• आज सिद्धि योग में होगी मां सरस्वती की पूजा, ऐसे करें आराधना

    आज सिद्धि योग में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा होगी. ज्योतिषियों के अनुसार जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है. दस फरवरी को पंचमी सुबह 9 बजकर 46 मिनट तक है. वसंत पंचमी के दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है

  • शिशिर की शांति छीन आया मधुमास वसंत

    वसंत-पंचमी आ गयी. वसंत का पंचम दिन. शास्त्रकार भले मीन-मेष में पड़े हों-‘मीन-मेषे गते सूर्ये वसन्तः परिकीर्तितः’ या चैत-वैशाख मानते हों. वसंत धीर-प्रशांत नहीं, धीरोद्धत व धीरललित ऋतुनायक है. इसलिए इसने पंद्रह दिनों में ही शिशिर की शांति छीन ली, वसंत-राज्य की घोषणा करवा ली. सरसों फूल ही गयी, रबी की फसलें गदरा ही गयीं... पेड़ों में नयी कोपलें फूटने ही लगीं, तो यह क्यों दम साधे? सूरज ठंड को गरमाने ही लगे, तो यह क्यों घुड़की मारे रहे? ऋतुराज का दूत रसाल मंजरियां लेकर आ ही गया.

  • दरगाह में वसंत पंचमी

    सूफीवाद का सिर्फ एक ही सिद्धांत है - इंसान चाहे किसी भी मजहब, जाति या रंग का हो, सभी की सेवा करना. सूफी संत की शांति और एकता का 13वीं सदी का संदेश आज भी मायने रखता है. समाज में बहुत अधिक ध्रुवीकरण होने के बावजूद दरगाह ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों और उनके विचारों को स्थान दिया है.

  • विवाह पूर्व क्यों जरूरी है वर-वधू का कुंडली मिलान

    डॉ एनके बेरा, ज्योतिषाचार्य विवाह और दांपत्य जीवन प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है.

  • कुंभ का दूसरा शाही स्नान आज

    इलाहाबाद : कुंभ मेले का शाही स्नान सोमवार को होगा. इस दिन मौनी अमावस्या भी है. माघ मास में आने वाली इस अमावस्या को माघी अमवास्या के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन मौन व्रत धारण कर संगम में या फिर किसी पवित्र नदी में डुबकी लगाने का विशेष महत्व है.

  • Kumbh Mela 2019 : दूसरे स्नान पर्व पर प्रयागराज में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पौष पूर्णिमा के साथ शुरू हुआ कल्पवास

    प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) : कुंभ मेले के दूसरे स्नान पर्व पर त्रिवेणी में डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम के तट पर पहुंच चुके हैं. सुबह से ही श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल पर श्रद्धा की डुबकियां लगा रहे हैं. पवित्र स्नान कर रहे हैं. संगम के तट पर प्रयागराज में सोमवार (21 जनवरी) को पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान करने के साथ ही एक महीने का कल्पवास भी शुरू हो गया. हर बार कुंभ में 10 से 12 लाख श्रद्धालु लगातार एक महीना तक यहां रुककर नियम व परंपराओं के मुताबिक संगम में स्नान करते हैं.

  • चंद्रग्रहण आज, भारत में नहीं दिखाई पड़ेगा

    नयी दिल्ली : इस साल का पहला चंद्रग्रहण सोमवार, 21 जनवरी को लगेगा. भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा. यह केवल अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य प्रशांत में ही दिखायी देगा. मालूम हो कि यह साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसे ब्लड मून नाम दिया जा रहा है. इस ग्रहण का भारतीय मौसम और वातावरण पर खासा असर पड़ेगा.

  • आदर्श मनुष्य वह है, जो सत्कर्मों का फल ईश्वर को करे समर्पित

    आज का आलोच्य विषय है- आदर्श मनुष्य की जीवनचर्या कैसी होनी चाहिए? मनुष्य पृथ्वी में बहुत दिनों तक रहने के लिए नहीं आता है. वह आता है, कुछ दिन रहता है, काम-काज करता है, खाता-पीता है, दूसरों का उपकार करता है, राग-अभिमान करता है, अभाव अभियोग करता है, उसके बाद सबकुछ समाप्त हो जाता है, हमेशा के लिए वह सो जाता है.

  • पौष पूर्णिमा पर स्नान और दान का है विशेष महत्व

    साल 2019 की पहली पूर्णिमा की तिथि 21 जनवरी से शुरू हो रही है. शास्त्रों के अनुसार, मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए पौष माह की पूर्णिमा बहुत ही शुभ होती है. अमावस्या को कृष्ण पक्ष और पूर्णिमा को शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन होता है. पौष माह की पूर्णिमा होने के कारण इसे पूषी पूर्णिमा भी कहते हैं.

  • किन बातों पर निर्भर करता है भाग्य-दुर्भाग्य

    अर्थात् समुद्र-मंथन में विष्णु को लक्ष्मी मिलीं और शिव को विष. मायने यह कि भाग्य का ही फल सभी जगह मिलता है, विद्या और उद्योग का नहीं. यह कथन अपने उदाहरण से भले ही भाग्यवादी सोच को बल देता हो, पर ज्ञान और उद्यम का सदा महत्व रहा है. ऐसा नहीं होता तो शिक्षा केंद्रों की जरूरत नहीं होती.

  • शुक्र को नाराज करने से बनता है दुख का कारक

    ज्योतिषशास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम का प्रतीक माना गया है. अगर जातक की कुंडली में शुक्र मजबूत है, तो जीवन में रोमांस के साथ भोग-विलासिता में कमी नहीं रहती.

  • मकर संक्रांति के फूड सीक्रेट्स , जानें कुछ खास बातें

    मकर संक्रांति मूलतः नहाने और खाने का त्योहार है, और उसमें भी इस रोज तिल खाना सबसे जरूरी होता है. यही वजह है कि मकर संक्रांति का एक और नाम तिल संक्रांति भी है. तिल, तिलकुट और तिल की बनी दूसरी मिठाइयों के साथ हम मकर संक्रांति के दिन खास कर खिचड़ी और चूड़ा दही भी खाते हैं.

  • 45 किलोमीटर में फैला है कुंभ मेला, शुरू हुआ शाही स्नान, 15 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मी

    नयी दिल्ली/इलाहाबाद : सबसे बड़ा आयोजन कहे जाने वाले कुंभ मेले का पहला शाही स्नान मंगलवार सुबह से शुरू हो चुका है और आधिकारिक रूप से मेले की शुरुआत हो गयी है. 49 दिन तक चलने वाले इस मेले का समापन चार मार्च को होगा और इस बीच आठ मुख्य पर्वों पर शाही स्नान होगा. माना जा रहा है कि शाही स्नान इस अर्द्धकुंभ का सबसे बड़ा आकर्षण होगा,

  • #MakarSankranti2019 : कुंभ से बेहतर व्यवस्था गंगा सागर में, आज रात से शुरू हो जायेगा पुण्य स्नान

    सागरद्वीप (पश्चिम बंगाल) : कुंभ से बेहतर व्यवस्था सागरद्वीप के गंगा सागर मेला में है. यह दावा है पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासन का. कहा गया है कि प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में केंद्र सरकार की मदद से उत्तम प्रबंध किये गये हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने दम पर प्रयागराज से बेहतर व्यवस्था सागरद्वीप में लगने वाले गंगा सागर मेला में की है. सोमवार शाम 6:09 बजे से मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान शुरू हो जायेगा, जो मंगलवार की शाम 6:09 बजे तक चलेगा.

  • सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार, मेला कल, 20 लाख श्रद्धालु सागर तट पर लगायेंगे डुबकी

    हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर मोक्षदायिनी, पतित पावनी गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर गंगासागर मेला लगता है. संगम स्थल पर देश-विदेश से आये लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं. इस साल (15 जनवरी को) गंगासागर मेले में करीब 18 से 20 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. इसको लेकर पश्चिम बंगाल की सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है. सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है. रविवार को ही हजारों श्रद्धालु सागर तट पर पहुंच चुके हैं. कोलकाता के बाबूघाट से लेकर सागर तट तक श्रद्धालुओं को देखा जा सकता है.

  • मकर संक्रांति के दिन जरूर करें यह काम...

    मकर संक्रांति के साथ ही हिंदू त्योहारों का सिलसिला शुरु हो जाता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में यह त्‍योहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. तमिलनाडु में इसे पोंगल, असम में बिहू, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में संक्रान्ति के नाम से इसे जाना जाता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ रहा है या 15 जनवरी को इसे लेकर लोगों के मन में दुविधा है.

  • मकर संक्रांति के दिन जरूर करें यह काम...

    मकर संक्रांति के साथ ही हिंदू त्योहारों का सिलसिला शुरु हो जाता है. मकर संक्रांति तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि की संक्रांति में प्रवेश करता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में यह त्‍योहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. तमिलनाडु में इसे पोंगल, असम में बिहू, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में संक्रान्ति के नाम से इसे जाना जाता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ रहा है या 15 जनवरी को इसे लेकर लोगों के मन में दुविधा है.

  • चलो कुंभ चलें, उत्तर प्रदेश सरकार का आह्वान

    लखनऊ : प्रयागराज ‘कुंभ 2019’ के आयोजन की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं. विश्व के इस सबसे बड़े समागम को ऐतिहासिक बनाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार देश के हर गांव और विश्व के हर देश की भागीदारी सुनिश्चित करने में जुट गयी है. प्रदेश सरकार ने ‘चलो कुंभ चलें’ स्लोगन के साथ कुंभ में हर खास-ओ-आम की भागीदारी का आग्रह किया है.

  • परमेश्वर के प्रेम में बने रहिए

    क्रिसमस का त्योहार हमें तीन बातों पर ध्यान देने को प्रेरित करता है- 1. मुक्ति के इतिहास में बेतलेहम का योगदान 2. मुक्ति के इतिहास में मरियम का योगदान 3. मुक्ति के इतिहास में हमारा योगदान. जकारियस जो योहन बपतिस्ता का पिता था, माता मरियम यीशु खीस्त की मां, इन सभी ने परमेश्वर के निमंत्रण को कभी अस्वीकार नहीं किया, बल्कि मुक्ति के काम में परमेश्वर के सहभागी बनें.

  • बाइबल : परमेश्वर का दिया हुआ एक अनोखा तोहफा

    बाइबल एक तोहफा है, जो परमेश्वर ने हमें दिया है और इसके लिए हमें दिल से उसका एहसान मानना चाहिए. यह अनोखी किताब हमें बताती है कि सूरज, चांद, सितारों को, और इस धरती और पहले स्त्री-पुरुष को कैसे बनाया गया. बाइबल में ऐसे सिद्धांत दिये गये हैं, जो भरोसे के लायक और फायदेमंद हैं.

  • शनि के प्रतिकूल प्रभाव से नौकरी में आती है अड़चन

    आज देश के ज्यादातर युवा शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगारी की समस्या से झूझ रहे हैं. समय पर नौकरी-रोजगार न मिलने पर अक्सर व्यक्ति गलत रास्ते को अपना लेता है.

  • हर समस्या में छिपा है एक अवसर

    हमारा पूरा जीवन भीड़ का हिस्सा बना हुआ है. विचारों की भीड़ हो या संगठनों के आदर्श की या व्यक्ति की. अधिकतर व्यक्ति की चेतना में अभिनव कुछ नहीं होता. वह एक रोडमैप बनाता है- बस भीड़ को फॉलो करने का.

  • मंगलमय जीवन का ग्रंथ है गीता

    गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को कुरुक्षेत्र में हुआ था. ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था, इसीलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से मनायी जाती है.

  • प्रेम और ध्यान से पैदा होता है जीवन का संगीत

    जीवन में हमेशा अतियां हैं और अतियों के बीच एक समन्वय चाहिए. दिन भर तुमने श्रम किया, रात विश्राम किया और सो गये. असल में जितना गहरा श्रम करोगे, उतनी ही रात गहरी नींद आ जायेगी. यह बड़ा अतर्क्य है. तर्क तो यह होता कि दिनभर आराम करते, अभ्यास करते आराम का, तो रात गहरी नींद आनी चाहिए थी. मगर जीवन विपरीत चलता है.

  • विवाह पंचमी पर उपासना से होता है वैवाहिक बाधाओं का अंत

    मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था. तभी से इस पंचमी को ''विवाह पंचमी पर्व'' के रूप में भव्यता से मनाया जाता है.

  • इन संकेतों से जान सकते हैं शनि आपसे कुपित तो नहीं

    कई बार दुष्ट व्यवहार पर लोग कहते हैं- इस पर शनिचरा सवार है! जिन्हें कुंडली का ज्ञान नहीं, वे भी कुछ संकेतों से जान सकते हैं कि शनि आपके लिए शुभ फलदाता हैं या अशुभ. जिन लोगों से शनि कुपित होते हैं, उन्हें वायु से संबंधित रोग अधिक होते हैं.

  • अखंड के प्रति आकर्षण ही है भक्ति, जानिए कौन पा सकता है परम ब्रह्म को ?

    भक्ति शब्द का अर्थ होता भजना. भजना करने के लिए, जो भजन करते हैं और जिनकी भजना की जाती है, इन दोनों सत्ताओं की उपस्थिति अपरिहार्य है. इसलिए जब तक भक्त और भगवान का भेद है तब तक भक्ति साधना का सुयोग तथा प्रयोजन रहता है.

  • सुख और सौभाग्य का कारक ग्रह है गुरु

    चि कई बार मेहनत करने के बाद भी नौकरी या मनचाहा फल नहीं मिल पाता. घर में धन की कमी हमेशा बनी रहती है या लाख कोशिशों के बावजूद शादी-ब्याह में रुकावट आ रही हो, तो इन समस्याओं का कारण आपकी कुंडली में बैठा बृहस्पति हो सकता है.

  • बुद्ध की मैत्री भावना

    बौद्ध ग्रंथों में मैत्री भावना के अनेक प्रसंग मिलते हैं. उनमें से एक कथा भिक्खु पूर्ण की है. वे व्यापार के लिए अक्सर श्रावस्ती आया करते थे. एक बार उन्हें बुद्ध का सान्निध्य प्राप्त हुआ. बुद्ध से वे इतने प्रभावित हुए कि उनके शिष्य बनकर भिक्खु हो गये. कुछ दिनों तक बुद्ध से ज्ञान लेने और उसका अभ्यास करने के बाद एक दिन पूर्ण ने बुद्ध से पूछा- क्या मुझे अपनी मातृभूमि सूनापरांत में जाकर धर्मोपदेश की अनुमति है? बुद्ध ने कहा- पूर्ण! सूनापरांत के लोग चंड व कठोर होते हैं, यदि वे क्रोध करेंगे तो तुम्हें कैसा लगेगा? पूर्ण ने उत्तर दिया, भगवन!

  • एस्ट्रो टिप्स : योग मुद्रा में सूर्यदेव को जल चढ़ाना लाभदायी

    धर्म में आस्था रखनेवाले लोग सूर्य को जल चढ़ाते हैं. इसके पीछे रंगों का विज्ञान भी है. हमारे शरीर में रंगों का संतुलन बिगड़ने से कई रोग होने का खतरा होता है.

  • रोगों के शमन में भी लाभप्रद होते हैं रत्न

    चिकित्सा शास्त्र व्यक्ति को रोग होने के पश्चात रोग के प्रकार का आभास देता है, किंतु ज्योतिषशास्त्र के तहत कुंडली में अनिष्ट ग्रहों पर विचार कर विभिन्न रत्नों के उपयोग से उपचार किया जाता है. दरअसल, ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति की जन्म कुंडली जन्म के समय बह्मांड में स्थित ग्रह-नक्षत्रों का मानचित्र होती है, जिसका अध्ययन कर यह भी जाना जा सकता है कि व्यक्ति को उसके जीवनकाल में कौन-कौन से रोग होंगे.

  • गणपति व चंद्र देव की ऐसे करें उपासना, कटेंगे अपयश के योग

    हिंदू पंचांग में प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थी होती हैं. पूर्णिमा के बाद आनेवाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आनेवाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं.

  • छठ के बाद लगातार होंगे कई त्योहार, सात से 16 दिसंबर तक है वैवाहिक योग

    छठ व्रत के साथ ही इस महीने कई त्योहार होंगे. कार्तिक पूर्णिमा तक त्योहारों का सिलसिला जारी रहेगा. इस दौरान विधि-विधान से पूजा का काफी महत्व है. पंडितों के अनुसार छठ के बाद विधि-विधान से पूजा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है. इस बार 19 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पड़ रहा है. मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु अपने शयन का त्याग करेंगे. देवताओं का दीपोत्सव होगा. -

  • छठ विशेष : सविता का ही दूसरा नाम है छठी मैया, जो बच्चों को अकाल मृत्यु से बचाती हैं

    हर देवता जनमानस में संकट की घड़ी में लहर लेता एक महाभाव है. हर देवी-देवता का चेहरा एक महाभाव के मूर्ती की तरह पढ़ना चाहिए - वीरता, सौंदर्य, न्याय और करुणा की मूर्ती की तरह. हर देवता की एक शक्ति के साथ पूजा होती है. सूर्य की शक्ति का नाम ''सविता'' भी है. बिहार की लोक-परंपरा में ''सविता'' का ही एक नाम ''छठी मइया'' भी है.

  • छठ दूसरा दिन खरना आज : बहुआयामी महापर्व के जनसरोकार

    आज व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करेंगे. इसे ''खरना'' कहा जाता है. प्रसाद के रूप चावल की खीर, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनायी जाती है.

  • विदेशों में छठ : सिंगापुर में भी गूंज रहा है 'छठ करब जरूर'

    आधुनिकता की चकाचौंध में भी अपनी संस्कृति व परंपरा को जीवंत रखने का पर्व ही छठ है. बिहार-झारखंड के लोग जो नौकरी के सिलसिले में सात समंदर पार विदेशों में हैं, वे भी हर साल अपनी माटी के लोकपर्व को याद करते हैं. यह कहा भी गया है कि अपनी जड़, सभ्यता व संस्कारों को कभी दरकिनार नहीं करना चाहिए.

  • छठ गीतों में भी वही पवित्रता है, जो छठ लोकपर्व में है

    आस्था, विश्वास, समर्पण, पवित्रता और सामंजस्य के भाववाला लोकपर्व छठ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुख्य तौर पर मनाया जाता है. इस क्षेत्र के लोग जहां-जहां गये,अपनी संस्कृति और इस लोकपर्व को भी अपने साथ लेते गये. इस कारण यह पर्व अब दिल्ली, मुंबई, इंदौर, चेन्नई और चंडीगढ़ जैसी जगहों पर भी मनाया जाने लगा है.

  • विदेश में छठ : दोहा-कतर की छतों पर गूंजते छठ के गीत

    छठ पूजा अब केवल बिहार, झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश का ही पर्व नहीं रह गया है, बल्कि इन प्रदेशों के लोग जहां-जहां गये, वहां इसका फैलाव होता गया. अब तो पूरी दुनिया में लोग छठ पर्व मनाते हैं. गल्फ देशों के साथ सिंगापुर, अमेरिका व मॉरीशस समेत कई देशों में भी लोग छठ पर्व मनाते हैं. बिहार के अंबिका नगर, मोतिहारी के अनिल कुमार दोहा-कतर में कतर एयरवेज में एयरक्