अनुज कुमार सिन्‍हा

  • वाह काेहली, वाह धाैनी वाह टीम इंडिया

    टीम इंडिया के खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया से सर ऊंचा कर, इतिहास रच कर विदा हो रहें हैं. टेस्ट और वनडे सीरीज दाेनाें में ऑस्ट्रेलिया काे हराया और आराम से हराया. ऐसा पहली बार हुआ. टी-20 सीरीज ड्रॉ रही हालांकि उसमें भी भारत ही भारी रहा था.

  • शिबू सोरेन के 75 साल : ऐसे हैं हमारे दिशाेम गुरु

    शिबू साेरेन यानी गुरुजी काे 75 साल पूरा हाेने पर बधाई. अधिकांश लाेग और आज की युवा पीढ़ी असली शिबू साेरेन काे नहीं जानती. उनकी उन खासियत काे नहीं जानती, उनके उस संघर्ष काे नहीं जानती, जाे युवाओं काे प्रेरित कर सकता है.

  • शिबू सोरेन के 75 साल : ऐसे हैं हमारे दिशाेम गुरु

    शिबू साेरेन यानी गुरुजी काे 75 साल पूरा हाेने पर बधाई. अधिकांश लाेग और आज की युवा पीढ़ी असली शिबू साेरेन काे नहीं जानती. उनकी उन खासियत काे नहीं जानती, उनके उस संघर्ष काे नहीं जानती, जाे युवाओं काे प्रेरित कर सकता है.

  • अपनी ताकत को पहचानें संकल्‍प लें, उसे पूरे भी करें

    नये साल की बधाई. वक्त है गर्व करने का, संकल्प लेने का, अपनी ताकत काे पहचानने का, वक्त है अपने, अपने परिवार और देश-समाज के लिए खुशहाली का रास्ता तलाशने का, उनमें अपना याेगदान करने का. गर्व इसलिए कि हम सभी भारतीय हैं,भारत की पवित्र धरती पर पैदा हुए हैं आैर अपना भारत दुनिया में अपनी ताकत, अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है. चाहे आणविक ताकत की बात हाे, चाहे अर्थव्यवस्था की बात हाे, प्राकृतिक साैंदर्य की बात हाे या भारतीय संस्कृति-संस्कार की बात हाे, अपना भारत बेहतरीन है.

  • रघुवर सरकार के चार साल : बहुमत के कारण ही कड़े फैसले ले सकी है सरकार

    रघुवर दास सरकार के चार साल पूरे हाे गये. एक साल का समय बचा है. अगर इसे क्रिकेट मैच से जाेड़ कर देखें ताे 50 आेवर में 40 आेवर खत्म हाे गये. अब सिर्फ 10 आेवर (यानी अंतिम एक साल) का खेल बाकी है. अंतिम दस आेवराें का खेल बहुत कुछ तय करता है. वह खेल का पासा पलट देता है, इसलिए सरकार के लिए यह पांचवां वर्ष सबसे महत्वपूर्ण है. यही निर्णायक हाेगा भी.

  • सही मायने में एक दिलेर लीडर थे निर्मल महताे

    25 दिसंबर का अपना महत्व है. पूरी दुनिया इस दिन क्रिसमस मनाती है. इसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था. झारखंड के एक बड़े आैर संघर्षशील नायक यानी निर्मल महताे का जन्म भी ताे इसी दिन हुआ था. एक ऐसा नायक, जाे जीवन भर अविवाहित रहा. यह साेेच कर कि शादी कर लेने से परिवार में उलझ जायेंगे आैर अलग झारखंड राज्य की लड़ाई कमजाेर पड़ जायेगी, उन्हाेंने शादी नहीं की थी.

  • डॉ सुभाष मुखोपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण आज : यह है प्रतिभा का सच्चा सम्मान

    नौ दिसंबर का दिन झारखंड खास कर हजारीबाग के लिए ऐतिहासिक दिन हाेगा. कारण, हजारीबाग (झारखंड) की धरती पर जन्मे और दुनिया में चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा काम करनेवाले डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की आदमकद प्रतिमा का अनावरण हाेगा. उस डॉ सुभाष का, जिन्हें देश में पहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा काे जन्म दिलाने का श्रेय हासिल है. लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इस महान वैज्ञानिक-चिकित्सक काे इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्हाेंने 1981 में जान दे दी. उनकी बड़ी दर्दनाक कहानी है.

  • जब ऑस्ट्रेलिया में जीत पर कप्तानी की बात हो तो बेदी को भूल नहीं सकते

    काेहली की कप्तानी में टीम इंडिया अॉस्ट्रेलिया में है. एडिलेड में छह दिसंबर से टेस्ट हाेगा. यही बात हाे रही है कि काेहली अॉस्ट्रेलिया में इतिहास (जीत कर) रचेंगे या नहीं. गांगुली आैर धाैनी काे सबसे सफल कप्तान माना जाता रहा है, लेकिन जब अॉस्ट्रेलिया दाैरे की बात आती है, ताे एक कप्तानी की काेई चर्चा नहीं करता. अॉस्ट्रेलिया की धरती पर उससे बेहतर भारतीय कप्तान काेई नहीं हुआ है.

  • 41 साल पहले इस भारतीय कप्तान ने किया था ऑस्‍ट्रेलियाई टीम के 'नाक में दम', क्या कोहली दोहरा पायेंगे इतिहास ?

    कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में है. एडिलेड में आज से टेस्ट सीरीज शुरू हो गया है, हालांकि भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया है लेकिन उसकी शुरुआत अच्छी नहीं और मात्र 189 रन के स्कोर पर उसके छह खिलाड़ी आउट हो चुके हैं, लेकिन अभी भारत के सामने दूसरी इनिंग भी है और पुजारा जैसे खिलाड़ी मैदान पर हैं. विराट कोहली की टीम से यह अपेक्षा है कि वह ऑस्ट्रेलिया में इतिहास (जीत कर) रचेंगे. भारतीय क्रिकेट में गांगुली ऑर धौनी को सबसे सफल कप्तान माना जाता रहा है, लेकिन जब ऑस्ट्रेलिया दौरे की बात आती है तो एक कप्तानी की कोई चर्चा नहीं करता.

  • बिरसा मुंडा काे समझा, लेकिन देर से

    इतिहास गवाह है कि अंगरेजाें के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में आदिवासि याें की बड़ी भूमिक ा रही है. चाहे वे बाबा तिलका माझी, सिद ाे-कान्हू हाें या बि रसा मुंडा. इतिहासकार भले ही कहते रहे कि इनमें से अधिकांश संघर्ष जमीन काे लेकर था आैर आरंभ में इन्हें भारत के स्वत ंत्रता संग्राम से काेई लेना-देना नहीं था लेकिन सच यही है कि ये सारे आंदाेलन शाेषण, अंगरेजाें आैर उनके समर्थ न कर रहे लाेगाें के खिलाफ ही थे. आजादी के लि ए थे. अगर बि रसा मुंडा के उलगुलान काे ही लें, ताे उसी अवधि में देश में अलग-अलग जगहाें पर अंगरेजाें के खिलाफ आंदाेलन हाे रहे थे आैर उन्हें दर्ज भी किया जा रहा था.

  • धैर्य रखें, झारखंड में दिल्ली जैसे हालात मत बनने दीजिए

    सुप्रीम काेर्ट का आदेश है-दीपावली के दिन सिर्फ दाे घंटे (रात में आठ बजे से 10 बजे) पटाखा फाेड़े. झारखंड में राज्य सरकार ने भी आदेश जारी कर दिया है. पुलिस प्रशासन ने तैयारी भी की है. जिसने भी आदेश का उल्लंघन किया, कार्रवाई हाेगी. अब सारा कुछ जनता के विवेक पर निर्भर करता है कि इस आदेश का वास्तव में कितना पालन हाेता है.

  • बिरसा मुंडा की सबसे ऊंची मूर्ति समय पर बनाना चुनौती

    11 अक्तूबर, 2018 का वह एक ऐतिहासिक क्षण, जब रांची के पुरानी जेल परिसर में बिरसा मुंडा की देश की सबसे बड़ी प्रतिमा (साै फीट ऊंची) बनाने के लिए शिलान्यास हाेता है.

  • 11 अक्तूबर जयप्रकाश नारायण जयंती पर विशेष : जमशेदपुर में गिरफ्तार किया गया था जेपी को

    आजादी के पहले आैर आजादी के बाद भी जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने बड़ी भूमिका अदा की. चाहे वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम हाे या आजाद भारत में किया गया 1974 का छात्र आंदाेलन. पहले ने देश की आजादी में याेगदान दिया आैर दूसरे आंदाेलन ने ताे लोकतांत्रिक परंपराओं के पुनर्स्थापन के िलए सत्ता ही पलट दी. यहां बात करेंगे आजादी के पहले के आंदाेलन की. यह सही है कि जेपी नहीं चाहते थे कि भारत दूसरे विश्वयुद्ध में शामिल हाे. महात्मा गांधी का इस संबंध में विचार अलग था. 1939 में दूसरा महायुद्ध शुरू हाे चुका था.

  • रांची में लेफ्टिनेंट गवर्नर से मुलाकात में गिरफ्तारी की आशंका थी, गांधी जी ने पत्नी और बेटे को रांची बुला लिया था

    दक्षिण अफ्रीका से भारत लाैटने (जनवरी 1915) के बाद बिहार-झारखंड की धरती पर कदम रखने में महात्मा गांधी काे बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगा. माैका था चंपारण में नील की खेती करनेवाले किसानाें के समर्थन में खड़ा हाेना. स्वदेश वापसी के बाद गांधी का यह पहला बड़ा आंदाेलन था. 10 अप्रैल 1917 काे गांधी पहली बार काेलकाता से राजकुमार शुक्ल के साथ बांकीपुर आये थे.

  • Asia Cup 2018 : टीम इंडिया मजबूत, पर रहना होगा सतर्क

    भारत आज शाम एशिया कप का फाइनल खेलने के लिए उतरेगा. सामने होगी बांग्लादेश की टीम. भारत का फाइनल खेलना तय माना जा रहा था लेकिन सामने बांग्लादेश की टीम होगी, इसकी उम्मीद नहीं थी. यही माना जा रहा था कि फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच ही होगा. पाकिस्तान का खेल खराब किया बांग्लादेश ने, जिसने पाकिस्तान को बाहर का रास्ता दिखा दिया.

  • एशियन गेम्स की खुमार में गुम हो गया इंग्‍लैंड में टीम इंडिया की हार, फजीहत से बच गयी 'विराट सेना'

    चौथा टेस्ट भारत हारा और साथ में सीरीज भी, लेकिन इस हार की ओर अभी तक बहुतों को ध्यान नहीं गया है. कारण है पूरे देश की निगाह एशियन गेम्स की ओर थी, जहां हमारे खिलाड़ियों ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया.

  • फ्लाइआेवर पर कराेड़ों खर्च, लेकिन डायवर्सन घटिया, जिंदगी नरक

    रांची के कांटाटोली में फ्लाइओवर बन रहा है. अच्छा काम है. इस काम काे 10-15 साल पहले हो जाना चाहिए था. चलिए, सरकार ने कम से कम ठोस निर्णय तो लिया. उम्मीद है समय पर यह फ्लाइआेवर बन जायेगा, ताकि रांची की जनता को ट्रैफिक जाम से कुछ राहत मिले.

  • डॉ रामदयाल मुंडा जयंती आज : आदिवासी संस्कृति की पहचान के लिए लड़ते रहे डॉ रामदयाल मुंडा

    दे ऊड़ी (तमाड़) जैसी छाेटी जगह से निकल कर अगर काेई आदिवासी युवा देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान बना लेता है ताे वह युवक खास हाेगा ही. अदभुत गुणाें से भरा हाेगा वह युवक. यहां बात हो रही है डॉ रामदयाल मुंडा की. 23 अगस्त 1939 काे जब देऊड़ी में रामदयाल मुंडा का जन्म हुआ था, तब देऊड़ी ताे क्या, रांची की भी बहुत पहचान नहीं थी

  • वाजपेयी नहीं होते, तो झारखंड राज्य भी नहीं बनता

    अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे. भारतीय राजनीति के ऐसे नेता, जिन्हें हर दल के लाेग प्यार करते थे, सभी के चहेते थे. अदभुत वक्ता. बेदाग छवि. सभी काे मिला कर, साथ लेकर चलने का गुण. ऐसे नेता, जिनके बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था-यह युवक एक न एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा. नेहरू की भविष्यवाणी सच हुई.

  • प्रभात खबर के 34 वर्ष पर विशेष : दबाव के बीच साख को बचाये रखने की चुनौती

    14 अगस्त, 1984 का दिन. यह वह दिन है जिस दिन प्रभात खबर का प्रकाशन रांची से आरंभ हुआ था. 34 साल देखते-देखते बीत गये. तब झारखंड न ताे राज्य बना था आैर न ही रांची इतना बड़ा शहर था. 34 सालाें में बहुत बदलाव दिखा. सिर्फ रांची से निकलनेवाला प्रभात खबर इन 34 सालाें में रांची के बाहर जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, पटना, भागलपुर, मुजफ्फपुर, गया, काेलकाता आैर सिलिगुड़ी से भी निकलने लगा यानी देश के तीन राज्याें से.