तरुण विजय

  • अतीत के गौरव की अमेरिका में वापसी

    भारत का प्राचीन गौरव, वैभव और वैश्विक कीर्ति इतनी प्रबल और व्यापक थी कि दुनिया में भारत देखने के लिए सबकी इच्छा रहती थी. कोलंबस भारत की खोज में चला था और अमेरिका पहुंच गया और वहां के मूल निवासियों को इंडियन कह डाला. शताब्दियों बाद वास्तविक भारत से उसी प्राचीन गौरव की पताका लिये एक भारतीय प्रधानमंत्री ने भारत की कीर्ति का जो पराक्रम स्थापित किया, वह अविस्मरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.

  • आरक्षण, दलित दर्द और हिंदू

    यह निर्विवाद सत्य है कि यदि बाबा साहब आंबेडकर की पहल तथा संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था न होती, तो अनुसूचित जाति का हिंदू समाज या तो धर्मांतरित हो गया होता अथवा श्रीराम का नाम अधरों पर लिए आज भी कचरा बीन रहा होता. हिंदुओं की संवेदना (बड़ी जाति के हिंदू) के दो पहलू हैं.

  • डॉ श्यामा प्रसाद का शिक्षा संसार

    डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसे राजनेता हुए, जिनके जीवन का अधिकांश भाग शिक्षा, साहित्य, विज्ञान प्रसार तथा औद्योगिकीकरण का समर्पित रहा. लेकिन राष्ट्रीय घटनाक्रम ने कुछ ऐसी करवटें बदलीं कि वे कश्मीर की शेष भारत के साथ एकता और अखंडता के नाते ही ज्यादा जाने गये.

  • विदेश नीति का वैचारिक पहलू

    गत सप्ताह चीन में विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अकादमियों में मुझे तीन व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिनका मुख्य विषय दोनों देशों के मध्य गतिशील सांस्कृतिक संबंधों पर केंद्रित था. भारत-चीन संबंध महाभारतकालीन हैं, यह तो प्रमाणित है. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी चीन के रेशम का जिक्र है. हजार साल पहले चीन के राजगुरु के नाते भारत के बौद्ध भिक्षु कुमारजीव (चीनी भाषा में चोमोलिशु) प्रतिष्ठित किये गये थे.

  • चाहिए सशक्त और विवेकी विपक्ष

    अच्छी सरकार के लिए एक सुविचारित और सशक्त विपक्ष अनिवार्य होता है. जिस देश में विपक्ष मरा हुआ, थका हुआ, बुद्धिहीन और धन लिप्सा में लिप्त भ्रष्ट होता है, वहां की सरकारें अच्छे से अच्छे नेता के नेतृत्व में भी जनविमुख और निरंकुश हो जायें, तो किसी को आश्चर्य नहीं होता.

  • जापान के नये सम्राट से उम्मीद

    जापान से हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए, क्योंकि जापान एक ऐसा देश है, जो अपनी परंपराओं की रक्षा और निर्वाह बखूबी करता है. भारत में यदि कोई प्राचीन परंपराओं को संभालने की बात करता है, तो उनके बारे में यह कहा जाता है कि ये लोग अतीतजीवी हैं. ऐसे लोग यह बात नहीं समझते कि भविष्योन्मुखी होने के लिए अतीत को त्यागना या उसका अपमान करना जरूरी नहीं है. ये लोग जापान को नहीं देखते, जिसने यह बात सिद्ध करके दिखायी है.

  • बीमार है हमारा बॉलीवुड

    एक फिल्म है- ''मेंटल है क्या''. यह फिल्म भारत के धनी, अहंकारी और संवेदनहीन समाज का दर्पण है, जिसे भारत या भारतीयों से कोई लेना-देना नहीं. सिर्फ बॉक्स ऑफिस उनका गणतंत्र, टिकट बिक्री ही उनका मजहब और ऐश व विलास ही उनका निर्वाण है.

  • गोवा में हिंदू स्मृति का जागरण

    गोवा में गुड़ीपाड़वा उत्सव अर्थात नूतन विक्रमी संवत् 2076 का आरंभ एक विशाल समारोह से हुआ. हजारों लोग सुबह चार बजे उठे. हिंदू स्त्रियों ने मंदिर जानेवाले विशेष परिधान पहने, थालियों में दीपक सजाये, तो सौ से अधिक युवतियों ने केसरिया पगड़ियां और अश्वारोही की तरह कसी हुई साड़ियां पहन कर सौ मोटरसाइकिलों पर भगवा ध्वज के साथ सवारी संभाली.

  • हिंदू का शत्रु हिंदू ही क्यों?

    राजधानी दिल्ली से प्रकाशित एक प्रसिद्ध अंग्रेजी दैनिक के संपादकीय पृष्ठ पर मेरा लेख (22 मार्च, 2003) छपा था, जिसका शीर्षक था- हिंदू ही हिंदू के प्रथम शत्रु. इसमें सदियों के अत्याचारों और जुल्म के बाद उदित हो रहे हिंदू अभिमान और गौरव का जिक्र करते हुए गजनी, गोरी तथा अन्य इस्लामी आक्रमणकारियों के समय स्थानीय राजाओं की पारस्परिक फूट के कारण हुए सोमनाथ विध्वंस जैसे घटनाक्रम का वर्णन था.

  • देश में देशभक्ति की वापसी

    ऐसा कभी हुआ नहीं कि भारतीय वायुसेना अधिकृत ट्विटर पर अपने वायुवीर अभिनंदन वर्तमान की प्रशस्ति में लिखी कविता प्रसारित की हो. देश के मीडिया ने उसे मान्य किया, उसकी खबर छापी. यूं तो हमारे देश में देशभक्ति का जज्बा हमेशा विद्यमान रहा ही है. पर यह भी कटु सत्य है कि सामान्यत: दरबार में हाजिरी लगानेवाले रायबहादुर और रायसाहब लोग ऐश और विलास करते रहे, जबकि भगत सिंह फांसी पर चढ़ते रहे.

  • ट्विटर बाबा की बादशाहत

    हमारी एक खासियत है. कोई भी बाहर का हो, अंग्रेजी बोलता हो और अगर वह सोशल मीडिया के एक हिस्से का मालिक है, तो फिर बात ही क्या? हमारे देश में आ जाये, तो हम इस तरह से उसकी आवभगत करते हैं, मानो वह किसी सर्वप्रभुता संपन्न देश का मालिक हो. तनिक हमारी हल्की-फुल्की तारीफ कर दी, तो बस हम यूं खुश होते हैं, मानो उस सर्टिफिकेट के लिए बरसों से हम तरस रहे थे. ट्विटर, फेसबुक, जीमेल का ऐसा ही मामला है. इन दिनों ट्विटर से झगड़ा चल रहा है. ट्विटर के भारतीय समन्वयक भारतीय बाबू ही हैं.

  • हिंदू होने का अर्थ!

    जब-जब हिंदुओं को अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा का अवसर मिला, तब-तब विदेशी विधर्मियों से बढ़कर स्वदेशी स्वधर्मियों ने ही अपने अहंकार और भीतरी विरोधियों से शत्रुता को प्रमुखता देते हुए मार्ग में बाधाएं डालीं और एक तरह से मिलती-मिलती विजय पानीपत की पराजय में बदलती चली गयी. दुर्भाग्य से इतिहास भी तो पराजय का ही पढ़ाया जाता है, पर पानीपत कितनों को याद होगा? यह सवाल जरा स्वयं से पूछिए.

  • नाम में भला क्या रखा है

    यह स्तंभ लिखते समय मुझे स्मरण हो आया कि घर से संसद भवन आते हुए आज सुबह ही विजय चौक के आसपास बड़ी संख्या में ''आदि उत्सव'' के पोस्टर, बैनर और घोषणाएं प्रदर्शित थीं. मुझे लगा कि संभवतः यह अरुणाचल प्रदेश की आदिम जनजाति के युवाओं का कोई सम्मेलन या उत्सव है. ध्यान से देखा तो पता चला कि यह जनजातीय मंत्रालय के अंतर्गत ट्राइफेड संस्था द्वारा आयोजित जनजातीय महोत्सव है. जनजातीय महोत्सव का नाम ''आदि महोत्सव''?

  • हम सबके बीच हजारों सरदार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण कर एक अद्भुत कीर्तिमान स्थापित किया है. राष्ट्र के लिए विभिन्न लोगों ने जो कार्य किये, अपना जीवन अर्पित किया, उसे चाहे किसी भी सत्ता द्वारा दबाने या ढकने का प्रयास किया जाये, लेकिन वक्त की हवा सच्चाई के दर्पण पर पड़ी सत्ता की मिट्टी उड़ा ही देती है और तब सच्चाई सामने आती है. सरदार पटेल की विश्व में सबसे ऊंची यह मूर्ति वस्तुत: भारत के स्वाभिमान और गौरव की ऊंचाई का अमर अभिमान बनी है.

  • राजनीतिक शत्रुता के दौर में आर्थिक जनतंत्र के उद्गाता

    राजनीतिक शत्रुताओं और वैचारिक अस्पृश्यताओं के इस दौर में पार्टियां नेतृत्व की वैचारिक परिपक्वता या लीक थोड़े ही बताती हैं. वे सिर्फ मुखिया के नाम से जानी जाती हैं. जो वे कह दें, वही सत्य वचन. सर झुकाए मानो, वर्ना खेत रहो. ऐसे में हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे नेताओं को याद ही क्यों करें? बगीचे, अस्पताल और सड़कें उनके नाम पर बनवा देते हैं, इतना काफी न होगा क्या?

  • देश बड़ा या पारिवारिक सामंतशाही

    रारामेश्वरम (तमिलनाडु) का निकटतम हवाईअड्डा तिरुअनंतपुरम है. रामेश्वरम विश्व के हिंदुओं का अप्रतिम तीर्थ है- यहीं से रामसेतु जाते हैं. यहां लंका विजय से पूर्व श्रीराम ने शक्ति पूजा की थी. बारह सौ स्तंभों का प्राचीन रामेश्वर शिव मंदिर यहीं है, जो विश्व का आश्चर्य एवं अत्यंत दर्शनीय हिंदू श्रद्धाकेंद्र है. पर विडंबना यह है कि आज तक रामेश्वरम में हवाईअड्डा नहीं बना. कांग्रेस-द्रविड़ राजनीति ने इसे महत्व नहीं दिया. जब तक मोदी सरकार यहां हवाईअड्डा बनाये, उसने तिरुअनंतपुरम से रामेश्वर जोड़ने का मार्ग दो नये सेतु निर्माण कर इतना सुगम कर दिया कि तीन घंटे से ज्यादा की यात्रा अब डेढ़ घंटे में होगी.

  • नक्सली हिंसा के साथी शब्द-जेहादी

    माओवादी और नक्सली कम्युनिस्ट विचारधारा को माननेवाले क्रूर आतंकवादी हैं, जो गरीब जनजातियों और संवैधानिक सत्ता के प्रतिनिधि सुरक्षा बलों पर धोखे से हमला कर एक काल्पनिक ''सर्वहारा का राज'' बनाने का दावा करते हैं. वे भारत की गणतांत्रिक व्यवस्था एवं सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा हैं. ऐसे वक्तव्य कांग्रेस शासन में उनके प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने दिये थे. ऐसे कम्युनिस्ट आतंकवादी संगठनों को शंकर राव चव्हाण, तत्कालीन कांग्रेस शासन में गृहमंत्री के समय प्रतिबंधित किया गया था और दस राज्यों के 106 जिले नक्सल प्रभावित घोषित किये गये थे.

  • जनचेतना से होती है राष्ट्र की रक्षा

    तरुण विजय नेता, भाजपा tarun.

  • पाकिस्तान में इमरान का अर्थ

    पाकिस्तान में चुनाव कुछ ऐसे ही होते हैं, जैसे सहारा के रेगिस्तान में पानी. वहां आज भी भूमि सुधार कानून कभी बने ही नहीं और जमींदारी बनाम साधारण गरीब में बंटा देश बंदूक की प्राथमिक शाला में पल-बढ़कर आज ऐसा मुल्क बन गया है, जहां दुनिया में सबसे बड़ी तादाद में मुसलमान ही गोलियों से मारे जा रहे हैं.

  • चीन के दर्द को भारत का इलाज

    चीन में इन दिनों एक फिल्म ''व पूश योशन'' की वहां के अखबारों में खूब चर्चा है. इसका अर्थ है- ''मैं औषधियों का ईश्वर नहीं.'' यह फिल्म चीन के गरीब कैंसर रोगियों को भारत से सस्ती दर पर दवा लाकर बिना मुनाफे के देनेवाले समाजसेवी की संघर्षकथा है.