• पतित पावन हैं गोविंद, इनके सुमिरन में जीने से नष्ट होते हैं सारे कर्मबंध

    गुरु तेगबहादुर जी गुरु सिक्खी परंपरा के नवें गुरु हैं. वे छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी के सुपुत्र हैं. आठवें गुरु हरकिशन जी मात्र आठ वर्ष की अवस्था में अपना शरीर छोड़ते समय संकेत दे गये थे कि अगले गुरु गुरद्वारा बाबा बकाला साहिब में होंगे. लेकिन बकाले में 22 दावेदार प्रकट हो गये. इस बीच, एक व्यापारी था- माखनशाह. जहाज लेकर समुद्र में था कि तूफान आ गया. जहाज डूबने लगा और उसने अपने गुरु से प्रार्थना की कि अगर मेरा जहाज बच गया, तो संगत को पांच सौ स्वर्ण असर्फियां दूंगा. माखनशाह जब आया तब तक आठवें गुरु विदा हो चुके. उसे बताया गया कि अगले गुरु बकाले में प्रकट होंगे. बकाले पहुंचने पर उसने देखा कि 22 लोग अपनी गद्दी लगाये बैठे हैं.

  • रामचरित मानस पाठ से परिवार में होता है सुख का वास

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम व जनकपुत्री जानकी का विवाह मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को हुआ था. इस बार विवाह पंचमी 1 दिसंबर को मनायी जायेगी. इसका उल्लेख श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने किया है. इस पर्व को भारत के साथ-साथ नेपाल में भी प्रमुखता से मनाया जाता है, क्योंकि वहीं माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर है.

  • ग्रहों के योग से बदलता है मानव स्वभाव

    मानव स्वभाव कभी स्थिर नहीं रहता. वह हमेशा बदलता रहता है. ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की बदलती स्थिति के कारण मानव स्वभाव और कर्म भी बदल जाता है, किंतु गोचर में ग्रहों की चाल में परिवर्तन मनुष्यों के कर्मगत स्वभाव को भी बदल देता है. ज्योतिष में कर्म का भाव दशम है, उस पर बैठने तथा दृष्टि रखने वाले ग्रहों पर निर्भर करता है कर्म. कर्म स्थान से नवम यानी छठा भाव या चंद्रमा से दशम से कर्म का प्रारंभ, रुचि, भाग्य उन्नति आदि के विषय में जानकारी मिलती है.

  • खाटू धाम में श्री श्याम प्रभु के नाम से पूजे जाते हैं महादानी बर्बरीक

    पांडव कुल शिरोमणी मोर्वी कुमार वीर बर्बरीक श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थे. स्कंद पुराण में उल्लेखित आख्यान के अनुसार पांडव पुत्र भीमसेन कुमार घटोत्कच अपने पुत्र बर्बरीक के साथ द्वारका में यदुवंशियों की सभा में पहुंचे.

  • उत्पन्ना एकादशी पर दीप दान से दूर होता है अकाल मृत्यु भय

    वर्ष में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. इन एकादशियों पर व्रत रखने का खास महत्व माना जाता है. लेकिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आनेवाले उत्पन्ना एकादशी की इनमें प्रमुखता है. मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था. इस बार यह एकादशी 22 नवंबर को पड़ रही है. उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों के बराबर माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु एवं एकादशी माता की पूजा का विधान है.

  • फलित ज्योतिष में क्या हैं युतियां एवं चुनौतियां

    लग्नशोधन, ग्रहबल,भावबल एवं षडबल- कुंडली के निर्धारण में क्रमबद्ध तरीकों से विवेचना अति महत्वपूर्ण है. यह जीवन मीठी कहानियों का संग्रह ही नहीं है, बल्कि कठिनाइयों का पहाड़ भी है.

  • कार्तिक पूर्णिमा: नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहें हैं श्रद्धालु, जानें इसका महत्व और पूजा विधि

    आज कार्तिक पूर्णिमा है. आज दान करने का अलग महत्व है. इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. नदियों और तालाबों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है.

  • 550वां प्रकाशपर्व पर विशेष : सुल्तानपुर लोधी, जहां हैं गुरु की अहम निशानियां

    देश-विदेश में गुरु नानक देव जी का 550 साला जनम दिहाड़ा मनाया जा रहा है. करतारपुर कॉरिडोर तो चर्चा में है ही, सुल्तानपुर लोधी में भी देश-विदेश से लोगों का जमावड़ा हो रहा है. पूरा नगर सज-धज कर तैयार है. शहर की दीवारों पर गुरु लीला के चित्र बना दिये गये हैं, लोगों के रुकने के लिए सरकारी व्यवस्था के अलावा आस-पास के लोगों ने भी अपने कमरे सेवा के लिए तैयार किये हैं. पूरे शहर के आस-पास लंगर लग रहे हैं.

  • प्रकाश पर्व : मानवता के पुंज गुरु नानक देव जी

    हर व्यक्ति जीवन में सुख-शांति की लालसा रखता है, परंतु उसे पाने के लिए उसके कार्य-कलाप विपरीत दिशा में चलते हैं. परिणामत: वह दुख की बेड़ियों में ही जकड़ा रहता है. गुरुनानक जी का कथन है-

  • प्रकाश पर्व पर विशेष : मन रे, नाम जपहु सुख होई

    मन के कोने-कोने को स्नेहभरी वाणी से उजागर करने वाले गुरुनानक देवजी का इस धरा पर आगमन कार्तिक पूर्णिमा, सन 1469 को आज से 550 वर्ष पूर्व हुआ. भारत का जनमानस उस समय जाति-पांति, कुरीतियों, कुप्रथाओं, आडम्बरों, अंधविश्वासों, छुआछूत जैसी बेड़ियों में जकड़ा हुआ था. ऐसे में जनमानस के जीवन में एक प्रकाश-पुंज का आगमन किसी वरदान से कम नहीं था, जिसने उन्हें इन बेड़ियों से मुक्ति दिलायी.

  • कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थल

    यह मंदिर अयोध्या में राम की पैड़ी पर स्थित है. कहा जाता है कि इस मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था. विक्रमादित्य के समय तक यह मंदिर अच्छी स्थिति में था. वर्तमान के नागेश्वर नाथ मंदिर को 1750 में सफदर जंग के मंत्री नवल राय ने बनवाया था. शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में बड़े उत्सव का आयोजन किया जाता है.

  • देवुत्थान एकादशी आज: पढ़ें इसका महत्व, जानें पूजा विधि

    देवप्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवुत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष देवप्रबोधिनी एकादशी 8 नवंबर को यानी आज मनायी जा रही है. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं.

  • अक्षय नवमी आज, आंवले की पूजा से मिलेगा महा वरदान, उत्तम स्वास्थ्य की होगी प्राप्ति

    पटना : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी मंगलवार को अक्षय नवमी मनायी जायेगी. मान्यता है कि अक्षय नवमी पर किये जाने वाले पुण्य व उत्तम कर्म कभी नष्ट नहीं होते. दैवज्ञ श्रीपति त्रिपाठी बताते हैं कि अक्षय नवमी के दिन ही त्रेता युग का आरंभ हुआ था. इस दिन कुष्मांड यानी कुम्हड़े (भतुआ) का दान महत्वपूर्ण माना गया है. माना जाता है कि नवमी तिथि को श्रद्धापूर्वक आंवले के नीचे भगवान विष्णु का पूजा कर भतुआ का दान करने से निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है तथा व्याधियां दूर होती हैं.

  • आठ नवंबर को देवोत्थान एकादशी व तुलसी विवाह, शुरू होंगे रुके हुए शुभ कार्य

    पटना : कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 08 नवंबर (शुक्रवार) को देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह व्रत मनाया जायेगा. इस दिन भगवान नारायण लगभग चार महीने बाद शयन से जायेंगे और चतुर्मास व्रत का समापन हो जायेगा.

  • छठ महापर्व : कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकतऽ जाय... आज डूबते व कल उगते सूर्य को छठव्रती देंगे अर्घ

    पटना : कांच ही रे बांस के बहंगिया...., मारबौ रे सुगवा धनुष से... छठ पर्व के इन्हीं सुमधुर गीतों के साथ सूबे में छठ महापर्व की छटा बिखर रही है. चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन छठव्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इसके साथ ही उनका 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया. महापर्व के तीसरे दिन शनिवार को छठव्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देंगे. फिर रविवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के बाद पारण कर अन्न-जल ग्रहण करेंगे. इसके साथ ही यह चार दिवसीय महापर्व संपन्न हो जायेगा.

  • छठ पर अब तक नहीं जारी हो सका डाक टिकट, जानें क्यों महत्वपूर्ण हैं टिकट

    बिहार का त्योहार माना जाने वाला छठ अब ग्लोबल हो चुका है. इसके बावजूद केंद्र सरकार के डाक विभाग से इसे वह सम्मान अब तक नहीं मिला है जिसका यह हकदार है.

  • लोकगीतों में छठ की महिमा

    आस्था,विश्वास व समर्पण का लोकपर्व छठ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाता है. अब कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में भी यह पर्व मनाया जाने लगा है.

  • व्रत केंद्रित त्योहार है छठ

    छठ एक व्रत है और त्योहार भी. दीपावली, सोहराई ,दशहरा ,होली आदि त्योहार हैं लेकिन व्रत नहीं हैं. छठ मूलतः व्रत है और फिर इसके वृत्त पर त्योहार भी रच दिया गया है - व्रत केंद्रित त्योहार. इसलिए तमाम त्योहारों में यह अजूबा है, कुछ खास और विशिष्ट भी.

  • जीवन का अर्थ ही है सूर्य को देखना

    मानव सभ्यता के पहले देव का नाम सूर्य है, जिनकी पूजा का अनुष्ठान जल से जुड़ा है. सूर्य की उपासना की पांच हजार से पूर्व की परंपरा है. भारतीय चिंतन कहता है कि पांच तत्वों से यह संसार बना है, उन्हीं से मनुष्य बना है.

  • साल में दो बार होती है छठपूजा

    छठ पूजा साल में दो बार मनायी जाती है. पहली पूजा चैत मास में और दूसरी कार्तिक में. षष्ठी देवी माता को कात्यायनी माता के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्रि के दिन हम षष्ठी माता की पूजा करते हैं.

  • अमेरिका में पटना की बेटी मनाती है छठ

    गो कहा जाता है कि बिहारी दुनिया में कहीं भी रहे अपनी परंपरा और संस्कृति को नहीं भूलते. अपनी परंपराओं से प्यार ही है कि बिहारी जहां भी गये अपने साथ महापर्व छठ को लेकर गये. हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में भी अब छठ का त्योहार मनाया जा रहा है वह भी बिहारी अंदाज में. अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में एक शहर है फिरीमाेंट यहां हर वर्ष महापर्व छठ मनाने के लिए आस - पास के शहरों से लोग जुटते हैं.

  • सिंगापुर में छठी की छटा

    बिहार-झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ छठ पर्व का फैलाव-विस्तार अन्य जगहों पर काफी तेजी से हुआ है. इन प्रदेशों के विदेशों में रहनेवाले लोग आस्था के इस पर्व को जहां हैं वहां काफी श्रद्धा के साथ मनाते हैं. सिंगापुर में भी इस उत्सव को पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाता है.

  • छठ महापर्व शुरू : आज से 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगी व्रतियां, मिलेगा खरना का प्रसाद

    पटना : लोक आस्था का चार दिवसीय छठ महापर्व गुरुवार से शुरू हो गया. महापर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को छठव्रती देर शाम खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगे. यह उपवास रविवार को उगते सूर्य को अर्घ देने के बाद संपन्न होगा और छठव्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगे.

  • छठ पूजा की पौराणिक कथाएं : नदी में एक पैर पर खड़े होकर सूर्योपासना किया करते थे कर्ण

    भारत में सूर्योपासना ऋग्वैदिक काल से होती आ रही है. सूर्य और उपासना की चर्चा विष्णुपुराण, भगवतपुराण, ब्रहापुराण, वैवर्तपुराण आदि में विस्तार से मिलती है. मध्यकाल तक आते-आते छठ सूर्योपसना के एक व्यवस्थित पर्व के रूप में समाज में प्रतिस्थापित हो चुका था. छठ के धार्मिक इतिहास पर नजर डालें, तो हमें इसकी समृद्धता का पता चलता है. छठ पर्व हिंदू कैलेंडर के कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है.

  • लोकगीतों की बिना छठ का त्योहार अधूरा, इन्‍हें सहेज कर रखना चाहिए

    लोकगीतों की बिना छठ का त्योहार अधूरा है. सामूहिकता और पावनता इस लोकपर्व के प्रमुख तत्व हैं. छठ गीतों का गायन महिलाएं सामूहिक रूप से करती हैं और गीतों के माध्यम से ही छठ पर्व से जुड़ी आस्था और इसकी पवित्रता का बखान करती हैं. यह कहना है बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत का. छठ और इसके लोकगीतों की चर्चा करते हुए वह कहती हैं कि इनमें एक विशेष प्रकार की पवित्रता और सामूहिकता होती है. प्रकृति के हर अंग में संगीत है.

  • प्रकृति और छठ : सूर्य से हमारा संबंध आपसदारी का है

    आश्विन बीत गया है. उसका जाना उस गीले रूमाल का समय की अलगनी पर जाना है जिससे आकाश को पोंछा गया हो. अब वहां काले बादल नहीं हैं. आंखें उठाओ तो नीलिमा और उजास का खिलखिलाता रास सुख देता है.

  • मिथिला में महत्वपूर्ण देवता हैं सूर्य, छठ व्रत के बाद यहां खेला जाता है सामा चकेबा खेल, जानें

    सूर्योपासना उत्तर भारत की एक विशिष्ट पूजा है जो अनादि काल से होती आयी है. इस पूजा में वैदिक कर्मकांड नहीं बल्कि स्थानीय फल फूल अनाज तथा पारस्परिक सहयोग से सारे कार्यों का संपादन किया जाता है. कार्तिक मास में उगने वाले फल विशेषतः सूर्य को प्रसाद के रूप में चढाए जाते हैं.

  • सूर्योपासना की स्थली रहा है अंग क्षेत्र

    भागलपुर शहर में पुरातन सूर्य मंदिर स्थित है, जहां सफेद संगमरमर की मूर्ति स्थापित है. प्राचीन समय से यहां सूर्य पूजा होती आ रही है. सुल्तानगंज का अजगैवी नाथ मंदिर एक पौराणिक स्थल है, जो चट्टानों पर दृढ़ता पूर्वक निर्मित है तथा इसमें उत्कृष्ट मूर्तियों एवं शिलालेखों की श्रृंखला है, जिन्हें गुप्त काल में तथा पाल काल के बाद की अवधि में उत्कीर्ण किया गया है. गंगा नदी जो अंग जनपद होकर बहती है.

  • नालंदा :बड़गांव में सांब ने की थी साधना और दिया था अर्घ, जानें पूरी कहानी

    नालंदा : बड़गांव सूर्योपासना के लिए सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र है. धार्मिक दृष्टिकोण से इसका बहुत महत्व है. नालंदा प्रागैतिहासिक काल से ही भगवान सूर्य की उपासना और अर्घ के लिए महत्वपूर्ण है. देश में कुल 12 प्रमुख सूर्यपीठ हैं. उन्हीं में से एक बड़गांव है. यहां प्रागैतिहासिक कालीन सूर्य तालाब है. कहा जाता है कि भगवान भास्कर को अर्घ देने की परंपरा इसी बड़गांव (पुराना नाम बर्राक) से शुरू हुई थी.

  • लोक आस्था का महापर्व छठ : पर्यावरण और प्रकृति के साथ सहजीवन का संदेश है छठ

    भारत में सालों भर अनेक पर्व-त्योहार मनाये जाते हैं. लेकिन छठ ही ऐसा पर्व है जिसमें दो बातें खास हैं. इसमें हम ऐसे भगवान की पूजा करते हैं जिन्हें हम रोज अपनी आंखों से देखते हैं. वहीं दूसरे किसी भगवान को हम साक्षात रूप में नहीं देख सकते. सूर्य को भगवान कहना वैज्ञानिक रूप से भी सही है. अगर सूर्य से रोशनी नहीं मिले तो कोई पौधा ग्रोथ नहीं करेगा. प्रकाश न मिलने से धरती अत्यंत ठंढी हो जायेगी. इस तरह से सूर्य का हमारे जीवन में महत्व काफी ज्यादा है.

  • यूट्यूब पर धूम मचा रहा है बिहारी बच्चों का गाया छठ गीत, देखें वीडियो

    लोक आस्था के महापर्व छठ में लोक गीतों का अपना महत्व है. सदियों से महिलाएं पूजा की तैयारियों के दौरान लोक गीत गाती रही हैं. आधुनिक दौर में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी छठ के गीत अपनी दस्तक दे रहे हैं. इन दिनों यूट्यूब पर बच्चों के द्वारा गाया छठ गीत वायरल हो रहा है. चंपारण टॉकिज के बैनर तले नितिन नीरा चंद्र के निर्देशन में बने इस वीडियो गीत में बच्चे छठ के गीत गाते नजर आ रहे हैं. साथ ही ये बच्चे छठ पूजा के दौरान होने वाले विभिन्न कार्यों को करते दिख रहे हैं.

  • लोक आस्था का महापर्व छठ : समाज को संस्कारित करती छठ पूजा

    कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष ‘षष्ठी और सप्तमी तिथि को शाम और सुबह को फलों और पकवानों के साथ सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. सभी लोग जल घाट पर एकत्रित होते हैं. व्रती महिलाएं और उपस्थित जनसमूह डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. सूर्य का आशीर्वाद लेकर घर वापस लौटते हैं. इन गतिविधियों का वर्णन करने पर ये बहुत छोटी सी बात लगती है. परंतु चार दिनों की इन गतिविधियों पर ध्यान देने से ऐसा लगता है कि संपूर्ण मानव समाज भारतीय संस्कृति के सूत्रों को उन चार दिनों में अपने जीवन में उतार लेता है.

  • छठी मां की महिमा : अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी ने देव में की थी छठ, पांडवों को विपदा से मिली थी मुक्ति

    औरंगाबाद : जब कभी छठ का जिक्र होता है, तो औरंगाबाद के देव सूर्य मंदिर की चर्चा जरूर होती है. इस मंदिर को लेकर कई तरह की कथाएं व्याप्त हैं. इन्हीं में से एक कथा द्रौपदी से जुड़ी है. कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों के साथ उनकी पत्नी द्रौपदी (पांचाली) औरंगाबाद के विराटनगर (अब विराटपुर) में पहुंची थीं. उस वक्त पांडव विपदा से ग्रसित थे.

  • छठी मां की महिमा : मीरकासिम का हुआ था हृदय परिवर्तन, हार गया था औरंगजेब भी

    सल्तनत काल में देव इलाके का सूबेदार मीर कासिम था. उसने सूर्य मंदिर को विध्वंस करने के कई प्रयास किये, पर सफल नहीं हुआ. मीर कासिम का पुत्र अफजलुद्दीन को कुष्ठ था और उसका रोग उसी सूर्य कुंड तालाब में स्नान करने के बाद ठीक हुआ. बेटे की बीमारी ठीक होने के बाद मीर कासिम का हृदय परिवर्तन हुआ व अपनी योजना को त्याग कर भक्ति भाव में डूब गया. कहा जाता है कि औरंगजेब भी मंदिरों को ध्वस्त करते हुए देव पहुंचा था. उस वक्त देव सूर्य मंदिर का मुख पूरब दिशा की ओर था.

  • छठ महापर्व की तैयारियां शुरू, कल से चार दिन का त्योहार, इस दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान

    चार दिनों तक चलने वाला छठ का महापर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा. छठ पूजा के त्योहार को महापर्व कहा जाता है. ये पर्व कार्तिक मास के षष्ठी को मनाया जाता है इसलिए इसे छठ पर्व कहा जाता है.

  • छठ महापर्व: सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम कर रहीं मुस्लिम महिलाएं, सेवा की भावना से बनाती हैं चूल्हा

    लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की बात ही निराली है. छठ में जितनी अनेकता में एकता है, उतनी शायद ही किसी और पूजा में दिखता है. सूर्य की उपासना का यह महापर्व सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी कायम करता है. छठ पर्व करने वाली व्रती महिलाएं जिस कच्चे चूल्हे पर प्रसाद बनाती है, उस चूल्हे को कई मुस्लिम महिलाएं सफाई और शुद्धता का ख्याल रखते हुए बड़े ही मनोयोग से बनाती हैं. आपको ये महिलाएं कदमकुआं, दारोगा राय पथ, आर ब्लॉक और जेपी गोलंबर के पास चूल्हा बनाते हुए हुए दिख जायेंगी.

  • भैया दूज: ऐसे बनाएं किस्मत चमकाने वाला तिलक, करें इस मंत्र का जाप

    भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई दूज का पर्व 29 अक्तूबर को यानी आज मनाया जा रहा है. इस वर्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक बहनों को भाईदूज का टीका करने का अवसर मिलेगा. टीका करने से पूर्व महिलाओं ने समूह में बैठ कर रूई में बेसन लगा कर लंबी मालाएं बनाएंगी.

  • भैया दूज आज : भाइयों की लंबी उम्र के लिए दुआएं करेंगी बहनें, जानें इसके पीछे की कहानी

    पटना : आज भैया दूज है. रक्षा बंधन की तरह ही दीपावली के बाद मनाये जाने वाले पर्व ‘भैया दूज’ का भी अपना खास महत्व होता है. भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भैया दूज दीपावली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपनी भाइयों को रोली और अक्षत से तिलक करके उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं. इसे भाई बहन के प्यार और त्याग के त्योहार के रूप में मनाया जाता है.

  • चित्रगुप्त पूजा आज : किताब, कलम, दावात और बही खातों की होगी पूजा, जानें पूजा का शुभ मंत्र

    पटना : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन चित्रगुप्त जी की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन किताब, कलम, दावात और बही खातों की पूजा का विशेष महत्व है. आज से ही नये बही खातों की शुरूआत भी होती है. पुराणों के अनुसार चित्रगुप्त पूजा करने से विष्णुलोक की प्राप्ति होती है. इस बार चित्रगुप्त पूजा का विशेष मुहूर्त मंगलवार की दोपहर 1.11 बजे से दोपहर 3.25 बजे तक है.

  • भाइयों से मिलेंगे विशेष उपहार, बहनें आज मनायेंगी गोधन का त्योहार

    भाई और बहन भले ही आपस में कई बार नोक-झोंक कर लें, लेकिन उनका रिश्ता हर रिश्तों से खूबसूरत होता है. इस इन रिश्तों को मजबूत करने के लिए बहनें अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ती. त्योहारों के इस मौसम में भाई और बहन की कुछ ऐसी ही खुशियां देखने को मिल रही है. सोमवार को भाई-दूज से एक दिन पहले शहर में हर तरफ इसका उत्साह दिखा. क्योंकि इस मौके पर बहनें जहां भाई की सलामती के लिए पूजा सामग्री खरीद रही थी. वहीं भाई भी अपनी बहन को प्यार भरे गिफ्ट देने के लिए शॉपिंग करने में व्यस्त रहे.

  • आनंद से सराबोर होते हैं छठ के चार दिन, रूठे रिश्‍तेदार भी अर्ध्‍य देने पहुंचते हैं घाट, मिलकर बनाते हैं प्रसाद

    दीवाली के खत्म होने के साथ ही लोग छठ की तैयारी में जुट चुके हैं. चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर को (गुरुवार) नहाय-खाय से होगी. 1 नवंबर को खरना है जबकि 2 को पहला अर्ध्‍य लोग सूर्य को द