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Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'बाला'
अपनी फिल्मों से हमेशा मनोरंजन के साथ साथ एक अनूठा संदेश का मकसद जोड़ने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना इस बार अपनी फिल्म बाला के ज़रिए बॉडी शेमिंग जैसे संवेदनशील और ज़रूरी मुद्दे पर बातचीत की है. भारतीय समाज ऐसा समाज रहा है. जहां किसी को भी अच्छा या बुरा उसके रूप रंग और कद काठी से करार दिया जाता रहा है. आप जैसे हैं वैसे बेस्ट हैं. ये बाहर वाले तो छोड़िए घरवाले भी कहते या समझाते नहीं हैं. बल्कि इस नुस्खे,इस क्रीम, इस ट्रीटमेंट से आप खुद को बदल सकते हैं।इसकी सलाह जरूर देते दिन रात देते रहते हैं.
Film Review: फिल्म देखने से पहले जानें कैसी है 'उजड़ा चमन'
कन्नड़ फिल्म ओन्दू मोट्टया कोंन्दू का हिंदी रीमेक यह फिल्म है. भारतीय समाज का इनर ब्यूटी से कोई सरोकार नहीं है. ऐसे समाज में कम उम्र में गंजापन कितनी बड़ी मुश्किल या हीनता का सबब बन सकता है. फिल्म के इसी कॉन्सेप्ट पर फिल्म की कहानी है.
Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'हाउसफुल 4'
हाउसफुल फ्रेंचाइजी की यह चौथी कड़ी भी ''घर दिमाग पर रखकर थिएटर में आइए'' इस बात को पुख्ता करती है. फ़िल्म में न कहानी है न कॉमेडी. माइंडलेस कॉमेडी वाली इस माइंडलेस फ़िल्म की कहानी में हैरी (अक्षय), मैक्स (बॉबी), रॉय (रितेश) तीन भाई हैं. उन्हें अपनी जान बचाने के लिए डॉन को पैसे देने हैं ऐसे में वह अमीर बिज़नेसमैन (रंजीत) की तीन बेटियों (कृति,पूजा और कृति) को प्यार में फंसाते हैं. वही घिसा-पिटा फार्मूला. बात शादी तक पहुँच जाती है फिर कहानी 600 साल पीछे चली जाती है.
Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'मेड इन चाइना'
सेक्स संबंध पर खुले आम बात करना हमारे यहां प्रतिबंधित माना जाता रहा है. यही वजह है कि फिल्मों ने भी इस विषय से मीलों की दूरी बना ली थी लेकिन पिछले कुछ सालों से ये फासले कम हो रहे हैं. ''मेड इन चाइना'' उसी की अगली कड़ी है लेकिन फ़िल्म अपनी कहानी या ट्रीटमेंट से इस विषय पर कुछ नया नहीं परोस पायी है. फिल्म देखते हुए कई बार हालिया रिलीज सोनाक्षी की फ़िल्म शफाखाना की याद दिला जाती है. हालांकि, मेड इन चाइना उस फिल्म से बेहतर ज़रूर है लेकिन अगर स्क्रीनप्ले और ट्रीटमेंट पर थोड़ा और काम किया जाता तो संभावनों से भरी यह फ़िल्म एक उम्दा फ़िल्म बन सकती थी.