पाठक का पत्र

बाढ़ से बचाव की पहल करे केंद्र व राज्य की सरकार

Prabhat Khabar

एक और जहां हम चंद्रयान दो के सफल प्रक्षेपण का जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की विभीषिका से भी रूबरू हो रहे हैं. खासकर बिहार में जहां नेपाल द्वारा छोड़े गये पानी के कारण हर साल करोड़ों रुपये की क्षति व जान-माल का नुकसान हो रहा है. पुराने समय में कोसी परियोजना गंडक परियोजना के जरिये नहर बनाकर बाढ़ के पानी को खेतों की ओर मोड़ दिया जाता था, जिससे पटवन के समय इसका उपयोग किया जाता था.

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इस्तेमाल और लत का समझें फर्क

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सूचना के लिहाज से हम एक ऐसे दौर में हैं, जहां सोशल मीडिया के जरिये हर पल कुछ न कुछ देखते-पढ़ते या ...

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चीन की विस्तारवादी योजना

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श्रीलंका के ‘हंबनटोटा’ बंदरगाह पर कब्जे को पुनः याद करवाते हुए, चीन अब केन्या के अत्यंत लाभकारी ...

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‘उदंत मार्तंड’ की संघर्ष गाथा

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आज चार दिसंबर हिंदी पत्रकारिता के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है. कोलकाता से प्रकाशित हिंदी ...

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स्त्री सुरक्षा और आजादी

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अठाहरवीं सदी के बड़े फ्रांसिसी दार्शनिक चार्ल्स फुरिए ने कहा था कि किसी भी समाज में प्रगति और आजादी ...

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वहशीपने पर अध्ययन की दरकार

बीते दिनों देश में हुईं बलात्कार की कुछ घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. लोगों में अपने और अपने परिवार वालों की सुरक्षा को लेकर फिक्र बढ़ गयी है. एक तरफ पूरा देश इन घटनाओं से आहत है और न्याय की मांग कर रहा है, वहीं हमारी सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं दिखती हैं. हालांकि, इस बार मानसिकता परिवर्तन की भी बात की जा रही है, लेकिन इस मानसिकता में परिवर्तन कैसे होगा?

खड़ा संकट और बेपरवाह मनुष्य

इस पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का मनुष्य द्वारा अपनी हवस और लालच के वशीभूत होकर इतना जबरदस्त दोहन और इसके साथ ही इतना प्रदूषण किया गया है कि अब इस धरती का धैर्य चुकने लगा है. धरती इसके प्रतिरोधस्वरूप कभी तूफान, कभी अतिवृष्टि, कभी सुनामी, तो कभी मौसम असंतुलित करके मनुष्य को बार-बार चेतावनी दे रही है.

मानसिकता में परिवर्तन जरूरी

सांसद और विधायक सिर्फ जन प्रतिनिधि ही नहीं होते. वे नियम बनानेवाले और देश चलानेवाले भी होते हैं. इसलिए इन्हें अपने हर वक्तव्य को काफी सोच-समझकर देना चाहिए. पिछले दिनों राज्यसभा सांसद जया बच्चन जी ने संसद में कहा था कि जिन्होंने हैदराबाद की डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसे जला दिया, उनकी मॉब लिंचिंग कर देनी चाहिए. जया जी काफी क्रोधित थीं, इसलिए उन्होंने ऐसा कह दिया होगा. मगर उन्हें आम आदमी जैसा बयान देने से बचना चाहिए था.

सख्त सजा की है जरूरत

भारतीय समाज में नारी को देवी स्वरूप स्थान दिया गया है. पत्नी को पति की अर्द्धांगिनी माना गया है. फिर भी स्त्रियों पर अत्याचार होता है. पिछले कुछ समय से बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. हाल में हुई हैदराबाद की घटना हो या रांची की, ये घटनाएं दिल को दहला देती हैं.

उपभोक्ता खर्च बढ़ाने के हों उपाय

देश में आर्थिक सुस्ती के जो कारण हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं. इन कारणों में सबसे चिंताजनक यह तथ्य सामने आया है कि उपभोक्ता खर्च कम हो रहा है.

आम जनता की भी जिम्मेदारी

यह चुनावी दौर है. आम जनमानस भी विभिन्न राजनीतिक दलों की विचारधारा और उनके समर्थक-विरोधियों में विभक्त है. समर्थन और विरोध भी इस हद तक की, कि लोग आपसी प्रेम और सौहार्द की बलि देने को तैयार हैं.

आधी आबादी के साथ कुकृत्य समाज के लिए बदनुमा दाग

बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ नारों के बीच में जिस प्रकार भारत में आधी आबादी के साथ कुकृत्य हो रहे हैं वह समाज के लिए बदनुमा दाग है. हालांकि यह कोई नयी बात नहीं है.

महंगाई की आंच और प्याज की झांस से सभी हैं परेशान

इन दिनों हर घर में महंगाई पर चर्चा खूब हो रही है, क्योंकि प्याज के दाम पेट्रोल से भी ऊपर चला गया है. हालांकि प्याज की एक बड़ी खेप लगभग 7000 मीटरिक टन मिस्र से आने को है. जब तक नासिक और गुजरात की नयी फसल न हो जाये तब तक तुर्की से भी 11000 मीटरिक टन प्याज आयात किया जायेगा. मौजूदा स्थिति यह है कि पुराने स्टॉक खत्म होने को हैं.

दुष्कर्म के खिलाफ सख्त कानून बनाये सरकार

हमारे देश में महिलाएं अब भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं. जबकि, आजादी के 70 साल बीत चुके हैं. महिलाओं व छात्राओं को घर से निकलना मुश्किल हो गया है. उन्हें डर लगता है कि कहीं मेरे साथ भी दुष्कर्म न हो जाये.

अर्थव्यवस्था की चिंता

चिंता इस बात की नहीं की जीडीपी का आंकड़ा लगातार पिछले छह सालों में न्यूनतम स्तर यानी 4.5 फीसद पर आ गया है. चिंता इस बात की हो रही है कि इसके सुधरने का कोई आसार दूर-दूर तक दिखायी नहीं पड़ रहा है.

फास्टट्रैक से हो सजा

तेलंगाना में एक महिला डॉक्टर को बलात्कार के बाद जिंदा जलाने की घटना तथा तमिलनाडु में एक लड़की के साथ बलात्कार और रांची की एक लॉ की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार, इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार किया है. हम किस तरह के समाज का निर्माण कर रहे हैं? यह एक गंभीर चिंता का विषय है. आये दिन समाचारों में हमें बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की खबरें पढ़ने को मिलती हैं. ऐसा करनेवाले लोग विकृत मानसिकता के होते हैं. अगर कानून का भय उन दरिंदों में होता, तो ऐसी घटनाएं न हुई होतीं. जरूरत है उनमें भय पैदा करने की.

नवान्न पर्व पर हो अवकाश

भारत कृषि प्रधान देश है, जहां की सत्तर प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है. नवान्न, जिसका शाब्दिक अर्थ नया अन्न है, अर्थात यह नयी फसल से प्राप्त अनाज को अग्नि के माध्यम से देव एवं पितर को समर्पित किये जाने के पश्चात स्वोपभोग की सनातनी परंपरा का खालिस देसी कृषक पर्व है.