आलेख

युवा मन को समझने की चुनौती

आशुतोष चतुर्वेदी

ज्ञान की भूमि रही है बिहार की धरती. कौटिल्य, गौतम बुद्ध और आर्यभट्ट की लंबी परंपरा हमारी थाती है. यह ज्ञान-विज्ञान की परंपरा ही है जिस पर हम गर्व करते हैं. इसके केंद्र में हैं युवा और हमारी शिक्षा व्यवस्था. इसमें कोई दो राय नहीं कि अच्छी शिक्षा के बगैर बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती. साथ ही लोकतंत्र को इन्हीं कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने नायक प्रदान किये हैं.

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इस्तेमाल और लत का समझें फर्क

निखिल पहवा

सूचना के लिहाज से हम एक ऐसे दौर में हैं, जहां सोशल मीडिया के जरिये हर पल कुछ न कुछ देखते-पढ़ते या ...

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चीन की विस्तारवादी योजना

डॉ अश्विनी महाजन

श्रीलंका के ‘हंबनटोटा’ बंदरगाह पर कब्जे को पुनः याद करवाते हुए, चीन अब केन्या के अत्यंत लाभकारी ...

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‘उदंत मार्तंड’ की संघर्ष गाथा

कृष्‍ण प्रताप सिंह

आज चार दिसंबर हिंदी पत्रकारिता के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है. कोलकाता से प्रकाशित हिंदी ...

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स्त्री सुरक्षा और आजादी

अनुज लुगुन

अठाहरवीं सदी के बड़े फ्रांसिसी दार्शनिक चार्ल्स फुरिए ने कहा था कि किसी भी समाज में प्रगति और आजादी ...

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