कुछ अलग

बेहद खास है नाहन का मुहर्रम

Prabhat Khabar

कभी हिमाचल का बेंगलुरु कहे जानेवाले शहर ‘नाहन’ के पानी से लबालब तालाब मेहमानों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. हर साल मुहर्रम नाहन में एक खास शोकोत्सव बनके आता है.

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पानी बचायें या मिट जायें

संजय बारू

अभी जहां एक ओर भारत के पश्चिमी तट पर माॅनसून की तेज बौछारें पड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी रिपोर्टें ...

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सामाजिक मूल्य और राष्ट्रवाद

मणींद्र नाथ ठाकुर

पिछले कुछ वर्षों में भारत में राष्ट्रवाद पर बहुत बहस हुई है. यहां तक कि बिना ठोस आधार के भी हम किसी ...

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सरकार की कोशिशों पर करें भरोसा

डॉ सय्यद मुबीन जेहरा

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने हाल ही में नयी सरकार के रूप में पुरानी ही मोदी सरकार को चुन लिया है. ...

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चुनाव नतीजे और नीतीश कुमार फैक्टर

केसी त्यागी

लोकसभा चुनावों में बिहार के नतीजों ने सबको आश्चर्यचकित किया है. कई धारणाएं, पूर्वानुमान तथा ...

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हरियाली का प्रबंधन जरूरी

पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर पेड़, पानी बचाने की खूब चर्चा हुई. हाल ही में किसी ने फेसबुक पर लिखा कि दुनिया के लाखों पेड़ गिलहरियों की देन हैं, क्योंकि ये खाने के लिए बीज छिपाकर रखती हैं और भूल जाती हैं. इसलिए किसी ने सुझाव दिया कि जो फल खाते हैं, उनके बीज बचाकर रखें. कभी यात्रा पर जायें, तो इन्हें रेलवे पटरियों और सड़क के किनारे बिखेर दें. इनसे कुछ दिन में पौधे उग जायेंगे और हरियाली बढ़ेगी.

आवेला असाढ़ मास, लागेला अधिक आस...

आसाढ़ सामने है. किसानों के जीवन में उल्लास लानेवाला महीना, जिसका इंतजार वे बेसब्री से करते हैं. खेती की शुरुआत इस महीने में होती है. इसी महीने मॉनसून आता है, बरखा-बुनी लाता है. खेतों और प्रकृति को नया जीवन मिलता है. नदी-तालाब अपने रंग में लौटने लगते हैं. आसाढ़ पर सावन का मनभावन होना टिका होता है. ऐसी कई विशेषताएं हैं, जिसकी वजह से लोक का यह प्यारा मौसम है.

न हो दिल की गलियां सूनीं

मेरे व्हाॅट्सएप पर एक जोक आया- कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है... अगर तुम साढ़े दस बजे सो जाती हो, तो तुम्हारे व्हाॅट्सएप्प पर लास्ट सीन ढाई बजे रात क्यों दिखाता है? जोक पढ़कर मेरे दिमाग की बत्ती जल गयी. असल में नये-नये एप हमारी जिंदगी में किस तरह असर डाल रहे हैं, इसका अंदाजा हमें खुद नहीं है. एसएमएस में तो आप झूठ बोलकर निकल सकते थे कि मेसेज नहीं मिला. पर ये नये-नये चैटिंग एप, लास्ट सीन और ब्ल्यू टिक वाला स्टेटस आपकी सारी हकीकत खोल देते हैं.

तूफानों का नामकरण

फनी तूफान ओड़िशा से गुजरा, गुजरात से वायु तूफान गुजर गया. मार बवाल हो लिया, गुजरात में ऐसा हो जायेगा, वैसा हो जायेगा. यह कर गुजरेगा वह कर गुजरेगा. गुजरात का तूफान कुछ कुछ गुजरात के हार्दिक पटेल की गति को ही प्राप्त हो गया, जाने क्या क्या उम्मीदें लगा ली गयी थीं कि ये कर जायेगा, वो कर जायेगा.

दूसरों की और अपनी गलतियां

यह सम्मान की बात है कि समाज के प्रतिष्ठित, वैभव संपन्न, उच्चतम वर्ग के लोग अपनी विशेषताएं समय-असमय आम देशवासियों को बताते रहते हैं. बड़े लोगों द्वारा छोटे लोगों के लिए बनायी गयी शासन व्यवस्था में यह प्रक्रिया जरूरी भी है. खास लोग समझाते हैं और आम लोग समझदारी से बात को समझ कर, प्रेरणा लेने का कर्तव्य पालन करते हैं.

यात्राओं का उद्देश्य

गर्मी की छुट्टियां खत्म होने में अब थोड़े ही दिन बचे हैं. अपनी यात्राओं से लोग लौट रहे हैं. पर जिन्हें पहले टिकट नहीं मिला था, वे अब जाने को तैयार हैं. हर जगह खचाखच भीड़ और ऊपर से गरमी की भयावहता. इस समय अगर ट्रेनें लेट चलती हैं, तब यात्रियों की हालत का अंदाजा लगाइये. कितनी कोफ्त होती है! गर्म हवाएं और पसीने से तर-ब-तर औरत, बच्चे और बूढ़े.

अयोध्या नगर के सिंदूरिया

वर्षों पहले किसी पत्रिका में एक लेख पढ़ा था- शादी हो तो मिथिला में. जाहिर है, इस लेख में जानकी और पुरुषोत्तम राम की शादी की चर्चा के साथ मिथिला की मेहमाननवाजी और संस्कृति का जिक्र था. पिछले कुछ दशकों में मिथिला क्षेत्र से भारी मात्रा में विस्थापन और पलायन हुआ है, लेकिन शादी-विवाह के लिए मध्यवर्ग वापस गांव-घर लौटता रहा है.

प्लास्टिक का कहर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आकलन के मुताबिक, साल 2017-18 में भारत में 6.6 लाख टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ था. लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है. देश के 35 क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में से सिर्फ 14 ने ही ऐसे कचरे के बारे में जानकारी दी थी. वर्ष 2016-17 में केवल 25 बोर्डों ने केंद्रीय बोर्ड को जानकारी दी थी. विवश होकर बोर्ड को राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल की शरण लेनी पड़ी थी.

दुर्लभ संस्कृतिकर्मियों में से थे नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड

गिरीश कर्नाड ने जब अपना पहला नाटक ययाति (1961) लिखा, तो आयु मात्र 23 साल की थी और तुगलक (1964) के प्रकाशन के साथ ही वे राष्ट्रीय रंगमंच के केंद्र में आ गये थे. प्रकाशन के साथ ही तुगलक का कन्नड़, मराठी और हिंदी में मंचन हुआ. इब्राहिम अल्काजी ने 1967 में इसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के लिए प्रस्तुत किया.

स्कर्टनुमा ड्रेस में फाइट

उस पार्टी के अध्यक्ष ने कहा हम घणा संघर्ष करेंगे और उनकी अपनी पार्टी के नेता पंजाब से राजस्थान तक आपसी संघर्ष में जुट लिये. चुनाव के बाद सिर्फ संघर्ष और आग ही बची है, सूरज से भी बरसती हुई. उस टीवी चैनल की स्क्रीन के बैक ग्राउंड में आग लगातार जलती रहती है, एंकर भयंकर अफरातफरी में इधर से उधर भागते दिखते हैं, एकैदम परम एक्टिव टाइप.

सेब के मुकाबिल केला

भले ही आम फलों का राजा हो, पर स्वास्थ्य के मामले में जो लोकप्रियता सेब की है, वह आम की नहीं. लगता है, उसने अपनी बिक्री बढ़ाने का काम किसी विज्ञापन-एजेंसी को दिया था. एजेंसी ने पहला काम किया, एक बढ़िया नारा बनाने का, क्योंकि नारा है तो सब-कुछ है. नारा भी बनाया अंग्रेजी में, क्योंकि अंग्रेजी भी तो सब-कुछ है.

गर्मी से लड़ने के तौर-तरीके

गर्मी से हाहाकार है. कहीं पानी नहीं है, कहीं बिजली नहीं है. दोपहर में सड़कों पर कर्फ्यू सा लगा है. चुरू राजस्थान में पारा 50 डिग्री तक जा पहुंचा है. कानपुर ने गर्मी का दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. लोग गर्मी से बचने के लिए शीतल पेय और आइसक्रीम का सहारा ले रहे हैं.