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लोकसभा में इस बार कैसी है मुसलमानों की स्थिति
हिंदुओं के बाद सबसे बड़ी आबादी वाले मुसलमानों का संसद में कितना प्रतिनिधित्व होगा.
मोदीमय हुई काशी : गली-कूचों में नहीं बिक रहा 'बनारसी पान', बज रहा अमिताभ बच्चन की फिल्म 'डॉन' का यह गाना...
वाराणसी : लोकसभा चुनाव की मतगणना के दिन यहां पान की दुकानों पर सिर्फ ‘बनारसी पान'' नहीं बिक रहे हैं, बल्कि यहां अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘डॉन'' का गाना ‘खइके पान बनारस वाला'' की धुन हर जगह सुनायी पड़ रही है. इस दौरान राजनीति की चर्चा भी जोरों पर है. पान की दुकानों पर केवल इस बात की चर्चा नहीं है कि इस लोकसभा सीट पर कौन जीतेगा, बल्कि वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कितने वोटों से जीतेंगे, इस बात की ज्यादा चर्चा हो रही है.
रेकी कर दिया गया घटना को अंजाम, कई जगह छापेमारी
गांडेय में संचालित एसबीआइ के सीएससी संचालक की रेकी कर अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया होगा. बताया जाता है कि प्रत्येक दिन अपराधी यह पता लगा रहे थे कि संचालक पवन कब बैंक से पैसा निकालता है और कितने बजे सेंटर को खोलता है.
लोकसभा चुनाव : सभी सीटों पर जीत तय : आजसू
आजसू पार्टी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में राज्य की गिरिडीह सहित सभी 14 सीटों पर एनडीए गठबंधन की जीत तय है. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डाॅ देवशरण भगत ने पत्रकारों से कहा कि हमारी जीत तय है. केवल जीत का अंतर कितना रहेगा, 23 मई को साफ हो जायेगा. राज्य की जनता ने 13 सीटों पर फूल और एक पर फल लाकर राज्य की समृद्धि के लिए मतदान किया है.
क्या 1996 के हरकिशन सुरजीत साबित होंगे 2019 के चंद्रबाबू नायडू?
23 मई को आने वाले अंतिम नतीजों को विपक्षी पार्टियां कितना प्रभावित कर पाएंगी ?
कितना भरोसेमंद है एग्जिट पोल ?
चुनाव खत्म हुए. अब चर्चा है एग्जिट पोल की. एग्जिट पोल पर आप कितना भरोसे करते हैं, आपके भरोसे का आधार क्या है ? क्या आपका आकलन और एग्जिट पोल पर एक जैसा हो तभी भरोसा होता है. मैं ऐसा इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि एग्जिट पोल का इतिहास देखेंगे तो पायेंगे राजनीतिक पार्टियों के विश्वास का आधार यही है. इस बार यानि 2019 के आम चुनाव के बाद हुए एग्जिट पोल में ज्यादातर पोल इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि एनडीए को बहुमत मिलेगा. एनडीए के नेता खुश हैं, तो यूपीए समेत सपा- बसपा सरीखे पार्टियों के नेता इसे गलत बता रहे हैं.
Exit Polls कैसे किए जाते हैं और कितने सही
एक्ज़िट पोल की प्रक्रिया किस हद तक वैज्ञानिक है और कितना भरोसा करना चाहिए?
Exit Polls के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश और बिहार में आगे कौन
सबसे ज़्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार सपा-बसपा गठबंधन है, किस दल को मिलेगी कितनी सीटें.
ईरान पर हमला अमरीका के लिए कितना आसान
अमरीका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है लेकिन इससे पहले ईरान 8 साल तक इराक़ से युद्ध लड़ चुका है जिसमें अमरीका भी भागीदार था.
ऑस्ट्रेलिया के कंजरवेटिव पीएम स्कॉट मॉरिसन ने स्वीकारी हार, चुनावी जीत को बताया ‘चमत्कार'
सिडनी : ऑस्ट्रेलिया के कंजरवेटिव प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने शनिवार को चुनाव में उनकी पार्टी की ‘चमत्कारिक'' जीत के लिए ‘शांत ऑस्ट्रेलियाई लोगों'' की प्रशंसा की. विपक्षी लेबर पार्टी ने चुनाव में हार स्वीकार कर ली है. मॉरिसन एक छुपे रुस्तम के रूप में चुनावी प्रक्रिया में शामिल हुए थे, लेकिन एक कठिन प्रचार अभियान के बाद उन्होंने लिबरल-नेशनल गठबंधन के छह साल के शासन के विस्तार की सभी बाधाओं को दूर कर दिया. उन्होंने सिडनी में समर्थकों से कहा कि मैंने हमेशा चमत्कारों में विश्वास किया है! ऑस्ट्रेलिया कितना अच्छा है?
जमीन खोद कर 14 फुट नीचे लगाया मोटर पंप, फिर भी नहीं मिली राहत
शहर का भू-जलस्तर कितना ज्यादा नीचे चला गया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चापाकल व सामान्य मोटर के जवाब देने के बाद लोग अब अपने घर के कैंपस में 14-15 फुट नीचे गड्ढे खोद कर उसमें मोटर पंप लगा रहे हैं, फिर भी पानी नहीं मिल रहा है. ऐसे में शह
पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर भड़कना कितना जायज़? लोकसभा चुनाव 2019
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है.
मोदी समेत कितने सांसदों की सांसद निधि पर रोक लगी?-बीबीसी पड़ताल
पीएम नरेंद्र मोदी सहित 443 ऐसे सांसद हैं जिनके साल मिलने वाले पांच करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं है
उत्‍तर प्रदेश : अंतिम चरण की 13 सीटों पर कई दिग्गज, इन पर रहेगी देशभर की नजर, जानें कितनी सीटें किनके पास
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण यानी सातवें चरण में पीएम मोदी, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के विकासवाद की परीक्षा होनी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी सीट से मैदान में हैं. इनके अलावा मनोज सिन्हा गाजीपुर से, अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से और महेंद्र नाथ पांडेय चंदौली से उम्मीदवार हैं. ये तीनों सीटें वाराणसी से लगी हुई हैं.
पढ़ें- पूर्वी यूपी के अहम सीटों की ग्राउंड रिपोर्ट
पूर्वी यूपी की अहम सीटों पर हमने अपनी चुनावी यात्रा के दौरान आपको ग्राउंड रिपोर्ट दी. इस चुनावी यात्रा में हमने, जनता का मिजाज क्या है ? जमीनी स्तर पर मुद्दे क्या है ? कितना काम हुआ ? अगली सरकार से जनता की उम्मीदें क्या हैं, समझने की कोशिश की. हमने वीडियो और आर्टिकल्स के जरिये आपतक इन लोकसभा क्षेत्रों का हाल पहुंचाया. पूर्वी यूपी की इन सीटों पर चुनाव अंतिम चरण में यानि 19 मई को है. चुनाव से पहले एक बार फिर समझिये क्या है, जनता का मिजाज, क्या है, जातीय समीकरण और कौन - कौन है चुनावी मैदान में.
ग्राउंड रिपोर्ट : गोरखपुर में रवि किशन को योगी का सहारा, महागठबंधन की नजर जातीय समीकरण पर
पूर्वी यूपी की गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है. शहर में ज्यादातर लोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बात करते हैं और योगी के काम की तारीफ करते हैं. गांव में भी योगी की चर्चा है लेकिन सपा- बसपा की उपस्थिति भी आपको यहां महसूस होगी. गोरखपुर में इन पांच सालों में कितना काम हुआ, जब हमने गोरखपुर के लोगों से यह सवाल किया तो लोगों ने कहा, जब तक योगी सांसद थे उन्होंने ऐसा कोई खास काम नहीं किया जो गिनाया जा सके लेकिन मुख्मंत्री बनने के बाद उन्होंने गोरखपुर पर ध्यान दिया है.
लोकसभा चुनाव 2019 - ग़ाज़ीपुर में कितने मज़बूत हैं अफ़ज़ाल अंसारी
बीबीसी से ख़ास बातचीत में अफ़ज़ाल अंसारी ने माना मनोज सिन्हा ग़ाज़ीपुर के पहले केंद्रीय मंत्री हैं और इससे उनका मनोबल बढ़ा है.
किसान कल्याण योजना : गांवों की मिट्टी की सेहत का हाल बतायेगा डिजिटल नक्शा
किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है. एक रणनीति के तहत चल रही योजनाओं का एक हिस्सा है किसान कल्याण योजना. कई चरणों में इस योजना के तहत गांवों की मिट्टी की सेहत की जांच चल रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि किस गांव की किस मिट्टी की उत्पादन क्षमता कितनी है, कौन-सी फसल लगाने से किसानों को ज्यादा उपज मिलेगी, मिट्टी की गुणवत्ता कैसी है, उसे किस प्रकार के उपचार की जरूरत है, वहां का वातावरण कैसा है, पारिस्थितिकी तंत्र कैसा है. मृदा और जल संरक्षण की क्या स्थिति है. जमीन के इस्तेमाल के साथ-साथ पर्यावरण की गुणवत्ता और जलछाजन का भी पता लगाया जा रहा है. इन सबको सम्मिलित कर एक डिजिटल नक्शा बन रहा है और उसे हर गांव में लगाया जायेगा.
प्रत्याशियों को अपने-अपने तर्क से विजेता बनाने का लगा रहे हिसाब, किये जा रहे जीत और हार के दावे
गोपालगंज : शहर से लेकर गांव तक के चौक- चौराहों पर चाय की चुस्कियों के साथ वोटों के रुझान के साथ हार-जीत का हिसाब बैठाया जा रहा. लोकसभा चुनाव में कौन बाजी मारेगा, किसके सिर पर ताज होगा, किसको कितने वोट मिलेंगे.
प्रत्याशियों को अपने-अपने तर्क से विजेता बनाने का लगा रहे हिसाब, किये जा रहे जीत और हार के दावे
गोपालगंज : शहर से लेकर गांव तक के चौक- चौराहों पर चाय की चुस्कियों के साथ वोटों के रुझान के साथ हार-जीत का हिसाब बैठाया जा रहा. लोकसभा चुनाव में कौन बाजी मारेगा, किसके सिर पर ताज होगा, किसको कितने वोट मिलेंगे.