हरिवंश की कलम से

जीवन दर्शन और अध्यात्म से ही होता है चरित्र का निर्माण

हरिवंश

आज पांच नवंबर को कृष्णबिहारी मिश्र अपने जीवन के 85वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. गुरु आचार्य हजारी प्रसाद के शिष्य कृष्णबिहारीजी ने हिंदी जगत को अपनी रचनाधर्मिता से ऐसी चीजें दी हैं, जो अद्वितीय हैं. निजी लोकप्रियता के लिए बने-बनाये या समय के साथ बनते-विकसित होते पॉपुलर फ्रेम को छोड़, उन्होंने उन विषयों को अपनी रचना का विषय बनाया, जिनमें चुनौतियां ज्यादा थीं, कहीं कोई पगडंडी जैसी भी न थी कि उस पर चल सकें. वे ख्यातिप्राप्त ललित निबंधकार तो हैं ही, साथ ही आध्यात्मिक चिंतक भी हैं. हिंदी पत्रकारिता पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के मार्गदर्शन में उन्होंने जो शोध किया, वह अद्वितीय है.

Columns

कर्ज सस्ते होने के आसार

सतीश सिंह

मुख्य रूप से ईंधन की कीमत में गिरावट की वजह से जुलाई महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) दर ...

Columns

जनसंख्या नियंत्रण की चुनौती

आशुतोष चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में देश की बढ़ती जनसंख्या ...

Columns

कश्मीर पर संरा का पाक को साफ जवाब

प्रो सतीश कुमार

अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पाकिस्तान बेचैन है और चीन गुस्से में है. बीते शुक्रवार चीन द्वारा ...

Columns

लोकतंत्र पर गर्व का क्षण

नवीन जोशी

ब्रिटिश हुकूमत से आजाद होने के हिलोरें मारती भारतीय तमन्ना से उपजे आंदोलन के दबाव में जब भारत को ...

Columnists