• पढ़ें, देश में मौजूद जाति व्यवस्था पर तंज कसता व्यंग्य ‘ जाति पूछो भगवान की’

    गांव में रामचरित मानस कथा के दस-दिवसीय आयोजन का आज अंतिम दिन था. एक स्कूल के मैदान में गांव-जवार के लगभग दो हजार लोग एकत्र थे, हरिद्वार के स्वामी श्री श्री नित्यानंद जी महाराज भगवान विष्णु के दशावतारों की गणना और आध्यात्मिक व्याख्या कर रहे थे. कलियुग में हो रहे पापों की संक्षिप्त सूची पढ़ने के बाद उन्होंने घोषित किया कि कलियुग अब अपने अंतिम चरण में है. किसी भी दिन भगवान का कल्कि अवतार संभावित है और शास्त्रों के अनुसार इस बार उनका जन्म किसी ब्राह्मण कुल में होगा.

  • इस वर्ष का ‘मधुबन व्यंग्यश्री सम्मान’ प्रसिद्ध व्यंग्यकार सुशील सिद्धार्थ को

    14 वां ‘मधुबन व्यंग्यश्री सम्मान’ इस वर्ष काव्य मधुबन संस्था,कोटा,राजस्थान द्वारा प्रसिद्ध समीक्षक और व्यंग्यकार सुशीलसिद्धार्थ को प्रदान किया जायेगा . पुरस्कार स्वरूप 11हज़ार की धनराशि नकद, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न , शाल एवं श्रीफल प्रदान किया जायेगा. इससे पूर्व यह पुरस्कार प्रेम जनमेजय, ज्ञान चतुर्वेदी , हरीश नवल , विष्णु नागर , बालेंदुशेखर तिवारी , सूर्यबाला , शेरजंग गर्ग आदि व्यंग्य पुरोधाओं को दिया जा चुका है. सुशील सिद्धार्थ लंबे समय से व्यंग्य लेखन और संपादन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं . उनका ‘नारद की चिंता’, ‘मालिश महापुराण’ एवं ‘हाशिये का राग’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं .

  • खट्टरकाका की डायरी से

    सीसी मिश्रा: मोन इसलिए झुंझुआन और कोनादन कर रहा है कि आई मधुबनी पेंटिंग से सज्जित मधुबनी रेलवे स्टेशन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाने से चूक गया. 7000 वर्ग फ़ीट दीवाल पर 180 कलाकारों ने दिनरात मेहनत कर मधुबनी पेंटिंग बनाया लेकिन रेलवे के हाकिम इतने ही मूर्खाधिपति थे कि उन्होंने रिकॉर्ड बनाने के अभियान की शुरुआत से पहले गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जरूरी रजिस्ट्रेशन करवाया ही नहीं था. सब उदास हैं.

  • इमेज होत बलवान

    मित्र मनीषी एक सभा में किसी मुद्दे पर आग उगल कर आये थे. वहां उनका चेहरा अग्निपिंड हो रहा था. अब वे घर पर थे. मुस्कुराते हुए ठंडा पानी पी रहे थे. चेहरे पर भयावह शांति थी. मैंने चाय के साथ चुस्की भी ली. दोस्त,आज जिस मुद्दे पर तुम तड़प रहे थे,कल तो उसीके पक्ष में बमक रहे थे.

  • खट्टर काका की डायरी से

    मेरे प्यारे मैथिल ब्रदर्स, सिस्टर्स एंड ऑल. हरेक वर्ष की भांति आप इस साल भी दुर्गा पूजा के अवसर पर लाउडस्पीकर पर लखबीर सिंह लक्खा, दुर्गा रंगीला, देवी, खेसारीलाल, दबंग बिहारी जैसे ट्रक छाप पंजाबी और भोजपुरी गायकों के तथाकथित भजन बजा कर अपने भक्ति का आसुरी नमूना पेश कर रहे होंगे. आपके भक्ति से नहीं आपके शोर से देवी दुर्गा आक्रान्त हो रही होंगी. मुझे आप मूढ़मति मासूम मैथिल द्वारा फैलाये जा रहे ध्वनि प्रदूषण की उतनी चिंता नहीं है जितनी की इस बात से की आप अनजाने में या जानबूझकर सांस्कृतिक प्रदूषण फैला रहे हैं.

  • व्यंग्य आलेख : 2024 में बुलेट ट्रेन की एक यात्रा

    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन. ऐसी चकाचक कि मुझ जैसा टुटपुंजिया पत्रकार पैर धरते डरे. 20 हजार रुपये का टिकट है! वो तो भला हो ‘मालपाणी जी’ की कंपनी का, जिसने अपनी ट्रेन दिखाने के लिए हम पत्रकारों को फोकट में सवारी का मौका दिया है. चलो, इसी बहाने गदहजनम कटा. मेरे बगल की सीटों पर एक लड़का-लड़की बैठे थे. ‘कॉरपोरेट कैजुअल’ धज में. उन्होंने एक उचटती हुई नजर मुझ पर डाली, जिसमें छिपा संदेश बहुत साफ था- ये यहां कहां से घुस आया? लड़की ने लड़के से फुसफुसाते हुए कहा, ‘‘इन लो-क्लास लोगों के चलते पहले मैंने स्लीपर में चलना छोड़ा. फिर एसी में भी ये लोग चलने लगे, तो मैंने प्लेन से चलना शुरू कर दिया. उम्मीद थी कि बुलेट ट्रेन में सब ‘अपमार्केट’ लोग होंगे, पर यहां भी बगल में एक फटीचर बंदा आकर बैठ गया.’’

  • बस किसी तरह ख़ुश रहना सीख लो

    दोस्त : साथी ,इनसे मिलो,ये मेरी पत्नी हैं. साथी :लेकिन सर,गोवा में तो किसी और को आपने पत्नी कहकर मिलवाया था. दोस्त : तो? उससे क्या हुआ जी .ये मेरी मोबाइल पत्नी हैं. साथी : और वे! दोस्त : वे मेरी लैंडलाइन पत्नी हैं. साथी : यह तो आपने ग़ज़ब किया.'' दोस्त: असली ग़ज़ब तो अब आएगा.वो यह है कि मैं एक मोबाईल में दो दो सिम रखता हूं.