हरिवंश की कलम से

जीवन दर्शन और अध्यात्म से ही होता है चरित्र का निर्माण

हरिवंश

आज पांच नवंबर को कृष्णबिहारी मिश्र अपने जीवन के 85वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. गुरु आचार्य हजारी प्रसाद के शिष्य कृष्णबिहारीजी ने हिंदी जगत को अपनी रचनाधर्मिता से ऐसी चीजें दी हैं, जो अद्वितीय हैं. निजी लोकप्रियता के लिए बने-बनाये या समय के साथ बनते-विकसित होते पॉपुलर फ्रेम को छोड़, उन्होंने उन विषयों को अपनी रचना का विषय बनाया, जिनमें चुनौतियां ज्यादा थीं, कहीं कोई पगडंडी जैसी भी न थी कि उस पर चल सकें. वे ख्यातिप्राप्त ललित निबंधकार तो हैं ही, साथ ही आध्यात्मिक चिंतक भी हैं. हिंदी पत्रकारिता पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के मार्गदर्शन में उन्होंने जो शोध किया, वह अद्वितीय है.

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सावरकर का हिंदुत्व

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छह सीटाें से चुनाव लड़े थे राजा साहब चार जीते, दाे पर मिली थी शिकस्त

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अनुज कुमार सिन्हा, रांची : काेई प्रत्याशी एक चुनाव में चार सीटाें से विजयी हाे जाये, ताे उसकी ...

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