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जल प्रबंधन के जरिये बाढ़ व सुखाड़ का हल : संजय झा
पटना : राज्य में सुखाड़ व बाढ़ दोनों ही समस्याएं विद्यमान है. इस समस्या के निदान के लिए जल प्रबंधन आवश्यक है. एएन कॉलेज के द्वारा आयोजित सत्येंद्र नारायण सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला के 12वीं कड़ी में ‘भारत में जल प्रबंधन: प्रकृति आधारित समाधानों का बढ़ता महत्व’ विषय पर व्याख्यान के दौरान राज्य सरकार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने ये बातें कहीं.
बेरोजगार युवाओं के लिए बना वरदान
प्रकृति भी कभी कभी ऐसा चमत्कार कर देती है जिस पर सहज ही यकीन नहीं होता है. ओल्ड मालदा ब्लॉक अंतर्गत साहापुर ग्राम पंचायत के आदिवासी बहुल भाटरा गांव इन दिनों प्रकृति प्रेमियों के लिये मिनी-दीघा बन गया है. इसका नजारा देखने के लिये हर रोज हजारों पर्यटक जमा हो रहे हैं.
'मैन वर्सेस वाइल्ड' में पीएम मोदी, प्रकृति के संरक्षण के बारे में की बात
नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैन वर्सेस वाइल्ड'' में बियर ग्रिल्स के साथ मिलकर नदी के ठंडे पानी में राफ्ट बोट पर सवारी की और इस एडवेंचर के माध्यम से संरक्षण तथा स्वच्छता जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया. डिस्कवरी चैनल के ‘मैन वर्सेस वाइल्ड विद बियर ग्रिल्स एंड प्राइम मिनिस्टर मोदी'' में दोनों ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में ठंड और बारिश की मार झेली. ग्रिल्स का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद ऊर्जावान और उत्साही हैं.
पीएम मोदी ने Man vs Wild देखने के लिए देश के आम अवाम को आमंत्रित किया
नयी दिल्ली : ‘मैन वर्सेज वाइल्ड'' सीरीज की ताजा कड़ी प्रसारित होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर प्रकाश डालने का इससे बेहतर रास्ता नहीं हो सकता है. इस सीरीज की कड़ी में प्रधानमंत्री कार्यक्रम के होस्ट बीयर ग्रिल्स के साथ नजर आयेंगे. प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि भारत के हरे भरे जंगलों में मातृ प्रकृति की गोद में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर प्रकाश डालने का इससे बेहतर रास्ता क्या हो सकता है. आज रात 9 बजे इससे जुड़ें.
आदिवासी समाज प्रकृति के पुजारी और उपासक हैं
अविराम काॅलेज आॅफ एजुकेशन टिको कुड़ू में विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. रंगारंग सांस्कृतिक तथा आदिवासी समाज पर आधारित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज के गतिविधियों को पेश किया गया.
वन संरक्षण और जैव विविधता को बचाए रखने के लिए वानिकी में प्रोफेशनल्स की है जरुरत, यहां लें दाखिला
वानिकी में क्वालीफाइड छात्रों के पास फॉरेस्ट, कंजर्वेशन के अलावा अन्य कई अवसर हैं. लेकिन इन अवसरों की प्रकृति पंरपरागत वानिकी से कुछ हटकर है. जिस तरह से परिस्थितियां बदलीं हैं, बहुत संभव है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में नौकरी की नई संभावनाएं पैदा होंगी. टिंबर टिंबर प्लांटेशन में कार्यरत कॉरपोरेट हाउस, फिल्म मेकिंग, कंसल्टेंसी फ‌र्म्स इसके कुछ उदाहरण हैं.
रांची : आदिवासी ही प्रकृति के रक्षक हैं : वंदना
रांची/मेसरा : आदिवासी युवा उलगुलान संगठन के तत्वावधान में गुरुवार को विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर खेलगांव मोड़ पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि झारखंडी भाषा साहित्य अखड़ा के संस्थापक व साहित्यकार वंदना टेटे ने कहा कि आदिवासी ही प्रकृति के रक्षक हैं.संस्कृति ही आदिवासियों की पहचान है. जल, जंगल व जमीन की रक्षा करें. पुरखों ने समृद्ध संस्कृति दी है.
विश्व आदिवासी दिवस 2019: मिलिए इन चेहरों से जिन्‍होंने पाया खास मुकाम, कहा- हमारी संस्‍कृति हमारी पहचान
आज विश्व आदिवासी दिवस है. इस दौरान आदिवासियों की मौजूदा हालात, समस्‍याएं और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है. प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है. संसाधनों के आभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. गीत-संगीत-नृत्‍य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है. उनके गीतो-नृत्‍यों में प्रकृति से लगाव का पुट दिखता है. लेकिन मौजूदा समय में आदिवासी समुदाय अपनी भाषा-संस्‍कृति से विमुख हो रही है.
विश्व आदिवासी दिवस 2019: मिलिए इन चेहरों से जिन्‍होंने पाया खास मुकाम, कहा- हमारी संस्‍कृति हमारी पहचान
आज विश्व आदिवासी दिवस है. इस दौरान आदिवासियों की मौजूदा हालात, समस्‍याएं और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है. प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है. संसाधनों के आभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. गीत-संगीत-नृत्‍य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है. उनके गीतो-नृत्‍यों में प्रकृति से लगाव का पुट दिखता है. लेकिन मौजूदा समय में आदिवासी समुदाय अपनी भाषा-संस्‍कृति से विमुख हो रही है.
गांवों में पाये जाने वाले औषधीय पौधों, मिट्टी व जानवरों की तैयार होगी सूची, छात्रों को शोध करने में होगी सुविधा
विभांशु, बांका : जिले के गांवों में उगने वाले औषधीय व अन्य पौधों, मिट्टी की प्रकृति, फल, फूल के साथ जानवरों के आंकड़े तैयार किया जायेगा. गांवों में कई पौधों की जड़ें व पत्तियां व जानवर पाये जाते हैं जिसका देसी इलाज में उपयोग किया जाता है. ऐसे ही विशेष जैव विविधताओं की सूची तैयार करने के लिए जिले के पंचायतों व शहरी निकाय में जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन किया जायेगा. वन विभाग ने इस संबंध में डीएम व डीएफओ को लिखित रूप से दिशा-निर्देश भी दिया.
ऑनलाइन शॉपिंग से छोटे व्यापारियों पर संकट
वक्त के साथ परिवर्तन होना प्रकृति का नियम है. समय बदला, परिवेश बदली, सोच बदले तथा व्यापार करने का जरिया भी बदला. आज बाजारीकरण, पूंजी की कृत्रिमता, विज्ञापन, चकाचौंध आदि व्यवसाय का अहम किरदार हो गया है, जो ग्राहकों को न केवल अपनी गिरफ्त में ले रहा है, बल्कि उन्हें जरूरत के सामान के लिए माॅल पर आश्रित कर दिया है.