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Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'सांड की आंख'
बायोपिक फिल्मों के इस दौर में यह फ़िल्म भारत की सबसे उम्रदराज़ महिला शार्प शूटर चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की कहानी है जो शूटर दादी के नाम से भी प्रसिद्ध हैं. यह महिला सशक्तिकरण की कहानी है. दो औरतों के संघर्ष और उनकी जीत की कहानी है जो संघर्ष करती हैं, पुरुष सत्ता के खिलाफ खड़ी होती हैं अपने लिए नहीं बल्कि अपनी बेटी और पोतियों के लिए. चंद्रो तोमर( भूमि पेंडेरेकर) और प्रकाशी तोमर( तापसी पन्नू) एक दूसरे की जेठानी और देवरानी है. वे ऐसे गाँव परिवार से आती हैं.
Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है सैफ की 'लाल कप्‍तान'
हिंदी सिनेमा का पॉपुलर फार्मूला बदल रहा है. इसी फॉर्मूले पर फ़िल्म ''लाल कप्तान'' की भी कहानी है. फ़िल्म का कालखंड 18 वीं शताब्दी है. यही फ़िल्म में उत्सुकता जगाता है कि ये बात नए किरदार और दिलचस्प पहलू के साथ कहानी को परोसा जाएगा लेकिन जिस तरह से कहानी को परोसा गया है वह न एंगेजिंग है और ना ही मनोरंजक. भले ही हॉलीवुड के अंदाज़ वाला ग्रैंड प्रोडक्शन वैल्यू है, कमाल की स्टारकास्ट है लेकिन कहानी बहुत कमजोर और उबाऊ रह गयी है.
Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है 'द स्‍काई इज पिंक'
मौत की आगोश में भी ज़िन्दगी को पूरी जिंदादिली से जिया जा सकता है बल्कि जीना ही चाहिए. इसी फलसफे को फ़िल्म ''द स्काई इज पिंक'' दर्शाती है. फ़िल्म 18 साल की कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह गयी मोटिवेशनल स्पीकर और लेखिका आएशा और उनके परिवार की सच्ची कहानी का फिल्मी रूपांतरण है. कहानी की शुरुआत आएशा की आवाज़ से होती है जिसके अंदाज़ में मरना भी कूल लगता है. वह फ़िल्म में कहती भी है कि कोई सौ साल पहले मरेगा कोई सौ साल बाद फिर इतना मातम क्यों है.