नयी आशाएं होंगी उदित, बढ़ेंगे धनागम के अवसर....जानें अपने राशिफल के बारे में

जमीन-जायदाद संबंधी विवादों का समाधान मिलेगा. नौकरी में उन्नति. यशस्वी कार्य करने का अवसर मिलेगा.सुख-सुविधा के साधन बनेंगे.

खाटू धाम में श्री श्याम प्रभु के नाम से पूजे जाते हैं महादानी बर्बरीक

पांडव कुल शिरोमणी मोर्वी कुमार वीर बर्बरीक श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थे. स्कंद पुराण में उल्लेखित आख्यान के अनुसार पांडव पुत्र भीमसेन कुमार घटोत्कच अपने पुत्र बर्बरीक के साथ द्वारका में यदुवंशियों की सभा में पहुंचे.

उत्पन्ना एकादशी पर दीप दान से दूर होता है अकाल मृत्यु भय

वर्ष में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. इन एकादशियों पर व्रत रखने का खास महत्व माना जाता है. लेकिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आनेवाले उत्पन्ना एकादशी की इनमें प्रमुखता है. मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था. इस बार यह एकादशी 22 नवंबर को पड़ रही है. उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों के बराबर माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु एवं एकादशी माता की पूजा का विधान है.

फलित ज्योतिष में क्या हैं युतियां एवं चुनौतियां

लग्नशोधन, ग्रहबल,भावबल एवं षडबल- कुंडली के निर्धारण में क्रमबद्ध तरीकों से विवेचना अति महत्वपूर्ण है. यह जीवन मीठी कहानियों का संग्रह ही नहीं है, बल्कि कठिनाइयों का पहाड़ भी है.

ज्‍योतिष परामर्श

ग्रहों पर निर्भर है नौकरी का योग, रखें धैर्य, मिलेगी सफलता

पटना : आज हर कोई नौकरी पाने की कोशिश में लगा है. अधिकांश लोग सरकारी और प्राइवेट नौकरी में सफलता चाहते हैं, लेकिन लगातार मिलने वाली असफलता से परेशान हैं. चूंकि नौकरी ग्रहों के योग पर निर्भर करती है, इसलिए धैर्य जरूरी है. उक्त बातें दैवज्ञ श्रीपति त्रिपाठी ने गुरुवार को प्रभात खबर में आयोजित ज्योतिष काउंसेलिंग में पाठकों के सवालों का जवाब देते हुए कही. उन्होंने कहा कि ग्रहों के हिसाब से जातकों को भगवान शंकर, बजरंग बली व गणपति जी की अाराधना करनी चाहिए.

नैतिक शिक्षा

प्रकाश पर्व: गुरु नानकदेव ने मक्का-मदीना में किया था ये चमत्कार, यूं दिया एकता का संदेश

सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी की जयंती कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो 12 नवंबर यानी कि आज है. अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक देव जी की इस बार 550वीं जयंती मनाई जा रही हैं.

धर्म-कर्म

खाटू धाम में श्री श्याम प्रभु के नाम से पूजे जाते हैं महादानी बर्बरीक

पांडव कुल शिरोमणी मोर्वी कुमार वीर बर्बरीक श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थे. स्कंद पुराण में उल्लेखित आख्यान के अनुसार पांडव पुत्र भीमसेन कुमार घटोत्कच अपने पुत्र बर्बरीक के साथ द्वारका में यदुवंशियों की सभा में पहुंचे.

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प्रकाश पर्वः गुरु नानक देव के ये 10 उपदेश जो बदल देंगे आपका जीवन

550वां प्रकाशपर्व पर विशेष : सुल्तानपुर लोधी, जहां हैं गुरु की अहम निशानियां