपने लेफ्ट पैर का पैड राइट से पहले हर मैच में पहनते थे. भारतीय क्रिकेटर ही नहीं विदेशी क्रिकेटर्स भी टोटको और लकी चार्म में यकीन करते रहे हैं.
Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'ड्रीम गर्ल'
आयुष्मान खुराना पिछले कुछ समय से लगातार अपनी फिल्मों के साथ एक्‍सपेरीमेंट कर वाहवाही बटोर रहे हैं. लीग से हटकर उनकी फिल्मों के विषय रहे हैं. ''ड्रीम गर्ल'' में वह महिला का किरदार निभा रहे हैं. फ़िल्म का कांसेप्ट आकर्षित करता है लेकिन फ़िल्म की कहानी और उससे जुड़ा ट्रीटमेंट इसे लीग से हटकर नहीं बल्कि विशुद्ध मसाला फ़िल्म की श्रेणी में ले जाता है. इस मसाला फ़िल्म की कहानी जो फ़िल्म के प्रोमो में नज़र आयी है बस वही भर है.
Film Review : देखने से पहले जानें कैसी है फिल्‍म 'छिछोरे'
कॉलेज कैंपस पर फिल्में बनती रही हैं. जिसमे कॉलेज की मस्ती, दोस्ती, मोहब्बत के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा और जीत का जश्न दिखाया जाता रहा है. ''छिछोरे'' में ये सब तो है ही लेकिन इसके साथ एक और जो बात इस फिल्म की कहानी को खास बनाते हैं. वो ये है कि फिल्म सिर्फ जीत ही नहीं बल्कि असफलता की बात भी करती है. जीत का जश्न मनाने की प्लानिंग हमेशा ही होती है हारने पर क्या करना है यह फिल्म इस पर फोकस करती है. सफलता के बारे में सभी सोचते हैं जिंदगी के बारे में क्यों नहीं. उसकी जवाबदारी क्यों नहीं होती है.