आलेख

युवा मन को समझने की चुनौती

आशुतोष चतुर्वेदी

ज्ञान की भूमि रही है बिहार की धरती. कौटिल्य, गौतम बुद्ध और आर्यभट्ट की लंबी परंपरा हमारी थाती है. यह ज्ञान-विज्ञान की परंपरा ही है जिस पर हम गर्व करते हैं. इसके केंद्र में हैं युवा और हमारी शिक्षा व्यवस्था. इसमें कोई दो राय नहीं कि अच्छी शिक्षा के बगैर बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती. साथ ही लोकतंत्र को इन्हीं कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने नायक प्रदान किये हैं.

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कृषि आय बढ़ाने की हो पहल

देविंदर शर्मा

इस वक्त देश में मुख्यत: मांग घटने और निवेश कम होने की वजह से आर्थिक सुस्ती आयी है. ऐसा माना जा रहा ...

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संवैधानिकता का जश्न मनाया जाए

प्रो फैजान मुस्तफा

छब्बीस जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के वर्षों बाद पहली बार भारत के लोग संविधान से खुद की पहचान ...

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बजट की आहट : कर में राहत देने की जरूरत

सतीश सिंह

राजस्व वसूली के मोर्चे पर सरकार अपेक्षित लक्ष्य हासिल में नाकाम रही है. कॉर्पोरेट कर में उल्लेखनीय ...

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हिंदुस्तान का दिल है संविधान

जस्टिस आरएस सोढ़ी

किसी भी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसके पास एक मजबूत संविधान का होना बहुत जरूरी है. संविधान ...

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