कुछ अलग

बेहद खास है नाहन का मुहर्रम

Prabhat Khabar

कभी हिमाचल का बेंगलुरु कहे जानेवाले शहर ‘नाहन’ के पानी से लबालब तालाब मेहमानों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. हर साल मुहर्रम नाहन में एक खास शोकोत्सव बनके आता है.

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सावरकर का हिंदुत्व

रवि भूषण

महात्मा गांधी की डेढ़ सौवीं वर्षगांठ के तुरंत बाद विनायक दामोदर सावरकर सुर्खियों और बहसों में हैं. ...

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छह सीटाें से चुनाव लड़े थे राजा साहब चार जीते, दाे पर मिली थी शिकस्त

अनुज कुमार सिन्‍हा

अनुज कुमार सिन्हा, रांची : काेई प्रत्याशी एक चुनाव में चार सीटाें से विजयी हाे जाये, ताे उसकी ...

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लोकतंत्र का अर्थ है संवाद

अजीत रानाडे

भारतीय गणतंत्र की स्थापना के ठीक पहले, नवंबर 1949 में संविधान सभा में दिये गये अपने ऐतिहासिक भाषण ...

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वैश्विक सूचकांकों में भारत

सतीश सिंह

जिनेवा स्थित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा हर साल वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक सूचकांक जारी किया ...

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सेल-प्रधान विश्व करि राखा

चालू विश्वविद्यालय ने सेल विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध इस प्रकार है-सेल-प्रधान विश्व करि राखा, जो जस बेचहू सो तस धन चाखा- कवि कहना चाह रहा है कि विश्व को सेल प्रधान बना दिया गया है, जिसने जैसा बेच लिया, उसे उसी के हिसाब से धन का स्वाद मिल गया है.

टमाटर बेचने में जो ''टशन'' है!

मेरे एक मित्र का टमाटर का बड़ा करोबार है. उसके बाप-दादा भी यही काम किया करते थे. अब बेटा उनके कारोबार को आगे बढ़ा रहा है. टमाटर बेचकर उसने अपनी शानदार कोठी खड़ी कर ली है. एक महंगी कार ले ली है. बच्चे भी शहर के ऊंचे स्कूलों में पढ़ रहे हैं. कुल मिलाकर मित्र की लाइफ टनाटन चल रही है.

17 अक्तूबर, सर सैयद डे : हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े पक्षधर थे सर सैयद

हिंदुस्तान एक खूबसूरत दुल्हन है, हिंदू और मुसलमान उसकी दो आंखें है. उसकी खूबसूरती इसमें है कि उसकी दोनों आंखें सलामत व बराबर रहें.''

हर तरफ हनी-ट्रैपिंग!

कोई बंदा हनीट्रैप हो जाये, तो एक बात है, लेकिन बंदों का सीडी कांड भी हो जाये तो क्या कहने. सीडी कांड की व्याख्या किसी ग्रंथ में नहीं है. सामान्य परिभाषा के अनुसार, ये ऐसा कांड होता है, जिसमें सीडी बनते वक्त फिल्म का नायक फिल्म रिलीज होते ही खलनायक में तब्दील हो जाता है. इस कांड के पश्चात कुर्सी, नौकरी और पत्नी बचाने के लाले पड़ जाते हैं. प्रतिष्ठा के विषय में कुछ सही-सही नहीं कहा जा सकता कि वह कम होती है या बढ़ती है.

रावण क्लब की बैठक

दशहरा की थकावट उतारने के बाद रावण क्लब की सालाना हंगामा बैठक हुई. राक्षस चाहते थे कि उनके हितों के बारे में भी विचार विमर्श हो. अध्यक्ष रावण को सदस्यों ने बताया कि सरकार जनता की भलाई के लिए बहुत काम कर रही है, समाज से बुराई खत्म करने के बेहतर तरीके निकाले जा रहे हैं. एक समय आयेगा जब समाज से बुराई समाप्त हो जायेगी और राम-राज्य स्थापित हो जायेगा. फिर हमारा क्या होगा, हमें भी सरकार खत्म कर देगी.

बेच-बेच कर महाबली बने!

चालू विश्वविद्यालय ने भारत-चीन संबंधों पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है-चीन महाबली देश है, भारत भी महाबली देश है. पर चीन कितना भी महाबली हो जाये, आखिर में उसे पता है कि माल बेचना है. माल बेचना पड़ता है. बड़े-बड़े महाबली कुछ-न-कुछ माल बेचते हुए पाये जाते हैं.

जब गरीब ही नहीं रहेंगे!

सरकार किसी भी दल की हो, पहला काम गरीबी दूर करने का ही करती है. फिर चाहे वह गरीबों को मिटाकर करे या गरीबी का नाम बदलकर. यह अलग बात है कि सत्तर सालों में और जो भी काम हुए हों, पर गरीबी दूर करने का नहीं हो पाया. गरीब हैं ही इतने हठी कि सरकार की एक नहीं चलने देते. फिर भी सरकार कोशिश तो करती ही है और हम उम्मीद करते हैं कि एक न एक दिन वह कामयाब भी अवश्य होगी.

कुल्हड़ की वापसी

पहले दुकानों पर छोटे-बड़े सभी प्रकार के कुल्हड़ दिखते थे. सबसे छोटे कुल्हड़ को कुलिया पुकारते थे. और जब कोई कम चाय देता था, तो कहते थे- अरे चाय ठीक से दो, ये क्या कि कुलिया में पकड़ा दी.

धारा में विचार

चालू विवि ने राजनीतिक विचारधारा विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है- राजनीतिक विचारधारा टॉपिक में तीन शब्द हैं- राजनीतिक, विचार और धारा. राजनीतिक यानी सत्ता, यानी कुरसी, यानी पावर, यानी पेट्रोल पंप, यानी राशन की दुकानें, यानी बड़े ठेके, यानी मौके के प्लाट, जिन रास्तों से यह सब हासिल होता है, उन्हें राजनीतिक रास्ते कहते हैं.

न रोका जाये नदियों का प्रवाह

जब तक फरक्का बैराज नहीं हटता है, तब तक उत्तर बंगाल, झारखंड, उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश बाढ़ से परेशान रहेंगे. बीते एक हफ्ते से हम पटना एवं गंगा के दोनों किनारे बाढ़ देख रहे हैं. फरक्का बैराज गंगा को आगे बहने से रोकता है. इसके 120 फाटकों में 60 से ज्यादा कई वर्षों से बंद पड़े हैं.

उड़ने की आकांक्षा

प्राणी जगत में उड़ने की इच्छा इतनी प्रबल है कि पंछी पंख आने का बेताबी से इंतजार करते हैं. पंखों में बिन ताकत अगर वो उड़ने की कोशिश करते हैं तो गिर पड़ते हैं. मनुष्य चेतनशील प्राणी है इसलिए आकांक्षाओं को जमीन पर उतारने के पहले वह सोचता है कि उसकी उड़ान यथार्थ के धरातल पर है कि नहीं.

एक था मोहन

आप जहां हैं वहीं झूठ की खेती को लहलहाते हुए देख रहे होंगे. आप देख रहे होंगे कि वहां हिंसा का बोलबाला दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है. आप कहते होंगे कि अब संतुलन मुश्किल है. लोग गोली-बंदूक की बात कर रहे हैं और देश एटम बम की बात को हवा में उछाल रहा है.