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विलक्षण कथाकार
विलक्षण कथाकार स्वयं प्रकाश की मशहूर कहानी ‘पार्टीशन’ को पढ़ते वक्त मुझे रामवृक्ष बेनीपुरी की किताब ‘माटी की मूरतें’ के अविस्मरणीय चरित्र सुभान खां की याद आ गयी. ऐसा लगा कि कुर्बान भाई उसी परंपरा के हैं और ‘मियां’ कहकर उनका ही उपहास उड़ाया जा रहा है और उन्हें जबरन सांप्रदायिक बनने के लिए विवश किया जा रहा है. इसी तरह ‘रशीद का पाजामा’ पढ़ते वक्त भी मुझे प्रेमचंद की एक यादगार कहानी ‘ईदगाह’ और उसके बाल नायक हामिद की याद आयी.