प्रभात मत

अराजक उड़ान सेवाएं

Prabhat Khabar

बेहद सुविधाजनक और समय की बचत करनेवाली हवाई यात्रा थोड़ी-सी चूक से यातनादायी भी हो सकती है. गुरुवार सुबह मुंबई से जयपुर जा रहे जेट एयरवेज के एक विमान के यात्रियों को ऐसे ही भयावह अनुभव से गुजरना पड़ा. उस विमान के भीतर हवा का समुचित दबाव बनाये रखनेवाले बटन को चालू नहीं करने के कारण यात्रियों के कान और नाक से खून निकलने लगा था.

Columns

पानी बचायें या मिट जायें

संजय बारू

अभी जहां एक ओर भारत के पश्चिमी तट पर माॅनसून की तेज बौछारें पड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी रिपोर्टें ...

Columns

सामाजिक मूल्य और राष्ट्रवाद

मणींद्र नाथ ठाकुर

पिछले कुछ वर्षों में भारत में राष्ट्रवाद पर बहुत बहस हुई है. यहां तक कि बिना ठोस आधार के भी हम किसी ...

Columns

सरकार की कोशिशों पर करें भरोसा

डॉ सय्यद मुबीन जेहरा

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने हाल ही में नयी सरकार के रूप में पुरानी ही मोदी सरकार को चुन लिया है. ...

Columns

चुनाव नतीजे और नीतीश कुमार फैक्टर

केसी त्यागी

लोकसभा चुनावों में बिहार के नतीजों ने सबको आश्चर्यचकित किया है. कई धारणाएं, पूर्वानुमान तथा ...

Columnists

चिंताजनक मॉनसून

इस वर्ष मॉनसून में प्रगति 12 सालों में सबसे धीमी है. आम तौर पर इस समय तक देश के दो-तिहाई हिस्सों में मॉनसून आ जाता है, किंतु अभी इसकी पहुंच 10-15 फीसदी इलाकों तक ही हो सकी है और यह 15 दिनों की देरी से गतिमान है.

राज्य मंत्रियों की भूमिका

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल राज्य मंत्री अब अधिक उत्तरदायित्व का वहन कर सकेंगे. इस श्रेणी में आनेवाले कनिष्ठ मंत्रियों का कार्य कैबिनेट मंत्रियों का सहयोग करना होता है, लेकिन यह लगभग परिपाटी बन गयी है कि अक्सर उन्हें कम महत्व के विभागीय काम, जैसे- राजभाषा से जुड़े मामले, संसद के अतारांकित प्रश्नों के उत्तर तैयार करना आदि- मिलते हैं. ऐसे में वे निर्णय करने की प्रक्रिया में अधिक योगदान नहीं कर पाते हैं.

कर चोरों पर नकेल

आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाना वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अनिवार्य शर्त है. बीते वर्षों में अर्थव्यवस्था को औपचारिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने ठोस प्रयास किया है. इस क्रम में अब कर चोरों से कड़ाई से निपटने की तैयारी

संतुलित नीतिगत दृष्टि

देश का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की शासकीय परिषद की बैठक में अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलित गति से विकासशील है, परंतु आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय कारकों के कारण वृद्धि दर बाधित हुई है. इस अवरोध से पार पाने के लिए उन्होंने राज्यों से प्रमुख क्षमताओं को चिह्नित कर जिले के स्तर से सकल घरेलू उत्पादन को बढ़ाने का आह्वान किया है.

बिश्केक में कूटनीति

क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति व आर्थिकी में उथल-पुथल के वर्तमान माहौल में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक बहुत महत्वपूर्ण है.

स्वास्थ्य हो प्राथमिकता

पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को समेकित रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक अहम पहलें की है. हालांकि, इनके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं, परंतु अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है.

भ्रष्टाचार पर नकेल

केंद्र सरकार ने आयकर विभाग के 12 भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत करने का सराहनीय निर्णय लिया है. वरिष्ठ और अहम पदों पर बैठे भारतीय राजस्व सेवा के इन दंडित अधिकारियों पर रिश्वतखोरी, उगाही, यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप हैं. वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत आयकर विभाग आर्थिक और वित्तीय संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेहनत और ईमानदारी से अर्जित आय पर कर का भुगतान करनेवाले करदाताओं के बरक्स एक श्रेणी ऐसे लोगों की भी है, जो भ्रष्ट अधिकारियों से सांठ-गांठ कर करोड़ों रुपये की कर चोरी करते हैं.

महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीति और वाणिज्य में पड़ोसी देशों के महत्व को हमेशा प्राथमिकता दी है. वर्ष 2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशियाई देशों के प्रमुखों को आमंत्रित करना, आसियान के सदस्य देशों के प्रमुखों को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाना तथा अपने दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक समूह के सात देशों, सार्क के पांच देशों और म्यांमार व थाईलैंड के नेताओं को मेहमान बनाना उनकी प्राथमिकता के विशिष्ट उदाहरण हैं.

ठोस पहल जरूरी

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास दर में कमी आयी है. कमजोर मॉनसून और देश के कई हिस्सों में जल संकट भी चिंताजनक संकेत दे रहे हैं. ऐसे में सरकार के सामने आर्थिक बढ़ोतरी को गति देने की बड़ी चुनौती है. वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में वृद्धि दर 5.8 फीसदी रही थी तथा पूरे साल का आंकड़ा सात फीसदी से भी घटकर 6.8 फीसदी के स्तर पर आ गया.

शिक्षकों की जल्दी भर्ती

सुदृढ़ शिक्षा तंत्र के बिना कोई भी देश विकास की राह पर मजबूती के साथ आगे नहीं बढ़ सकता है. अनेक क्षेत्रों में प्रगति के बावजूद देश में शिक्षा की बेहतरी पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया है.

धरती तो बचे

अगर दुनिया में हरियाली, जानवर, पक्षी, कीट-पतंगे आदि कम होते जायें, पानी, हवा और जमीन में जहर घुलता जाये तथा ध्रुवों की बर्फ पिघलकर समुद्र का स्तर बढ़ाती रहे, तो मनुष्य का अस्तित्व कब तक बचा रह सकता है?

सूख रहे जलाशय

देश के कई हिस्से जल संकट से जूझ रहे हैं. मॉनसून-पूर्व बारिश के कम होने की वजह से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. ऐसे में बड़े जलाशयों का स्तर लगातार नीचे जाना बेहद चिंताजनक है.