वीरेंद्र नारायण झा

गांवों में भी खोले जाएं वृद्धाश्रम!

वीरेंद्र नारायण झा

इसमें कोई शक नहीं कि भारत आज भी गांवों का देश है, लेकिन आबादी के हिसाब से देखें, तो गांव आज अपनी ही आबादी के लिए तरस रहा है. लोग शहर की ओर पलायन कर रहे हैं. दरअसल, आज के समय में लोगों की जरूरतें जब बढ़ रही हैं, ऐसे में कोई भी गांव प्रायः सक्षम नहीं है कि इन्हें अपने बल-बूते पूरी कर सके. अधिकांश जरूरतों के लिए गांव को शहर पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इनमें प्रमुख हैं रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बहुत कुछ.

Columns

न हो आचार संहिता का उल्लंघन

नवीन जोशी

आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के कारण चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ...

Columns

इवीएम पर बार-बार उठते प्रश्न

अवधेश कुमार

विपक्षी दलों ने इवीएम को फिर निशाना बनाया है. इन दलों ने यह तय किया कि वे ईवीएम को खत्म कर मतपत्रों ...

Columns

भ्रष्टाचार दशकों से चुनाव का बड़ा मुद्दा

सुरेंद्र किशोर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस करने के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री ...

Columns

देश को जीवंत वामपंथ की जरूरत

डॉ संजय बारू

आम चुनावों के रिपोर्ताज एवं विश्लेषणों के रोजाना शोरगुल तथा आपाधापी में भारतीय राजनीति के उस एक अहम ...

Columnists