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संविधान संशोधन का अर्थ

रामबहादुर राय

आजकल संविधान को लेकर जो बहस चल रही है, उसके गुण-दोष को छोड़ दें, तो एक अच्छी बात यह है कि संविधान की ओर लोगों का ध्यान गया है. इस बहस से एक बात अच्छी निकलकर कर आयेगी कि अब लोग संविधान के बारे में अधिक से अधिक लोग जान सकेंगे, साक्षर हो सकेंगे और जागरूक हो सकेंगे. दरअसल, इन चीजों को बहुत अभाव था, और अब भी है. पिछले कई सालों से मेरा प्रयास रहा है कि संविधान के प्रति जागरूकता बढ़े और लोग साक्षर हों.

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कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल

विजय कुमार चौधरी

पिछले दिनों कोच्चि (केरल) में आयोजित एक कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कुरियन ...

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संन्यास का फैसला धौनी पर छोड़ें

आशुतोष चतुर्वेदी

महेंद्र सिंह धौनी एक बार फिर सुर्खियों में है. कुछ-कुछ दिनों बाद धौनी चर्चा में आ जाते हैं. भारतीय ...

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संविधान का मूल विचार

अनुज लुगुन

पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश सुर्खियों में था, जिसमें उसने करीब दस लाख से ज्यादा आदिवासियों ...

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पीओके पर फैसले का समय

अवधेश कुमार

थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है कि अगर संसद चाहे, तो पाकिस्तान ...

Columnists

भरोसा बहाल हो

एक पखवाड़े में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति व प्रशासनिक संरचना में बदलाव के छह माह पूरे हो जायेंगे. इस अवधि में कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए किये गये कई उपायों के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है.

रोजगार वाया आंदोलन

वही हुआ जिसका डर था. बिना मान्यता प्राप्त विवि से प्रदर्शन-आंदोलन का कोर्स किये आंदोलनकारी सड़क पर आ गये हैं. देश का कोई नामचीन विवि उस कौशल का पाठ्यक्रम संचालित ही नहीं कर रहा, जिसकी आज अधिक आवश्यकता है.

खाद्य-वस्तुओं को बचाया जाये

आज हर जगह जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण आम बात है. हमारे उपभोग की तमाम चीजों को इस प्रदूषण ने अपनी आगोश में ले लिया है. अनाज, दालों और सब्जियों में आर्सेनिक, यूरिया और पारे की खतरनाक स्तर में मौजूदगी मनुष्य जीवन पर गहरे आसन्न संकट की तरफ इशारा करती है.

आगामी बजट से हमारी उम्मीदें

इस समय हमारे देश के करोड़ों लोग वित्त वर्ष 2020-2021 के लिए पेश होनेवाले आम बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस बजट में देश में चल रही आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा, इस बात की उम्मीद है.

एक शांतिपूर्ण समाज बनें हम

भारत को 73 देशों की वैश्विक सूची में ''रहने लायक देश'' के लिहाज से 25वां स्थान मिला है. साल 2018 में थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत महिलाओं की सुरक्षा के लिए विश्व में सबसे ''असुरक्षित'' और ''खतरनाक'' देश है. नन्हें बच्चों को पौष्टिक आहार व दवाइयों से सुरक्षा देने के मामले में भारत की स्थिति अफ्रीकी गरीब देश केन्या तथा इजिप्ट से भी बुरी है.

स्वास्थ्य में निवेश

भारत उन देशों में शामिल है, जहां स्वास्थ्य के मद में सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के अनुपात में सबसे कम खर्च किया जाता है. हमारे देश में यह आंकड़ा सवा फीसदी के आसपास है.

एक युद्ध बड़ा सुंदर-सा

मध्य-पूर्व के इलाके में तनाव-ईरान इराक में उठापटक. सायरन, जलती-बुझती रोशनियां, मिसाइल, धमाके- ये सब टीवी स्क्रीन पर भले ही उत्तेजक लगते हैं, पर ये हैं तबाहकारी. यह बात मैंने अपने एक टीवी पत्रकार मित्र से कही. पर वह कुछ खुश न हुआ.

डॉक्टरों को लाभ व हानि से प्रेरित नहीं होना चाहिए

डॉक्टर में लोगों को भगवान का रूप नजर आता है. दरअसल यह पेशा सिर्फ लाभ हानि से प्रेरित नहीं होता, बल्कि इसमें सेवा और समर्पण की भावना निहित होती है. बिना सेवा व समर्पण के न तो कोई डॉक्टर मरीजों के साथ न्याय कर सकता है और न ही ख्याति अर्जित कर सकता है, पर इन दिनों नयी तरह की समस्या देखने को मिल रही है.

जल के प्रति जिम्मेदारियों का एहसास कराना होगा

नल जल योजना का दुरुपयोग हो रहा है. कई गांव ऐसे हैं, जहां नल का पानी ऐसे ही बर्बाद हो रहा है. किसी नल की टोटी नहीं है, तो कोई खुला छोड़ दिया गया है. कहीं रास्ते के किनारे पाइप के फटे रहने से हजारों लीटर पानी ऐसे ही बर्बाद हो जाता है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है.

बेरोजगारों की बढ़ती संख्या देश की प्रगति में बाधक

आज हमारे देश में बेरोजगारी काफी बढ़ गयी है. खासकर बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में बेरोजगार युवक-युवतियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. बेरोजगारी की बढ़ती समस्या निरंतर हमारी प्रगति, शांति और स्थिरता के लिए चुनौती बन रही है. देश के अधिकांश युवा आज नौकरी की तलाश में भटक रहा है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में किसानों से ज्यादा बेरोजगारों ने आत्महत्या की है.

अहम कूटनीतिक जीत

चीन ने न्यूयार्क में बंद कमरे में हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की बैठक में एक बार अपने मुवक्किल पाकिस्तान की ओर से कश्मीर मसला उठाने की कोशिश की. लेकिन बात बनी नहीं और चीनी-पाकिस्तानी गठजोड़ को लगातार तीसरी बार नाकामी हाथ लगी. इसके कुछ देर बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हमें खुशी है कि पाकिस्तान द्वारा फैलाये जा रहे झूठ और निराधार आरोपों को चर्चा के लायक नहीं समझा गया. फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस समेत अन्य 10 देशों ने साफ कह दिया कि यह मामला यहां उठाने की जरूरत नहीं है. कश्मीर, भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है.

नेताओं में एबीसीडीई का गुण!

बहुत साल पहले ‘नेताजी’ शब्द का बड़ा महत्व था. कहीं नेताजी का अर्थ आप सुभाष चंद्र बोस से लगा रहे हैं, तो मुझे क्षमा कीजिये. मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं. मैं आज के नेताजी की बात कर रहा हूं. एक समय था जब ‘नेताजी’ का अर्थ सत्य, अहिंसा, धर्म और न्याय शब्द का पर्याय हुआ करता था. किंतु आज इसके विपरीत काम करनेवाला ही नेताजी कहलाता है.