पुष्पेश पंत

दो प्याजा का राजसिक जायका

पुष्पेश पंत

मनुष्य का आहार बदलते ऋतुचक्र के अनुकूल होना चाहिए और साथ ही व्यक्ति के स्वभाव के भी अनुकूल होना चाहिए. पितृपक्ष और नवरात्रि में तामसिक भोजन पारंपरिक रूप से वर्जित है. इस दौरान सात्विक भोजन का आनंद लेने का कोई विकल्प नहीं. इस लंबे अंतराल के बाद बेचारी जिह्वा का राजसिक स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए तरसना स्वाभाविक है. मनुष्य का आहार बदलते ऋतुचक्र के अनुकूल होना चाहिए. और साथ ही व्यक्ति के स्वभाव के विपरीत नहीं होना चाहिए.

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