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वाह काेहली, वाह धाैनी वाह टीम इंडिया

अनुज कुमार सिन्‍हा

टीम इंडिया के खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया से सर ऊंचा कर, इतिहास रच कर विदा हो रहें हैं. टेस्ट और वनडे सीरीज दाेनाें में ऑस्ट्रेलिया काे हराया और आराम से हराया. ऐसा पहली बार हुआ. टी-20 सीरीज ड्रॉ रही हालांकि उसमें भी भारत ही भारी रहा था.

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आसान नहीं मिजोरम सरकार की राहें

श्रीप्रकाश शर्मा

एक दशक के राजनीतिक निर्वासन के बाद जोरामथांगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) द्वारा ...

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बदलता आदिवासी समाज-विज्ञान

अनुज लुगुन

भारत से अंग्रेजों का जाना अन्य भारतीयों की तरह ही आदिवासियों के लिए भी अंग्रेजों का जाना था और इसके ...

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सपा-बसपा गठबंधन के मायने

नीरजा चौधरी

भारतीय राजनीति में सपा-बसपा का गठबंधन ऐतिहासिक कहा जा सकता है. दोनों पार्टियों की विचारधाराएं ...

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कर्नाटक संकट के लिए कांग्रेस दोषी

आर राजगोपालन

कर्नाटक का राजनीतिक ड्रामा लोकसभा चुनावों का एक ट्रेलर है- गठबंधन सरकार के गिरने के बारे में ...

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आसान नहीं मिजोरम सरकार की राहें

एक दशक के राजनीतिक निर्वासन के बाद जोरामथांगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) द्वारा ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता की बागडोर संभालना मिजोरम राजनीति में एक नये अध्याय का प्रारंभ है.

बिरसा मुंडा काे समझा, लेकिन देर से

इतिहास गवाह है कि अंगरेजाें के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में आदिवासि याें की बड़ी भूमिक ा रही है. चाहे वे बाबा तिलका माझी, सिद ाे-कान्हू हाें या बि रसा मुंडा. इतिहासकार भले ही कहते रहे कि इनमें से अधिकांश संघर्ष जमीन काे लेकर था आैर आरंभ में इन्हें भारत के स्वत ंत्रता संग्राम से काेई लेना-देना नहीं था लेकिन सच यही है कि ये सारे आंदाेलन शाेषण, अंगरेजाें आैर उनके समर्थ न कर रहे लाेगाें के खिलाफ ही थे. आजादी के लि ए थे. अगर बि रसा मुंडा के उलगुलान काे ही लें, ताे उसी अवधि में देश में अलग-अलग जगहाें पर अंगरेजाें के खिलाफ आंदाेलन हाे रहे थे आैर उन्हें दर्ज भी किया जा रहा था.