• पूरे उत्साह के साथ भविष्य की ओर बढ़ें

    नव वर्ष उत्सव का समय है. सच्चे उत्सव के दो पहलू हैं- पहला है, धन्यवाद देने के लिए उत्सव मनाना, जो दिव्यता के प्रति आभार और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है और दूसरा है, भूतकाल को भुलाते हुए आगे बढ़ते रहना; यह समझ लेना कि जीवन शाश्वत है. इस नव वर्ष का स्वागत किसी एक या दोनों ही पहलुओं के साथ करें.

  • सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण बातें

    वि वाह किसी जातक के जीवन में खुशियां भर देता है, तो कहीं बड़े दुख का कारण भी बन जाता है. ऐसा क्यों होता है? कहीं जो सावधानियां जातक को विवाह तय करने में रखनी चाहिए उन्हें वह अनदेखा कर देता है या उनसे अनभिज्ञ तो नहीं है? वैवाहिक जीवन में सफलता के लिए कुंडली मिलान के साथ-साथ कुछ आवश्यक जानकारियां हमारे शास्त्र में हैं, जिसका अवश्य ही पालन करना चाहिए.

  • जानें महाभारत काल से मकर संक्रांति का क्या है कनेक्शन, गरीबों को दें दान मिलेगा पुण्‍य

    इस बार भी 15 जनवरी बुधवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का मकर राशि में आगमन 14 जनवरी मंगलवार की मध्य रात्रि के बाद रात 2 बजकर 7 मिनट पर हो रहा है. मध्य रात्रि के बाद संक्रांति होने के कारण पुण्य काल का मान ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक होगा.

  • इस मकर संक्रांति कार्टून कैरेक्टर पतंग की मांग सबसे अधिक, आकाश में दिखेंगे पब्जी, डोरेमोन, बार्बी डॉल

    रांची : दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का त्योहार हो और पतंगों की बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता. मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा प्राचीन है. इस दिन क्या बच्चे-क्या बड़े सभी पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं.

  • मकर संक्रांति कल: जानें सर्वोत्तम काल जिसमें आप कर सकेंगे स्नान और दान पुण्य

    दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा. इस संबंध में पंडित एके मिश्रा बताते हैं कि माघ मास कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 15 जनवरी 2020 को पूर्वाह्न 02:22 बजे (रात्रि 02:22 बजे)पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र ,सौभाग्य योग, तैतिल करण, चंद्रराशि सिंह एवम् वृश्चिक लग्न में सूर्य देव का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ ही धनु खरमास समाप्त हो जाएगा.

  • आस्था का केंद्र है पलामू के बृद्धखैरा का वेणुगोपाल मंदिर, 1956 से मकर संक्रांति पर लग रहा है मेला

    पांडू (पलामू) : झारखंड के पलामू जिला के पांडू के बृद्धखैरा में स्थित वेणुगोपाल मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर पांच दिवसीय मेला का आयोजन होता है. मेला कमेटी के सदस्य एक महीना पहले ही तैयारी शुरू कर देते हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर परिसर में 14 जनवरी, 1956 से मकर संक्रांति के अवसर पर मेला लग रहा है.

  • मकर संक्रांति 2020 : हजारीबाग के बरकट्ठा में 14 जनवरी से होता है सूर्यकुंड मेला का शुभारंभ

    बरकट्ठा : झारखंड में हजारीबाग जिला के बरकट्ठा प्रखंड स्थित सूर्यकुंडधाम में मकर संक्रांति के पर्व पर हर साल 14 जनवरी को सूर्यकुंड मेला लगता है. प्रकृति का अनुपम उपहार गर्म जल का कुंड चर्म रोगियों के लिए चिकित्सीय वरदान है. सूर्यकुंडधाम धार्मिक आस्था के साथ भू-गर्भ विज्ञान और पर्यटन के लिए धरोहर है. यहां अनवरत गर्म जल निकलता रहता है.

  • पलामू का भीम चूल्हा जहां 75 साल से मकर संक्रांति के मौके पर लगता है मेला

    मोहम्मदगंज (पलामू) : पलामू में धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से मोहम्मदगंज का भीम चूल्हा काफी महत्वपूर्ण है. इस स्थल का जुड़ाव महाभारत काल से बताया जाता है. उसके अवशेष आज भी इस स्थल पर मौजूद हैं. कहा जाता है कि मोहम्मदगंज में कोयल नदी के पास भीम का बनाया एक चूल्हा है. भीम ने तीन चट्टानों से यह चूल्हा बनाया था. हर वर्ष इसे देखने के लिए मकर संक्रांति के अवसर पर हजारों लोग आते हैं.

  • #MakarSankranti2020: 15 को मकर संक्रांति, जानें किस राशि पर पड़ेगा क्या प्रभाव

    इस साल दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा. 15 को प्रातः 07 बजकर 54 मिनट से भगवान भास्कर मकर राशि मे प्रवेश कर जाएंगे. इसलिए मकर संक्रांति का खिचड़ी का प्रसिद्ध पर्व इसी दिन ही मनाया जाएगा. इसका पूण्यकाल सूर्यास्त तक रहेगा. सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे एवं खरवास समाप्त हो जाएगा.

  • हमें कर्म की प्रेरणा देते हैं भुवन भास्कर

    मकर संक्रांति कभी पूस में, तो कभी माघ महीने में आती है, इसलिए पश्चिम बंगाल एवं बंगलादेश में ‘पौष संक्रांति’ तो नेपाल में ‘माघे संक्रांति’ तथा पंजाब में ‘माघी’ के नाम से जानी जाती है. वस्तुतः मकर संक्रांति से भगवान भास्कर उत्तरी गोल जाने के लिए उत्तरायण हो जाते हैं. यह देवताओं का प्रभात काल है. चूंकि उत्तरायण में दिन बड़ा होने लगता है, मौसम अनुकूल होता है, अत: शादी-ब्याह, यज्ञ-यात्रा के लिए इसका माहात्म्य बढ़ जाता है.

  • नवीन तकनीक के विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ है पूर्व दिशा

    सद्गुरुश्री स्वामी आनंद जी ज्योतिषीय सवाल-जवाब पर आधारित यह नया कॉलम आपकी समस्याओं का समाधान बतायेगा.

  • किन कारणों से संतान सुख में आती हैं बाधाएं

    कुं डली के बारह भाव में लग्न एवं चंद्रमा से पंचम भाव एवं इसके कारक ग्रह गुरु से देखा जाता है. यह भाव पिछले जन्म में किये गये कर्मों का भी है. संतान इन्हीं शुभ कर्मों का प्रतिफल है. लेकिन पूर्व जन्म में किये अपराध संतान सुख में बाधा उत्पन्न करते हैं. जैसा कि मानस में वर्णन है, राजा दशरथ संतान के लिए व्याकुल हो जाते हैं, वहां गुरु वशिष्ठ उन्हें धैर्य देते हैं-

  • इस उपाय से दूर होती हैं रोजगार संबंधी परेशानियां

    कई लोग अपने काम-धंधे, रोजगार से नाखुश रहते हैं. उन्हें आये दिन तरह-तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है. जबकि कई लोग मजे से जीविकोपार्जन करते हैं.

  • पंचांग के अनुसार जानें वर्ष 2020 के शुभ मुहूर्तों के बारे में

    1. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 2. अक्षय तृतीया, 3. दशहरा, 4. दीपावली (सायंकाल के बाद दीप प्रकाश में). उपरोक्त मुहूर्तों को अबूझ मुहूर्त कहते हैं. इन मुहूर्तों में कोई भी काम शुरू करने पर विजय प्राप्ति होती है. लेकिन विवाह आदि कार्य के लिए पंचांग मुहूर्तों को ही मानें.

  • नववर्ष 2020 : जानें क्‍या कुछ बदल देगा शनि का गोचर, भय के पर्याय नहीं कर्मफल दाता हैं शनि

    नये वर्ष 2020 में 24 जनवरी की दोपहर 12:04 मिनट पर शनि का गोचर यानी गृह परिवर्तन होने जा रहा है, जो ज्योतिष के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण घटना होगी. इसके बाद धरती पर बहुत कुछ बदल जायेगा. इसके फलस्वरूप कुंभ राशि के लोग शनि के साढ़ेसाती के असर में आ जायेंगे, वहीं मिथुन और तुला राशि के लोग अढ़ैया के जाल में फंसकर फड़फड़ायेंगे. यह वर्ष राजनीतिक और वैचारिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है. मगर कौन है यह शनि और क्यों है इनका इतना आतंक? शनि के गोचर से आपके लिए क्या कुछ बदल जायेगा? इसकी गहन पड़ताल कर रहे हैं सदगुरुश्री के नाम से प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सदगुरुश्री स्वामी आनंदजी.

  • नववर्ष 2020 : जानें ज्योतिष में क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं शनि

    भारतीय ज्योतिष में सौरमंडल के नौ ग्रहों का प्रभाव सृष्टि पर पाया गया है, जिसमें से राहू और केतु छाया ग्रह हैं. छाया ग्रह से तात्पर्य गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) और ब्रह्मांडीय आकर्षण (Levitation) अर्थात उत्तोलन से है. विज्ञान बचे सात ग्रहों में से सिर्फ़ पांच को ही ग्रह मानता है. वह सूर्य को तारा और चंद्रमा को धरती का उपग्रह कहता है.

  • इस ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली बल है प्रेम

    जीसस का अर्थ है- प्रेम. यदि आप प्रेम कहते हैं, तो आपको जीसस कहने की आवश्यकता नहीं है और यदि आप जीसस कहते हैं, तो इसका अर्थ है-प्रेम. जीसस ने एक बार कहा था- ''''यदि तुम ईश्वर को मेरा नाम लेकर पुकारोगे, तब तुम जो भी मांगोगे, वह तुम्हें मिल जायेगा''''. ईश्वर के लिए सब कुछ प्रेम है. आप जीसस में प्रेम की पूर्ण अभिव्यक्ति पायेंगे. कोई भी छोटी-सी झलक, जो आपको यहां-वहां मिलती है, यह दर्शाती है कि जीवन उस पूर्णता, अव्यक्त की उस परम अभिव्यक्ति को, हर समय अभिव्यक्त करने का प्रयास कर रहा है.

  • वास्तु टिप्स : घर में इन टूटी-फूटी चीजों के होने से रूठ जाती हैं लक्ष्मी

    घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए वास्तुशास्त्र में कई नियम बताये गये हैं. आजकल सभी के घरों में कुछ न कुछ वस्तुएं टूटी-फूटी मिल ही जाती है, जो बेकार होती हैं.

  • #solareclipse: साल का आखिरी सूर्यग्रहण, लोगों ने देखा अद्भुत नजारा, पीएम मोदी ने किया ये ट्वीट

    नयी दिल्ली : इस साल का तीसरा व आखिरी सूर्यग्रहण पौष कृष्ण अमावस्या के दिन यानी आज लगा. देश के कई जगहों से गुरुवार को सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिला और हजारों लोगों ने इसका लुत्फ उठाया. धार्मिक मान्यता के कारण सूर्य ग्रहण के दौरान राज्य में कई मंदिर बंद रहे. देश के विभिन्न हिस्सों में साल का आखिरी सूर्य ग्रहण साफ दिखाई दिया. हालांकि कई जगहों से मिली खबरों के अनुसार वहां बादल छाए होने के कारण ग्रहण अच्छी तरह दिखाई नहीं दिया.

  • इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण कल

    रांची : खंडग्रास सूर्यग्रहण गुरुवार को लगेगा. यह इस साल का अंतिम ग्रहण होगा. इसकी शुरुआत वाराणसी पंचांग के अनुसार रांची में सुबह 8:22 बजे होगी अौर 11.22 बजे इसका मोक्ष होगा. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में यह ग्रहण सुबह 8 बजे से शुरू होकर 10़ 57 बजे तक रहेगा. राज्य में तीन घंटे तक ग्रहण का असर रहेगा. हालांकि ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जायेगा.

  • दान एवं विनम्रता ही यीशु के जन्मोत्सव का संदेश

    बेल्जियम में एक भारतीय व्यक्ति मित्र को क्रिसमस कार्ड भेजने हेतु कार्ड की खोज कर रहा था. उसने लोगों से पूछा कि मुझे वैसा ही क्रिसमस कार्ड चाहिए, जिसमें प्रभु यीशु का चित्र हो. लोगों के पास जवाब नहीं था. क्रिसमस कार्ड तो हर जगह उपलब्ध थे, पर उसमें यीशु गायब थे. कार्ड में सांता क्लॉज हैं, क्रिसमस ट्री, रेनडियर है, स्नो है, सिल्वर बेल्स, जिंग्लस बेल्स हैं, लेकिन यीशु मसीह, पवित्र परिवार आदि दृश्य हाशिए पर चले गये हैं.

  • सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इन नियमों का रखें ध्यान

    आपने देखा होगा कि कई घरों में तमाम अभावों के बावजूद दाम्पत्य जीवन बढ़िया चलता है, जबकि कई ऐसे भी घर हैं, जहां छोटी-छोटी बातों पर कलह का वातावरण रहता है. वास्तुशास्त्र में सुखी दाम्पत्य के कुछ नियम बताये गये हैं. नवदंपती का बेडरूम उत्तर-पश्चिम के क्षेत्र में वायव्य कोण की ओर होना चाहिए. पति-पत्नी को दक्षिण-पूर्व की ओर सोना चाहिए. दक्षिण-पूर्व दिशा में शुक्र का आधिपत्य एवं अग्नि का वास होता है.

  • जीवन में संपूर्ण सुख का नाम है ईश्वर

    विश्व के महान आध्यात्मिक गुरु में से एक परमहंस योगानंद जी किताब ''मानव की निरंतर खोज'' में लिखते हैं कि मानव जाति ''कुछ और'' की निरंतर खोज में व्यस्त है, जिसमें उसे आशा है कि संपूर्ण एवं असीम सुख मिल जायेगा.

  • चांद्र मास व सूर्य के संचरण से बनता है सौर मास

    खगोल स्वयं में विज्ञान है. आकाश में टिमटिमाते तारों की बाह्य -अंत: प्रवृत्तियों का बिना वैज्ञानिक यंत्रों का अध्ययन कर हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले अनेक खगोलीय रहस्यों का उद्घाटन कर दिया था, जिसे हम ज्योतिष विद्या के नाम से जानते हैं.

  • समस्त सृष्टि के मूल हैं प्रकृति-पुरुष, दांपत्य में पुरुष बाहरी कवच, तो स्त्री आंतरिक कवच

    दीया के बिना बाती का और बाती के बिना दीये का क्या वजूद? ठंडे तार के बगैर गरम तार और गरम तार के बगैर ठंडे तार से क्या विद्युत धारा प्रवाहित होकर रोशनी फैला सकती है? बायें हाथ के बिना दायां हाथ और दायें हाथ के बिना बायां हाथ कितना कर सकता है? दिल के बिना दिमाग रोबोट मात्र हो जायेगा, तो दिमाग के बिना दिल मूढ़ हो जायेगा. समाज में भी किसी को कम आंकना बेमानी होगी. इसलिए ईश्वर ने नर बनाया, तो नारी भी बनायी. दोनों को मूल्य दिया, महत्ता दी. इसलिए तो सृष्टि दो की देन है. इसी को अविनाभाव भी कहते हैं.

  • पर्व त्योहार : मोक्ष का द्वार खोलती है मोक्षदा एकादशी

    मो क्षदा एकादशी का महत्व हिंदू सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है. मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत करने से मनुष्यों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.

  • पतित पावन हैं गोविंद, इनके सुमिरन में जीने से नष्ट होते हैं सारे कर्मबंध

    गुरु तेगबहादुर जी गुरु सिक्खी परंपरा के नवें गुरु हैं. वे छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी के सुपुत्र हैं. आठवें गुरु हरकिशन जी मात्र आठ वर्ष की अवस्था में अपना शरीर छोड़ते समय संकेत दे गये थे कि अगले गुरु गुरद्वारा बाबा बकाला साहिब में होंगे. लेकिन बकाले में 22 दावेदार प्रकट हो गये. इस बीच, एक व्यापारी था- माखनशाह. जहाज लेकर समुद्र में था कि तूफान आ गया. जहाज डूबने लगा और उसने अपने गुरु से प्रार्थना की कि अगर मेरा जहाज बच गया, तो संगत को पांच सौ स्वर्ण असर्फियां दूंगा. माखनशाह जब आया तब तक आठवें गुरु विदा हो चुके. उसे बताया गया कि अगले गुरु बकाले में प्रकट होंगे. बकाले पहुंचने पर उसने देखा कि 22 लोग अपनी गद्दी लगाये बैठे हैं.

  • रामचरित मानस पाठ से परिवार में होता है सुख का वास

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम व जनकपुत्री जानकी का विवाह मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को हुआ था. इस बार विवाह पंचमी 1 दिसंबर को मनायी जायेगी. इसका उल्लेख श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने किया है. इस पर्व को भारत के साथ-साथ नेपाल में भी प्रमुखता से मनाया जाता है, क्योंकि वहीं माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर है.

  • ग्रहों के योग से बदलता है मानव स्वभाव

    मानव स्वभाव कभी स्थिर नहीं रहता. वह हमेशा बदलता रहता है. ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की बदलती स्थिति के कारण मानव स्वभाव और कर्म भी बदल जाता है, किंतु गोचर में ग्रहों की चाल में परिवर्तन मनुष्यों के कर्मगत स्वभाव को भी बदल देता है. ज्योतिष में कर्म का भाव दशम है, उस पर बैठने तथा दृष्टि रखने वाले ग्रहों पर निर्भर करता है कर्म. कर्म स्थान से नवम यानी छठा भाव या चंद्रमा से दशम से कर्म का प्रारंभ, रुचि, भाग्य उन्नति आदि के विषय में जानकारी मिलती है.

  • खाटू धाम में श्री श्याम प्रभु के नाम से पूजे जाते हैं महादानी बर्बरीक

    पांडव कुल शिरोमणी मोर्वी कुमार वीर बर्बरीक श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय थे. स्कंद पुराण में उल्लेखित आख्यान के अनुसार पांडव पुत्र भीमसेन कुमार घटोत्कच अपने पुत्र बर्बरीक के साथ द्वारका में यदुवंशियों की सभा में पहुंचे.

  • उत्पन्ना एकादशी पर दीप दान से दूर होता है अकाल मृत्यु भय

    वर्ष में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. इन एकादशियों पर व्रत रखने का खास महत्व माना जाता है. लेकिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आनेवाले उत्पन्ना एकादशी की इनमें प्रमुखता है. मान्यता है कि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था. इस बार यह एकादशी 22 नवंबर को पड़ रही है. उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों के बराबर माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु एवं एकादशी माता की पूजा का विधान है.

  • फलित ज्योतिष में क्या हैं युतियां एवं चुनौतियां

    लग्नशोधन, ग्रहबल,भावबल एवं षडबल- कुंडली के निर्धारण में क्रमबद्ध तरीकों से विवेचना अति महत्वपूर्ण है. यह जीवन मीठी कहानियों का संग्रह ही नहीं है, बल्कि कठिनाइयों का पहाड़ भी है.

  • कार्तिक पूर्णिमा: नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहें हैं श्रद्धालु, जानें इसका महत्व और पूजा विधि

    आज कार्तिक पूर्णिमा है. आज दान करने का अलग महत्व है. इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. नदियों और तालाबों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है.

  • 550वां प्रकाशपर्व पर विशेष : सुल्तानपुर लोधी, जहां हैं गुरु की अहम निशानियां

    देश-विदेश में गुरु नानक देव जी का 550 साला जनम दिहाड़ा मनाया जा रहा है. करतारपुर कॉरिडोर तो चर्चा में है ही, सुल्तानपुर लोधी में भी देश-विदेश से लोगों का जमावड़ा हो रहा है. पूरा नगर सज-धज कर तैयार है. शहर की दीवारों पर गुरु लीला के चित्र बना दिये गये हैं, लोगों के रुकने के लिए सरकारी व्यवस्था के अलावा आस-पास के लोगों ने भी अपने कमरे सेवा के लिए तैयार किये हैं. पूरे शहर के आस-पास लंगर लग रहे हैं.

  • प्रकाश पर्व : मानवता के पुंज गुरु नानक देव जी

    हर व्यक्ति जीवन में सुख-शांति की लालसा रखता है, परंतु उसे पाने के लिए उसके कार्य-कलाप विपरीत दिशा में चलते हैं. परिणामत: वह दुख की बेड़ियों में ही जकड़ा रहता है. गुरुनानक जी का कथन है-

  • प्रकाश पर्व पर विशेष : मन रे, नाम जपहु सुख होई

    मन के कोने-कोने को स्नेहभरी वाणी से उजागर करने वाले गुरुनानक देवजी का इस धरा पर आगमन कार्तिक पूर्णिमा, सन 1469 को आज से 550 वर्ष पूर्व हुआ. भारत का जनमानस उस समय जाति-पांति, कुरीतियों, कुप्रथाओं, आडम्बरों, अंधविश्वासों, छुआछूत जैसी बेड़ियों में जकड़ा हुआ था. ऐसे में जनमानस के जीवन में एक प्रकाश-पुंज का आगमन किसी वरदान से कम नहीं था, जिसने उन्हें इन बेड़ियों से मुक्ति दिलायी.

  • कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थल

    यह मंदिर अयोध्या में राम की पैड़ी पर स्थित है. कहा जाता है कि इस मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था. विक्रमादित्य के समय तक यह मंदिर अच्छी स्थिति में था. वर्तमान के नागेश्वर नाथ मंदिर को 1750 में सफदर जंग के मंत्री नवल राय ने बनवाया था. शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में बड़े उत्सव का आयोजन किया जाता है.

  • देवुत्थान एकादशी आज: पढ़ें इसका महत्व, जानें पूजा विधि

    देवप्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवुत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष देवप्रबोधिनी एकादशी 8 नवंबर को यानी आज मनायी जा रही है. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं.

  • अक्षय नवमी आज, आंवले की पूजा से मिलेगा महा वरदान, उत्तम स्वास्थ्य की होगी प्राप्ति

    पटना : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी मंगलवार को अक्षय नवमी मनायी जायेगी. मान्यता है कि अक्षय नवमी पर किये जाने वाले पुण्य व उत्तम कर्म कभी नष्ट नहीं होते. दैवज्ञ श्रीपति त्रिपाठी बताते हैं कि अक्षय नवमी के दिन ही त्रेता युग का आरंभ हुआ था. इस दिन कुष्मांड यानी कुम्हड़े (भतुआ) का दान महत्वपूर्ण माना गया है. माना जाता है कि नवमी तिथि को श्रद्धापूर्वक आंवले के नीचे भगवान विष्णु का पूजा कर भतुआ का दान करने से निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है तथा व्याधियां दूर होती हैं.

  • आठ नवंबर को देवोत्थान एकादशी व तुलसी विवाह, शुरू होंगे रुके हुए शुभ कार्य

    पटना : कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 08 नवंबर (शुक्रवार) को देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह व्रत मनाया जायेगा. इस दिन भगवान नारायण लगभग चार महीने बाद शयन से जायेंगे और चतुर्मास व्रत का समापन हो जायेगा.

  • छठ महापर्व : कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकतऽ जाय... आज डूबते व कल उगते सूर्य को छठव्रती देंगे अर्घ

    पटना : कांच ही रे बांस के बहंगिया...., मारबौ रे सुगवा धनुष से... छठ पर्व के इन्हीं सुमधुर गीतों के साथ सूबे में छठ महापर्व की छटा बिखर रही है. चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन छठव्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इसके साथ ही उनका 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ हो गया. महापर्व के तीसरे दिन शनिवार को छठव्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देंगे. फिर रविवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के बाद पारण कर अन्न-जल ग्रहण करेंगे. इसके साथ ही यह चार दिवसीय महापर्व संपन्न हो जायेगा.

  • छठ पर अब तक नहीं जारी हो सका डाक टिकट, जानें क्यों महत्वपूर्ण हैं टिकट

    बिहार का त्योहार माना जाने वाला छठ अब ग्लोबल हो चुका है. इसके बावजूद केंद्र सरकार के डाक विभाग से इसे वह सम्मान अब तक नहीं मिला है जिसका यह हकदार है.

  • लोकगीतों में छठ की महिमा

    आस्था,विश्वास व समर्पण का लोकपर्व छठ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाता है. अब कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में भी यह पर्व मनाया जाने लगा है.

  • व्रत केंद्रित त्योहार है छठ

    छठ एक व्रत है और त्योहार भी. दीपावली, सोहराई ,दशहरा ,होली आदि त्योहार हैं लेकिन व्रत नहीं हैं. छठ मूलतः व्रत है और फिर इसके वृत्त पर त्योहार भी रच दिया गया है - व्रत केंद्रित त्योहार. इसलिए तमाम त्योहारों में यह अजूबा है, कुछ खास और विशिष्ट भी.

  • जीवन का अर्थ ही है सूर्य को देखना

    मानव सभ्यता के पहले देव का नाम सूर्य है, जिनकी पूजा का अनुष्ठान जल से जुड़ा है. सूर्य की उपासना की पांच हजार से पूर्व की परंपरा है. भारतीय चिंतन कहता है कि पांच तत्वों से यह संसार बना है, उन्हीं से मनुष्य बना है.

  • साल में दो बार होती है छठपूजा

    छठ पूजा साल में दो बार म