कुमार प्रशांत

संस्कृति के एक सिपाही का जाना

कुमार प्रशांत

मुझे अच्छा लगा कि गिरीश रघुनाथ कर्नाड को संसार से वैसे ही विदा किया गया, जैसे वे चाहते थे- नि:शब्द! कोई तमाशा न हो, कोई शवयात्रा न निकले, कोई सरकारी अायोजन न हो, कोई क्रिया-कर्म भी नहीं, भीड़ भी नहीं, सिर्फ निकट परिवार के थोड़े से लोग हों- ऐसी ही विदाई वे चाहते थे….

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हिंदी-उर्दू की अजब-गजब कथा

मृणाल पांडे

हमारे राज, समाज और सोशल मीडिया पर इन दिनों उर्दू को जबरन सिर्फ मुसलमानों की भाषा मनवाने और हिंदी से ...

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जन स्वास्थ्य भी विमर्श में हो शामिल

अनुज लुगुन

यह चुनाव परिणाम के ठीक बाद की घटना है, जिसमें बच्चे बेमौत मारे जा रहे हैं. सत्ता के गलियारों में ...

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भारतीय उदारवादियों का दोहरा रवैया

प्रभु चावला

उदारवादी धर्मनिरपेक्षवादियों के स्वप्निल संसार में अल्पसंख्यकों के सरोकार ही सर्वप्रमुख होते हैं. ...

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नुकसानदेह है अमेरिका-ईरान संघर्ष

आकार पटेल

पिछले सप्ताह अमेरिका ने ईरान पर हमले की घोषणा की और फिर उसे वापस ले लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ...

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