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Film Review : फिल्‍म देखने से पहले पढ़ें 'फैमिली ऑफ ठाकुरगंज' का रिव्‍यू
''फैमिली ऑफ ठाकुरगंज'' 70 और 80 के दशक की दो भाइयों की मसाला फिल्मों की कहानी से प्रेरित है।यहां भी दो भाई है. नन्नू और मन्नू. नन्नू ( जिम्मी शेरगिल) गरीबी और परिवार की जिम्मेदारी की वजह से गलत रास्ते पर चल पड़ता है और गैंगस्टर बन जाता है बस बदलाव ये किया है फ़िल्म के लेखकों ने मुन्नू (नंदिश संधू) को पुलिस ना बनाकर प्रोफेसर बना दिया है जो अच्छाई के रास्ते पर चलता है. उसकी कोशिश है कि उसका भाई बदल जाए. उसकी मुराद भी पूरी जल्द ही हो जाती है.
लोकसभा में बोले मुलायम - कृषि को छोड़ सारे धंधे फायदेमंद, 65% किसान गरीबी रेखा से नीचे
समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने देश में किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए लोकसभा में बुधवार को सरकार से सवाल किया कि अभी सारे धंधे फायदे में हैं, लेकिन किसान घाटे में है, 65 प्रतिशत किसान गरीबी रेखा से नीचे है. क्या केंद्र सरकार यह भूल गयी है.
आंकड़ों की बाजीगरी
एक खबर पढ़ी कि भारत में 2006 से 2016 के बीच दस सालों में 27 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकल गये हैं और 44 लोग प्रति मिनट गरीबी से मुक्त होकर अमीर हो रहे हैं. यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र संघ और एक अमेरिकी संस्था ऑक्सफोर्ड पोवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव की संयुक्त रिपोर्ट की तरफ से जारी की गयी है.
27 करोड़ की गरीबी दूर, झारखंड अव्वल
संयुक्त राष्ट्र /नयी दिल्ली : भारत में स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति के कारण बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि देश में 2006 से 2016 के बीच रिकॉर्ड 27.10 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हुए. गरीबी हटाने के प्रयास में सबसे अधिक सुधार झारखंड में देखा गया.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, गरीबी को मात देने में झारखंड नंबर वन
नयी दिल्ली : भारत ने गरीबी से बाहर निकलने में प्रगति की है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किये गये रिपोर्ट में झारखंड को नंबर वन माना गया है. पूरी दुनिया में झारखंड पहले नंबर पर है, जहां गरीबी से मुक्ति के लिए उल्लेखनीय काम हुआ है. भारत में स्वास्थ, स्कूली शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में विकास हुआ है जिसकी वजह से गरीबी कम हुई है. भारत में खाना बनाने, ईधन, साफ - सफाई और पोषण में सुधार हुआ है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि गरीबी सूचकांक मूल्य में सबसे बड़ी गिरावट है.
टीबी से मां का निधन, पिता भी पीड़ित, बहनों ने छोड़ी पढ़ाई
गरीबी के कारण इलाज नहीं करा पाने से टीबी बीमारी से तीन साल पहले मां का निधन हो गया. अभी पिता भी टीबी बीमारी से ग्रसित हैं और घर में रहते हैं. मां के निधन व पिता के बीमार होने और गरीबी के कारण तीन बहनों ने पढ़ाई छोड़ दी. क्योंकि स्कूल की जरूरत की चीजें खरीदने के लिए इन बहनों के पास
टीबी और गरीबी ने परिवार को किया तबाह, मां की मौत, पिता की बीमारी के कारण बेटियों ने छोड़ी पढ़ाई
आर्थिक तंगी और पिता की बीमारी के कारण तीन बहनों को पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी. गरीबी के कारण इलाज नहीं करा पाने से टीबी बीमारी से तीन साल पहले बच्‍चों पर से मां का साया उठ गया. पिता भी टीबी से ग्रसित हैं. मां के निधन, पिता के बीमार होने और आर्थिक तंगी ने तीन बहनों को पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया. उनके पास स्कूल की जरूरत की चीजें खरीदने के लिए पैसे नहीं थे. पेट की भी आग बुझाने है. इसलिए बेटियों ने पढ़ाई छोड़ गरीबी से लड़ने के लिए मजदूरी कर रही हैं.
'श्रमिकों की सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए समावेशी न्यूनतम मजदूरी प्रणाली की जरूरत'
नयी दिल्ली : गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया है कि देश में एक अधिक समावेशी न्यूनतम मजदूरी प्रणाली स्थापित किये जाने की जरूरत है. यह प्रणाली श्रमिकों की सुरक्षा और गरीब उन्मूलन में कारगर भूमिका निभा सकती है. इसके साथ ही, इससे मजदूरी की असमानता घटाने, गरीबी उन्मूलन और विशेष तौर पर निचले स्तर पर समावेशी वृद्धि दर लाने में मदद मिलेगी.