पाठक का पत्र

बेखौफ घूमते अपराधी

Prabhat Khabar

हजारीबाग शहर में एक बार फिर मोबाइल छिनतई गिरोह के लोग सक्रिय हो गये हैं. ये एेसे चोर हैं, जिनका काम करने का तरीका ही कुछ अलग है. इनका ध्यान राह चलते व्यक्ति पर रहता है. ये बिना नंबर की बाइक पर तीन की संख्या में सवार होते हैं. पहला व्यक्ति बाइक संभालता है, दूसरा मोबाइल झपटता है और तीसरा माहौल देखता है.

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जब एके राय ने जेपी का साथ दिया

Prabhat Khabar

बहुत ही अनूठा व्यक्तित्व था कॉमरेड एके राय (अरुण कुमार राय) साहब का. उनसे मेरी पहली मुलाकात साल ...

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गांधी-टैगोर की वैचारिक समता

डॉ असीम श्रीवास्तव

एक ऐसा वर्ष जब देश बापू का 150वां जन्मदिवस मना रहा है, हमें एक ऐसा सुअवसर प्रदान करता है, जब हम ...

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युवा प्रतिभाओं का हो सम्मान

आशुतोष चतुर्वेदी

कुछ समय पहले 10वीं और 12वीं के नतीजे आये थे. इन परीक्षाओं में बच्चे पूरी ताकत से जुटते हैं, रात-दिन ...

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कर्नाटक मामले से उपजे सवाल

विजय कुमार चौधरी

कर्नाटक में विधायकों के इस्तीफा एवं सरकार के विश्वासमत का प्रकरण अंतहीन बनता जा रहा है. राजनीतिक ...

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लोकतंत्र में भीड़तंत्र को नहीं दी जा सकती इजाजत

हाल के दिनों में यह देखा गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों से मॉब लिंचिंग की अलग-अलग घटनाएं सामने आयी हैं, जो समाज में सौहार्द के वातावरण में कटुता का विष घोल रहा है. अगर समाज के लोग थोड़ी-सी समझदारी और धैर्य दिखाएं, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है. भीड़ तंत्र अक्सर अफवाहों का हिस्सा होता है. भीड़ का न कोई चेहरा होता है और न कोई विवेक. परिणाम यह होता है कि महज चंद मिनटों में कई परिवार उजड़ जाते हैं.

थर्ड जेंडर को समाज में नहीं मिल रहा समान हक

हमारा समाज पुरुषवादी समाज है, जो लिंग के आधार पर दो वर्गों को स्वीकार किया है, जिसमें स्त्री और पुरुष हैं. लेकिन, कुछ ऐसे भी मानवीय प्राणी हैं, जिन्हें हम न तो स्त्री वर्ग में शामिल कर सकते हैं और न ही पुरुष वर्ग में.

सरकार नियोजित शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण करे

बिहार में कार्यरत लाखों नियोजित शिक्षक वर्षों से वेतनमान की लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. सड़क से लेकर सदन तक, उसके बाद न्यायालय का चक्कर भी लगा चुके हैं.

चिकित्सा व स्वास्थ्य समस्या पर विशेष ध्यान दे सरकार

लौरिया का प्राथमिक व रेफरल अस्पताल सरकारी उदासीनता का शिकार है. 21 पंचायतों वाला प्रखंड मुख्यालय का लौरिया अस्पताल पर करीब तीन लाख लोगों को स्वास्थ्य लाभ देने का बोझ है.

लड़कियों के प्रति सोच बदलने की जरूरत

हमारे समाज में लड़कियों को माता-पिता के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है. समाज उनके साथ हमेशा दोयम दर्जे का व्यवहार किया है, जिसे नकारा नहीं जा सकता?

नियोजित शिक्षकों के भविष्य पर ध्यान दे सरकार

बिहार के नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर लगातार कई वर्षों से आंदोलनरत हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनको निराशा हाथ लगी थी, लेकिन सभी शिक्षक वेतन संबंधी अन्य मांगों को लेकर बिहार सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं, किंतु सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है.

आइसीजे के फैसले से राहत

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) द्वारा 15-1 के बहुमत से भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक का फैसला भारतीयों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है. स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने इस निर्णय पर अपनी खुशी जताते हुए इसे सच और न्याय की जीत बताया है.

समेकित विकास की नीति जरूरी

दुनिया के कुल 130 करोड़ गरीबों में से आधे 18 साल से कम उम्र के बच्चे हैं और उनमें भी दस साल से कम उम्र वाले बच्चों की तादाद लगभग एक तिहाई है.

कोर्ट ने बदला फैसला

रांची की निचली अदालत द्वारा ऋचा को पांच कुरान बांटने की जो सजा सुनाया उसको लेकर पूरे भारत में उठे जबर्दस्त जनाक्रोश के कारण कोर्ट को दी गयी सजा का निर्णय बदलना पड़ा है. उसे अपनी भूल का एहसास हो गया. कोर्ट ने पूर्व निर्णय को बदलते हुए न्यायपालिका पर लोगों के विश्वास को खोने से बचाने में सफलता पायी है.

पुराने सरकारी स्कूलों के भवन का हो पुनर्निर्माण

बिहार सरकार के अथक प्रयास के बावजूद सरकारी स्कूल के भवन बने तो हैं, परंतु पुराने स्कूल के भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में आ गये हैं, जो अपनी सुनहरी यादों को समेटे किसी उद्धारक की बाट जोह रहे हैं.

वकीलों व डॉक्टरों की फीस का निर्धारण हो

जनसाधारण से लेकर वीआइपी तक एसडीओ कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय में न्याय की आस में पहुंचते हैं, जहां रसूखदार लोग तो मोटी फीस देकर अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अच्छे वकील रख लेते हैं.

गंदगी व कीचड़ से बिहार को मुक्त करे सरकार

आज बिहार के किसी भी शहर की पहचान गंदगी व कीचड़ पर बसे नगर की हो चुकी है. शायद ही कोई ऐसा जिला है जिसे आदर्श कहा जा सके. राजधानी की भी छवि कोई अच्छी नहीं कही जा सकती है. सवाल यह है कि नगर निगम, नगर पर्षद, नगर पंचायत के रहते सभी नगरों की यह दशा है.