यदृच्छया

हम कितने कश्मीर के हैं !

राजेंद्र तिवारी

आजादी मिले 70 साल हो गये. तब से अब तक पांच पीढ़ियां आ चुकीं. पहली, जो आजादी के संघर्ष में शामिल थी या जिसने इस संघर्ष को देखा था. दूसरी, जो उस समय बालवय या किशोरवय थी. तीसरी, जो आजादी के बाद पैदा हुई और जिसने अपने बचपन में जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद, राजेंद्र बाबू जैसे नेताओं को देखा, सुना या पढ़ा और जिसकी सोच पर इन नेताओं या कहें कांग्रेस का प्रभाव रहा. चौथी, जो 1970 के बाद पैदा हुई, जिसने कांग्रेस और नेहरूवादी मूल्यों के पराभव की प्रक्रिया में शामिल रही या इस प्रक्रिया को देखा.

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कृषि आय बढ़ाने की हो पहल

देविंदर शर्मा

इस वक्त देश में मुख्यत: मांग घटने और निवेश कम होने की वजह से आर्थिक सुस्ती आयी है. ऐसा माना जा रहा ...

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संवैधानिकता का जश्न मनाया जाए

प्रो फैजान मुस्तफा

छब्बीस जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के वर्षों बाद पहली बार भारत के लोग संविधान से खुद की पहचान ...

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बजट की आहट : कर में राहत देने की जरूरत

सतीश सिंह

राजस्व वसूली के मोर्चे पर सरकार अपेक्षित लक्ष्य हासिल में नाकाम रही है. कॉर्पोरेट कर में उल्लेखनीय ...

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हिंदुस्तान का दिल है संविधान

जस्टिस आरएस सोढ़ी

किसी भी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसके पास एक मजबूत संविधान का होना बहुत जरूरी है. संविधान ...

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