प्रभात मत

अराजक उड़ान सेवाएं

Prabhat Khabar

बेहद सुविधाजनक और समय की बचत करनेवाली हवाई यात्रा थोड़ी-सी चूक से यातनादायी भी हो सकती है. गुरुवार सुबह मुंबई से जयपुर जा रहे जेट एयरवेज के एक विमान के यात्रियों को ऐसे ही भयावह अनुभव से गुजरना पड़ा. उस विमान के भीतर हवा का समुचित दबाव बनाये रखनेवाले बटन को चालू नहीं करने के कारण यात्रियों के कान और नाक से खून निकलने लगा था.

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बजट-भाषण में कवि, लेखक, विचारक

रवि भूषण

अभी तक संभवत: इस पर विचार-विमर्श नहीं हुआ है कि स्वाधीन भारत के वित्त मंत्रियों ने अपने बजट-भाषण ...

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सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था

केसी त्यागी

मुजफ्फरपुर में ‘एक्यूट इंसेफेलाइटिस’ नामक बीमारी से हुई बच्चों की मौत दर्दनाक घटना है. इसने सरकार ...

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ग्राम सभाओं की जरूरत

अनुज लुगुन

आम बजट में सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य रखा है. बजट पर ...

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प्रभात खबर पटना यात्रा के 23 वर्ष पूरे : अपनी पाठकों का भरोसा ही हमारी ताकत

आशुतोष चतुर्वेदी

प्रभात खबर ने पटना में अपनी यात्रा के 23 वर्ष पूरे कर लिये हैं. प्रभात खबर ने एक सुदूर पिछड़े इलाके ...

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बेहतरी की उम्मीद

तीन दशकों से जारी कश्मीर समस्या के फौरी समाधान की अपेक्षा करना सही नहीं होगा, परंतु कुछ महीनों से हालात में हो रहे सकारात्मक सुधारों से भविष्य के लिए उम्मीदें बंधती हैं. कुछ सालों से सरकार ने एक तरफ अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों पर अंकुश लगाने की कवायद की है, तो दूसरी ओर विकास एवं कल्याण कार्यक्रमों के जरिये कश्मीरी अवाम में भरोसा पैदा करने की कोशिश की है. राज्य के अस्थिर क्षेत्रों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण इस साल के पहले छह महीनों में घुसपैठ की एक भी घटना नहीं हुई है. ऐसा कई सालों में पहली बार हुआ है.

श्रम सुधार की पहल

केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों की संरचना में व्यापक परिवर्तन का निर्णय लिया है. देश के 40 करोड़ कामगारों की बेहतरी तथा व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने के लिए ऐसे सुधारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.

मैनुफैक्चरिंग पर जोर

रोजगार और उत्पादन में बढ़ोतरी कर मैनुफैक्चरिंग सेक्टर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बीते डेढ़ दशकों से इसे प्राथमिकता देने के बावजूद संतोषजनक नतीजे नहीं मिल सके हैं. यूपीए सरकार सकल घरेलू उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी को 16-17 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी तक नहीं ले जा सकी थी और मौजूदा सरकार के पहले कार्यकाल में ''मेक इन इंडिया'' कार्यक्रम का प्रदर्शन भी अपेक्षा से कम रहा.

कैसे रुकें हादसे

उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुई हृदयविदारक बस दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसे हादसों को कैसे रोका जाए. पिछले महीने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बस के खाई में गिर जाने से 44 लोगों की मौत हो गयी थी. दुर्घटना स्थल पर सड़क भी खराब थी और घुमावदार मोड़ पर अवरोधक भी नहीं लगा था.

बैंकों को राहत

बीते वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के धीमा रहने का एक कारण यह भी था कि कई छोटे और मझोले कारोबारियों तथा सामान्य ग्राहकों को बैंकों और वित्तीय कंपनियों से कर्ज लेना मुश्किल हो रहा था. फंसे हुए कर्जों की वसूली न होने पाने की वजह से ये संस्थाएं भी मजबूर थीं.

अर्थव्यवस्था में स्त्रियां

विकास और समृद्धि की सभ्यतागत यात्रा में स्त्रियों का महत्वपूर्ण योगदान है. यदि हमारी अर्थव्यवस्था को वृद्धि की राह पर अग्रसर रहना है और 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करना है, तो महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रभावी उपाय जरूरी हैं.

गुणवत्ता पर ध्यान

रेलयात्रियों की सुख-सुविधा में लगातार बेहतरी के बावजूद खाने के स्तर को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं. इसमें सुधार के लिए सरकार की ओर से अनेक कदम उठाये जा रहे हैं.

महानगरों की बाढ़

साढ़े चार दशकों में सर्वाधिक बारिश से देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में आयी बाढ़ ने 2005 की विभीषिका की याद ताजा कर दी है, जिसमें करीब 11 सौ लोग मारे गये थे. राज्य सरकार और महानगरपालिका का दावा है कि बाढ़ से निपटने की तैयारी पुख्ता थी, किंतु जलवायु परिवर्तन की वजह से हुई बहुत ज्यादा बारिश से इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं.

कृषि पर ध्यान

देश के कुल घरेलू उत्पादन में कृषि क्षेत्र का योगदान 17-18 फीसदी है तथा इसमें कुल कार्यबल का 50 फीसदी से ज्यादा रोजगार है. लंबे समय से यह क्षेत्र संकट से जूझ रहा है, जिसके कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपेक्षित वृद्धि हासिल नहीं हो पा रही है. केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि बीते सालों की कोशिशों को आगे बढ़ाते हुए बजट में किसानों और ग्रामीण क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिलेगी.

बिन पानी सब सून

देश के कई इलाके गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं. बहुत कमजोर मॉनसून की वजह से इसमें सुधार की उम्मीद भी बहुत कम है. ऐसी स्थिति के लिए सरकारों और समाज की लापरवाही और कुप्रबंधन जिम्मेदार है.

संतोषजनक रहा जी-20

अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं राजनीति में व्याप्त तनावों और चिंताओं की पृष्ठभूमि में आयोजित हुई विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुखों की बैठक के परिणाम संतुलित रहे हैं.

कश्मीर में उम्मीद

केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों के बावजूद कश्मीर में हिंसा रोकने की चुनौती बनी हुई है. ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से यह इंगित होता है कि उनके एजेंडे में कश्मीर ऊपर है. इस दौरे से उम्मीदें इस वजह से भी बढ़ गयी हैं कि अलगाववादियों ने किसी तरह के बंद या विरोध का आयोजन नहीं किया. तीन दशकों से अशांत घाटी में ऐसा पहली बार हुआ है. आतंकियों के हाथों मारे गये लोगों के परिजनों तथा विभिन्न समुदायों और संगठनों के प्रतिनिधियों से गृह मंत्री की मुलाकात से भी भरोसे बनाने में मदद मिलेगी.