पाठक का पत्र

बाढ़ से बचाव की पहल करे केंद्र व राज्य की सरकार

Prabhat Khabar

एक और जहां हम चंद्रयान दो के सफल प्रक्षेपण का जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की विभीषिका से भी रूबरू हो रहे हैं. खासकर बिहार में जहां नेपाल द्वारा छोड़े गये पानी के कारण हर साल करोड़ों रुपये की क्षति व जान-माल का नुकसान हो रहा है. पुराने समय में कोसी परियोजना गंडक परियोजना के जरिये नहर बनाकर बाढ़ के पानी को खेतों की ओर मोड़ दिया जाता था, जिससे पटवन के समय इसका उपयोग किया जाता था.

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कृषि आय बढ़ाने की हो पहल

देविंदर शर्मा

इस वक्त देश में मुख्यत: मांग घटने और निवेश कम होने की वजह से आर्थिक सुस्ती आयी है. ऐसा माना जा रहा ...

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संवैधानिकता का जश्न मनाया जाए

प्रो फैजान मुस्तफा

छब्बीस जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के वर्षों बाद पहली बार भारत के लोग संविधान से खुद की पहचान ...

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बजट की आहट : कर में राहत देने की जरूरत

सतीश सिंह

राजस्व वसूली के मोर्चे पर सरकार अपेक्षित लक्ष्य हासिल में नाकाम रही है. कॉर्पोरेट कर में उल्लेखनीय ...

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हिंदुस्तान का दिल है संविधान

जस्टिस आरएस सोढ़ी

किसी भी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसके पास एक मजबूत संविधान का होना बहुत जरूरी है. संविधान ...

Columnists

कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता जरूरी

चीन में फैल रहे कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में अलर्ट जारी कर दिया गया है. लेकिन, इसको रोकने पर अभी तक कामयाबी नहीं मिल पायी है, जिसके कारण चीन में 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 30 हजार से ज्यादा लोग इसकी चपेट में बताये जा रहे हैं. इसको लेकर हर देश अपने एयरपोर्ट पर विशेष जांच की व्यवस्था की है.

सरस्वती पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूली बंद हो

सरस्वती पूजा के नजदीक आते ही राजधानी पटना के विभिन्न छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की मनमानी शुरू हो जाती है. वे आम लोगों से सरस्वती पूजा के नाम पर जबरन चंदा वसूलते हैं. जो लोग किसी कारणवश चंदा नहीं दे पाते हैं, उनके साथ छात्र गाली-गलौज और मारपीट करते हैं.

अश्लील भोजपुरी फिल्मों पर लगाम लगाये सरकार

आज भोजपुरी फिल्में अश्लीलता परोसने का माध्यम बन चुका है. वर्तमान समय में बननेवाली अधिकतर भोजपुरी फिल्मों में उत्तेजक दृश्य व अश्लील गीत होते हैं, जिन्हें परिवार के सदस्यों के साथ देखने में शर्मिंदगी महसूस होती है. इन फिल्मों के गाने भी घर में नहीं सूना जा सकता है. इन फिल्मों का समाज में गलत असर पड़ रहा है.

इंसानियत जिनसे कायम है

अयोध्या के मोहम्मद शरीफ को इस वर्ष पद्मश्री अवाॅर्ड से नवाजा गया है. वे पिछले कई सालों से बिना धार्मिक भेदभाव के करीब 3000 हिंदुओं और 2500 मुसलमानों के लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं.

देश के प्रति छात्रों का कर्तव्य

देश में संविधान के प्रति, जनता के प्रति, किसानों-मजदूरों के प्रति वर्तमान सरकारें अगर गलत काम करने लगें, तो क्या इस देश के पढ़े-लिखे लोगों या छात्रों को सरकार के उस गलत कार्य को अनदेखा कर अपने काम में ही लगे रहना चाहिए या उन्हें उस असंवैधानिक कार्य का विरोध करना चाहिए?

ईमानदारी से काम करने होंगे

ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक के दौरान भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक को जारी किया. इस सूची में सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार के मामलों में 180 देशों को रखा गया था. इस साल भ्रष्ट देशों की सूची में भारत दो स्थान फिसल गया है. भारत 180 देशों की सूची में 80वें पायदान पर है, जबकि साल 2018 में भारत 78वें स्थान पर था.

सूचकांकों में सुधार की हो कोशिश

वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में भारत जैसे लोकतांत्रिक गणराज्य का 10 पायदान नीचे आ जाना बिल्कुल भी अच्छे संकेत नहीं हैं. यह रिपोर्ट साफ बताती है कि पिछले एक साल में भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति कुछ ठीक नहीं रही है. अब यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार अवश्य ही इसमें सुधार के लिए सभी जरूरी कदम उठायेगी. इस रिपोर्ट को समझना और इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.

महिलाओं का अपमान निंदनीय

राजगढ़ की कलेक्टर निवेदिता द्वारा राजनीतिक पार्टी के एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारना निंदनीय है. लेकिन, प्रदेश के पूर्व मंत्री द्वारा (पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी में) भरे मंच से एक महिला के बारे में बेहद अशोभनीय बातें कहना सरासर नारी का अपमान है. इतनी तुच्छ और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया कि न तो समाचार चैनल पर दिखाया जा सकता है ना अखबारों में उस भाषा को छापा जा सकता है.

प्रेरणादायी बाल फिल्में बनें

देश की आबादी के हिसाब से फिल्म जगत में बच्चों के लिए बाल फिल्मों के निर्माण का प्रतिशत बहुत कम है. स्वस्थ मनोरंजन के अभाव में अच्छी दिशा उन्हें प्रेरणास्वरूप नहीं मिल पाती है. इन्हीं कारण से भी बच्चों के मन-मस्तिष्क को व्यापक दृष्टिकोण नहीं मिल पाता है. मस्तिष्क पुष्ट व स्वस्थ बनाने के लिए प्रेरणादायी बाल फिल्में उत्तम साधन होती हैं. अंग्रेजी बाल फिल्मों का हिंदी संस्करण करके कई फिल्में थियेटर एवं सीडी के रूप में होती ही है, किंतु उनमें भारतीय संस्कृति ,शिक्षा अभाव होता है. भोंडा, फूहड़ व हिंसात्मक भाव ही देखने मिलते है. हमारे गांवों और शहरों में थियेटर के जरिये या सीडी या अन्य साधन के जरिये निर्मित बच्चों की फिल्मों का प्रतिमाह स्कूलों में प्रसारण किया जाना चाहिए.

गंगा नदी की सफाई पर ध्यान दे सरकार

भारत की सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे लंबी नदी गंगा है. गंगा नदी का न सिर्फ सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी है. इसी महत्ता के कारण ही सरकार गंगा को निर्मल करने के लिए '' नमामि गंगे'' परियोजना लांच किया था.

जुर्माने की जगह सुरक्षित यातायात की व्यवस्था हो

सड़क पर चलने के संदर्भ में बहुतेरे लोगों में सिविल सेंस की कमी दिखती है. संयम के अभाव में जहां थोड़ी जगह दिखी, चल देते हैं. गलत तरीके से ओवरटेक पर नियंत्रण नहीं हो पाता है. यातायात पुलिस भी हमेशा सक्रिय रहती नहीं है, जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ता है. इससे देश के अथाह समय, श्रम व संसाधन को क्षति पहुंचती है. सरकार को इस संदर्भ में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है.

शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छात्र सरकार पर बनाएं दबाव

देश की खराब शिक्षा प्रणाली और बेरोजगारी स्तर से आरक्षण प्राप्त विद्यार्थियों को कोई फायदा नहीं हो रहा. प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में एक भी शिक्षक योग्य प्रतीत नहीं होते, जो बच्चों को सही शिक्षा दे पाएं. सही शिक्षा नहीं मिलने से गरीब व पिछड़े वर्ग के बच्चे पांचवीं या छठी तक ही पढ़ते हैं. इसके बाद छोटा-मोटा रोजगार प्रारंभ करते हैं.