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बढ़ रही है महिला विधायकों की संख्या, झारखंड विस में चार के बाद पांच, आठ, फिर नौ, अब हैं 11 महिला विधायक
झारखंड में महिला विधायकों की संख्या धीरे-धीरे ही सही, बढ़ रही है. झारखंड निर्माण से ठीक पहले हुए बिहार विधानसभा चुनाव (वर्ष 2000) में चार महिलाएं विधायक बनी थीं. वहीं 2005 में झारखंड बनने के बाद पहली बार हुए चुनाव में पांच महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. इसके बाद 2009 के चुनाव में इनकी संख्या बढ़ कर आठ हो गयी.
बढ़ रही है महिला विधायकों की संख्या, झारखंड विस में चार के बाद पांच, आठ, फिर नौ, अब हैं 11 महिला विधायक
झारखंड में महिला विधायकों की संख्या धीरे-धीरे ही सही, बढ़ रही है. झारखंड निर्माण से ठीक पहले हुए बिहार विधानसभा चुनाव (वर्ष 2000) में चार महिलाएं विधायक बनी थीं. वहीं 2005 में झारखंड बनने के बाद पहली बार हुए चुनाव में पांच महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. इसके बाद 2009 के चुनाव में इनकी संख्या बढ़ कर आठ हो गयी.
Ayodhya Verdict : इस फैसले से इतिहास में दर्ज हो गया जस्टिस गोगोई का नाम
नयी दिल्ली : देश के बहुचर्चित और सबसे पुराने अयोध्या भूमि विवाद को लेकर वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले बाद से जस्टिस गोगोई का कार्यकाल इतिहास में दर्ज हो जायेगा.
विधायक का सफरनामा : हाथ पकड़ कर छोड़ते रहे हैं राधाकृष्ण किशोर
छतरपुर के विधायक राधाकृष्ण किशोर पहले कांग्रेस, फिर जदयू, इसके बाद फिर से कांग्रेस तथा अभी भाजपा में हैं. पलामू के छतरपुर विधानसभा का पांच बार प्रतिनिधित्व करनेवाले श्री किशोर पहली बार कांग्रेस के टिकट पर 1980 में छतरपुर के विधायक बने थे. तब कांग्रेस के नेता भीष्म नारायण सिंह (अब स्वर्गीय) ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभायी थी. युवा विधायक के रूप में एकीकृत बिहार में श्री किशोर की पहचान थी. 1980 के बाद 1985 का चुनाव भी उन्होंने जीता. इसके बाद दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद 1995 में कांग्रेस के टिकट पर ही किशोर ने फिर से चुनाव मे जीत हासिल की. पर इसके बाद 2000 का चुनाव वह हार गये. झारखंड गठन के बाद के पहले चुनाव (2005) से पूर्व उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी तथा जदयू में शामिल हो गये. जदयू के टिकट पर ही उन्होंने चुनाव लड़ा तथा राजद प्रत्याशी पुष्पा देवी को हराया.
विधायक का सफरनामा : हाथ पकड़ कर छोड़ते रहे हैं राधाकृष्ण किशोर
छतरपुर के विधायक राधाकृष्ण किशोर पहले कांग्रेस, फिर जदयू, इसके बाद फिर से कांग्रेस तथा अभी भाजपा में हैं. पलामू के छतरपुर विधानसभा का पांच बार प्रतिनिधित्व करनेवाले श्री किशोर पहली बार कांग्रेस के टिकट पर 1980 में छतरपुर के विधायक बने थे. तब कांग्रेस के नेता भीष्म नारायण सिंह (अब स्वर्गीय) ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभायी थी. युवा विधायक के रूप में एकीकृत बिहार में श्री किशोर की पहचान थी. 1980 के बाद 1985 का चुनाव भी उन्होंने जीता. इसके बाद दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद 1995 में कांग्रेस के टिकट पर ही किशोर ने फिर से चुनाव मे जीत हासिल की. पर इसके बाद 2000 का चुनाव वह हार गये. झारखंड गठन के बाद के पहले चुनाव (2005) से पूर्व उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी तथा जदयू में शामिल हो गये. जदयू के टिकट पर ही उन्होंने चुनाव लड़ा तथा राजद प्रत्याशी पुष्पा देवी को हराया.
Ayodhya Verdict: वो 7 बड़े सवाल जिनके मिलेंगे जवाब
अयोध्या मामले में 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई 40 दिनों तक चली थी.
Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले की बड़ी बातें
सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए अलग ज़मीन देने का निर्देश, निर्मोही अखाड़े की दावेदारी ख़ारिज.
Ayodhya Verdict: मुसलमान पक्ष असंतुष्ट, ओवैसी बोले, "पांच एकड़ ज़मीन की ख़ैरात नहीं चाहिए"
ओवैसी ने कहा, 'हम अपनी नस्लों को ये बताते जाएंगे कि यहां 500 साल तक मस्जिद थी.'
पिछले चुनाव में दशरथ ने अर्जुन को पछाड़ कर पलट दी थी सियासी धारा, जानें खरसावां विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा
खरसावां : दुनिया में सिल्क (कुचाई सिल्क) को लेकर प्रसिद्ध खरसावां का झारखंड की राजनीति में अलग पहचान है. आजादी के बाद पहले चुनाव में खरसावां से जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी से जीत दर्ज की थी. 1957 में झारखंड पार्टी से हरिचरण सोय ने जीत दर्ज की. वे बिहार में मंत्री भी बने. इसी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी जीत चुके हैं. 1995, 2000 व 2005 के चुनाव में अर्जुन मुंडा ने जीत की हैट्रिक लगायी. श्री मुंडा एक बार झामुमो की टिकट पर भी इस सीट से जीत चुके हैं.
पिछले चुनाव में दशरथ ने अर्जुन को पछाड़ कर पलट दी थी सियासी धारा, जानें खरसावां विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा
खरसावां : दुनिया में सिल्क (कुचाई सिल्क) को लेकर प्रसिद्ध खरसावां का झारखंड की राजनीति में अलग पहचान है. आजादी के बाद पहले चुनाव में खरसावां से जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी से जीत दर्ज की थी. 1957 में झारखंड पार्टी से हरिचरण सोय ने जीत दर्ज की. वे बिहार में मंत्री भी बने. इसी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी जीत चुके हैं. 1995, 2000 व 2005 के चुनाव में अर्जुन मुंडा ने जीत की हैट्रिक लगायी. श्री मुंडा एक बार झामुमो की टिकट पर भी इस सीट से जीत चुके हैं.
Ayodhya Verdict: CJI रंजन गोगोई ने UP के मुख्‍य सचिव, डीजीपी से ली सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी
नयी दिल्ली : अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट शनिवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाने जा रहा है. धार्मिक, राजनैतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमे में फैसले से पहले उत्तर प्रदेश और विशेषकर अयोध्या की स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राज्य के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह से मिलकर कानून-व्यवस्था की स्थिति जानी.
Ayodhya Verdict: CJI रंजन गोगोई ने UP के मुख्‍य सचिव, डीजीपी से ली सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी
नयी दिल्ली : अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट शनिवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाने जा रहा है. धार्मिक, राजनैतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमे में फैसले से पहले उत्तर प्रदेश और विशेषकर अयोध्या की स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने राज्य के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह से मिलकर कानून-व्यवस्था की स्थिति जानी.
झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : 15 विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनाव से है एक ही दल का कब्जा बरकरार
रांची : झारखंड गठन के बाद से अब तक विधानसभा के तीन चुनाव (2005, 2009 और 2014) हुए हैं. राज्य में विधानसभा की 15 ऐसी सीटें हैं, जिन पर पिछले तीन चुनावों से एक ही दल का कब्जा बरकरार है. 81 विधानसभा सीटों में से पांच-पांच विधानसभा सीटों पर झामुमो व भाजपा अजेय रही है. संताल परगना प्रमंडल की तीन सीट बरहेट, लिट्टीपाड़ा व शिकारीपाड़ा में झामुमो का किला कभी ध्वस्त नहीं हुआ.
झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : 15 विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनाव से है एक ही दल का कब्जा बरकरार
रांची : झारखंड गठन के बाद से अब तक विधानसभा के तीन चुनाव (2005, 2009 और 2014) हुए हैं. राज्य में विधानसभा की 15 ऐसी सीटें हैं, जिन पर पिछले तीन चुनावों से एक ही दल का कब्जा बरकरार है. 81 विधानसभा सीटों में से पांच-पांच विधानसभा सीटों पर झामुमो व भाजपा अजेय रही है. संताल परगना प्रमंडल की तीन सीट बरहेट, लिट्टीपाड़ा व शिकारीपाड़ा में झामुमो का किला कभी ध्वस्त नहीं हुआ.
झारखंड विधानसभा चुनाव : 20 गुना बढ़ गये करोड़पति विधायक, जानें 2014 में चुने गये विधायकों का ब्योरा
रांची : झारखंड गठन के बाद विधानसभा में करोड़पति विधायकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है. अलग राज्य बनने के बाद 2005 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ. इसमें दो करोड़पति विधायक बने. 2009 के विधानसभा चुनाव में करोड़पति विधायकों की संख्या दो से बढ़ कर 24 हो गयी. 2014 विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में करोड़पति विधायकों की संख्या 21 से बढ़ कर 41 हो गयी. इस तरह सिर्फ 10 साल के अंदर करोड़पति विधायकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई.
झारखंड विधानसभा चुनाव : 20 गुना बढ़ गये करोड़पति विधायक, जानें 2014 में चुने गये विधायकों का ब्योरा
रांची : झारखंड गठन के बाद विधानसभा में करोड़पति विधायकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है. अलग राज्य बनने के बाद 2005 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ. इसमें दो करोड़पति विधायक बने. 2009 के विधानसभा चुनाव में करोड़पति विधायकों की संख्या दो से बढ़ कर 24 हो गयी. 2014 विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में करोड़पति विधायकों की संख्या 21 से बढ़ कर 41 हो गयी. इस तरह सिर्फ 10 साल के अंदर करोड़पति विधायकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई.
Jharkhand Election : चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की संख्या बढ़ी, प्रत्याशियों में आयी कमी
रांची : झारखंड में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं. हर चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रत्याशियों की संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2005 में पहली बार झारखंड विधानसभा के लिए चुनाव हुआ था. उस चुनाव में 6 राष्ट्रीय दलों समेत 50 पार्टियां शामिल हुईं. निर्दलीयों की भी अच्छी-खासी संख्या थी. वर्ष 2009 में पार्टियों की संख्या बढ़कर 63 हो गयी और 2014 के चुनावों में यही संख्या 65 तक पहुंच गयी. 2005 में कुल 1390 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि 2009 में 1491 लोग चुनाव के मैदान में उतारे गये या उतरे. इस बार प्रत्याशियों की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में कुछ ज्यादा थी. वहीं, वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या घटकर 1217 रह गयी.
Jharkhand Election : चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की संख्या बढ़ी, प्रत्याशियों में आयी कमी
रांची : झारखंड में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं. हर चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रत्याशियों की संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2005 में पहली बार झारखंड विधानसभा के लिए चुनाव हुआ था. उस चुनाव में 6 राष्ट्रीय दलों समेत 50 पार्टियां शामिल हुईं. निर्दलीयों की भी अच्छी-खासी संख्या थी. वर्ष 2009 में पार्टियों की संख्या बढ़कर 63 हो गयी और 2014 के चुनावों में यही संख्या 65 तक पहुंच गयी. 2005 में कुल 1390 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि 2009 में 1491 लोग चुनाव के मैदान में उतारे गये या उतरे. इस बार प्रत्याशियों की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में कुछ ज्यादा थी. वहीं, वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या घटकर 1217 रह गयी.
लक्ष्मी पूजा की तैयारी पूरी
प्रखंड के चमातू गांव में लक्ष्मी पूजा की तैयारी जोरों पर है. मूर्तिकार मां लक्ष्मी की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं. पूजन समिति के लोगों ने बताया कि यहां प्रतिमा स्थापित कर वर्ष 2005 से मां लक्ष्मी की पूजा की जा रही है.
14 वर्ष बाद रामदेव का वनवास हुआ खत्म
बिभांशु, बांका : बात फरवरी 2005 की है, जब सूबे में नीतीश कुमार की अगुवाई में पूरी ताकत के साथ भाजपा व जदयू चुनाव लड़ रही थी. राजद की स्थिति काफी खराब हो गयी थी. बावजूद इस चुनाव में भी रामदेव यादव ने जदयू उम्मीदवार जनार्दन मांझी को पराजित कर दिया. वह लगातार तीन बार इस क्षेत्र से जीत दर्ज करने वाले पहले विधायक बन गये.