कुछ अलग

बेहद खास है नाहन का मुहर्रम

Prabhat Khabar

कभी हिमाचल का बेंगलुरु कहे जानेवाले शहर ‘नाहन’ के पानी से लबालब तालाब मेहमानों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. हर साल मुहर्रम नाहन में एक खास शोकोत्सव बनके आता है.

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आइये, अपना आरक्षण ले जाइये

कुमार प्रशांत

राजस्थान में गुर्जरों ने अारक्षण की मांग का अपना पांचवां अांदोलन इस भाव के साथ वापस ले लिया है कि ...

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आतंकी हमले से उद्वेलित देश

आशुतोष चतुर्वेदी

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद पूरे देश में ...

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भारत की मुख्य सुरक्षा चुनौती चीन

प्रो सतीश कुमार

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद से देश के भीतर रोष है. अवाम अब बदला मांग रही है. भारत ने 1996 में ...

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सोलहवीं लोकसभा का कामकाज

अंकिता नंदा

साल 2019 के बजट सत्र के समापन के साथ 16वीं लोकसभा का अवसान हो गया. पिछले पांच वर्षों के दौरान 133 ...

Columnists

उतरे करने को उदधि-पार

पिछले दिनों देश के प्रतिष्ठित ‘दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स’ में समाजशास्त्र के प्रोफेसर रहे रबिंद्र रे (1948-2019) के गुजरने की खबर आयी. विश्व पुस्तक मेले में मैं मैथिली की सुपरिचित कथाकार लिली रे के उपन्यास ‘पटाक्षेप’ का मैथिली संस्करण ढूंढ़ रहा था.

मोस्ट फेवर्ड नेशन

स्मार्ट विश्वविद्यालय ने पाकिस्तान विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, उसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है- पाकिस्तान एक कन्फ्यूजन है. वह एक रोजगार योजना है. यूं ही पाकिस्तान अपने को नेशन कहता है. हाल की आतंकी घटना से पहले भारत ने पाकिस्तान को कारोबार वगैरह के मामले में मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी सबसे वरीयता प्राप्त नेशन का दर्जा दे रखा था. अब यह पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भारत ने वापस ले लिया है.

सारा जहां सभी का

हर परिवार का मुखिया अपने तरीके से परिवार का नाम चमकाने के लिए कितनी तरह के जुगाड़ करता है. अमेरिका के राष्ट्रपति, अमेरिकी जीवन में अनेक चांद और मंगल लगाने के लिए क्या-क्या नहीं कर रहे हैं.

नेताओं का वैलेंटाइन डे

मुझे संत बचपन से ही बहुत पसंद रहे हैं. मैं खुद बड़ा होकर संत बनना चाहता था. बड़ा होकर इसलिए कि ज्यादातर लोग बड़े होकर ही कुछ बनते देखे गये हैं. बच्चों से भी यही पूछा जाता है कि बड़े होकर तुम क्या बनोगे?

खालिस प्रेम का वसंत

प्रेम पर जितना लिखा जाये कम है. प्रेम पर लिखते हुए दुनिया के सारे शब्द भी कम पड़ जाते हैं. कबीर ने सच ही कहा है- ''पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय''. सचमुच कबीर ने मनुष्य के हर महीन भाव को भी पकड़ लिया.

आज के युवा और वैलेनटाइन डे

आगामी चौदह फरवरी को वैलेनटाइन डे से पहले वैलेनटाइन सप्ताह होता है. सात फरवरी को रोज डे था. प्रेम न बाड़ी उपजे प्रेम न हाट बिकाय की कहावत अब चरितार्थ नहीं होती. प्रेम खूब बाजार में बिक रहा है.

अब वसंत आ गया है

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर स्मार्ट विश्वविद्यालय द्वारा बसंत पंचमी विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है-

‘कहां तुम चले गये!’

एक से बढ़कर एक गजलों और गीतों को नर्म लहजे वाले अंदाज में अपने होठों से छूकर अमर कर देनेवाले और अपनी शहद जैसी आवाज से जग को जीत लेनेवाले गायक जगजीत सिंह जी अगर इस दुनिया में होते, तो आज वे अपना 78वां जन्मदिन मना रहे होते. आज भी उनकी मखमली आवाज का जादू लाखों दिलों को बहुत सुकून देता है.

पांखुरी-पांखुरी मुस्कुराता वसंत

प्रकृति जिस समय अपने चरमोत्कर्ष पर होती है, उसी समय जीवन का उदात्त काल होता है. वसंत वनस्पति के संवत्सर ताप का अत्यंत मनमोहक पुरश्चरण है. प्रकृति के सान्निध्य में मानव चेतना का विकास हुआ है.

हरी साड़ी पर पीली छींटें!

कल की बात है. कक्का कहने लगे कि सरसों में फूल आने लगे हैं. वसंत आ गया है! उनका चेहरा खिल उठा था. वह हौले-हौले मुस्कुराने लगे. मैंने उनकी आंखों में झांका, वहां मुझे एक उम्मीद नजर आ रही थी. कक्का कह रहे थे कि वसंत सच में राजा होता है. मौसम का राजा. इसके आते ही जन-जन प्रसन्नता और उल्लास से भर जाते हैं.

मोहब्बत में एक खूबसूरत मोड़

अच्छा ही हुआ कि सोहनी को महिवाल नहीं मिला और हीर रांझे की ना हो सकी! यह भी ठीक ही हुआ कि रोमियो और जूलिएट एक अधूरे इश्क के किरदार के तौर पर ही प्रेमकथाओं में दर्ज हुए! सोचिये जरा, अगर ये सभी मिल जाते, तो इश्क करनेवाले किसकी मिसाल देते?

गरीबी का घणा महत्व है

चालू विश्वविद्यालय द्वारा गरीबी, खेती और बजट पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में जिस निबंध ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है, वह है-गरीबी का हमारे आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में घणा महत्व है. राजनीति में गरीबी का इतना महत्व है कि इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ के नारे पर चुनाव जीता था और करीब पचास साल बाद उनके पौत्र राहुल गांधी गरीब-हित में गरीबों के लिए इनकम गारंटी की मांग कर रहे हैं.