Rajneesh Anand

  • सावधान ! मां-बाप के पास समय नहीं, मोबाइल- इंटरनेट साथी बनकर बच्चों को दे रहा ‘गंभीर बीमारी’

    कल बेंगलुरू से एक ऐसी खबर आयी थी जिसने सबको चौंका दिया. जिसने भी यह खबर सुनी उसके मन में यही सवाल था कि आखिर कैसे एक 15 साल की बच्ची अपने पिता की हत्या कर सकती है? आखिर हमारा समाज किस ओर जा रहा है? घटना कुछ यूं थी कि 15 साल की लड़की को एक 19 साल के लड़के से प्रेम था. उसके इस प्रेम संबंध पर पिता को आपत्ति थी और उन्होंने अपनी बेटी को इस संबंध में आगाह किया था और यह भी कहा था कि वह मोबाइल पर लड़के से बात ना करें.

  • जनसंख्या विस्फोट का कारण धर्म नहीं, सामाजिक बुराइयां...

    संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2010-2019 तक में भारत की जनसंख्या 1.2 की औसत वार्षिक दर से बढ़ी है. यह पूरे देश के लिए चिंता का कारण है. इसी चिंता को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से छोटे परिवार की वकालत की और जनसंख्या नियंत्रण पर अंकुश लगाने की बात कही. उनके इस बयान की प्रशंसा हो रही है, उनके विरोधी भी उनकी प्रशंसा कर रहे हैं. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में परिवार नियोजन के तरीके उपलब्ध रहने के बाद भी जनसंख्या विस्फोट पर उस तरह अंकुश नहीं लग सका, जैसी कोशिश की गयी थी, यही कारण है कि सरकार जनसंख्या विनियमन विधेयक 2019 लेकर आयी है, जिसके अंतर्गत दो बच्चों को आदर्श मानते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जायेगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या कानून से समस्या का समाधान हो पायेगा. आखिर देश में बढ़ती जनसंख्या की मूल वजह क्या है:-

  • जश्ने आजादी के मौके पर जानें महिलाओं को अबतक क्या मिले अधिकार...

    आज जबकि हम आजादी का जश्न मना रहा हैं, यह विचारणीय है कि 72 साल बाद महिलाओं की सामाजिक स्थिति में क्या परिवर्तन आये और उन्हें किस-किस तरह के अधिकार मिले. इसमें कोई दो राय नहीं है कि आजादी के बाद महिलाओं की स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए और कानून ने उन्हें अधिकारों से परिपूर्ण किया. भारतीय संविधान ने लिंग आधारित किसी भी भेदभाव को खारिज किया है और महिलाओं को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए अधिकार मुहैया कराये हैं. जश्ने आजादी के इस मौके पर हम बात कर रहे हैं उन अधिकारों की, जिन्होंने भारतीय महिलाओं को सशक्त किया और उनकी आजादी में मील का पत्थर साबित हुए.

  • आजम खान का संसद से सड़क तक विरोध, महिलाओं ने कहा- अविलंब माफी मांगें, कार्रवाई भी जरूरी

    समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने संसद में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठी भाजपा सांसद रमा देवी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी है, जिसके बाद सदन में कल से हंगामा मचा हुआ है और महिला सांसद उनसे माफी की मांग कर रही हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी उनसे माफी मांग की मांग की है और कहा कि पूरा मामला महिलाओं की प्रतिष्ठा का है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए. आजम खान का बयान महिलाओं की प्रतिष्ठा से किस कदर जुड़ा है और इस बयान के बाद महिलाएं कितनी आहत हैं

  • ट्रिपल तलाक पर बहस, जानें क्या चाहती हैं मुस्लिम महिलाएं

    ट्रिपल तलाक बिल को यह कहकर लाया जा रहा है कि इससे औरतों का फायदा होगा, जबकि सच्चाई यह है कि इस बिल के कानून बनने से औरतों का कोई फायदा नहीं होगा. एक आदमी जब अपनी पत्नी को ट्रिपल तलाक देता है और कोर्ट ने उसे पहले ही इनवैलिड करार दिया है, ऐसे में तो पति जेल जायेगा और पत्नी बदहाल हो जायेगी. उसकी सिक्यूरिटी की जिम्मेदारी कौन लेगा. पति जेल में रहेगा तो पत्नी कहां जायेगी, उसका क्या हाल होगा? यह कुछ सवाल हैं, जिनपर सोचा जाना चाहिए. मैंने अपने आसपास ट्रिपल तलाक की एक भी घटना नहीं देखी, आजकल तो महिलाएं खुला ले रही हैं

  • स्वच्छ भारत मिशन : बच्चों के स्वास्थ्य में हुआ सुधार, बीमारियों से भी हो रहा है बचाव, अबतक बने 9.5 करोड़ शौचालय

    महात्मा गांधी ने एक बार कहा था स्वच्छता, स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी है. इसलिए उनके आदर्शों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी, इसका उद्देश्य है ‘ सुंदर भारत की परिकल्पना, जिसे स्वस्थ भारत के जरिये पूरा किया जायेगा. इस मिशन का उद्देश्य था महात्मा गांधी की 150वीं जयंती यानी कि 2 अक्टूबर 2019 तक सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज प्राप्त करना है. देश को खुले में शौच से मुक्त करना इस मिशन की प्राथमिकता है. साथ ही इस मिशन का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना है, ताकि वे स्वस्थ रहें.

  • #Emergency : इंदिरा गांधी को मिली सीख, लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि, तानाशाह नहीं

    आज 25 जून है, भारतीय राजनीति के इतिहास का काला दिन. पूरे 44 साल हो गये जब देश में आपातकाल की घोषणा हुई थी. उस वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं जिन्होंने अपने तानाशाही रवैये को विस्तार देते हुए देश में इमजेंसी यानी आपातकाल की घोषणा की थी. इंदिरा गांधी ने 25 जून की मध्यरात्रि को अपने राजनीतिक जीवन का सबसे कठोर और गलत फैसला लिया था, जिससे भारतीय लोकतंत्र पर कलंक तो लगा ही, लेकिन यह बात भी पुख्ता हुई कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है.

  • इन महिलाओं ने मसाला बेचकर जिंदगी को बनाया जायकेदार

    झारखंड की महिलाएं ना सिर्फ मेहनती हैं, बल्कि उनके अंदर स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की भावना भी भरपूर है. इसकी बानगी राजधानी रांची के कांके प्रखंड के गारू गांव में देखने को मिलती है, जहां मात्र पांच महिलाओं ने मिलकर मिसाल कायम की है. इसकी सफलता की कहानी कुछ इस प्रकार है. गारू गांव के एक सखी मंडल की पांच महिलाओं ने इस साल की शुरुआत से मसाला फैक्टरी लगायी है. जहां शुद्ध मसालों को पीसकर बाजार में बेचा जा रहा है.

  • बिहार, झारखंड और बंगाल में भाजपा ने सिर्फ एक अल्पसंख्यक को दिया टिकट, एनडीए से मात्र दो

    भाजपा एक ऐसी पार्टी है जिसके लिए यह माना जाता है कि वह अल्पसंख्यकों से दूरी बनाकर रखती है. भाजपा की ओर से चुनावों में पार्टी प्रत्याशी भी अल्पसंख्यक समुदाय से कम ही बनाये जाते हैं. ऐसे में यह जानने की जरूरत है कि इस चुनाव में भाजपा अल्पसंख्यकों के कितना करीब हुई. अगर बात बिहार, झारखंड और बंगाल की हो, तो यहां से चुनिंदा अल्पसंख्यकों को ही टिकट दिया गया है.

  • बिहार-झारखंड में जिन महिलाओं को टिकट मिला वे सब मुखौटा, जानें क्या है असलियत...

    बिहार-झारखंड में कुल 54 लोकसभा क्षेत्र हैं और सात और चार चरणों में मतदान होना है. सभी पार्टियों ने तैयारी शुरू भी कर दी है, दो-चार सीटों को छोड़ दें तो सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. बिहार और झारखंड दोनों ही जगहों पर विपक्ष ने महागठबंधन किया है और भाजपा को हराने के लिए एकजुट हुए हैं. इन पार्टियों में तमाम मुद्दों को लेकर चाहे कितना भी मतभेद हो, लेकिन महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने के मामले में सबके चेहरे एक हैं

  • महिला सशक्तीकरण के नाम पर भाजपा ने अबतक कुल 33 महिलाओं को ही देश भर में दिया टिकट, जानें प्रत्याशियों के नाम

    भाजपा ने अबतक लोकसभा चुनाव के लिए अपने 375 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है. प्रत्याशियों की सूची पर अगर नजर डालें तो हम पायेंगे कि अबतक जिन महिलाओं को टिकट दिया उनकी संख्या मात्र 33 है. अभी कुछ और सूचियां जारी होनी हैं, जिनमें कुछ और महिला उम्मीदवारों का नाम हो सकता है, लेकिन उनकी संख्या दस से अधिक नहीं होगी, यह भी तय है. कहने का आशय यह है कि भाजपा की ओर से इस बार भी 50 महिला उम्मीदवारों को भी टिकट नहीं दिया जायेगा.

  • अटल-आडवाणी युग का उत्थान और फिर पतन

    भारतीय राजनीति में कई लीडर उभरे और इतने शक्तिशाली हुए कि उनका विकल्प कोई नहीं दिखता था, लेकिन कुछ समय बाद उनका पतन हो गया. इसे एक युग के रूप में देखा जाता है, जैसे गांधी युग, नेहरू युग, इंदिरा युग. हालांकि यह एक सच्चाई है कि उत्थान और पतन का दौर हर युग में आया. आज जबकि अटल-आडवाणी युग के पतन की बात हो रही है तो एक बार इस युग के उत्थान और पतन की चर्चा भी जरूरी है.

  • सरकारी योजनाओं को मजबूती देकर बाल अधिकार सुनिश्चित कर रही है ‘Save the Children' : महादेव हांसदा

    बच्चों के अधिकार सुनिश्चित करके उनका बचपन खुशहाल बनाने के लिए ‘सेव दि चिल्ड्रेन’ काम कर रही है. हमारी संस्था मुख्यत: तीन क्षेत्रों में काम कर रही है- चाइल्ड प्रोटेक्शन, चाइल्ड एजुकेशन एवं स्वास्थ्य और पोषण. उक्त बातें ‘ सेव दि चिल्ड्रेन’ झारखंड के जेनरल मैनेजर स्टेट प्रोग्राम महादेव हांसदा ने कही. मूलत : बंगाल के पुरुलिया के रहने वाले महादेव हांसदा 2013 से संस्था से जुड़े हैं.

  • बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरूक करने में जुटी है ‘सेव दि चिल्ड्रेन’ रूमी कुमारी को बनाया है ‘चाइल्ड चैंप’

    भारत एक ऐसा देश है जहां बाल विवाह एक गंभीर समस्या है, झारखंड में 38 प्रतिशत लड़कियां 18 वर्ष से पहले ब्याह दी जाती हैं. जिसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. कम उम्र में शादी होने के कारण वे कम उम्र में मां भी बन जाती हैं, जिसके लिए उनका शरीर तैयार नहीं होता है, जिसके कारण कई बार डिलीवरी के दौरान उनकी मौत भी हो जाती है.

  • ‘सेव दि चिल्ड्रेन’ ने आयोजित किया Competency Based Training कार्यक्रम

    बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘सेव दिन चिल्ड्रेन’ ने झारखंड स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी गवर्मेंट अॅाफ झारखंड के सहयोग से प्रोटेक्शन आफिसर्स के लिए competency Based training प्रोग्राम का आयोजन किया गया. इस ट्रेनिंग का उद्देश्य क्षमता में वृद्धि करना था.

  • झारखंड में ‘ट्रैफिकिंग’ और बाल यौन शोषण रोकने के लिए काम कर रही है Save the Children

    झारखंड में ‘ट्रैफिकिंग’ एक ऐसी समस्या है जो बच्चों का बचपन उनसे छीन लेती है और उन्हें एक ऐसा जीवन जीने पर मजबूर कर देती है, जिसकी चाहत उन्होंने कभी नहीं की होगी. झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है और यहां के कई जिलों में ‘ट्रैफिकिंग’ की समस्या आम है, जिनमें रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा, चाईबासा, दुमका और पलामू प्रमुख हैं.

  • क्या आप जानते हैं झारखंड की पहली महिला सांसद विजया राजे को?

    झारखंड राज्य का गठन तो वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन अविभाजित बिहार में जिस महिला ने इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीता, उनका नाम विजया राजे था. जी हां विजया राजे ने चतरा लोकसभा सीट से 1957 में पहली बार चुनाव जीता था. हालांकि इससे पहले वे 1952 में राज्यसभा के लिए चुनी गयीं थीं.

  • क्या आप जानते हैं झारखंड की पहली महिला सांसद विजया राजे को?

    झारखंड राज्य का गठन तो वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन अविभाजित बिहार में जिस महिला ने इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीता, उनका नाम विजया राजे था. जी हां विजया राजे ने चतरा लोकसभा सीट से 1957 में पहली बार चुनाव जीता था. हालांकि इससे पहले वे 1952 में राज्यसभा के लिए चुनी गयीं थीं.

  • फूलपुर : कभी पंडित नेहरू के कारण था कांग्रेस का गढ़, आज कोई अस्तित्व ही नहीं

    फूलपुर लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से एक है, लेकिन यह सीट बहुत ही खास है. इस सीट के खास होने का कारण है यहां के सांसद पंडित जवाहर लाल नेहरू जो देश की आजादी के बाद से अपने मृत्यु तक यहां से सांसद रहे. उनके बाद इस सीट से विजयलक्ष्मी पंडित सांसद बनीं.

  • बच्चों में कुपोषण की समस्या को मात देने के लिए गुमला जिले में पिछले पांच वर्षों से कार्यरत है ‘सेव दि चिल्ड्रेन’

    बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है, लेकिन यह झारखंड के लिए दुर्भाग्य की बात है कि यहां के 47.8 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. एनएफएचएस-4 (2015-16) के अनुसार झारखंड में 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 45 प्रतिशत बच्चे बौनेपन के शिकार हैं. 29 प्रतिशत बच्चे काफी दुबले हैं, यानी वे पोषाहार से वंचित हैं.