कुछ अलग

बेहद खास है नाहन का मुहर्रम

Prabhat Khabar

कभी हिमाचल का बेंगलुरु कहे जानेवाले शहर ‘नाहन’ के पानी से लबालब तालाब मेहमानों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. हर साल मुहर्रम नाहन में एक खास शोकोत्सव बनके आता है.

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इवीएम पर बार-बार उठते प्रश्न

अवधेश कुमार

विपक्षी दलों ने इवीएम को फिर निशाना बनाया है. इन दलों ने यह तय किया कि वे ईवीएम को खत्म कर मतपत्रों ...

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देश को जीवंत वामपंथ की जरूरत

डॉ संजय बारू

आम चुनावों के रिपोर्ताज एवं विश्लेषणों के रोजाना शोरगुल तथा आपाधापी में भारतीय राजनीति के उस एक अहम ...

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भ्रष्टाचार दशकों से चुनाव का बड़ा मुद्दा

सुरेंद्र किशोर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस करने के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री ...

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शैक्षिक योग्यता और कामकाज

आकार पटेल

एक नेता को कितना शिक्षित होना चाहिए और उसमें बौद्धिक सुसंगति के अभाव के क्या नतीजे हो सकते हैं? ...

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बुद्धिमत्ता के पर्याय आइंस्टीन

‘हर कोई जीनियस है, लेकिन अगर एक मछली को पेड़ पर चढ़ने की काबिलियत के हिसाब से आप आंकेंगे, तो मछली खुद को जिंदगी भर मूर्ख समझेगी.’ जाहिर है, मछली पानी में तैरने में जीनियस है.

स्नेह-विनिमय

कक्का उस दिन हरे टमाटर तोड़ रहे थे. कहने लगे कि हरखू के घर भेजना है. परसों उसने टमाटर की ओर देखकर कहा था कि उसे हरे टमाटर की चटनी बहुत पसंद है. सब्जी में दो हरे टमाटर डाल देने से उसका स्वाद कितना अद्भुत हो जाता है न! वह यह भी कह रहा था कि उसने भी समय रहते पांच पौधे लगाये थे, लेकिन बकरी चर गयी. बाद में बारिश आयी, तो उसमें उसके पौधे गल गये. वह देर तक हरे टमाटर को निहारता रहा था और कह रहा था कि बारिश के मौसम आने से पहले तक ये फलते रहेंगे.

गणित के सवाल में जेंडर का प्रश्न

गणित में सवाल आता है- किसी काम को 5 पुरुष 10 दिनों में तथा 5 महिलाएं 15 दिनों में कर सकती हैं, तो 2 पुरुष और 3 महिलाएं इसे कितने दिनों में पूरा करेंगे? ऐसे सवाल आपने खूब हल किये होंगे. गणित के लिहाज से इस सवाल में कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है और अधिकतर लोग इस सवाल को आसानी से हल भी कर लेंगे.

गर्व का रजिस्ट्रेशन

उस फिल्म स्टार ने कहा कि मुझे गर्व है अपने देशप्रेम पर, आपको भी करना चाहिए. फिर वह फिल्म स्टार अगले ही सीन में बिस्कुट बेचता दिखा.

आचार की संहिता

आचार संहिता सख्ती से लगी हुई है, लेकिन सरकारी सड़क की तरह यहां, वहां और कहां-कहां टूट-फूट भी रही है. यह मौसम कांच का होता है, जिसे तोड़ने के लिए लोकतांत्रिक बेकरारी का नटखट ‘कन्हैया’, इसके लगने की घोषणा के साथ ही अवतरित हो जाता है. विकासजी निढाल हो जाते हैं, घोषणाओं की योजनाओं और योजनाओं की घोषणाओं का आचार डलने से रह जाता है. विपक्ष पूरे विश्वास के साथ सरकार बनाने की घोषणाएं ‘मुफ्त’ में करता है.

शक्ल से ‘गरीब’ नजर आऊं

मैं ‘अमीर’ नहीं होना चाहता. ‘गरीब’ ही बना रहना चाहता हूं. मैं नहीं चाहता मेरे कने कार हो, बंगला हो, रुपया-पैसा हो, मकान-दुकान हो. मेरा मानना है कि यह सब अमीरों के चोचले हैं! मैं चाहता हूं, मेरे पास कबाड़ा साइकिल हो, मेरे मकान में न छत हो न खिड़की, मेरे कपड़ों में पड़े बेतरतीब छेद मेरी दयनीयता की कहानी खुद बयान करें. मेरी जिंदगी पूरी तरह से ‘उधार’ पर टिकी हो और मैं शक्ल से ही ‘गरीब’ नजर आऊं.

चुनाव मार्फत सोशल मीडिया

पिछले दिनों चुनाव विश्लेषक और चर्चित टीवी पत्रकार प्रणय राय ने एक बातचीत के दौरान लोकसभा चुनाव (2019) को ‘व्हाॅट्सएप इलेक्शन’ कहा. दस वर्ष पहले लोगों के बीच आपसी संवाद के लिए व्हाॅट्सएप जैसे मैसेजिंग प्लेटफाॅर्म का इस्तेमाल शुरू हुआ और देखते ही देखेते ‘एसएमएस’ के इस्तेमाल को इसने काफी पीछे छोड़ दिया.

सुराही-मटके के दिन!

गरमी आते ही फ्रिज, कूलर, एसी, ठंडे पेय की मांग बढ़ जाती है. खीरा, तरबूज, ककड़ी की बहार आ जाती है. सड़कों पर कहीं-कहीं घड़े दिखने लगते हैं. पहले रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, किसी भीड़-भाड़ वाली जगह पर घड़े-सुराहियां दिखती थीं. मगर अब ऐसा कहीं-कहीं ही देखने को मिलता है. फूल-पत्तियों की डिजाइन से सजे मिट्टी के ये बरतन बहुत सुंदर दिखते थे. रेलवे स्टेशनों या बस अड्डों पर बने प्याऊ में बड़े-बड़े मटकों में पानी रखा रहता था.

गीत नहीं, विचारधारा है

यह वक्त अद्भुत है. राजनीतिक विमर्श यह है कि वह गायिका उस पार्टी को ज्वाॅइन कर रही हैं या इस पार्टी को.उस पार्टी के गायक इस गायिका को समझा ले गये कि नहीं कि अभी ज्वाॅइन मत करो. इधर राजनीतिक विचारधारा की तलाश हिट गीतों में होनी चाहिए. इधर एक गीत बहुत हिट हो रहा है- तेरी आंख्या का यो काजल.

खुशामद कर बुलंद इतनी

‘मार्च’ का शाब्दिक अर्थ भले ही शुरू करना, कूच करना, प्रयाण करना हो, पर हकीकत में उसका ताल्लुक रुकने, खत्म करने, बंद करने से है, जिसे ‘क्लोजिंग’ भी कहते हैं. सरकार का साल अप्रैल से शुरू होकर मार्च में खत्म होता है.

बहुत कुछ कहता है काला तिल

आपके शरीर पर कहीं कोई तिल है क्या? अरे तिल बोले तो वह काला चिह्न, जो आपकी खूबसूरती को बढ़ा देता है. यानी हर काली चीज खराब नहीं होती. वैसे आपके चेहरे पर कहीं या फिर होंठ पर कहीं ऐसी जगह वह प्यारा-सा काला तिल है, तो आप बड़ा गर्व महसूस करते होंगे और उस ऊपर वाले को शुक्रिया कहना नहीं भूलते होंगे कि आपकी खूबसूरती को बदनजर से बचाने के लिए उसने कुदरती इंतजाम कर दिया है.

एक रात की बात

कक्का अक्सर एक बात कहा करते हैं कि लोग बड़े-बुजुर्गों को विशाल छायादार वृक्ष तो कह देते हैं, लेकिन समाज के युवाओं को उसी वृक्ष के फल की संज्ञा देना भूल जाते हैं. वे यह बात तब जरूर छेड़ देते हैं जब उनके कानों तक बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरें पहुंचती हैं.