• तुलसी के राम ‘जय श्रीराम’ नहीं, वे ‘जय सियाराम’ हैं

    तुलसी की भक्ति सर्वग्राह्य और सर्वसुलभ के तर्क के साथ चलती है. तुलसीदास ने भक्ति के लिए दो चीजें जरूरी बतायीं. अभ्यास और वैराग्य. कुरुक्षेत्र में अर्जुन कृष्ण से कहते हैं : यह मन तो बड़ा चंचल है. इसे कैसे आप पर केंद्रित करूं! ईश्वर से मन को जोड़ने के लिए इस संसार से मन को तोड़ना जरूरी है. ये दोनों क्रियाएं तोड़ने और जोड़ने के क्रमिक अभ्यास से ही संभव हैं. तुलसीदास ने कहा है कि चीटीं पहले बालू की ओर आकर्षित होती है. मगर चखने के बाद उसे त्याग देती है. वहीं, चीनी मिलते ही उसे खाना शुरू कर देती है.

  • कजरी तीज : सुखी दांपत्य के लिए नीमड़ी मां की पूजा

    भादो मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनायी जाती है, जिसे कजली तीज भी कहते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि इस बार 18 अगस्त को है. कजरी तीज मुख्यत: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत हिंदी भाषी क्षेत्रों में प्रमुखता से मनायी जाती है. हरियाली तीज, हरतालिका तीज की तरह कजरी तीज भी सुहागन महिलाओं के लिए अहम पर्व है. वैवाहिक जीवन की सुख और समृद्धि के लिए यह व्रत किया जाता है.

  • आत्म शक्ति के जागरण का महापर्व है रक्षाबंधन

    आत्मिक ऊर्जा के विस्तार व अपने भीतर के अनावश्यक भय को मिटाने का पर्व है श्रावण मास की पूर्णिमा, जो विश्व में भारत वंशियों के बीच रक्षाबंधन के रूप में प्रख्यात है. श्रावण मास की इस पूर्णिमा को बलेव और नारियल पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है. रक्षासूत्र प्रचलित रक्षाबंधन पर्व का प्रमुख घटक है. ये जहां अंतर्मन के भय को नष्ट करता है, वहीं विपरीत लिंगी सहोदरों यानी भाई बहन को भी परस्पर जोड़ कर समाज को एक सूत्र में पिरोता है.

  • अंतिम सोमवारी पर झारखंड में आस्था, उमंग व भक्ति का अद्भुत संगम, लाखों श्रद्धालुओं ने शिवालयों में किया जलाभिषेक

    रांची : सावन महीने की अंतिम सोमवारी पर झारखंड के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. अलग-अलग शिवालयों में लाखों श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की. देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर के अलावा अन्य शिवालयों में भी भक्तों का तांता लगा रहा. राजधानी रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में जलार्पण के लिए तड़के से ही शिवभक्तों की लाइन लग गयी. वहीं. रामगढ़ जिला में कांवर यात्रा में एक लाख से ज्यादा भक्त शामिल हुए.

  • Shravani Mela 2019 : अंतिम सोमवारी को बाबा मंदिर में भक्तों का सैलाब, कतार कुमैठा स्टेडियम के पार

    देवघर : अंतिम सोमवारी को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. मंदिर का पट खुलने से पहले ही कांवरियों की कतार कुमैठा स्टेडियम के पार पहुंच गया. सावन के अंतिम सोमवार को कतार शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर तक पहुंच गया. भक्तों को जलार्पण करने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पूरा प्रशासन देर रात से ही जुटा रहा.

  • रोगों का शमन एवं अशुभताओं का निवारण करता है रक्षाबंधन

    जी यह जीवन पग-पग पर असुरक्षित है. कब क्या हो जाये, क्या पता! इसलिए रक्षा-सुरक्षा सबको जरूरी है. दैहिक कष्टों से बचने के लिए संयम तथा रोग उत्पन्न होने पर समय से दवा लेते ही हैं, पर भौतिक व दैवी आपदाओं पर किसका नियंत्रण है? बिजली गिरे मर जायें, बाढ़ में डूब जायें, लू ले बीते, ठंड ठंडा कर दे क्या पता? हम बचते आ रहे हैं, यह कृपा, आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं की भी देन है.

  • अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक

    ई द-उल-अज़हा जिसे आम बोलचाल में बकर-ईद कहा जाता है, इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए एक अहम त्योहार है. ईद-उल-अजहा हर साल इस्लामी कैलेंडर के अनुसार जिलहिज्जह के महीने की दसवीं से बारहवीं तारीख अर्थात तीन दिनों तक कुर्बानी दी जा सकती है. लेकिन ईद-उल-अजहा की नमाज मात्र एक दिन दसवीं जिलहिज्जह को ही पूरी की जाती है. इस दिन हज जैसी इबादत पूरी की जाती है.

  • किन ग्रहों के योग से जीवन में आती है कटुता

    डॉ एनके बेरा, ज्योतिषाचार्य भारतीय ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशेष लक्षण तथा स्वभाव होता है.

  • शिव को अर्पित करें ये चीजें होगी धन-धान्य की प्राप्ति

    हर कोई अपने जीवन को समृद्ध करना चाहता है. इसके लिए अपेक्षित प्रयास भी करता है, मगर कई बार सफलता नहीं मिलती. शास्त्रों में कर्म को प्रधान बताया गया है, अपितु अनुकूल परिणाम पाने को कुछ धार्मिक उपाय भी बताये गये हैं. शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव को अर्पित की जानेवाली अलग-अलग चीजों से शुभ फल प्राप्त होता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है.

  • बोल बम : श्रावण मास में बैद्यनाथ की नगरी में विल्वपत्र की होती है अद्भुत प्रदर्शनी

    श्रावण माह में बैद्यनाथधाम में विल्लवपत्र यानी बेलपत्र की प्रदर्शनी अद्भुत होती है. विल्लवपत्र प्रदर्शनी की परंपरा बहुत पुरानी है और इसे भी शिवभक्ति के प्रकार के रूप में देखा जाता है.

  • शिव अरूप, पर बहुरूपों में विख्यात

    नटराज, मृत्युंजय, त्रिमूर्ति, बटुक-शिवलिंग, हरिहर, अर्द्धनारीश्वर, कृतिवासा, पंचवक्त्र, पितामह, महेश्वर सर्वज्ञ इत्यादि शिव के प्रतिरूप हैं. शिव की लीलाओं की तरह इनकी महिमा भी अपरंपार है. इसी कारण नाम भी निराले हैं. शैवागम के अनुसार, इनका एक प्रमुख रूप ‘रुद्र’ हैं. पुन: रुद्र के ग्यारह रूप हैं- शंभु, पिनाकी, गिरीश, स्थाणु, भर्ग, सदाशिव, शिव,हर, शर्व, कपाली और भव, जिनके अपने माहात्म्य हैं.

  • भगवान शिव तो सब जीवों के हैं

    सृष्टि के प्रारंभ से ही जीवों में वर्चस्व की लड़ाई होती रही है. इसका मूल कारण उदर पूर्ति या भूख था. जीवों का भोजन जीव है- ''जीवोजीवस्य भोजनम्'' की अवधारण का प्रारंभ उसी काल से प्रारंभ हो गया. इसी क्रम में शाकाहारी, मांसाहारी एवं शाका-मांसाहारी का भी जन्म हुआ, पर मानव अन्य प्राणियों की तुलना में एक चीज के कारण आगे बढ़ता गया. वह थी बुद्धि, जो ज्ञान और विज्ञान में परिवर्तित होता गया.

  • नागपंचमी और सोमवार का अद्भुत संयोग, थोड़ी सी पूजा कर देगा धन्‍य-धान से परिपूर्ण

    हिन्दू पंचांग में सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देशभर में नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है. उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है. कहीं कहीं दूध लावा भी खिलाया जाता है. नागों की पूजा के बारे में भविष्योत्तरपुराण में कहा गया है

  • संघर्ष और सफलता की मिसाल हैं संत जॉन मेरी वियानी

    पुरोहितों (फादरों) के संरक्षक संत जॉन मेरी वियानी का आज (चार अगस्त) पर्व दिवस है. उनकी संघर्ष और सफलता की एक बेमिसाल कहानी है. 24 में 18 घंटे वे सिर्फ काम करते थे. जैसे मधुमक्खियां मधु जमा करने के लिए हर फूल पर मंडराती है और मधु लाकर छत्ते में भर देती है, उसी प्रकार का व्यक्तित्व जॉन मेरी वियानी का था.

  • मिथ्या अहंकार से बाहर निकलिए आपके जीवन में भी फूटेगी हंसी

    जीवन का यह एक अद्भुत नियम है कि बाहर के जगत की जितनी भी चीजें हैं, वे बांटी जायें, तो घटती जाती हैं और भीतर के जगत की जितनी चीजें हैं, वे बांटने पर बढ़ती जाती हैं. बाहर का कोई भी खजाना अकूत नहीं है- कुबेर का भी नहीं! हंसी भी ऐसी ही है. हम अक्सर हंसने में संकोच करते हैं. और, जो आदमी हंसी को जितना रोकता है, उसकी हंसी उतनी मरती जाती है. धीरे-धीरे, वह हंसना ही भूल जाता है.

  • ग्रहों के भाव तय करते हैं शिक्षा की दिशा-दशा

    हमारे सौरमंडल में नौ ग्रह भ्रमणशील हैं, जिनका नियंत्रण परमपिता परमेश्वर के हाथ में है. उनकी दिव्यसत्ता ही जीवन में हर पल घटने वाली घटनाओं का प्रमुख नियंत्रक है.

  • वास्तु टिप्स : इन उपायों से नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखें

    हर कोई चाहता है कि उसके घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास हो और नकारात्मक ऊर्जा दूर ही रहे. इसके लिए आपको कुछ जत्न करने होंगे. वास्तु में इसके कुछ उपाय बताये गये हैं. चूंकि घर के खिड़की-दरवाजे ही बाहरी ऊर्जा प्रवेश करने का माध्यम होते हैं, अत: इन जगहों को शुद्ध रखना जरूरी है. एक बाल्टी पानी में पांच नीबू निचोड़कर, एक कप नमक और चौथाई कप सफेद सिरका डालकर इस मिश्रण से घर के सभी प्रवेश द्वार को साफ करें.

  • जानें व्रत रखने का क्‍या हैं विज्ञान

    श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के भक्त श्रद्धावश व्रत नियम का पालन करते हैं. व्रत रखने के तीन कारण हैं- पहला दैहिक, दूसरा मानसिक और तीसरा आत्मिक रूप से शुद्ध होकर पुनर्जीवन प्राप्त करना और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होना. दैहिक में आपकी देह शुद्ध होती है.

  • नागपंचमी पूजा से दूर होते हैं जीवन के सारे कष्ट

    श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी मनाने का विधान है, जो तिथि इस बार सोमवार, 5 अगस्त को है. इस दिन श्रावण सोमवार व्रत-पूजा भी है, अत: बेहद शुभ दिन है. हिंदू पुराणों में नागों को पाताल लोक या फिर नाग लोक का स्वामी माना जाता है.

  • श्रावण मास : मुक्ति व मोक्ष का संगम स्थल अजगैबीनगरी

    अजगैबीनाथ धाम पौराणिक स्थल रहा है. अजगैबीनगरी मुक्ति व मोक्ष का संगम स्थल माना जाता है. केवल सावन ही नहीं, अन्य माह में भी पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यहां हर दिन मोक्ष के साथ मुक्ति की कामना मन में लिये लोग पहुंचते हैं. विशेषकर सावन में अजगैबीनगरी का स्वरूप बदल जाता है.

  • देवघर : 1783 में ऐसा था बाबा मंदिर का प्रांगण, ऐसे करें भगवान शिव की पूजा-अर्चना

    देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर की यह दुर्लभ पेंटिंग 1783 की है. इस ऑयल पेंटिंग को ब्रिटिश चित्रकार विलियम होज्स ने बनाया था. तब उन्होंने इस क्षेत्र में 49 दिन प्रवास किया था.

  • शिव ही हैं परम आनंद व कल्याण के मूल

    श्रावण मास का प्रत्येक दिन शिव उपासना के लिए विशिष्ट है, श्रेष्ठ है. सावन की सोमवारी का स्थान इस विशिष्टता और श्रेष्ठता में सर्वोच्च है. इस दिन शिवलिंग को कामनालिंग के रूप में पूजा जाता है और माना जाता है कि इस पूजन से मनुष्य की लौकिक कामनाएं तो पूर्ण होती ही हैं, पालौकिक कल्याण का भी मार्ग इसी से प्रशस्त होता है. वस्तुत: परम आनंद व कल्याण के मूल शिव ही हैं. ‘शिव’ शब्द की उत्पत्ति ‘वश-कांतौ’ धातु से हुई है, जिसका तात्पर्य है ‘जिसे सभी चाहते हैं’. सभी उसे चाहते हैं, जिससे आनंद की प्राप्ति हो और यह परम आनंद शिव से मिलता है.

  • इस्लाम धर्म का पवित्र कर्तव्य हज

    इस्लाम धर्म के पांच सतून (स्तंभ) हैं, अर्थात तौहीद, नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हज. तौहीद का अर्थ एक ईश्वर यानी अल्लाह की इबादत करना है जबकि रोज़ा, नमाज़ सभी बालिगों (वयस्क) मुसलमानों पर फर्ज़ (अनिवार्य) है. लेकिन ज़कात और हज सभी के लिए अनिवार्य नहीं है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से संपन्न मुसलमानों को ही ज़कात अदा करना है और हज की यात्रा भी स्वस्थ एवं आर्थिक संपन्नता के बाद ही पूरा करना है. हज इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक प्रत्येक वर्ष जिलहिज्ज महीने की 8 से 12 तारीख तक अदा किया जाता है.

  • श्रावणी उपाकर्म का महत्व

    श्रावण माह में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म प्रत्येक हिंदू के लिए जरूर बताया गया है. वैसे यह कुंभ स्नान के दौरान भी होता है. यह कर्म किसी आश्रम, जंगल या नदी के किनारे संपूर्ण किया जाता है. अर्थात घर-परिवार से दूर संन्यासी जैसा जीवन जीकर यह कर्म किया जाता है. प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय (श्रावणी उपाकर्म) किसी गुरु के सान्निध्य में रहकर करना चाहिए.

  • कामिका एकादशी व्रत से बनते हैं बिगड़े काम

    कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र स्वरूप की पूजा की जाती है. इस बार यह पर्व रविवार, 28 जुलाई को है. यह व्रत करने से पूर्वजन्म की बाधाएं दूर होती हैं. इस पवित्र एकादशी के फल लोक और परलोक दोनों में उत्तम कहे गये हैं, क्योंकि इस व्रत को करने से हजार गौ दान के समान पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

  • कुंडली में कब होता है कालसर्प योग

    प्राचीन विद्वानों ने कालसर्प योग के बारे में जन्मकुंडली में कुछ विशेष भावों में इसकी स्थिति व अनिष्ट प्रभावों को बताया है. इसकी विशद व्याख्या तो वही कर सकता है, जिसने इस दुर्योग का फल भुगता है. पापग्रहों के होने पर सर्पयोग एवं पंचम में राहु की स्थिति से संतान नाश प्रचीन आचार्यों ने भी स्वीकार किया है.

  • सावन में अराधना कर दूर करें कुंडली के ग्रह दोष, ऐसे करें भगवान शिव को खुश

    पटना : व्यक्ति के जीवन में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जिसमें वह सबसे ज्यादा परेशान, हताश और दु:खी होता है. कठिन परिश्रम करने के बाद भी हर बार उसे असफलता हाथ लगती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब व्यक्ति की कुंडली में अशुभ योग और ग्रह दोष होता है तो इस तरह की परेशानियां आती हैं.