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छापेमारी में 3.5 लाख की नकली पुस्तक जब्त
दिल्ली से आये भारती भवन पुस्तक प्रकाशन की टीम ने शनिवार की देर शाम रोसड़ा के ब्लॉक रोड स्थित सिकंदर पुस्तक भंडार के दुकान व गोदाम में स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की.छापेमारी टीम ने भारती भवन प्रकाशन के विभिन्न कक्षाओं के करीब साढे़ तीन लाख मूल्य के कुल 322 नकली पुस्तकें बरामद की.छा
'Technology Sector की प्रगति ने रोजगार में पैदा किया है खतरा, हर साल एक करोड़ युवाओं को चाहिए नौकरी'
नयी दिल्ली : नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रही प्रगति की वजह से रोजगार को जो खतरा पैदा हुआ है, उससे जल्द निपटने की जरूरत है, अन्यथा इसका देश की भावी पीढ़ी पर काफी बुरा असर पड़ सकता है. कांत ने अमित कपूर के साथ चिराग यादव की पुस्तक ‘द एज आफ एवेकनिंग : द स्टोरी आफ इंडियन इकोनॉमी सिंस इंडिपेंडेंस'' के परिशिष्ट में लिखा है कि भारत की आधी से ज्यादा आबादी 25 साल से कम की और हर साल श्रमबल में युवा आबादी बढ़ रही है.
नितुरिया पुस्तक मेला शुरू होगा 16 से
नितुरिया. नितुरिया प्रखंड के सरबड़ी में आगामी 16 मार्च से आयोजित होनेवाले छठें नितुरिया पुस्तक मेले के लिए रविवार को विधायक पूर्णचंद्र बाउरी की अध्यक्षता में बैठक हुई. शिक्षक कैलाश गोप, स्वप्न कवि, गणेश उपाध्याय, काजल पुइतुंड़ी, शेख बनी आमिन, सुबोध चौधरी सहित पुस्तक संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे. पुस्तक मेला 16 मार्च से 22 मार्च तक चलेगा. मेले की शुरुआत करने में विधायक श्री बाउरी की अहम भूमिका है.
पुस्तक प्रेमी पसंद कर रहे राग दरबारी व कैसा सच
नगर के राजेंद्र भवन सभागार में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी सह मेला के दूसरे दिन शनिवार को पुस्तक प्रेमियों की भीड़ लगी रही. देर शाम तक पुस्तक प्रेमी विभिन्न स्टॉलों पर पुस्तकों का अवलोकन करते दिखे.
पुस्तक के बिना अधूरा है हमारा ज्ञान व जीवन
नगर के राजेंद्र भवन सभागार में पुस्तक प्रदर्शनी सह मेला का शुभारंभ हो गया. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार की शाम डीएम डॉ रणजीत कुमार सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर 10 दिनों तक चलने वाले पुस्तक मेला का उद्घाटन किया.
पुस्तक समीक्षा : प्रेरणा से भरी किताब ‘खुशी क्लास’
पत्रकार मुकेश सिंह चौहान की पहली किताब ‘खुशी क्लास’ एक अलग सी किताब है, जिसमें छोटे -छोटे पचासी प्रसंगों के माध्यम से 104 पृष्ठों में बहुत ही प्रेरक बातें संग्रहित की गयी हैं. आमतौर पर हम इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं .ज्यादातर प्रसंग हमें कहीं न कहीं से अपने आप से जोड़ती हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि हम भी उन प्रसंगों में कहीं न कहीं हैं. किताब की भाषा बहुत ही सरल और सहज है.