• प्रभात खबरः 30 वर्ष का सफर!

    आज, प्रभात खबर की उम्र 30 वर्ष हुई. आज ही के दिन, 14 अगस्त 1984 को इस अखबार का पहला अंक (प्रति) छपा था. रांची (तत्कालीन बिहार) से. जिन लोगों ने भी इस छोटी जगह (तब) रांची से अखबार के प्रकाशन की कल्पना की, उनके पास हौसले थे, बड़े सपने थे, देश के इस पिछड़े अंचल में जागरूकता, ज्ञान और बदलाव का माहौल बनाने का जज्बा था

  • हमें याद है वह शुरुआती संघर्ष

    किसी समाचार पत्र को उसकी आयु की दृष्टि से देखा जाये, तो 30 वर्ष यदि ज्यादा नहीं हैं, तो कुछ कम भी नहीं हैं. अत: नियमित रूप से प्रकाशित होते हुए इस मुकाम तक पहुंचना अखबार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. आज जब प्रभात खबर को इस मुकाम पर पहुंचा हुआ पाता हूं, तो बड़ी प्रसन्नता होती है.

  • अन्य अखबारों में ऐसी गंभीरता नही

    मौसम महांति प्रभात खबर की स्थापना के 30 वर्ष पूरे होने पर मुझे जब लिखने को कहा गया, तो मन अतीत की ओर दौड़ पड़ा

  • कोई कमी नजर नहीं आती हम

    पिछले 30 साल से प्रभात खबर पढ़ रहा हूं. इसकी मुख्य वजह यह है कि इसमें बड़ी खबरें भी कम शब्दों में कह दी जाती हैं और सारी सूचना भी मिल जाती है. खबर पढ़ते वक्त उसमें कोई कमी महसूस नहीं आती. यही कारण है कि अन्य अखबारों की अपेक्षा प्रभात खबर में अब तक मेरी रुचि बनी है.

  • सच्चई व विश्वसनीयता का पर्याय

    एक आंदोलन का नाम है. सच्चई का दूसरा नाम प्रभात खबर है. इस अखबार ने 30 साल की यात्र के दौरान कई इतिहास बनाये हैं. कई आंदोलनों को मुकाम तक पहुंचाया है. झारखंड अलग राज्य के निर्माण में इसने जो भूमिका अदा की है. वह किसी से छिपी हुई नहीं है. अलग राज्य निर्माण के बाद इस राज्य में भ्रष्टाचार के जो कीर्तिमान बनाये जा रहे थे, उन्हें रोकने का काम प्रभात खबर ने किया और इसी की देन है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा तक पहुंचे.

  • निष्पक्षता है इसकी पहचान

    अमृत कुमार मेट प्रभात खबर अपने नारे ‘अखबार नहीं, आंदोलन’ को सचमुच चरितार्थ करता है

  • अखबार नहीं, बदलाव का हथियार

    डॉ एचपी नारायण प्रभात खबर समाज को जोड़ने का काम करता आया है

  • लोकतांत्रिक मूल्यों का सजग प्रहरी

    1996 में प्रभात खबर जब पटना से निकलना शुरू हुआ, लगभग तभी से मैं इस अखबार को जानता हूं. बिहार में रहते हुए प्रभात खबर पढ़ता भी रहा. मेरे और मेरे छोटे भाई के मित्र के अलावा कुछ परिचित भी इससे जुड़े हुए थे और अधिकतर आज भी जुड़े हुए हैं.

  • बिना पढ़े रहना मुश्किल होता है

    मैं कब से प्रभात खबर पढ़ रहा हूं, याद नहीं कर पाता. लेकिन वर्ष 1990 से नियमित रूप से अखबार न सिर्फ पढ़ने की, बल्कि उसमें छपनेवाले प्रमुख खबरों व लेखों का स्मरण आज भी तरोताजा है. जब मैंने आरंभिक दिनों में अखबार पढ़ना शुरू किया, तो उस समय नवभारत टाइम्स का पाठक था. लेकिन प्रभात खबर के आने के बाद उसके संपादकीय, संपादकीय पन्नों में छपनेवाले लेखों, राजनीतिक व आर्थिक विश्लेषणों, खेल, व्यापार, मनोरंजन आदि की खबरों ने मुङो प्रभावित किया और मैं प्रभात खबर का नियमित पाठक हो गया. इस बीच नवभारत टाइम्स छपना बंद भी हो चुका था.

  • हिंदी पत्रकारिता को दी नयी ऊंचाई

    हिंदी पत्रकारिता को नया आयाम देनेवाले अखबारों में दिल्ली से प्रकाशित ‘जनसत्ता’ (प्रभाष जोशी के संपादन काल में) के बाद जिन अखबारों का नाम लिया जाता है, उनमें प्रभात खबर का अहम स्थान है. सामयिक विषयों पर सारगर्भित एवं खोजपूर्ण जानकारी देने और पाठकों का विश्वास अर्जित करने में इसका कोई सानी नहीं है.

  • रूप और सामग्री में बदलाव कर हर चुनौती पर विजय पायी

    मैं समाचार पत्रों को युगीन चेतना का दस्तावेज मानता हूं, इसलिए प्रतिदिन सबसे पहले समाचार पत्र पढ़ता हूं. जिन समाचार पत्रों को पढ़ने में ज्यादा समय लगता है, उनमें सबसे प्रमुख ‘प्रभात खबर’ है. इसमें समाचार से ज्यादा विचार महत्वपूर्ण होते हैं. विभिन्न मुद्दों पर आधिकारिक व्यक्तियों द्वारा लिखे गये विचारपरक आलेखों से विभिन्न विमर्शो के आयाम खुलते हैं. कभी-कभी तो ये विमर्शमूलक बहसें कई-कई दिनों तक स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर छायी रहती हैं. ऐसे अवसरों पर ‘प्रभात खबर’ अखबार नहीं, आंदोलन की शक्ल अख्तियार किये होता है. हालिया वर्षो में बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव के कारण लोगों की अभिरुचि में गिराव

  • प्रभात खबर की 30वीं वर्षगांठ : पत्रकारों का काम सिर्फ समाचार देना नहीं है

    प्रख्यात कथावाचक व भाई श्री के नाम से विख्यात श्री रमेश भाई ओझा ने मीडिया को ऐसी शक्ति बताया है, जो विचारों को प्रभावित करती है. प्रभात खबर के 30 वर्ष पूरे होने पर रांची क्लब में गुरुवार को आयोजित प्रभात उत्सव कार्यक्रम के तहत उन्होंने धर्म व पत्रकारिता विषय पर प्रवचन दिया. रांची क्लब के सभागार में शहर के प्रबुद्ध लोगों सहित पत्रकारों ने भाई श्री को सुना.