यदृच्छया

हम कितने कश्मीर के हैं !

राजेंद्र तिवारी

आजादी मिले 70 साल हो गये. तब से अब तक पांच पीढ़ियां आ चुकीं. पहली, जो आजादी के संघर्ष में शामिल थी या जिसने इस संघर्ष को देखा था. दूसरी, जो उस समय बालवय या किशोरवय थी. तीसरी, जो आजादी के बाद पैदा हुई और जिसने अपने बचपन में जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद, राजेंद्र बाबू जैसे नेताओं को देखा, सुना या पढ़ा और जिसकी सोच पर इन नेताओं या कहें कांग्रेस का प्रभाव रहा. चौथी, जो 1970 के बाद पैदा हुई, जिसने कांग्रेस और नेहरूवादी मूल्यों के पराभव की प्रक्रिया में शामिल रही या इस प्रक्रिया को देखा.

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हिमालय से हिंद महासागर तक संघर्ष

प्रो सतीश कुमार

भारत और चीन के बीच अनौपचारिक वार्ता एक नये संबंध का आगाज बन सकता है. प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति ...

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शहरों की विफलता के जिम्मेदार

प्रभु चावला

गैतिहासिक काल के मोहनजोदड़ो से शुरुआत कर वैदिक काल के इंद्रप्रस्थ और प्राचीन रोम तक शहरों पर उनके ...

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सच्चे अर्थों में लोकनायक थे जेपी

कृष्‍ण प्रताप सिंह

ग्यारह अक्तूबर, 1902 को उत्तर प्रदेश व बिहार की सीमा पर स्थित, बलिया व सारण जिलों के बीच बंटे और ...

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बदल रही है युद्ध प्रणाली

आकार पटेल

अखबारों से पता चला कि भारतीय वायु सेना 200 लड़ाकू विमान और लेना चाहती है और इस संबंध में विभिन्न ...

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