पाठक का पत्र

बेखौफ घूमते अपराधी

Prabhat Khabar

हजारीबाग शहर में एक बार फिर मोबाइल छिनतई गिरोह के लोग सक्रिय हो गये हैं. ये एेसे चोर हैं, जिनका काम करने का तरीका ही कुछ अलग है. इनका ध्यान राह चलते व्यक्ति पर रहता है. ये बिना नंबर की बाइक पर तीन की संख्या में सवार होते हैं. पहला व्यक्ति बाइक संभालता है, दूसरा मोबाइल झपटता है और तीसरा माहौल देखता है.

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अमेरिका से भी सावधानी जरूरी

डॉ अश्विनी महाजन

विदेशी व्यापार के मामले में अमेरिका और चीन भारत के दो सबसे बड़े साझेदार देश हैं. हमें समझना होगा कि ...

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पुलवामा आतंकी हमले के मायने

आकार पटेल

जैशे-मोहम्मद मतलब मोहम्मद की सेना. यह आश्चर्यजनक है, क्योंकि इस्लाम के पैगम्बर की जीत की कोई ...

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आइये, अपना आरक्षण ले जाइये

कुमार प्रशांत

राजस्थान में गुर्जरों ने अारक्षण की मांग का अपना पांचवां अांदोलन इस भाव के साथ वापस ले लिया है कि ...

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आतंकी हमले से उद्वेलित देश

आशुतोष चतुर्वेदी

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद पूरे देश में ...

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कश्मीरियों ने भी देश की रक्षा में दी है शहादत, करें सम्मान

बीते 14 फरवरी की शाम कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकी हमले में जवानों की शहादत पर देश भर में विरोध प्रदर्शन किया गया. शहीद हुए जवानों के लिए कैंडल मार्च भी निकाला गया तथा श्रद्धांजलि भी दी गयी, जो देशवासियों का जवानों के प्रति अगाध श्रद्धा को दरसाता है. ऐसे में इस आतंकी हमले के लिए किसी भी राज्य में रह रहे कश्मीरियों के साथ भेदभाव अनुचित होगा.

आतंकियों का न कोई देश होता है और न ही मजहब

गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की धरती पर जनमानस में जिस तरह का आक्रोश है, वह लाजिमी है. पुलवामा में आतंकियों ने जिस तरह से बर्बरता की, उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है. लेकिन, अब समय आ गया है कि इस आधुनिक युग में सेना को हाइटेक किया जाये, ताकि हर विषम परिस्थितियों में हमारे सैन्यकर्मी डटे रहें. दूसरी बात जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उसमें कहीं न कहीं हमारी सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही रही है.

आतंकवादियों में आतंक पैदा करना जरूरी

सीआरपीएफ की गाड़ी पर पुलवामा में जिस तरह का फिदायीन हमला किया गया है, उसने पूरे देश को सकते में डाल दिया है. ऐसे वक्त में जब कश्मीर में अमन चैन कायम हो रहा था, लोग चैन और सुकून से रह रहे थे, आतंकवादियों ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया. सवाल चूक या सुरक्षा का नहीं है. जब तक हम इन आतंकी ठिकानों को नष्ट नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हमले होते रहेंगे और हमारे जवान अपनी शहादत देते रहेंगे.

कुलभूषण की तरफ भारत का ध्यान भटकाना चाह रहा पाक

अंतरराष्ट्रीय अदालत आइसीजे एक में सोमवार से कुलभूषण जाधव के मामले में सार्वजनिक सुनवाई शुरू हो गयी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने के लिए आइसीजे की स्थापना की गयी थी. पाकिस्तानी सेना की अदालत ने अप्रैल, 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में भारतीय नागरिक जाधव को मौत की सजा सुनायी थी.

सरकार सेना को उपलब्ध कराये बुलेट प्रूफ जैकेट्स

सेना ने करीब एक दशक पहले हल्की और ज्यादा सेफ्टी देने वाली मॉड्युलर बुलेट प्रूफ जैकेट्स की मांग रखी थी और छह साल पहले सरकार ने प्रपोजल को हरी झंडी भी दे दिया था. मगर अब तक सेना को ये जैकेट्स अब तक नहीं मिले.

भागलपुर के जगदीशपुर अंचल पर ध्यान दे सरकार

भागलपुर जिले के अंचल जगदीशपुर की विधि व्यवस्था पर जिले के वरीय अधिकारी और विधायक व सांसदों के साथ राज्य सरकार को संज्ञान लेने की सख्त आवश्यकता है. अंचल कार्यालय के क्षेत्राधीन 15 पंचायत के लाखों लोगों के साथ नगर निगम क्षेत्र के लाखों लोगों से संबंधित कार्य निबटाने का दायित्व है, लेकिन स्थिति यह है कि अंचल कार्यालय में एक-दो कर्मी को छोड़कर न तो कोई कर्मचारी दिखता है और न कोई किरानी.

जनता में है बदले की आग

14 फरवरी को पुलवामा में 40 जवानों ने अपनी शहादत से देशवासियों को कर्जदार बना दिया है. यकीनन यह खबर सुन कर खून के आंसू नहीं रुक रहे.

विश्व मानवता और चीन

कन्फूशियस जैसे उदात्त चरित्र वाले दार्शनिक के देश चीन के चरित्र का आज के परिदृश्य में आकलन करें, तो लगता है कि यह देश दुनिया से अलग-थलग किसी दूसरे ग्रह पर बसा देश है.

सख्त कदम की जरूरत है

केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान से ''सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र'' का दर्जा वापस ले लिया है. यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के तहत दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाने के लिए भारत ने उसे दे रखा था.

सफाई अभियान को जारी रखने का लें संकल्प

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरू किया, उस वक्त जिसे देखो हाथ में झाड़ू लिये कचरों की सफाई कर रहा है, परंतु यह अभियान धीरे-धीरे अब दम तोड़ रहा है. जबकि, यह हर कोई जानते हैं कि सफाई में ही भलाई है.

गर्ल्स स्कूलों में काउंसेलिंग की हो व्यवस्था

सामाजिक व्यवस्था में एक तरफा प्रेम रूपी संक्रमित तत्व कितने घातक होते हैं इसका अंदाजा सहज नहीं लगाया जा सकता. स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियां छेड़छाड़ का शिकार होती रहती हैं, पर हर मामले सामने नहीं आ पाते.

प्रेम का सही अर्थ समझ गये तो हर दिन प्रेम दिवस

कहते हैं कि किसी को सच्चे प्रेम का एहसास करवाने और उनसे इजहार करने में जिंदगी बीत जाती है. अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि उसके मां-बाप, बीबी-बच्चे उनसे प्यार नहीं करते, पर यह सत्य है कि जब लोग जन्म लेते हैं तो सबसे पहले मां के सान्निध्य में होते हैं, फिर पिता और परिवार वालों से परिचय होता है. इसके बाद धीरे-धीरे समाज से घुलते-मिलते हैं.