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पहनावा थोपना समझदारी नहीं

आशुतोष चतुर्वेदी

जाने माने युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल को हाल में दिल्ली के राजीव गांधी चौक, जो कभी कनॉट प्लेस कहलाता था, वहां एक रेस्तरां में जाने से इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उनके कंधे पर गमछा था. साहित्य कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल झारखंड-बिहार से हैं. इस घटना की सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है. इसे इस क्षेत्र की पहचान की लड़ाई से जोड़ कर देखा जा रहा है. उनके समर्थन में बड़ी संख्या में युवावर्ग और साहित्यकार सामने आये हैं. सभी लोगों ने एक स्वर से इस घटना के विरोध में आवाज बुलंद की है. जाने-माने कवि कुमार विश्वास ने कहा- कनॉट प्लेस अंग्रेजों की मानसिकता वाली जगह है.

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राजनीति में दो टर्निंग प्वाइंट्स

रवि भूषण

भारतीय राजनीति में वर्ष 1989 का विशेष महत्व है. तीस वर्ष पहले के उस वर्ष-विशेष की याद आज की राजनीति ...

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प्रदूषित हवा से बचना जरूरी

डॉ नरेश त्रेहन

सर्दियां आते ही हवा में जब नमी आने लगती है, तो वह ऊपर उठने के बजाय बैठने लगती है. अब अगर उस हवा में ...

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मेधा की दुनिया में चमकते सितारे थे वशिष्ठ : हरिवंश

हरिवंश

नयी दिल्ली : लंबे समय से बीमार चल रहे मशहूर गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर राज्यसभा के ...

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बहुराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्रहित की रक्षा

पुष्पेश पंत

रीजनल कॉम्प्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीइपी) बुनियादी तौर पर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का ...

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पेयजल की गुणवत्ता

मुंबई के अलावा तीन महानगरों और 17 राजधानियों में नलों से मुहैया होनेवाले पेयजल की गुणवत्ता ठीक नहीं है. भारतीय मानक ब्यूरो के अध्ययन में दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई का पानी 11 में से करीब 10 कसौटियों पर खरा नहीं उतरा है. रांची, हैदराबाद, भुवनेश्वर, रायपुर, अमरावती और शिमला के नमूने एक या अधिक मानकों पर ठीक नहीं पाये गये हैं, जबकि चंडीगढ़, गुवाहाटी, बेंगलुरु, गांधीनगर, लखनऊ, जम्मू, जयपुर, देहरादून, चेन्नई और कोलकाता समेत 13 राजधानियों का पेयजल किसी भी आधार पर ठीक नहीं पाया गया. पीने के पानी की यह स्थिति जब इन शहरों में है, तो देश के बाकी हिस्से की हालत का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है.

कद्दू कटेगा, कटेगा ना

जहां-जहां गठबंधन सरकारें बनने का डौल जमता है, वहां यही बातें सुनायी देती हैं- कद्दू कटेगा, तो सबमें बंटेगा. उस राज्य में एक पार्टी के नेता लगभग रोते हुए कह रहे हैं- हाय किसान, उई किसान, रे किसान, चुनाव परिणाम आने के बाद बीस दिन के बाद तक 29 किसानों की आत्महत्या की खबर आ गयी है

मोमेंटम पकड़ता ''झारखंड''

उन्नीस वर्ष पहले बिहार से अलग होकर बने झारखंड राज्य की स्थिति शुरुआत में बीमार राज्य जैसी थी. माओवाद एकीकृत बिहार के समय से ही इस हिस्से की तरक्की को रोक रहा था, लेकिन इन वर्षों में हालात बदले हैं.

वशिष्ठ बाबू की उपेक्षा का दंश

हमारी सरकार और हमारा समाज अपने होनहार सपूतों को उनके जीते जी न तो ठीक से पहचान पाता है, न ही उनका उचित सम्मान कर पाता है. महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ. वशिष्ठ बाबू जैसे और भी प्रतिभाएं हमारे देश में ऐसी ही उपेक्षा का दंश झेल रही है.

उच्च शिक्षा का मौजूदा हाल

किसी देश की उच्च शिक्षा की तस्वीर सरकार की शिक्षा में प्राथमिकता को दर्शाती है. जब भी दुनियाभर में बेहतरीन विश्वविद्यालयों की सूची सामने आती है, तो हमें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि उसमें भारत के विश्वविद्यालयों का स्थान क्या है? हाल में जारी ''टाइम्स हायर एजुकेशन रिपोर्ट'' में शीर्ष 300 में भारत का एक भी विश्वविद्यालय शामिल नहीं है.

विकसित देशों के पैंतरे

व्यापार के क्षेत्र में भी अपनी पकड़ व बढ़त बनाये रखने के लिए विकसित देश ऐसे तौर-तरीके अपना रहे हैं, जिनसे विकासशील देशों के वाणिज्यिक हितों को नुकसान हो रहा है.

सर्दी का सुख

सवेरे का समय था. पूरब में लाल सूर्य उदित हो रहा था. लेकिन कुहासे के कारण उसकी छटा ठीक से बिखर नहीं पा रही थी. दाने की खोज में निकली चिड़ियां किल्लोल कर रही थीं. ताजे खिले फूलों पर ओस की बूंदें चमकती हुई दिख रही थीं. सामने के हरसिंगार के पौधे से गिरे हुए फूल नीचे धरती पर जैसे सो रहे थे. जहां तक फूल गिरे हुए थे, लग रहा था कि उतनी दूर की धरती को सजाया-संवारा गया हो!

प्राणघातक रोग से बचे भारत

हाल में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के निराकरण के लिए एक बहुत ही सुखद समाचार पढ़ने को मिला. विज्ञान एवं तकनीक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसद की स्थायी समिति ने कैंंसर की रोकथाम के लिए राज्यसभा के सभापति को अपने कुछ अमूल्य सुझाव दिये हैं, ताकि उस पर अमल करके इस जानलेवा बीमारी से हर साल सोलह लाख मरीजों में से 68 प्रतिशत यानी दस लाख नब्बे हजार के लगभग लोग मौत के मुंंह में चले जाते हैं, उनको बचाया जा सके.

चुनावी मुद्दा बने तकनीकी शिक्षा

बालेंदु शर्मा दाधीच जी का लेख ''क्या चंद्रयान हैकरों का शिकार हुआ'' सचमुच में आश्चर्यचकित करता है कि एक आईटी शक्ति होने के बाद भी हम हैकरों से पार न पा सके.

हर गली में हो फॉगिंग

प्रभात खबर में एक खबर पढ़ी कि देवघर में निगम हर वार्ड में डेंगू से बचाव के लिए फॉगिंग करा रहा है. हालांकि फॉगिंग भी नाम मात्र के लिए हो रही है लगता है.

सराहनीय कृषि सुधार

किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के संकट को दूर करने के लिए सरकार ने किसान उत्पादकों के दस हजार संगठन बनाने का निर्णय लिया है.

नेहरू जयंती : भारत के एक स्वप्नद्रष्टा राष्ट्रनायक

शेख अब्दुल्ला अपनी जीवनी में बताते हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के राष्ट्रीय कवि हफीज जालंधरी ने बातचीत में कहा था कि ‘हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच कोई फर्क है तो नेहरू.