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भारत की आत्मा के लिए लड़ाई

मृणाल पांडे

राज्यों के ताजा चुनावी नतीजों से राज्यवार जिस किस्म के आमूलचूल बदलाव की उम्मीद टीवी के पंडितों ने लगा रखी थी, वह नहीं आया. मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ कांग्रेस को वापिस मिल गये, पूर्वोत्तर में मिजोरम और दक्षिण में तेलंगाना को भी क्षेत्रीय दलों ने कब्जे में ले लिया. उधर बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, पहले से ही क्षेत्रीय दलों के पास हैं.

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जन-संस्कृति का त्योहार है होली

Prabhat Khabar

हमारी काॅलोनी के बच्चे प्लास्टिक की पिचकारियां हाथ में लेकर एक-दूसरे के पीछे दौड़ते दिख रहे हैं, ...

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घातक है नफरत की संस्कृति

आकार पटेल

शुक्रवार (15 मार्च, 2019) को रेडियो पर समाचार सुनते हुए मुझे न्यूजीलैंड में हुए नरसंहार के बारे में ...

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हर राज्य में हों कैंसर अस्पताल

Prabhat Khabar

बीते रविवार की शाम गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया. पर्रिकर पैंक्रियाटिक कैंसर से ...

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और अब श्वेत आतंकवाद का उभार

आशुतोष चतुर्वेदी

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 50 लोगों की जान लेने की घटना ने ...

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रेलवे की ठोस पहल

यात्रियों की आवाजाही और सामान ढुलाई के साथ देश के कोने-कोने को जोड़ने में भारतीय रेल की भूमिका धमनी की तरह है. साल 2000 से आंकड़ों को देखें, तो यात्री आवागमन 200 फीसदी और माल ढुलाई में 150 फीसदी का इजाफा हुआ है, यानी देश के विकास को गति देने में रेल यातायात का बड़ा योगदान है.

प्रकृति रंग लुटा रही है!

कक्का खेतों की ओर से घूम कर लौटे ही थे. कह रहे थे कि फागुन का महीना आते-आते प्रकृति लाल, हरे और पीले रंगों में डूबने-उतरने लगती है. उन्होंने सेमल के लाल-लाल फूलों को याद किया और नये निकले हरे पत्तों को भी. उन्हें आमों में अभी-अभी निकले बौर की याद हो आयी. उन्होंने कहा कि किसी भी त्योहार का उत्साह प्रकृति अपने में सकारात्मक बदलाव करके हमें पहले ही दे देती है!

मनमुटाव भुला प्यार बांटने का संदेश देता है होली

होली रंगों का त्योहार है. रंगों का अपना एक अलग महत्व होता है. लेकिन, होली ही एक ऐसा त्योहार है, जिसमें सभी रंग मिलकर इंद्रधनुषी रंग का निर्माण करता है. वह रंग प्यार, खुशी, हर्ष से मिलकर बना होता है. होली आपसी झगड़े, मनमुटाव को भुलाकर सभी को एक रंग में रंगने का संदेश देता है. होली का कई धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व भी है, जिसमें नाचने, गाने व आपस में गले मिलने का अवसर देता है. होली सदियों से दोस्ती में पड़े दरार को एक सूत्र में बांधने का मौका देता है.

भारत में साक्षरता दर वैश्विक स्तर पर 84% से कम

भारत में साक्षरता दर 74.04 (2011) है, जो वैश्विक औसत 84% से कम है. हाल ही में नीति आयोग द्वारा स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया@75 में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये हैं.

मनोहर पर्रिकर की सादगी देशवािसयों के लिए मिसाल

पूर्व रक्षा मंत्री सह गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन से देश की अपूरणीय क्षति हुई है. उनकी सादगी और कार्यकुशलता देशवासियों के लिए सदा मिसाल बना रहेगा. आम जनता के साथ राजनेताओं को भी सीख लेने की जरूरत है कि आपकी पहचान गाड़ियों का काफिला ही नहीं होता. व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने सादा जीवन उच्च विचार को आत्मसात किया तो दूसरी ओर असाध्य बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद कार्यस्थल में देश व समाज सेवा कर कर्मठता का अभूतपूर्व परिचय दिया.

कम होती बचत

आर्थिक स्थिति को पटरी पर बनाये रखने के लिए आमदनी, खर्च और बचत के सही संतुलन का होना जरूरी है. इसी हिसाब से भविष्य के लिए निवेश के लिए भी गुंजाइश बनती है. यह बात किसी परिवार, संस्था और देश पर समान रूप से लागू होती है.

मिथिला की ‘लिखिया कला’

पिछले दिनों राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मिथिला कला की वयोवृद्ध एवं सिद्धहस्त कलाकार गोदावरी दत्त को पद्मश्री से सम्मानित किया. राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से राष्ट्रपति भवन ने गोदावरी दत्त की तस्वीर शेयर करने के साथ ही लिखा कि ‘पारंपरिक कला को बढ़ावा देने, उभरते कलाकारों को प्रशिक्षित करने और मार्गदर्शन के लिए’ उन्हें यह सम्मान दिया गया.

यह कैसी विचारधारा जो रातोंरात बदल जाये?

भारतीय राजनीति एक ऐसे युग में प्रवेश करती जा रही है, जिसका कोई नियम नहीं दिखता. बड़ी संख्या में हो रहे दल-बदल से यह भी पता चल रहा है कि विचारधारा के आधार पर राजनीति करने के नाम पर जनता को बेवकूफ ही बनाया जाता है.

अभिभावक बच्चों पर विश्वास कर स्वरोजगार का दें मौका

हमारे देश की विडंबना देखिए. आज हम सबसे युवा देश हैं और हमारे युवाओं को मौका नहीं मिल पा रहा. न जाने कितने युवा बेरोजगारी की जंजीरों में फंसे हैं.

बिहार के विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी

किसी भी राष्ट्र या राज्य के निर्माण में शिक्षा का अहम योगदान माना जाता है. शिक्षा के अभाव में समाज का विकास असंभव है. बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदतर होती जा रही है. सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के दो लाख से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लगातार वादा किया जाता रहा है.

स्वास्थ्य सेवा की बेहतरी

बीते दो दशकों में स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धियों के बाद भी भारत उन विकासशील देशों में शुमार है, जो स्वास्थ्य सेवा पर बहुत कम खर्च करते हैं.

चुनाव परिणाम तक नागरिक-संहिता

लोकसभा चुनावों की घोषणा हो गयी है, 23 मई 2019 को परिणाम भी आ जायेंगे. चुनाव आयोग ने नेताओं के लिए आचार संहिता लगा दी है, पर नागरिक-वोटर लोकतंत्र में सबसे ताकतवर होते हैं और इसलिए उनमें से कुछ खुद को हर तरह के नियम-कायदों से मुक्त भी मानते हैं.