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पुण्यतिथि पर विशेष : जब आपातकाल के बाद बोले थे अटल, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने
"बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने. खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने". पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये लाइन उस वक्त कही थी, जब आपातकाल के बाद चुनाव की घोषणा हुई. दिल्ली की ठंड में जनता पार्टी की सभा हो रही थी हल्की-हल्की बारिश थी, लोगों को लग रहा था कि भीड़ छटने लगेगी, लेकिन लोग चुपचाप बैठे इंतजार कर रहे थे. इंतजार था, अटल बिहारी वाजपेयी के संबोधन का. आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि है. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ और दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने 16 अगस्त, 2018 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली.
सुषमा का यशमय राजनीतिक व्यक्तित्व
सुषमा स्वराज के निधन से भारतीय राजनीति में आपातकाल की खतरनाक सियासत के संघर्ष से पैदा राष्ट्रीय नेताओं की कतार में एक बड़ा शून्य आ गया है. राजनीतिक गलियारे में एक खालीपन सा पसर गया है.
आपातकाल से बचने को ले बस में नहीं रहती है फायर सिलिंडर की व्यवस्था
अररिया : सोमवार की सुबह पूर्णिया में एक बस डायवर्सन से टकरा जाने के कारण बस में आग लग गयी. इससे कई लोगों की मौत भी हो गयी. इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद भी बस मालिक सबक नहीं ले रहे हैं. बस मालिक व प्रशासन खामियां यात्रियों को जान गंवाकर देनी पड़ रही है.