पाठक का पत्र

बेखौफ घूमते अपराधी

Prabhat Khabar

हजारीबाग शहर में एक बार फिर मोबाइल छिनतई गिरोह के लोग सक्रिय हो गये हैं. ये एेसे चोर हैं, जिनका काम करने का तरीका ही कुछ अलग है. इनका ध्यान राह चलते व्यक्ति पर रहता है. ये बिना नंबर की बाइक पर तीन की संख्या में सवार होते हैं. पहला व्यक्ति बाइक संभालता है, दूसरा मोबाइल झपटता है और तीसरा माहौल देखता है.

Columns

जन-संस्कृति का त्योहार है होली

Prabhat Khabar

हमारी काॅलोनी के बच्चे प्लास्टिक की पिचकारियां हाथ में लेकर एक-दूसरे के पीछे दौड़ते दिख रहे हैं, ...

Columns

घातक है नफरत की संस्कृति

आकार पटेल

शुक्रवार (15 मार्च, 2019) को रेडियो पर समाचार सुनते हुए मुझे न्यूजीलैंड में हुए नरसंहार के बारे में ...

Columns

हर राज्य में हों कैंसर अस्पताल

Prabhat Khabar

बीते रविवार की शाम गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया. पर्रिकर पैंक्रियाटिक कैंसर से ...

Columns

और अब श्वेत आतंकवाद का उभार

आशुतोष चतुर्वेदी

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 50 लोगों की जान लेने की घटना ने ...

Columnists

मनमुटाव भुला प्यार बांटने का संदेश देता है होली

होली रंगों का त्योहार है. रंगों का अपना एक अलग महत्व होता है. लेकिन, होली ही एक ऐसा त्योहार है, जिसमें सभी रंग मिलकर इंद्रधनुषी रंग का निर्माण करता है. वह रंग प्यार, खुशी, हर्ष से मिलकर बना होता है. होली आपसी झगड़े, मनमुटाव को भुलाकर सभी को एक रंग में रंगने का संदेश देता है. होली का कई धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व भी है, जिसमें नाचने, गाने व आपस में गले मिलने का अवसर देता है. होली सदियों से दोस्ती में पड़े दरार को एक सूत्र में बांधने का मौका देता है.

भारत में साक्षरता दर वैश्विक स्तर पर 84% से कम

भारत में साक्षरता दर 74.04 (2011) है, जो वैश्विक औसत 84% से कम है. हाल ही में नीति आयोग द्वारा स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया@75 में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये हैं.

मनोहर पर्रिकर की सादगी देशवािसयों के लिए मिसाल

पूर्व रक्षा मंत्री सह गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन से देश की अपूरणीय क्षति हुई है. उनकी सादगी और कार्यकुशलता देशवासियों के लिए सदा मिसाल बना रहेगा. आम जनता के साथ राजनेताओं को भी सीख लेने की जरूरत है कि आपकी पहचान गाड़ियों का काफिला ही नहीं होता. व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने सादा जीवन उच्च विचार को आत्मसात किया तो दूसरी ओर असाध्य बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद कार्यस्थल में देश व समाज सेवा कर कर्मठता का अभूतपूर्व परिचय दिया.

यह कैसी विचारधारा जो रातोंरात बदल जाये?

भारतीय राजनीति एक ऐसे युग में प्रवेश करती जा रही है, जिसका कोई नियम नहीं दिखता. बड़ी संख्या में हो रहे दल-बदल से यह भी पता चल रहा है कि विचारधारा के आधार पर राजनीति करने के नाम पर जनता को बेवकूफ ही बनाया जाता है.

अभिभावक बच्चों पर विश्वास कर स्वरोजगार का दें मौका

हमारे देश की विडंबना देखिए. आज हम सबसे युवा देश हैं और हमारे युवाओं को मौका नहीं मिल पा रहा. न जाने कितने युवा बेरोजगारी की जंजीरों में फंसे हैं.

बिहार के विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी

किसी भी राष्ट्र या राज्य के निर्माण में शिक्षा का अहम योगदान माना जाता है. शिक्षा के अभाव में समाज का विकास असंभव है. बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदतर होती जा रही है. सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के दो लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लगातार वादा किया जाता रहा है.

अपराधियों का संसद पहुंचना समाज के लिए खतरनाक

2019 लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही एक-दूसरे पर शब्द बाण चलानेवाले राजनीतिक दल और भी आक्रामक दिख रहे हैं. एक-दूसरे को चोर, बेईमान, अपराधी आदि साबित करने में लगे हैं.

बेरोजगारी के कारण समाज में बढ़ रहा अपराध

हम समाज में बढ़ते अपराध को लेकर काफी चिंतित रहते हैं. इसके निराकरण के लिए प्रयास भी करते हैं. लेकिन, इसके मूल कारणों को खत्म नहीं कर पाते. देखा जाये तो अपराध बढ़ने का प्रमुख कारण बेरोजगारी है.

''वोट का अधिकार'' से देश को करें सशक्त

लोकतंत्र सरकार का एक ऐसा रूप है, जिसमें शासकों का चुनाव देश की जनता करती है. इसमें अंतिम निर्णय लेने की शक्ति लोगों के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के पास ही होती है.

नशा हमारे जीवन के लिए काफी खतरनाक

जब नशीली आंखें, बदबू भरा मुख, लड़खड़ाते कदम, कीचड़ से सना शरीर और बहकती वाणी वाले व्यक्ति नजर आते हैं, तब अच्छे मानव की आत्मा उसके हृदय को कचोटने लगती है. वह सोचने लगता है कि मद्य का सेवन मानव को मानव नहीं रहने देता.

बदहाल है विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था

बिहार पौराणिक काल से शिक्षा का मुख्य केंद्र रहा है. नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालय उनमें से एक है. पहले की अपेक्षा वर्तमान समय में शिक्षा को लेकर जन जागरूकता अवश्य ही बढ़ा है, पर जिस रफ्तार से होनी चाहिए उसमें हर जगह कमी दिखायी पड़ रही है.

लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट डालना जरूरी

चुनाव नजदीक आ गया है और चुनाव आयोग ने 11 अप्रैल से चुनाव की तारीख की घोषणा भी कर चुकी है. आज मैं युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों से गुजारिश करना चाहता हूं कि अपना कीमती वोट का प्रयोग जरूर करें, क्योंकि लोकतंत्र की शक्ति जनता के हाथ में होती है.