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नयी पौध

रानी प्रभावती गुप्त के शासन से मोहित होकर हरिनी श्रीनिवासन ने रच डाली The Curse of Anuganga

नयी दिल्ली : भारत के राजाओं में गुप्त वंश का शासनकाल मध्यकालीन भारत का स्वर्णिम काल माना जाता है. इन्हीं गुप्त राजाओं में एक समय ऐसा भी आया था, जब शासन के कार्यभार को रानी प्रभावती ने संभाले रखा. रानी प्रभावती के शासनकाल से प्रभावित होकर एक शोधार्थी ने इतिहास ही रच दिया. हरिनी श्रीनिवासन ने शोध की सीमित सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद अपने उपन्यास के लिए गुप्त-वाकाटक कालखंड को चुना है. ऐसा इसलिए कि वह इस काल में रानी प्रभावतीगुप्त के दो दशक के शासन काल से बहुत मोहित थीं.

व्यंग्य

‘सत्ता परिवर्तन’ के बाद लेखक अमिताभ बुधौलिया का एक नया हास्य-व्यंग्य ‘उल्लू का पट्ठा’ चर्चा में

भोपाल : अमिताभ बुधौलिया का इलेक्शन के समय में प्रकाशित हुआ उपन्यास ‘उल्लू का पट्ठा’ चर्चाओं में है. यह उपन्यास कुर्सी हथियाने के लिए नेताओं के हथकंडों की कहानी बयां करता है. माना जा रहा है कि यह उपन्यास प्री-प्लान किया गया था. इसे आचार संहिता लागू होने के साथ ही लांच किया गया. उपन्यास में कुछ चुनावी जुमलों की भी कहानी सम्मिलित किये गये हैं. यह एक हास्य व्यंग्य है, जिसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन ‘नोशनप्रेस’ ने पब्लिश किया है.

पुरोधा

जन्मदिन विशेष : राष्ट्रीयता माखन लाल चतुर्वेदी के काव्य का कलेवर एवं रहस्यात्मक प्रेम उसकी आत्मा

बचपन में एक कविता पढ़ी थी – चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं........इस कविता को पढ़ते – पढ़ाते हमारे हिंदी के अध्यापक काफी भाव विभोर हो उठते थे. अभी पुलवामा हमले के बाद मुझे ऐसा लगा कि शायद इसी दिन के लिए इस कविता की रचना की गयी होगी. यह कविता कालजयी हो गयी है. तभी अचानक इस कविता के जनक, साहित्य जगत के प्रखर कवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी की याद आ गयी. चार अप्रैल 1889 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में इनका जन्म हुआ था .

संस्मरण/यात्रा वृतांत

इतिहास अपनी हदें बदल लेता है : रस्किन बांड

दोस्तों का मिलना, यारों का बिछुड़ना, मुल्क की आज़ादी और उसका बंटवारा, हर जगह तब्दीली. ये वे चंद अल्फ़ाज हैं जिनकी रोशनी में महान लेखक रस्किन बांड देश को ब्रिटेन से 1947 में मिली स्वतंत्रता को याद करते हैं. उस वक्त बांड की उम्र केवल 13 बरस की थी और वह शिमला के बिशप कॉटन रेजीडेंशियल स्कूल में तालीम हासिल कर रहे थे.

चर्चा

‘पाखी’ पत्रिका के कवर पेज पर विवाद, जानें क्या कहते हैं साहित्यकार...

साहित्य जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘पाखी’ का नया अंक विवादों में है. इसके कवर पेज को लेकर विवाद है, कई लोगों का मानना है कि इस कवर पेज को मात्र सस्ती लोकप्रियता के लिए प्रकाशित किया है, वहीं कई लोग इस कवर पेज के समर्थन में खड़े हैं और इसे एक सुंदर और शालीन कवर पेज बता रहे हैं. पाखी के कवर पेज पर इस बार लियोनार्डो दा विंची की प्रसिद्ध कृति मारिया की तसवीर छपी है, जिसमें स्त्री सौंदर्य बखूबी झ्रलक रहा है, उसके स्तन आवरण रहित हैं. यहां बहस का विषय यह है कि क्या प्रगतिशीलता के नाम पर इस तरह की तसवीर पत्रिका के कवर पेज पर छपनी चाहिए?

खबर

ओमान की लेखिका जोखा अल्हार्थी को मिला बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

लंदन : ओमान की लेखिका जोखा अल्हार्थी को उनकी किताब ‘कैलेस्टियल बॉडीज’ के लिए प्रतिष्ठित मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. यह कहानी तीन बहनों और एक मरुस्थली देश की है, जो दासता के अपने इतिहास से उबरकर जटिल आधुनिक विश्व के साथ तालमेल करने की जद्दोजहद करता है.

इंडिया बुक रिकॉर्ड में शामिल होगा मशहूर शायर देवेंद्र गोयल मांझी का 'मांझी तुकांत कोश'

पोलैंड की उपन्यासकार ओल्गा समेत पांच महिलाएं बुकर पुरस्कार के लिए नामित, विजेता की घोषणा 21 मई को

‘वक्त की अलगनी पर’ कविता संग्रह का लोकार्पण, कवयित्री रश्मि शर्मा ने कहा, कविता लिखना मेरी आदत और जरूरत

मलयालम की नामचीन लेखिका अशिता का निधन