पवन के वर्मा

आज के महिषासुर का वध

पवन के वर्मा

दुर्गा सप्तशती (400-600 ई.) इस बिंदु पर निस्संकोच रूप से बल देती है. दुर्गा, पार्वती की प्रतिरूप, शिव की अर्द्धांगिनी, इस ब्रह्मांड की सर्वोच्च सत्ता तथा सृजनकर्ता हैं. उनके बिना शिव जड़ हैं. शिव सर्वव्यापी, सर्वदर्शी, ब्रह्मण के सर्वज्ञ प्रतिनिधि, निर्गुण, निर्विशेष चेतना, जो अदृश्य, अचिंत्य तथा अखंड रूप से समस्त ब्रह्मांड में स्पंदित हैं. पर ब्रह्मण में प्रच्छन्न शक्ति से हीन वह शक्तिहीन हैं. दुर्गा वह अपराजेय, अभेद्य शक्ति हैं, जो शिव को प्रकट होने के योग्य बनाती हैं. इस बोध में, वे शिव की समानता में हैं.

Columns

जलवायु परिवर्तन की चेतावनी

हिमांशु ठक्कर

ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स (जीसीआरआई) में भारत को जलवायु परिवर्तन के मामले में कमजोर देशों में ...

Columns

मोबाइल इस्तेमाल का सच

आलोक जोशी

फोन पर सिर्फ जरूरी बात करें. फोन पर फालतू बात न करें. ध्यान रखें, हो सकता है किसी को कोई बेहद जरूरी ...

Columns

इस्तेमाल और लत का समझें फर्क

निखिल पहवा

सूचना के लिहाज से हम एक ऐसे दौर में हैं, जहां सोशल मीडिया के जरिये हर पल कुछ न कुछ देखते-पढ़ते या ...

Columns

अपरिपक्वों को किनारे करें मोदी

प्रभु चावला

दूरी परिप्रेक्ष्य देती है, फिर विश्लेषण और प्रवृत्ति की प्राप्ति होती है. पिछले सप्ताह महाराष्ट्र ...

Columnists