• समय 'हांका' लगा रहा है कवि अनवर शमीम का दूसरा काव्य संग्रह 'अचानक कबीर'

    सखुआ के पत्तों से दोना बनाती आदिवासी औरतें, जिनके हिस्से बस दोने भर नींद है. कवि इन मेहनतकश औरतों के दोना बनाने और गीत के लय को उनके आदिम दर्द के साथ गहराई से महसूसता है.

  • शहरी संस्कृति की प्रेम कहानियों को बयान करती 'बंद दरवाजों का शहर'

    रांची : एक लेखक समाज का नब्ज तभी पकड़ता है, जब वह समाज के मनोविज्ञान को भांपता और एहसास करता है. उसके एहसास का जरिया कलम बनती है. लेखिका रश्मिश् रविजा ने अपने पहले कथा संग्रह ''बंद दरवाजों का शहर'' समाज के इसी मनोदशा को समझने की कोशिश की है. इसमें कुल 12 कहानियां हैं. नगरीय जीवनशैली के इर्द-गिर्द बुने गये कथानक में स्त्रीवादी नजरिये के साथ पुरुष दृष्टिकोण को ध्यान रखा गया हैं. रश्मि की कलम से निकले शब्द स्त्री जीवन के दर्द, विषाद, प्रेम का सफल मनोवैज्ञानिक चित्रण करते हैं.

  • पुस्तक समीक्षा : सकारात्मकता के द्वार खोलती है ‘मन के द्वार’

    कविता क्या है? क्या यह अलौकिक होती है और मन की गहराइयों से निकलती है या फिर इसमें कवि मन का शिल्प भी होता है? यह बहस का विषय हो सकता है लेकिन कविता संग्रह ‘मन के द्वार’ में कवि शिव कुमार लोहिया ने स्पष्ट कहा है कि कविताएं उनके मन से निकली हैं और उन्हें पढ़कर इंसान उनके मन के द्वार तक ही नहीं पहुंचता बल्कि कवि पाठकों को मन के अंदर झांकने की अनुमति भी प्रदान करता है.

  • पुस्तक समीक्षा : प्रेरणा से भरी किताब ‘खुशी क्लास’

    पत्रकार मुकेश सिंह चौहान की पहली किताब ‘खुशी क्लास’ एक अलग सी किताब है, जिसमें छोटे -छोटे पचासी प्रसंगों के माध्यम से 104 पृष्ठों में बहुत ही प्रेरक बातें संग्रहित की गयी हैं. आमतौर पर हम इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं .ज्यादातर प्रसंग हमें कहीं न कहीं से अपने आप से जोड़ती हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि हम भी उन प्रसंगों में कहीं न कहीं हैं. किताब की भाषा बहुत ही सरल और सहज है.

  • पुस्तक चर्चा : पत्रकारों के लिए जरूरी किताब

    पुस्तक आरटीआई से पत्रकारिता लेखक : श्यामलाल यादव प्रकाशक: सेज/भाषा, नयी दिल्ली मूल्य: 440 पृष्ठ : 228 महाराष्ट्र का आदर्श हाउसिंग स्कैम टूजी, कोयला ब्लॉक आवंटन, कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े घोटालों पर से पर्दा न उठ पाता, अगर सूचना का अधिकार न होता.

  • पुस्तक समीक्षा : मेरी धरती, मेरे लोग, आत्मसंवाद की शैली में आमलोगों की बात

    कवि शेषेंद्र शर्मा समकालीन भारतीय और विश्व साहित्य के प्रतिष्ठित कवि माने जाते हैं. कवि शेषेंद्र शर्मा के कविता संकलनों का हिंदी अनुवाद किया है कवि अनुवादक ओमप्रकाश निर्मल ने. ‘मेरी धरती मेरे लोग’ मूलत: तेलुगु में प्रकाशित काव्य संग्रह है, जिसे हिंदी में अनुदित किया गया है. लेकिन इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कहीं पर भी अनुवादक कवि ने यह एहसास नहीं होने दिया कि पाठक अनुवाद को पढ़ रहा है. अनुवाद शैली इतनी प्रखर है कि भान होता है जैसे आप मूल पाठ ही पढ़ रहे हों.

  • सरजू पांडेय के जन्मदिन पर पढ़ें, उनकी जीवनी, एक अनोखा कामरेड

    कामरेड सरजू पांडेय का जीवन हर किसी को पढ़ना चाहिए, क्योंकि वह आज की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों में प्रासंगिक हैं. वे हर उस उभरते नेता, स्टूडेंट लीडर की प्रेरणा हो सकते हैं, जो धारा के विपरीत बह कर मुद्दों और समस्याओं को उठाते हैं. सरजू पांडेय पूर्वांचल के एक पिछड़े जिले गाजीपुर के जनप्रतिनिधि होकर भी राष्ट्रीय सोच रखते थे. चाहे वह गरीब किसानों पर सामंतों का जुल्म हो, जाति व्यवस्था और उत्पीड़न या फिर साम्राज्यवादी ब्रितानी हुकूमत से सीधे लोहा लेना.

  • कविता और गजलों का अनूठा संग्रह है कवि पंकज भूषण पाठक 'प्रियम' की 'लफ्ज़ समन्दर'

    रांची : लफ्ज़ यानी शब्द या फिर बात. साहित्य के किसी भी विधा में लफ्ज़ों का संयोजन आत्मा की तरह काम करता है. हिंदी साहित्य के दोनों विधा गद्य और पद्य में लफ्ज़ काफी महत्वपूर्ण साबित होते हैं. इसी गद्यात्मक विधा में कवि पंकज भूषण पाठक ''प्रियम'' ने बेहतरीन तरीके से गज़ल और कविता का संग्रह ''लफ्ज़ समन्दर'' पेश किया है. इस कृति को कवि ने महज तीन महीनों के कम समय में भी डेढ़ सौ कविता और गज़लों के अनूठे संग्रह को तैयार किया है.

  • Read...वाजपेयी : एक राजनेता के अज्ञात पहलू

    भारत के करिश्माई, चमत्कारी, कर्मठ एवं सौभाग्यशाली नेता, प्रखर वक्ता, ओजस्वी कवि, यशस्वी व्यक्तित्व और पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी. देश के राजनेताओं में या फिर उन्हें जानने वाले यहां के नारिकों में वे अटल जी या वाजपेयी जी के नाम से प्रख्यात थे. वे जितने अधिक सरल थे, उतने ही रहस्यमय भी. उन्हें आप जानने-समझने का जितना प्रयास करेंगे, आपको आश्चर्यचकित करने वाले अनेकानेक तथ्य मिलेंगे और फिर इस बात की हमेशा कमी बनी ही रहेगी कि अभी तो हमने उनके बारे में जाना ही नहीं है.

  • भारत में आधुनिक चिकित्सा : सरल एवं सहज शब्दों में पूरा ज्ञान

    भारत की आधुनिक चिकित्सा सुविधा, तकनीक का लोहा पूरी दुनिया मानती है. यहां चिकित्सा की वे सारी अत्याधुनिक सुविधाएं, विधियां तथा तकनीक मरीजों के इलाज के लिए अपनाये जा रहे हैं, जो दुनिया के किसी भी विकसित देशों में अपनाये जाते हैं. यही कारण है कि भारत में नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान के अतिरिक्त अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, सिंगापुर, जापान तक के मरीज आते हैं और किफायती दामों में इलाज कराकर जाते हैं.

  • अंग की धरती से दो चर्चित किताबें ‘अंगिका-खोरठा’ साक्षात्कार और ‘अंगिका लोक कथाएं’

    अंग की धरती भागलपुर से अपनी लेखनी की विभिन्न विधाओं में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित करने वाली डॉ मीरा झा की दो नयी किताब इन दिनों चर्चा में है. अंगिका-खोरठा (साक्षात्कार) व अंगिका लोक कथाएं. डॉ मीरा झा ने अपनी किताब में अंग देश की भाषा, इसकी संस्कृतियों और इतिहास को जानने-समझने का एक नया द्वार खोला है. अनेकानेक ऐसे नये तथ्य उद्घाटित हुए हैं, जिन पर अलग-अलग शोध किया जा सकता है . इसके अतिरिक्त अंगिका व खोरठा का एकीकरण करके लेखिका ने अंगिका को काफी विस्तृत कर दिया है.

  • पुस्तक समीक्षा :Organic IT Infrastructure Planning And Implementation

    इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी आज लोगों के जीवन का अभिन्न अंग बन गया है, लेकिन इसका सही और बेहतर इस्तेमाल कैसे हो, यह बताने के लिए ही ‘ ऑर्गेनिक आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग एंड इम्प्लेमेंटेशन’ जैसी किताब लिखी गयी है

  • खाँटी किकटिया : एक उपन्यास अलग-सा !

    अश्विनी कुमार पंकज हिंदी के प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार, नाटककार और विचारक होने के अलावा देश की आदिवासी भाषाओं के संरक्षक और आदिवासी संस्कृतियों के प्रखर योद्धा के तौर पर भी जाने जाते हैं. दशकों से झारखंड के आदिवासियों की सांस्कृतिक अस्मिता और अधिकारों के लिए संघर्षरत अश्विनी पंकज का एक और चेहरा तब सामने आया जब परसों पटना में अपनी मातृभाषा मगही में लिखे उनके उपन्यास ''खाँटी किकटिया'' (प्रकाशक प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन, चेशायर होम रोड, बरियातू, रांची 834009, मूल्य 250 रु) का लोकार्पण हुआ. बुद्ध और महावीर के समकालीन आजीवक मक्खलि गोसाल के जीवन और दर्शन पर आधारित यह उपन्यास मगही भाषा के लिए एक उपलब्धि की तरह है.

  • फांद से बाहर निकलने की जद्दोजहद बरास्ते ‘तीतर फांद’

    समकालीन कथा-साहित्य के अनूठे किस्सागो सत्यनारायण पटेल परिवेश की आंतरिक बेचैनी को सामने लाने वाले सर्वाधिक चर्चित लेखकों में से हैं. कथा को किस्सों में कहना वे कहीं बाहर से ईजाद नहीं करते, बल्कि आसपास की तमाम घटनाएं इनके यहां स्वतः ही किस्सों का रूप ले लेती हैं. इनकी रचनाएं एक साथ ग्रामीण जीवन की आंतरिक टोह भी लेती हैं और कस्बों, शहरों की आधुनिकता का मूल्यमापन भी करती हैं. इनकी रचनाएं केवल एक-रेखकीय विमर्श की परिधि में खींच कर बांची नहीं जा सकती, बल्कि अनेक दिशाओं में बहुत नज़दीक से देखा गया यथार्थ, अपनी संपूर्ण परिस्थितियों के सहारे इनके यहां उपस्थित होता जान पड़ता है. इनके लेखन में पाठक एक साथ ही राजनीतिक विसंगतियां, हाशिये पर धकेली जा रही तर्कवादी चिंतन पद्धति, पर्यावरण-विमर्श, मानव अधिकार और फांसीवादी ताकतों से जूझते अनेक पहलू देख सकते हैं.

  • पुस्तक समीक्षा : ‘प्रेमांजली’ में प्रेम, तो ‘अंतर्नाद’ में भूख की तड़प

    युवा कवि व पत्रकार पंकज भूषण पाठक"प्रियम" के दो कविता संग्रह ‘प्रेमांजली’ और ‘अंतर्नाद का लोकार्पण हाल ही में हुआ है. ‘प्रेमांजली’ में श्रृंगार रस की कविताएं हैं, जहां प्रेम का हर रूप विद्यमान है, मिलन की खुशी है तो विरह की तड़प है. इसमें कुल 75 रचनाएं हैं जिसमें से 25 दिल को छूती गजलें हैं. 95 पृष्ठों की इस किताब की कीमत 199 रुपये है.

  • 'व्यंग्य के पांच स्वर' : एक पठनीय संकलन

    हिंदी व्यंग्य में संपादक के रूप में इधर जिन कुछ लोगों ने अपनी पहचान बनायी है उनमें डॉक्टर नीरज सुधांशु का नाम प्रमुख है. पिछले साल उनके सह संपादन में वनिका पब्लिकेशंस से '' व्यंग्य बत्तीसी'' संकलन आया था,जो अभी तक चर्चा में है. ... अब उन्होंने '' व्यंग्य के पांच स्वर '' नामक संकलन संपादित किया है. प्रकाशक हैं वनिका पब्लिकेशंस. इसमें अंजनी चौहान, ज्ञान चतुर्वेदी, प्रेम जनमेजय, सुरेश कांत और सुशील सिद्धार्थ के कुछ लोकप्रिय व पठनीय व्यंग्य संकलित हैं. इसे मैं व्यंग्य जगत की एक रचनात्मक समृद्धि की तरह देख रहा हूं.

  • प्रेमी मन के कोमलतम भावों को छूतीं कविताएं

    रश्मि शर्मा का दूसरा काव्य संग्रह है- ‘मन हुआ पलाश’. रश्मि सुकुमार भावों की कवियित्री हैं. मन के कोमलतम भावों को उन्होंने बहुत सहजता से शब्द दिये हैं. कहीं वह समर्पित प्रेमिका हैं, जो अपने प्रिय से अलग अपना कोई अस्तित्व नहीं मानतीं, तो कहीं माननीय प्रेयसी. इस प्रेम ने सिर्फ उन्हें खुशी ही नहीं दी, बल्कि पीड़ा भी दी है . “मन पेंसिल सा है/ इन दिनों छिलता जाता है कोई / बेरहमी से उतरती हैं आत्मा की परतें/ मैं तीखी, गहरी लकीर खींचना चाहती हूं / उसके वजूद में/इस कोशिश में / टूटती जाती हूं लगातार...’’