पवन के वर्मा

चुनाव आयोग की हिचकिचाहट

पवन के वर्मा

निर्वाचन आयोग के प्रति उचित ही बड़े सम्मान से देखा जाता है. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति समेत विभिन्न चुनाव प्रक्रियाओं को सराहनीय क्षमता और समर्पण से यह संस्था संचालित करती रही है. आयोग की निष्पक्षता और एक संस्था के रूप में इसकी स्वायत्तता संदेह के घेरे में नहीं रही हैं. लेकिन, आज उसकी क्षमता पर प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं. ऐसा इसलिए नहीं कि आयोग के नेक इरादे में कमी है, बल्कि इसलिए कि यह संस्था किन्हीं कारणों से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होने पर सक्रिय और निर्णायक ढंग से कार्रवाई करने में हिचकती दिखायी दे रही है. इस हिचकिचाहट का क्या कारण है?

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