• आत्मिक शक्ति के विस्तार का महीना है श्रावण

    श्रावण हिंदू कैलेंडर का पंचम माह है, जिसे वर्ष के सर्वाधिक पवित्र मास में से एक माना जाता है. वर्षा ऋतु के इस महीने में तामसी शक्ति का दमन कर सतोगुण से ऐश्वर्य प्राप्ति की कोशिश की जाती है. यह महीना आत्मिक शक्ति के विस्तार के बोध व परमात्मा को जानने का काल है.

  • श्रेष्ठ है सोमवारी पर शिवलिंग-पूजन, जानें पूजा की विधि

    आज श्रावण मास की प्रथम सोमवारी है. सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग पर जलार्पण का विशेष महत्व है. समुद्र मंथन से प्राप्त विष को जगत के कल्याण के लिए पी लेने वाले शिव जी के कंठ को शीतलता प्रदान करने के लिए इस दिन जल का विशेष अर्पण किया जाता है. सोमवार चंद्रमा का दिन है.

  • देवघर : श्रावणी मेले का अर्थशास्त्र : "275 करोड़ के कारोबार का हैं अनुमान

    देवघर : बाबा नगरी की अर्थव्यवस्था को विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले से गति मिलती है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें, तो श्रावणी मेले के दौरान 45 से 50 लाख श्रद्धालु बैद्यनाथ धाम आते हैं. हजारों लोगों को रोजगार देनेवाले इस एक माह के मेले में इस बार करीब 275 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कई सामग्रियों की दरों में बढ़ोतरी होने से 10 फीसदी अधिक कारोबार होने की उम्मीद जतायी जा रही है.

  • शिव के अर्द्धनारीश्वर रूप और भृंगी का रहस्य

    बाबा भोले नाथ की इस आरती से हम सभी परिचित हैं. आरती में प्रयुक्त ‘नंदी’ को तो हम सभी जानते हैं. यह बाबा के वाहन ‘बसहा’ का नाम है, पर ‘भृंगी’ कौन है?

  • सावन खास : हर सोमवारी को करें शिवलिंग की आराधना, परेशानी दूर करने के लिए करें ये उपाय

    सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो अशुभ ग्रहों का दोष कुंडली से जल्द ही दूर हो जाता है. और परिणाम अच्छे मिलने लगते हैं. करियर में सफलता और असफलता के लिए कुडंली में बुध ग्रह को जिम्मेदार माना गया है. नौकरी, बिजनेस और पढ़ाई में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए इस सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर दूर्वा घास चढ़ाएं. इससे करियर संबंधी बाधा दूर हो जाती है.

  • वास्तविकता के साथ जीने की कला सीखना ही है जीवन का सत्य

    कई लोग अपनी आध्यात्मिक प्रक्रियाओं को लेकर बहुत सारी उलझनों से घिरे रहते हैं. वे सोचते हैं कि इन उलझनों से मैं कैसे निबटूं? तो कई बार आशा और निराशा को लेकर लगभग मतिभ्रम की स्थिति में होते हैं. असल में जीवन के प्रति आपका नजरिया कैसा होना चाहिए, आध्यात्मिक मार्ग पर होनेवाली ऐसी ही कुछ उलझनों से उबरने के लिए मार्गदर्शन कर रहे हैं सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव जी.

  • व्रत से होता है आध्यात्मिक लाभ

    हिंदू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है. पूरे श्रावण माह में निराहारी या फलाहारी रहने की अनुमति दी गयी है. इस माह में शास्त्र अनुसार ही व्रतों का पालन करना चाहिए. मन से या मनमानों व्रतों से दूर रहना चाहिए. इस संपूर्ण माह में नियम से व्रत रख कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है.

  • मंगला गौरी व्रत से होती है सुख-सौभाग्य की प्राप्ति, जानें विधि

    सावन के हर मंगलवार को मां गौरी की विशेष पूजा का विधान बताया गया है. यह व्रत मंगलवार को होने के कारण ही मंगला गौरी व्रत के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन गौरी के उपासक को उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इस बार इस व्रत का आरंभ 23 जुलाई, 2019 को मंगलवार के दिन से किया जायेगा.

  • हर काम में रुकावट, पितृदोष तो नहीं! करें ये सरल उपाय

    जीवन में उतार-चढ़ाव तो सामान्य बात है, परंतु पारिवारिक सुख-शांति छिन जाना, उन्नति अवरुद्ध होना, आपसी मन-मुटाव बढ़ जाना आदि बाधाओं के लिए ज्योतिष में अनेक स्थितियां बतायी गयी हैं. इनमें पितृदोष व ग्रहण योग भी हैं. किसी कारण वश पितरों की नाराजगी हमारे लिए आफत बन आती है.

  • हकीक की माला के जप से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव

    ज्योतिष शास्त्र में हकीक पत्थर का बड़ा महत्व है. मान्यता है कि यह जीवन के बड़े-से-बड़े दुखों के पहाड़ को तोड़ने में सक्षम है. कहते हैं हकीक की माला का जप करने से भगवान शिव अति प्रसन्न हो जाते हैं. यह माला फेरने के साथ यदि हनुमान जी के किसी मंत्र का जप किया जाये, तो यह भी लाभकारी है. जो लोग हकीक के बारे में थोड़ी भी जानकारी रखते हैं, उन्हें काले हकीक का महत्व जरूर पता होगा.

  • वास्तविकता के साथ जीने की कला सीखना ही है जीवन का सत्य

    आ ध्यात्मिक मार्ग पर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप किसी विशेष जगह पहुंचने का प्रयत्न न करें, क्योंकि जैसे ही आप कुछ विशेष पाना चाहेंगे, आपका मन ''वह विशेष स्थान'' बनाने लगेगा. आप अपना खुद का निजी स्वर्ग ही बना लेंगे.

  • व्रत से होता है आध्यात्मिक लाभ

    हिं दू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है. पूरे श्रावण माह में निराहारी या फलाहारी रहने की अनुमति दी गयी है. इस माह में शास्त्र अनुसार ही व्रतों का पालन करना चाहिए. मन से या मनमानों व्रतों से दूर रहना चाहिए. इस संपूर्ण माह में नियम से व्रत रख कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है.

  • मंगला गौरी व्रत से होती है सुख-सौभाग्य की प्राप्ति

    सावन के हर मंगलवार को मां गौरी की विशेष पूजा का विधान बताया गया है. यह व्रत मंगलवार को होने के कारण ही मंगला गौरी व्रत के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन गौरी के उपासक को उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इस बार इस व्रत का आरंभ 23 जुलाई, 2019 को मंगलवार के दिन से किया जायेगा.

  • हर काम में रुकावट, पितृदोष तो नहीं!

    जी वन में उतार-चढ़ाव तो सामान्य बात है, परंतु पारिवारिक सुख-शांति छिन जाना, उन्नति अवरुद्ध होना, आपसी मन-मुटाव बढ़ जाना आदि बाधाओं के लिए ज्योतिष में अनेक स्थितियां बतायी गयी हैं. इनमें पितृदोष व ग्रहण योग भी हैं. किसी कारण वश पितरों की नाराजगी हमारे लिए आफत बन आती है. तब ये सारी चीजें घटित होती हैं. वहीं प्रतियोगिताओं में सुयोग्यताएं जब मार खा जाएं, काम बन-बन कर बिगड़ जाए, तो यह ग्रहण है!

  • #ShravaniMela2019 : रघुवर दास ने देवघर में मेला का किया उद्घाटन, सावन के पहले दिन बाबाधाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब

    देवघर/दुम्मा : झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को दुम्मा में श्रावणी मेला का उद्घाटन किया. उन्होंने देश-दुनिया के शिवभक्तों से देवघर आने का आग्रह किया. कहा कि श्रद्धालुओं को यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता और विनम्रता मेला का मूल-मंत्र होगा. उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राजधानी की कल्पना महादेव के बिना निरर्थक है.

  • विशेष: साल का दूसरा चंद्रग्रहण आज, आर्थिक कष्ट संग आनंद रहेगा, इन राशियों के जीवन पर पड़ेगा प्रभाव

    आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा पर इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण लगेगा. चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, धनु राशि और माहेंद्र मंडल में लगेगा. भारत में दृश्य इस ग्रहण से आर्थिक कष्ट के बावजूद लोगों में आनंद रहेगा. राष्ट्र और राजा परस्पर मतभेदों को हल करने की दिशा में अग्रसर होंगे. कई राष्ट्रों के विवादों का हल निकालने की चेष्टा सकारात्मक रूप लेगी.

  • कल लगेगा साल का दूसरा चंद्रग्रहण, 149 साल बाद बन रहा खास संयोग

    कल यानी मंगलवार रात को इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण लगने वाला है. यह चंद्रग्रहण पूरे तीन घंटे लंबा होगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार को तीसरे पहर 4.31 बजे लग जाएगा.

  • व्रतों का खास महीना चतुर्मास

    श्रावण शब्द श्रवण से बना है, जिसका अर्थ है सुनना, अर्थात सुन कर धर्म को समझना. वेदों को श्रुति कहा जाता है, अर्थात उस ज्ञान को ईश्वर से सुन कर ऋषियों ने लोगों को सुनाया था. यह महीना भक्तिभाव और सत्संग के लिए होता है. जिस भी भगवान को आप मानते हैं, आप उसकी पूरे मन से आराधना कर सकते हैं, लेकिन सावन के माह में, विशेषकर भगवान शिव, मां पार्वती और श्रीकृष्णजी की पूजा का काफी महत्व है.

  • गुरु के ज्ञान व आशीर्वाद से जीवन में आती है श्रेष्ठता

    पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था, ऐसी मान्यता है. वे हमारे आदिगुरु माने जाते हैं. गुरु पूर्णिमा का यह प्रसिद्ध त्योहार व्यास जी की जयंती के रूप में मनाने की परंपरा है. इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं.

  • कब बनते हैं भूमि एवं भवन के योग

    उत्तम भवन प्राप्त करना हर व्यक्ति के पहचान का पर्याय है. आज भी आधी से अधिक आबादी किराये के मकान में ही रहती है. कुछ लोग पैसा रख कर भी मकान नहीं बना पाते, तो कुछ लोगों का पैसा जमीन एवं मकान में फंस जाता है. महान ज्योतिष के ग्रंथ इनका पूर्ण विश्लेषण करते हैं एवं सार्थक उपायों की विवेचना करते हैं. कुंडली के बारह भावों में चौथा भाव, चौथा से चौथा अर्थात सप्तम भाव, इनके कारक चंद्रमा तथा शुक्र से गृह सुख का आकलन किया जाता है.

  • कैसा हो घर का मंदिर

    किसी भी घर में भगवान के मंदिर की अपनी एक विशेष जगह होती है. वास्तु के अनुसार घर के मंदिर को स्थापित करने व सजाने में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. वास्तु कहता है कि घर में मंदिर स्थापित करने के लिए सबसे शुभ स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा होती है.

  • देवशयनी एकादशी आज, अगले चार माह तक मांगलिक कार्यों के लिए नहीं है मुहूर्त

    आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है. आज के इस दिन को देवशयनी एकादशी कहते हैं. इसे ''योगनिद्रा'' या पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.

  • श्रावणी मेला : देवघर में ‘कामना लिंग’ के दर्शन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, यहां ऐसे पहुंचे थे भगवान भोलेनाथ

    द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नवम ज्योतिर्लिंग हैं बाबा बैद्यनाथ. बाबा बैद्यनाथ का विश्वविख्यात मंदिर झारखंड के देवघर जिला में स्थित है. कहते हैं कि यहां आने वाले भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. इसलिए इस शिवलिंग को ‘कामना लिंग’ कहा जाता है. कहते हैं कि बाबा भोलेनाथ अनाथों के नाथ हैं. वह औढ़र दानी कहे जाते हैं. श्रद्धापूर्वक जो भी इनके द्वार पहुंचता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कुछ लोग यहां अपनी मनोकामना मांगने आते हैं, तो कुछ अपनी मनोकामनापूर्ण होने पर शिव का आभार प्रकट करने.

  • श्रावणी मेला 2019 की तैयारी : बाबा मंदिर परिसर के सुविधा केंद्र में बनेगा अस्थायी ट्रॉमा सेंटर

    देवघर : श्रावणी मेले में देवघर आने वाले श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा देने के लिए बाबा मंदिर के समीप सुविधा भवन (पाठक धर्मशाला) में 10 बेड का अस्थायी ट्राॅमा सेंटर खोला जायेगा. बाबा मंदिर व आसपास के क्षेत्र में अगर कोई बड़ा हादसा या दुर्घटना होती है, तो ट्राॅमा सेंटर में मरीजों का बेहतर इलाज किया जायेगा.

  • झारखंड का विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 17 से, सवा सौ साल बाद बन रहे कई संयोग...

    देवघर : विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला इस बार कई संयोग लेकर आ रहा है. लगभग सवा सौ साल बाद सावन माह में इस बार 17 जुलाई को पूर्णिमा व संक्रांति तिथि के अनुसार सावन प्रारंभ हो रहा है. इस दिन सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत होगी. इस दिन वज्र और विष कुंभ योग का संयाेग है. सावन में चार सोमवार पड़ेंगे. इसके अलावा रक्षा बंधन व स्वतंत्रता दिवस भी एक ही दिन होगा. एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग माना जा रहा है.

  • Rath Yatra : यहां भगवान को मौसीबाड़ी पहुंचने में लग जाते हैं दो दिन...

    सरायकेला : प्रभु जगन्नाथ को कलयुग में जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु का अवतार माना जाता है. प्रभु जगन्नाथ साल में एक बार रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हुए अपने जन्मस्थान गुंडिचा जाते हैं. इसे रथ यात्रा, गुंडिचा यात्रा या घोष यात्रा कहा जाता है. गुरुवार को इस वर्ष प्रभु जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी गुंडिचा मंदिर के लिए चल पड़े हैं. 12 जुलाई को भाई-बहन के साथ श्रीमंदिर लौटेंगे.

  • रांची में रथ मेला का इतिहास : एनीनाथ शाहदेव ने 1691 में जगन्नाथपुर मंदिर का कराया था निर्माण, देखें PICS

    रांची : झारखंड की राजधानी रांची का जगन्नाथपुर मंदिर पुरी की तरह ही रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है. जगन्नाथपुर मंदिर के संस्थापक के प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी लाल प्रवीर नाथ शाहदेव ने बताया कि 1691 में बड़कागढ़ में नागवंशी राजा ठाकुर एनीनाथ शाहदेव ने रांची में धुर्वा के पास भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था.

  • कल लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, भारत में प्रभाव नहीं लेकिन राशियों पर पड़ेगा असर

    आषाढ कृष्ण पक्ष अमावस्या यानी दो जुलाई 2019 मंगलवार को सूर्य ग्रहण लगेगा. इस दिन साल