प्रभात मत

अराजक उड़ान सेवाएं

Prabhat Khabar

बेहद सुविधाजनक और समय की बचत करनेवाली हवाई यात्रा थोड़ी-सी चूक से यातनादायी भी हो सकती है. गुरुवार सुबह मुंबई से जयपुर जा रहे जेट एयरवेज के एक विमान के यात्रियों को ऐसे ही भयावह अनुभव से गुजरना पड़ा. उस विमान के भीतर हवा का समुचित दबाव बनाये रखनेवाले बटन को चालू नहीं करने के कारण यात्रियों के कान और नाक से खून निकलने लगा था.

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इवीएम पर बार-बार उठते प्रश्न

अवधेश कुमार

विपक्षी दलों ने इवीएम को फिर निशाना बनाया है. इन दलों ने यह तय किया कि वे ईवीएम को खत्म कर मतपत्रों ...

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देश को जीवंत वामपंथ की जरूरत

डॉ संजय बारू

आम चुनावों के रिपोर्ताज एवं विश्लेषणों के रोजाना शोरगुल तथा आपाधापी में भारतीय राजनीति के उस एक अहम ...

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भ्रष्टाचार दशकों से चुनाव का बड़ा मुद्दा

सुरेंद्र किशोर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस करने के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री ...

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शैक्षिक योग्यता और कामकाज

आकार पटेल

एक नेता को कितना शिक्षित होना चाहिए और उसमें बौद्धिक सुसंगति के अभाव के क्या नतीजे हो सकते हैं? ...

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जंजाल बनते एप

सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन के विस्तार ने सूचना, संवाद एवं सेवा को व्यापक बनाया है. इस कारण डिजिटल तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है. लेकिन इसके उपयोग और उपभोग के नकारात्मक पहलुओं पर भी लगातार ध्यान रखना जरूरी है. इन दिनों एक बेहद लोकप्रिय वीडियो एप पर अदालती और सरकारी रोक की चर्चा है.

स्वास्थ्य पर जोर

हमारे देश में छह लाख चिकित्सकों और 20 लाख स्वास्थ्यकर्मियों का अभाव है. सेंटर फॉर डिजीज डायनामिक्स नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अपने ताजा अध्ययन में यह आकलन देते हुए बताया है कि इस कमी के कारण जीवन बचानेवाली दवाओं तक लोगों की पहुंच नहीं हो पा रही है.

भाषा मर्यादित हो

मतदाताओं की तादाद और चुनावी खर्च के लिहाज से लोकसभा के निर्वाचन की प्रक्रिया दुनिया में सबसे बड़ी जरूर है, पर हम क्या यह दावा भी कर सकते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन में भी हम पहले पायदान पर हैं?

बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक कचरा

बड़ी आबादी, तेज शहरीकरण, ऊर्जा की जरूरत आदि के कारण पैदा होते कचरे को निबटाने की समस्या से जूझते देश के सामने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (इ-वेस्ट) के प्रबंधन की चुनौती भी गंभीर होती जा रही है.

वाहन उद्योग में मंदी

देश का 70 अरब डॉलर का वाहन उद्योग हिचकोले खा रहा है. मार्च में कारों की बिक्री में छह फीसदी की कमी रही. इस क्षेत्र में पिछली गर्मियों से गिरावट का सिलसिला जारी है. दोपहिया वाहनों की बिक्री 15 फीसदी कम रही है. यही दशा व्यावसायिक वाहनों की भी है. वाहनों की मांग घटने के कारण कंपनियों को उत्पादन में भी कटौती करनी पड़ी है. वाहन उद्योग में उतार-चढ़ाव का दौर पिछले कुछ सालों से बना हुआ है. कारों की बिक्री में सालाना बढ़त 2018-19 में सिर्फ 2.7 फीसदी रही है, जो की पांच सालों का सबसे खराब प्रदर्शन है.

ब्रिटेन को संकोच क्यों

अमृतसर के जालियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को सैकड़ों निहत्थे लोगों की हत्या ब्रिटिश उपनिवेशवाद के क्रूरतम अपराधों में से एक है. औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास बलिदानों की महागाथा है, परंतु हमारी राष्ट्रीय स्मृति में दो शताब्दियों के ब्रिटिश अत्याचार और शोषण भी अंकित हैं.

दूर हो शैक्षणिक विषमता

मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा तैयार देश के श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों की वार्षिक सूची में पहले की तरह केंद्रीय संस्थानों का वर्चस्व है. इसमें शामिल राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय संस्थान महानगरों और राजधानियों में स्थित हैं. इस सूची के संदर्भ में समूची शिक्षा व्यवस्था पर विचार करने की आवश्यकता है.

समुचित भोजन जरूरी

जीवित रहने के लिए भोजन अनिवार्य है. लेकिन, कुछ भी खाकर पेट भरने की मजबूरी या लापरवाही जान भी ले सकती है. लांसेट मेडिकल जर्नल में छपे शोध के मुताबिक दुनियाभर में 2017 में 1.10 करोड़ लोगों की मौत अस्वास्थ्यकर भोजन से हुई थी.

कार्बन का कोहरा

ज्ञान और विज्ञान में उत्कृष्ट प्रगति के साथ मनुष्य धरती को तबाह भी कर रहा है. पृथ्वी पर अभी कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तीस लाख सालों में सबसे अधिक है. जिस भूवैज्ञानिक दौर में हम रह रहे हैं, उसकी उम्र भी इतनी ही है. जर्मन शोध संस्था पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के अध्ययन के अनुसार, इस गैस में बढ़ोतरी का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल है, जो वैश्विक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है. कार्बन डाइऑक्साइड के साथ वातावरण में मिथेन की बढ़त भी बेहद चिंताजनक है.

सूखे का संकट

जून-जुलाई में मॉनसून के कमजोर रहने की आशंका खेती के लिए चिंताजनक है. बारिश का अनुमान लगानेवाली निजी संस्था स्काईमेट ने बताया है कि अलनीनो के कारण जून में 23 और जुलाई में नौ फीसदी कम बारिश हो सकती है.

बैंक पूंजी में बढ़त

बीते कुछ सालों से सार्वजनिक बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य को संतोषजनक बनाये रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती रही है. भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और निकट भविष्य में डूबे कर्जों की वसूली की कोई संभावना भी नहीं दिख रही है. ऐसे कर्जों की मात्रा बैंकों की कुल परिसंपत्ति का 13 फीसदी तक जा पहुंची है, जो करीब तीन साल पहले तक तीन फीसदी से भी कम थी.

अब बढ़ेगी पेंशन

पेंशन का मुख्य उद्देश्य यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति अपना जीवन ससम्मान जी सके. लेकिन इसके लिए एक समुचित रकम मिलना भी जरूरी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की एक याचिका को निरस्त कर सर्वोच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है.