• पढ़ें, अमृता प्रीतम को समर्पित कंचन अपराजिता की कविताएं

    अमृता -- अमृता प्रेम करती थी। पावन गंगा की तरह, पवित्र प्रेम, उसका प्रेम कई हिस्सो मे बटाँ। एक पत्नी, एक प्रेयसी और एक पाक इबादत किसी की बन कर। सोचती हूँ, ये एक स्त्री अमृता ही हो सकती है । जो हर किरदार को बखूबी निभा पाई। जब वह कमसिन सी दुल्हन बनी होगी । एक पत्नी के रूप में जब उसने प्रीतम नाम जोड़ा होगा। कई सपने आंखों मे उसके भी सजे होंगे। जब साहिर के साथ बरसात की उस रात में प्रेम एक झोंका सा आकर उसकी साँसो मे बसा होगा । तभी उसकी अधजली सी सिगरेट उसके लबों को छुआ होगा। और कभी इमरोज की पीठ पर उसने अंगुलियों से साहिर नाम लिखा होगा यू ही नहीं पाकीजगी की हद तक इमरोज ने एक मनचाहा रिश्ता जोड़ा होगा। तभी तो उन्हें सांसद भवन से ले आना। रात में उसे लिखते देख उसके लिए चाय बनाना। उसकी बीज रूप में अपने अंदर रखना उनके लिए सरल होगा। उनकी वो मोहब्बत की उस चरम को छू पाया होगा। जिसमें रूह बस बसती है जिस्म गौण हो जाता है। अमृता ,ये सत्य है प्रेम खैरात नहीं होता प्रेम बस पाक होता है तुमने वही किया.

  • जिंदगी.....

    तुम्हारी यादों के सिवा कुछ नहीं.... चाहता भी नहीं मैं... मुझे कुछ और याद भी रहे... सिर्फ तुम

  • 'अब हर मोबाइल पर होगी 'द हिन्दी' की बात'

    नयी दिल्ली : हिन्दी बोलने मात्र से भारत का बोध होता है. विश्व के किसी भी कोने में कोई हिन्दी बोलते और सुनते नजर आयेंगे, तो उनका सरोकार भारत से ही होगा. भारतीयता को हिन्दी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का बीड़ा उठाया है युवा उद्यमी तरुण शर्मा ने. उन्होंने ''द हिन्दी'' नाम से एक नया वेबसाइट शुरू किया है.

  • नारी जब तुम्हें देखता हूं

    -विवेक कुमार पाठक- नारी जब तुम्हें देखता हूं प्रकृति जैसी समानता दिखती निःश्चल ममता दिखती है नव पत्तों की कोमलता दिखती है वसंत की खुशहाली दिखती है जनने का सामर्थ्य दिखता है दृढ़ निश्चयी, अडिग दिखती हो तुझमें दिखता मुझे एक दर्पण पूरा जीवन दूसरों के लिए अर्पण शक्ति की अवतार सृष्टि की आधार अधरों पर मुस्कान अमृत का कराती पान तुम्हारा क्रंदन सृष्टि में स्पंदन नर, नारी दोनों को जनती हो समान ममता बरसाती हो ऊंच -नीच का भाव न होता सेवा का कोई मोल न होता प्रकृति और तुम बिन सृष्टि का चिंतन व्यर्थ फिर क्यों दोनों के साथ अनर्थ? युग बीते सदियां बीतीं अधिकार बदले लेकिन शोषण के आधार न बदले देशी- विदेशी आक्रांता देखे आतंकवादी मसीहा देखे नारी का शोषण कर क्रूरता का परचम लहराते देखा लड़ते देखा, मरते देखा क्रूरता का साम्राज्य मिटते देखा देखा दमनों में पिसती नारी गिरती और उठती नारी नर को जनती नारी सृष्टि की प्यारी नारी मत इतराओं, झूठे सामर्थ्य पर मत करो अनर्थ अस्तित्व से मत करो इनकार मिट जायेगा तुम्हारे जीवन का सार जब नारी और प्रकृति जगती है इतिहास और भूगोल बदलती है संपर्क : ग्राम -गोपालपुर पो- मीरगंज, जनपद- जौनपुर उत्तर प्रदेश Mobile- 7007460723

  • रानी प्रभावती गुप्त के शासन से मोहित होकर हरिनी श्रीनिवासन ने रच डाली The Curse of Anuganga

    नयी दिल्ली : भारत के राजाओं में गुप्त वंश का शासनकाल मध्यकालीन भारत का स्वर्णिम काल माना जाता है. इन्हीं गुप्त राजाओं में एक समय ऐसा भी आया था, जब शासन के कार्यभार को रानी प्रभावती ने संभाले रखा. रानी प्रभावती के शासनकाल से प्रभावित होकर एक शोधार्थी ने इतिहास ही रच दिया. हरिनी श्रीनिवासन ने शोध की सीमित सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद अपने उपन्यास के लिए गुप्त-वाकाटक कालखंड को चुना है. ऐसा इसलिए कि वह इस काल में रानी प्रभावतीगुप्त के दो दशक के शासन काल से बहुत मोहित थीं.

  • कविता : 'नहीं चाहता छेदन- भेदन'

    मेरी जिंदगी की जरूरतें कम हैं। इसलिए मैं निराश कम हूं।। नहीं चाहता छेदन- भेदन, हो मां अवनी का। नहीं चाहता हृदय छलनी, हो मां अवनी का।।

  • पढ़ें, पूजा शकुंतला शुक्ला की दो कविताएं

    (कवयित्री, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापिका हैं. कविताएं लिखने का शौक रखती हैं, तो पढ़ें आज उनकी दो कविताएं, जो आपके हृदय तक जायेंगी.)

  • अभिषेक कुमार की कविता ‘विश्वास’

    अपना वजूद ख़ुद ही बनायेगा तू ! अपनी मंजिल भी खुद ही पाएगा तू ! बस खुद पर विश्वास कर ! अजनबी राहों में अपनों से ज्यादा पराये साथ देते हैं . बस उन पर विश्वास कर !