Pankaj Kumar Pathak

  • खूंटी के शहरी इलाकों में पत्थलगड़ी की नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा

    खूंटी : खूंटी संसदीय क्षेत्र से भाजपा, कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के 20 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया. अंतिम दिन 13 लोगों के नामांकन करने के कारण शाम पांच बजे तक नामांकन की प्रक्रिया चलती रही. खूंटी का मुद्दा दो भागों में बंटा है. एक ठेठ ग्रामीण इलाका जहां से पत्थलगड़ी का मुद्दा राष्ट्रीय - अतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया और दूसरा खूंटी का शहरी इलाका, जो राष्ट्रीय मुद्दों के आधार पर फैसला लेता है . इन शहरी मुद्दों में सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दे शामिल हैं. खूंटी में शहरी इलाके की आबादी लगभग 60 हजार है जबकि गांव छोटी- छोटी आबादी में बंटा है. कई गांव तक नेताओं का प्रचार नहीं पहुंच रहा है लेकिन शहर में घर- घर तक नेताओं की पहुंच है, पोस्टरबाजी हैं, रैली है, जनसभा है.

  • रांची लोकसभा के तीनों उम्मीदवारों ने भरा परचा, पढ़ें क्या है कार्यकर्ताओं का मिजाज

    रांची : रांची लोकसभा क्षेत्र के तीनों उम्मीदवारों ने आज नामांकन दाखिल किया. भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार संजय सेठ मोरहाबादी मैदान में एक जनसभा के बाद रोड शो करते हुए नामांकन दाखिल करने पहुंचें, तो महागठबंधन के उम्मीदवार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय रोड शो करते हुए नामांकन दाखिल करने पहुंचे.

  • गांव वालों ने श्रमदान से सींच दिया पूरा गांव

    रांची से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित आराकेरम गांव ओरमांझी के टुंडाहुली पंचायत के दो ऐसे गांव हैं जो ‘आदर्श ग्राम’ की श्रेणी में आते हैं. ये दोनों गांव श्रमदान की मिसाल पेश कर चुके हैं. प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसे इस गांव में 110 घरों में लगभग 550 लोग रहते हैं. श्रमदान से ग्रामीणों ने एक साल में दोनों गांवों की तसवीर बदल दी है. आदर्श गांव का तमगा पाकर यह गांव रूका नहीं और निरंतर आगे बढ़ रहा है. इस गांव के लोग अब जल संचय के लिए काम कर रहे हैं.

  • लोकसभा चुनाव 2019 : क्या हैं गांव के मुद्दे ? ग्राउंड जीरों से जानें लोगों का मिजाज

    रांची : सिर्फ चुनावी रैली और जनसभाओं से राजनीतिक मुद्दों को समझना मुश्किल है. हम इन जनसभाओं के माध्यम से देश का मूड नहीं समझ सकते. हम सभी जानते हैं भारत गांवों का देश हैं और देश का मूड समझने के लिए गांव के मूड को समझना होगा, इस लोकसभा चुनाव में गांव क्या सोचता है? गांव किन मुद्दों पर मतदान करेगा? क्या इन पांच सालों में गांवों की पगडंडियों से होकर विकास पहुंचा या रास्ता भटक गया?

  • Lok Sabha Election: बोले युवा, जो रोजगार देगा उसे वोट देंगे

    रांची: लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची में 8.4 करोड़ मतदाता जुड़े हैं. 18 साल के नये मतदाता 1.5 करोड़ हैं. संख्या काफी अहम है. इस लोकसभा चुनाव में युवाओं को रिझाने में हर एक पार्टियां लगी है. इस चुनाव में उनके क्या मुद्दे हैं. युवा किन मुद्दों को आधार मानते हैं और क्या देख कर वोट करेंगे. युवाओं से उनके मुद्दे पर बात की प्रभात खबर डॉट कॉम ने.

  • रांची : STUDENTS के लिए वरदान है साइकिल शेयरिंग योजना

    रांची : चार्टड साइकिल को लेकर शहर में इन दिनों गजब का उत्साह है. ऑटो में सफर करने वाले लोग एप्स डाउनलोड कर साइकिल का आनंद ले रहे हैं, हालांकि कई लोग अब भी एप्स एक्टिव ना होने के कारण परेशान हैं. एप्स डाउनलोड करने के बाद अगर आप अपने बैंक डिटेल और पैसे नहीं देना चाहते तो एप्स इंस्टॉल करने के बाद आपको ग्राहक सेवा केंद्र के नंबर 09727247247 पर कॉल कर सकते हैं. ज्यादातर लोग एप्स एक्टिव करने के लिए इस नंबर पर कॉल कर रहे हैं लेकिन ग्राहक सेवा के प्रतिनिधि व्यस्त है. कई लोग घंटों वहां कॉल करते रहे लेकिन नंबर नहीं लग रहा है. दूसरी तरफ जिन लोगों ने एप्स एक्टिव कर लिया है वह साइकलिंग का मजा ले रहे हैं. साइकिल इस्तेमाल करने वालों में ज्यादातर युवा और छात्र हैं.

  • VIDEO: रांची में होने वाले वनडे मैच के टिकट की कालाबाजारी, जानिये क्या है रेट

    रांची : 8 मार्च को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रांची के जेएससीए स्टेडियम में वनडे मैच खेला जायेगा. इसे लेकर टिकट की बिक्री शुरू हुई तो पहले दिन से ही टिकट खिड़की पर क्रिकेट के दिवानों की लंबी कतार नजर आयी. अबतक 24 हजार से ज्यादा टिकट बेचे जाने का दावा है लेकिन अबतक कतार में लोग इस दावे को मानने के लिए तैयार नहीं है. मैच देखने के लिए झारखंड के अलग - अलग शहर से लोग टिकट के लिए कतार में खड़े हैं. टिकट के लिए कतार में लोग सुबह 3.30 बजे से लग जाते हैं. आज भी लोग खड़े रहे लेकिन कई लोग टिकट लेने में सफल नहीं रहे.

  • #RIPBraveHearts : शहादत से झारखंड का नाता है पुराना

    कभी सीमा पार से हो रही गोलीबारी में, कभी सोते वक्त अचानक हुए हमले में, कभी गाड़ी पर हुए बम धमाके में, कभी छुपकर कायरों की तरह किये गये हमले में. कभी सीमा पार से आये आतंकी, तो कभी देश के अंदर से अपने ही रास्ता भटके हुए लोगों के हमले में हमारे कई जवान शहीद होते हैं. जब जब जवान शहीद होते हैं, तब हमें तकलीफ होती है.. हर बार दर्द के साथ गुस्सा होता है. सभी के मन में एक ही सवाल है उन आतंकियों को क्या जवाब देंगे, कैसे जवाब देंगे और कब जवाब देंगे. खबर है कि पुलवामा में ही जैश ए मोहम्मद के दो आतंकियों को मार गिराया गया. कामरान वही आतंकी है जो पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था

  • #RIPBraveHearts : गुस्से में देश जवानों को श्रद्धांजलि और पाक को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग

    पुलवामा में हुए आतंकी हमले से देश गुस्से में है. लोग शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं और बदले की मांग की जा रही है. झारखंड की राजधानी रांची में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए. रांची के फिरायालाल चौक पर सुबह श्यामली के तीन बच्चे तिरंगे के साथ पहुंचे और पाकिस्तान के सारे रिश्ते तोड़ने की मांग की. थोड़ी देर बाद बार एसोसिएशन ने मोमबत्ती जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कड़ी कार्रवाई की मांग की.

  • बिहारी का मतलब गाली नहीं इस शब्द का मतलब गर्व है : हास्य कवि शंभू शिखर

    मैं हास्यकवि नहीं हूं, मैं राजनीति की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष करता हूं तो लोगों को उसमें हंसी आती है, उक्त बातें जाने माने हास्यकवि शंभु शिखर ने प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ बातचीत में कही. वे आज प्रभात खबर डॉट कॉम के दफ्तर आये थे. बातचीत में शंभु शिखर ने कहा, दूसरे राज्यों में बिहारियों की ऐसी छवि बन गयी है मानो ‘बिहारी’ एक गाली है, लेकिन इस शब्द के पीछे गौरव और भारत का इतिहास छिपा है. अगर हम भारत के इतिहास से बिहार को बाहर कर दें तो इतिहास बचेगा ही नहीं. पढ़ें उनसे हुई पूरी बातचीत..

  • प्रभात खबर क्विज प्रतियोगिता में डीपीएस ने मारी बाजी

    प्रभात खबर क्विज कॉन्टेस्ट के फाइनल मुकाबले में जूनियर ग्रुप से डीपीएस रांची और सीनियर ग्रुप से डीपीएस बोकारो की टीम ने ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया. सीएमपीडीआइ स्थित मयूरी प्रेक्षागृह में 12 टीमों के बीच अंतिम राउंड हुआ. सीनियर में छह और जूनियर में छह टीमों के बीच कई राउंड की कठिन और ट्रिकी प्रतियोगिता के बाद विजेता टीम की घोषणा की गयी. इस वर्ष प्रभात खबर क्विज कॉन्टेस्ट का विजेता डीपीएस समूह रहा.

  • गणतंत्र दिवस : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने फहराया तिरंगा, पढ़ें कैसी थी झांकी और कैसा था उत्साह

    रांची : गणतंत्र दिवस के मौके पर राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने मोरहाबादी मैदान में सुबह नौ बजे झंडोत्तोलन किया. डीजीपी, गृह सचिव और मुख्यसचिव की मौजूदगी में राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली.इस मौके पर आकर्षक झाकियां निकाली गयी मौसम खराब होने के कारण भीड़ पहले जैसी नहीं थी लेकिन आकर्षक झाकियों ने इस बार भी लोगों का मन मोह लिया.

  • पढ़ें, कोलेबिरा के नवनिर्वाचित विधायक विक्सल कोंगाड़ी का डिटेल इंटव्यू , देखें वीडियो

    कांग्रेस में 1999 से अलग- अलग पदों पर रहे विक्सल कोंगाड़ी ने कोलेबिरा उपचनाव में जीत हासिल की. प्रभात खबर डॉट कॉम ने उनसे विशेष बातचीत की. यह बातचीत इसलिए भी जरूरी थी कि क्योंकि इस चुनाव पर सिर्फ क्षेत्रीय मीडिया की नहीं बल्कि नेशनल मीडिया की भी नजर थी. इस जीत ने विक्सल को कोलेबिरा के एक गांव से हवा के जरिये दिल्ली पहुंचा दिया.

  • 76वीं जयंती पर फिर याद आये अल्बर्ट एक्का

    लांस नायक अल्बर्ट एक्का की 76वीं जंयती मनायी जा रही है. हम उन्हें एक ऐसे बहादुर सैनिक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने अपनी जान देकर देश की रक्षा की. इस शहादत के लिए सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सैनिक सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया था. प्रभात खबर ने अपने राज्य के शहीद सपूत की समाधि उसके गांव में बनवाने के लिए पहल की और अल्बर्ट एक्का के समाधि स्थल से पवित्र मिट्टी परिवार वालों तक पहुंची. लेकिन इस शहीद सपूत के परिजनों से जो वादे किये गये थे वे आज भी पूरे नहीं हो पाये हैं. उनकी जयंती के अवसर पर अल्बर्ट एक्का के बेटे भिन्सेट एक्का अपने पिता की शहादत के साथ मां की उस यात्रा को भी याद करते हैं जो उन्हें पिता की समाधि स्थल तक ले गयी थी.

  • YEAR 2018 बयानबाजी के लिए रहेगा याद, स्तरहीन हुई राजनीति में बयानबाजी

    साल 2018 राजनीतिक बयानबाजी के नजरिये से भी बेहद रोचक रहा. कई बार बयानों की वजब से मुस्कान आयी तो कई बार राजनीतिक बयानबाजी के गिरते स्तर ने हम सभी को निराश कर दिया. "चौकीदार चोर है " "मसखरा राजकुमार", नामदार औऱ कामदार यह कुछ ऐसे शब्द हैं जिन्होंने राजनीतिक बयानबाजी में नेताओं को नये शब्द दिये . साल 2019 में कौन प्रधानमंत्री होगा कहना मुश्किल है.. बाबा रामदेव ने साल के अंत में यह बयान देकर राजनीति सरगर्मी तेज है. बाबा रामदेव ने कहा मैं आपको सारी चीजें नहीं बता सकता. बाबा के इस बयान से जाहिर है नये साल में इस बयान का राजनीतिक असर होगा. बाबा यहां राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं लेकिन साल 2018 में कई बयान सामने आये जिससे विवाद बढ़ा. आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही बयान जिसे विवाद बढ़ा.

  • अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर विशेष : जब आपातकाल के बाद बोले थे अटल, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने

    "बाद मुद्दत के मिले हैं दिवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने. खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने". पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये लाइन उस वक्त कही थी, जब आपातकाल के बाद चुनाव की घोषणा हुई. दिल्ली की ठंड में जनता पार्टी की सभा हो रही थी हल्की - हल्की बारिश थी, लोगों को लग रहा था कि भीड़ छटने लगेगी लेकिन लोग चुपचाप बैठे इंतजार कर रहे थे.

  • राष्ट्रीय खादी एवं सरस मेले का आगाज जानिये क्या है खास

    रांची : राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव का आगाज हो गया. महोत्सव 20 दिसंबर से 06 जनवरी तक रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया गया है. उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री गीरिराज सिंह मौजूद रहे. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास , नीलकंठ सिंह मुंडा, नवीन जैसवाल समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.

  • जानिये क्या है राफेल से जुड़ा पूरा विवाद, कब कैसे तय हुआ सौदा

    नयी दिल्ली : राफेल डील पर कांग्रेस सरकार को घेरने में लगी है. सदन में जोरदार हंगामा हो रहा है और कांग्रेस जांच की मांग पर अड़ी है. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा , राफेल डील पर सवाल उठाना गलत है. हमें रक्षा सौदे में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला. फ्रांस सरकार और डसाल्ट ने भी इस पूरे समझौते पर कंपनी चुनने में भारत सरकार की किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है.

  • विशेष बातचीत में बोली रसिका अभिनय करने का सपना देखने वालों के लिए यह बहुत अच्छा समय है

    शॉट फिल्म, बॉलीवुड और वेब सीरीज मिर्जापुर में धमाल मचाने वाली अभिनेत्री रसिका दुग्गल टाटा स्टील झारखंड लिटररी मीट में हिस्सा लेने रांची आयी थी. प्रभात खबर डॉट कॉम ने उनसे विशेष बातचीत की. जमशेदपुर से बॉलीवुड के सफर के साथ - साथ मिर्जापुर की आने वाली अगली कड़ी और उनकी आने वाली फिल्मों पर बातचीत की पंकज कुमार पाठक ने इसे फेसबुक पर लाइव आपतक पहुंचाया अरविंद सिंह ने.

  • jharkhand@18: कौशल तो पूरे गांव में है, विकास नहीं

    शहर में कुम्हार नये प्रयोग कर रहे हैं. घड़ा व सुराही में अब प्लास्टिक के नल नजर आने लगे हैं. मिट्टी की नयी-नयी मूर्तियां बाजार में आने लगी हैं. घर सजाने वाले मिट्टी के सामान की मांग भी अच्छी खासी है. गांव के कुम्हार शहर की नब्ज अबतक नहीं पकड़ सके. अबतक मिट्टी के घर की छत के लिए खपरैल व मांदर (वादक) के लिए ढांचा बनाने तक ही सीमित हैं. गांव के कुम्हारों का हाल समझना हो, तो सिमडेगा जिले से लगभग 36 किमी दूर केरसई प्रखंड की किनकेल पंचायत में कुम्हारों के एक छोटे से गांव कुम्हार टोली में आइये. यहां की नयी पीढ़ी गांव की मिट्टी छोड़ शहरों में खाक छान रही है. इस गांव में युवा दिखेंगे ही नहीं. मुंबई, हरियाणा, अंडमान जैसी जगहों पर आपको इस गांव के लोग जरूर नजर आ जायेंगे. कुम्हारों का गांव आज इस हालत में पहुंचा कैसे.