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गुमला : लोटवा के गरीबों के पास राशन कार्ड नहीं, सीएम जनसंवाद में शिकायत
गुमला जिला के बसिया प्रखंड के पंथा पंचायत में लोटवा गांव है. यहां रहने वाले लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं. मजदूरी कर पैसा कमाते हैं तो घर का चूल्हा जलता है. जिस दिन पैसा नहीं कमाया. उस दिन घर का चूल्हा नहीं जलता है. इसके बावजूद इस गांव को सरकारी लाभ से वंचित रखा गया है.
उग्रवाद प्रभावित पलामू और गुमला जिले में विकास के साथ कदमताल कर रही आधी आबादी
अनिश्चितता से हुनर की ओर, गरीबी से सशक्तीकरण की ओर व बेरोजगारी से उद्यमिता की ओर. यह कहानी है मेदिनीनगर की स्वावलंबी महिलाओं की. कभी पलामू के अधिसंख्य इलाकों में गोलियों की आवाज गूंजा करती थी, पर आज स्थिति बदली-बदली सी है. सरकार की विकास योजनाओं के सहारे यहां नयी इबारत लिखी जा रही है. यहां रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है.
उग्रवाद प्रभावित पलामू और गुमला जिले में विकास के साथ कदमताल कर रही आधी आबादी
अनिश्चितता से हुनर की ओर, गरीबी से सशक्तीकरण की ओर व बेरोजगारी से उद्यमिता की ओर. यह कहानी है मेदिनीनगर की स्वावलंबी महिलाओं की. कभी पलामू के अधिसंख्य इलाकों में गोलियों की आवाज गूंजा करती थी, पर आज स्थिति बदली-बदली सी है. सरकार की विकास योजनाओं के सहारे यहां नयी इबारत लिखी जा रही है. यहां रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है.
नवजात बेटी को बेचने के बाद भी नहीं बची माता-पिता की जान, पत्नी के बाद पति की भी मौत
गुमला शहर से सटे चंपा नगर निवासी चरवा उरांव (45 वर्ष) की आखिरकार गरीबी के कारण रविवार को मौत हो गयी. प्रशासन ने उसकी मदद देर से की. जिस कारण रिम्स में शनिवार को भर्ती होने के दूसरे दिन रविवार को उसकी जान चली गयी. अगर प्रशासन चरवा के इलाज में पहले मदद करता तो उसकी जान बच सकती थी.
नक्सलियों के गढ़ कोलेंग गांव में तैयार हो रही अगरबत्ती, राज्य में बिखेर रही खुशबू
नक्सली का डर था और गरीबी जीने नहीं दे रही थी. लेकिन वक्त बदलता है. बस लोगों को बदलाव का इंतजार था. यही बदलाव की कहानी बयां करती है पालकोट प्रखंड के कोलेंग गांव की महिलाएं. अपने हुनर व मेहनत के बूते इस गांव की महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बनायी. कोलेंग गांव की 12 महिलाएं अगरबत्ती बनाकर न खुद स्वावलंबी हो रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी अगरबत्ती बनाने के व्यवसाय से जोड़कर उन्हें मजबूत करने में लगी हुई हैं.
कृषि और पोषण विशेषज्ञ पूर्वी मेहता को वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन में मिली एक और बड़ी जिम्मेदारी
नयी दिल्ली : शोध और नीतिगत सुधारों के जरिये दक्षिण एशिया के छोटे किसानों का जीवन स्तर बेहतर बनाने और गरीबी तथा कुपोषण को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पिछले दो दशक से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने वाली पूर्वी मेंहता को ‘वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन’ की सलाहकार परिषद में शामिल किया गया है. फिलहाल पूर्वी मेहता बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ काम कर रही हैं. वह एशिया में फाउंडेशन के कृषि कार्यक्रमों का संचालन कर रही हैं.
राज्य में महिलाओं का मान बढ़ा है: विजया
रांची : भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा है कि रघुवर दास के नेतृत्व में झारखंड आगे बढ़ रहा है. राज्य में महिलाओं का मान-सम्मान बढ़ा है. अब महिलाएं रात में भी काम कर रही हैं. यूएन की रिपोर्ट में भारत गरीबी हटाने के अभियान में बेहतर काम करनेवाले 10 देशों में शामिल है. इस रिपोर्ट में झारखंड देश के अंदर गरीबी हटाने के अभियान में सबसे आगे है़
गरीबी व कलह से परेशान होकर भी नहीं छोड़ा साथ, वृद्ध बीमार मां के लिए पुत्र बना श्रवण
बांका : बिहार में बांका के पंजवारा में बीते दो-तीन दिनों से बाजार वासियों को एक दृश्य बार-बार अपनी ओर खींच रहा है. अपनी पीठ पर लादे वृद्ध मां को रोजाना एक बेटा उसके इलाज के लिए पंजवारा अस्पताल लाता है और फिर उसी तरह उसे घर भी पहुंचाता है.
रांची : रघुवर सरकार काम कम दिखावा ज्यादा कर रही
रांची : रघुवर सरकार काम कम और दिखावा ज्यादा कर रही है. बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी बढ़ती जा रही है. किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है. विधानसभा चुनाव में इन्हीं सब मुद्दों पर आम जनता से बात की जायेगी. आम जनता भी इसका हिसाब मांगें.
रात के अंधियारे में शिक्षा की रोशनी फैला रहे ब्रजमोहन
विभांशु, बांका : शिक्षा का विस्तार भले ही गांव-गांव हो चुका हो. सरकार शिक्षा के लिए लाखों की योजना स्वीकृत करती हो, परंतु आज भी वैसे गांव हैं, जहां शिक्षा के प्रति आज भी गरीबी व संकुचित वातावरण आड़े आ रहा है. ऐसे समय में शिक्षक ब्रजमोहन मंडल शिक्षक की वास्तविक भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
अखबार बेचकर बेटे को बनाया शिक्षक
सोनो : प्रखंड के सबसे पुराने व यहां का पहला अखबार हॉकर हीरा लाल तमोली ने जीवन में कड़े संघर्ष का सामना करते हुए अपने पुत्र संतोष कुमार को शिक्षित कर उसे शिक्षक बनाया. गरीबी के साथ लड़ते हुए उन्होंने न सिर्फ अपने बड़े परिवार का किसी तरह भरण पोषण किया बल्कि बच्चों को शिक्षित करने का भी प्रयास किया और अपने एक पुत्र को शिक्षक बनाया. उनका पुत्र संतोष कुमार तमोली कन्या मध्य विद्यालय सोनो में बतौर शिक्षक कार्यरत है. संतोष बताते हैं कि उनके पिता उन्हें पढ़ाने को लेकर सजग थे.
गोड्डा में CM रघुवर का जन चौपाल, संथाल परगना में विकास कार्यों को नया आयाम देना प्राथमिकता
संथाल परगना की गरीबी और विकास की स्थिति देख मन को पीड़ा होती थी. इस क्रम में मैं सोचता था कि अगर मैं मुख्यमंत्री बना तो संथाल परगना को बदलने का पूर्ण प्रयास करूंगा. 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से मैं लगातार संथालवासियों के बीच आ रहा हूं. संथाल की गरीबी दूर करना और संथाल में विकास कार्यों को नया आयाम देना मेरी प्राथमिकताओं में है. इस प्राथमिकता को कुछ हद तक हासिल कर पाया हूं, लेकिन पूर्णता अभी शेष है. यही वजह है आज फिर मैं आपके बीच, आपकी परेशानियों को साझा करने, उसे अपने हर संभव प्रयास से दूर करने आया हूं. ये बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गोड्डा के सुंदर पहाड़ी में आयोजित जन चौपाल के दौरान कही.