जीवित्पुत्रिका व्रत: 22 को उपवास करेंगी महिलाएं, 21 को नहाय-खाय,बनेगा नोन्ही का साग और मडुआ की रोटी

संतान की दीघार्यु और मंगलकामना के लिए माताएं रविवार को जिउतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत) का व्रत रखेंगी. इसकी शुरुआत 21 सितंबर को नहाय-खाय से होगी. आचार्य श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि महावीर पंचांग के मुताबिक 22 को उपवास व्रत के बाद 23 सितंबर को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकेगा. जीवत्पिुत्रिका कथा में भी उदया तिथि में अष्टमी व्रत करने की बात कही गयी है.

इनके नौकरी में परिवर्तन होने की संभावना है....जानें अपने राशिफल के बारे में

नौकरी में परिवर्तन होने की संभावना. उच्चस्तरीय लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश कामयाब होगी. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. परिवार में धार्मिक कार्य संपन्न होंगे.

जिउतिया व्रत: संतान के लिए माताएं करेंगी निर्जला उपवास, बदल रही है लोगों की मानसिकता

धनबाद : संतान के बेहतर स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने के लिए माताएं जिउतिया व्रत करती हैं. यह व्रत आश्विन माह कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को किया जाता है. पंडित गुणानंद झा बताते हैं मिथिला पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 21 सितंबर को दोपहर तीन बजे प्रवेश कर रहा है जो 22 सितंबर को दोपहर ढाई बजे तक रहेगा.

मिट्टी के बर्तन में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, पितरों को मिलेगी शांति

पितृपक्ष के दिनों में हमारे पितर (पूर्वज) हमारे यहां जरूर आते हैं. उनको मनाने या खुश करने का यह सबसे अच्छे दिन होते हैं. मिट्टी के बर्तन में सरसों के तेल का दीपक जलायें, श्रद्धानुसार एक या एक से अधिक पेड़ा रखें और कुल्हड़ में कच्चा दूध रखें. इन तीनों चीजों को घर के दक्षिण दिशा में 15 दिनों तक रोजाना रखें.

ज्‍योतिष परामर्श

पितृपक्ष से क्या आशय है? प्रेत और पितृ में क्या फ़र्क़ है ? जानें क्या कहते हैं सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी

सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं.

धर्म-कर्म

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संतान की दीघार्यु और मंगलकामना के लिए माताएं रविवार को जिउतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत) का व्रत रखेंगी. इसकी शुरुआत 21 सितंबर को नहाय-खाय से होगी. आचार्य श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि महावीर पंचांग के मुताबिक 22 को उपवास व्रत के बाद 23 सितंबर को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकेगा. जीवत्पिुत्रिका कथा में भी उदया तिथि में अष्टमी व्रत करने की बात कही गयी है.

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