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नये रुझानों का साक्षी बनता बिहार

केसी त्यागी

विगत लोकसभा चुनावों के नतीजों ने बिहार में कई मिथक तोड़े हैं. एक तरफ जहां मतदाताओं ने राष्ट्रीय सवालों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ नये परिवर्तनों की चाहत के लिए नयी जिज्ञासाएं भी पनपी हैं. सात अगस्त, 1990 को जब वीपी सिंह मंडल कमीशन की अनुशंसाएं लागू करने की घोषणा कर रहे थे, उसका बिहार की राजनीति पर कितना दूरगामी असर होगा, इसकी कल्पना न तो उन्हें थी और न ही शायद खुद बीपी मंडल को. बिहार ने पिछले 30 वर्षों में सामाजिक-समानता, जातीय अस्मिता के उत्थान व पतन दोनों को करीब से देखा है.

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अपना घर बचाएं इमरान

कुमार प्रशांत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अब इस नतीजे पर पहुंच गये हैं कि परंपरागत युद्ध में भारत से ...

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हर बाधा को जीत लेते हैं मोदी

प्रभु चावला

एक सच्चा नेता इतिहास का हिस्सा बन भौगोलिक या यहां तक कि खगोलीय सीमाओं से भी ऊपर उठ जाता है. क्या एक ...

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चमकीली होती सोने की चमक

सतीश सिंह

सोने की चमक फीकी पड़ने का नाम नहीं ले रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़कर 1,500 डॉलर ...

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मस्तक ऊंचा रखने का विश्वास

प्रसून जोशी

एक आम भारतीय से यदि आप प्रधानमंत्री और सरकार द्वारा किये गये परिवर्तनों के बारे में पूछें, तो ...

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नाले में मरते नागरिक

सर्वोच्च न्यायालय ने नालों में मरते सफाईकर्मियों के मसले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि कोई भी दूसरा देश अपने नागरिकों को गैस चैंबर में मरने के लिए नहीं भेजता है.

ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे

पिछले दिनों करीब पच्चीस साल के बाद अपने पुराने स्कूल जाना हुआ. वह शहर जहां मैंने अपनी जिंदगी के बेहतरीन साल गुजारे थे. वहां मुझे अपना सबसे प्यारा दोस्त मिला, जिसे मैंने पिछले पच्चीस साल से न देखा था और न ही बात की थी. वह स्कूल के दिनों का मेरा सबसे अच्छा दोस्त था. जब मैं वहां पहुंचा, तो इंसानी रिश्ते का जो एक नया रंग देखा, वह था दोस्ती का रंग.

फिराक की सुधि ले सरकार

अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषा-साहित्य के बड़े व अनोखे विद्वान शख्सियत, जिन्होंने अपनी जन्मभूमि को अपने नाम से जोड़ कर उसे वैश्विक बनाया, उस मशहूर शायर और प्रवक्ता जनाब फिराक गोरखपुरी को देश में वह सम्मान नहीं मिला, जिनके वह हकदार थे और आज भी हैं.

डिजिटल के बाद भी परेशानी

21वीं सदी में डिजिटल दुनिया की ओर कदम बढ़ाना जरूरी हो गया है, परंतु डिजिटल सुविधा ही अगर आम जन को बेहाल, बेदम कर दे, फिर इस सुविधा का क्या कहना. डिजिटलीकरण में एक प्रयोग इपीएफओ द्वारा देश के कॉन्ट्रैक्ट के कर्मचारियों को यूनिवर्सल एकाउंट नंबर से जोड़ना से संबंधित है.

चिन्मयानंद की बढ़ीं मुश्किलें

भारतीय समाज एवं सनातन धर्म में सदियों से साधु संत की इज्जत करने का रिवाज रहा है. साधु संत को ईश्वर के समकक्ष माना जाता है. दुर्भाग्य से पाखंडी लोग धर्म की आड़ में अधर्म का खेल खेलते हुए समाज एवं सनातन धर्म की छवि को खराब कर रहे हैं. नतीजतन कुछ तो जेल में सड़ रहे हैं.

भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं

यह एक जगजाहिर तथ्य है कि कल्याणकारी सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार के कारण लाभुकों तक ठीक से नहीं पहुंच पाती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल से ही शासन-प्रशासन से इस गंभीर व्याधि को उखाड़ फेंकने का संकल्प किया है. पिछले पांच सालों से विभिन्न स्तरों पर इस दिशा में ठोस कार्रवाई और सुधार का सिलसिला जारी है. उदाहरण के रूप में आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर रहे कई अस्पतालों को दंडित करने के मामलों को देखा जा सकता है.

जिस हवा में हम सांस लेते हैं

कक्का कह रहे थे कि कल वे फोन पर अपनी सलहज से बातें कर रहे थे. जब उन्होंने उनसे कहा कि कुछ दिनों के लिए साले साहब को साथ लेकर यहां घूमने आ जाइये.

वाणिज्य संकाय के शिक्षकों के लिए सृजित हों नये पद

सूबे के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की कमी है़ शिक्षकों की नियुक्ति में देरी से परेशानी बढ़ गयी है़ कॉमर्स व मैनेजमेंट संकाय की भी हालत ठीक नहीं है़

पूर्व नियोजित शिक्षकों के लिए दो साल की बाध्यता खत्म हो

2019 के लिए विद्यालयों में नियोजित शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है़ माध्यमिक शिक्षकों की बहाली के लिए आवेदन लिया जा रहा है और प्रारंभिक शिक्षकों के लिए 18 सितंबर से आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू होगी. इस बहाली प्रक्रिया में पूर्व की भांति नियोजित शिक्षकों के लिए भी आवेदन देने की व्यवस्था सरकार की ओर से की गयी है.

बच्चाचोर की अफवाह से बचें, सत्यता की करें जांच

उत्तर भारत के कुछ राज्यों में इन दिनों बच्चाचोर की अफवाह तेजी से फैलती जा रही है. इसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान के अलावा भी अन्य हिंदी प्रदेशों में बच्चा चोरी की अफवाह अधिक फैल रही है़ इसमें दर्जनों की संख्या में बेघर लोगों की पिटाई भीड़ ने कर दी है़

तेल में आग

सऊदी अरब के तेल शोधक कारखाने पर हुए ड्रोन हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 20 फीसदी तक का उछाल आ गया.

कानून लागू करने के फायदे

कानून फायदे के लिए ही बनाया जाता है. यह अलग बात है कि बनानेवाले को ज्यादा फायदा हो रहा है या जिनके लिए बनाया जा रहा है, उनको. कई बार एक बेहतर कानून को कमजोर करने के लिए एक और कानून बनाया जाता है.