आकार पटेल

  • वैश्विक नवोन्मेष और भारत

    कुछ सप्ताह पहले, भारत में स्मार्टफोन उद्योग के संबंध में रिपोर्टें प्रकाशित हुई थीं, जो बड़ी वार्षिक वृद्धि एवं विशाल उपभोग परिमाण के आधार पर उपभोक्ता-अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों में एक है. भारत के स्मार्टफोन बाजार का नेतृत्व एक चीनी कंपनी जिओमी कर रही है, जिसका इस बाजार के 30 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है.

  • नुकसानदेह है अमेरिका-ईरान संघर्ष

    पिछले सप्ताह अमेरिका ने ईरान पर हमले की घोषणा की और फिर उसे वापस ले लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब मुझे यह बताया गया कि इन हमलों के नतीजे में लगभग 150 ईरानियों की मृत्यु हो सकती है, तो मैंने ये हमले स्थगित कर दिये. उन्होंने इन हमलों के आदेश इसलिए दिये थे कि ईरान ने अपनी सीमा के निकट एक अमेरिकी सैन्य ड्रोन मार गिराया था.

  • अजीम प्रेमजी का परोपकारी व्यक्तित्व

    धनी व्यक्ति को अपनी संपति समाज को वापस सौंप देना चाहिए और उसे धनवान के रूप में नहीं मरना चाहिए, यह विचार एंड्र्यू कार्नेगी का है. कार्नेगी एक अमेरिकी उद्यमी थी, वे खुद के बूते बने थे और उन्होंने इस्पात का साम्राज्य खड़ा किया था. उन्होंने 35 वर्ष की उम्र से अपनी संपत्ति दान करना शुरू कर दिया था. सौ वर्ष पूर्व 1919 में उनकी मृत्यु हो गयी और उस समय तक उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 90 प्रतिशत दान में दे दिया था.

  • हार से सबक लेकर उठायें कदम

    आकार पटेल कार्यकारी निदेशक,एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया delhi@prabhatkhabar.

  • रूढ़िवादिता और संवैधानिक सुधार

    साल 1948 में हिंदू कोड बिल का प्रस्ताव पेश करते हुए भीमराव आंबेडकर ने इस विधेयक के मुख्य मुद्दे के रूप में उत्तराधिकार को रेखांकित किया था. हिंदू उत्तराधिकार कानून दो परंपराओं से आया था, जिन्हें मिताक्षरा और दायभाग के रूप में जाना जाता है. मिताक्षरा के अनुसार, एक हिंदू पुरुष की संपत्ति उसकी नहीं होती है. इसका साझा स्वामित्व पिता, पुत्र, पौत्र और प्रपौत्र का होता है. इन सभी का संपत्ति पर जन्मसिद्ध अधिकार होता है.

  • पार्टियां और उसकी सदस्यता

    जब आप भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाते हैं, तो आपको वहां एक संदेश मिलता है, जिसमें कहा गया है कि ''विश्व के सबसे बड़े दल की वेबसाइट पर आपका स्वागत है.'' भाजपा के 10 करोड़ सदस्य हैं. तकरीबरन 10 वयस्क भारतीय में से एक भाजपा का सदस्य है. यह एक चौंका देनेवाला आंकड़ा है. वर्ष 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 16 करोड़ मत मिले थे और उनमें अधिकांश हिस्सा भाजपा का था.

  • शैक्षिक योग्यता और कामकाज

    एक नेता को कितना शिक्षित होना चाहिए और उसमें बौद्धिक सुसंगति के अभाव के क्या नतीजे हो सकते हैं? कांग्रेस मजाक उड़ा रही है कि स्मृति ईरानी ने कभी किसी कॉलेज में दाखिला नहीं लिया. उन्होंने एक पत्राचार पाठ्यक्रम में अपना नामांकन तो कराया था, पर वे उसे पूरा न कर सकीं.

  • संवैधानिक अधिकारों के रक्षक

    आगामी कुछ ही महीनों में एक बड़े गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमुख के रूप में मेरा कार्यकाल समाप्त हो जायेगा. मैंने सोचा कि मुझे इस क्षेत्र के बारे में लिखना चाहिए और अपने सुधी पाठकों को बताना चाहिए कि पिछले चार वर्षों तक यहां काम करने के दौरान मैंने क्या-क्या सीखा और क्या-क्या पाया.

  • घातक है नफरत की संस्कृति

    शुक्रवार (15 मार्च, 2019) को रेडियो पर समाचार सुनते हुए मुझे न्यूजीलैंड में हुए नरसंहार के बारे में पता चला. संवाददाता स्थानीय मुस्लिमों से उनकी प्रतिक्रिया ले रहे थे और साफ तौर पर वे आवाजें दक्षिण एशियाई थीं. शनिवार सुबह एक समाचारपत्र की रिपोर्ट में बताया गया था कि हमले के बाद लापता हुए लोगों में अहमदाबाद और हैदराबाद के नौ भारतीय शामिल हैं.

  • पाक से प्रतिद्वंद्विता के प्रभाव

    मैं स्पष्ट रूप से उन गिने-चुने भारतीय में से हूं, जो पिछले सप्ताह हुई घटनाओं से उत्साहित नहीं हैं. मेरा आशय पाकिस्तान पर हवाई हमले, उसकी प्रतिक्रिया और फिर वायुसेना के पायलट के साथ हुए प्रकरण से है. इसके कई कारण हैं और कुछ कारण ऐसे हैं, जिनसे आप असहमत भी हो सकते हैं.

  • पुलवामा आतंकी हमले के मायने

    जैशे-मोहम्मद मतलब मोहम्मद की सेना. यह आश्चर्यजनक है, क्योंकि इस्लाम के पैगम्बर की जीत की कोई आकांक्षा नहीं थी. अरब का विस्तार मोहम्मद की मृत्यु के बाद खलीफाओं, विशेषकर उमर के दौर में शुरू हुआ.

  • बुनियादी आय गारंटी योजना

    छोटे किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये नकद देने की योजना की सरकारी घोषणा एक शानदार कदम माना जा रहा है, जिससे चुनाव में राजनीतिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है. बजट में घोषित इस योजना के पहले दो बातें हुई हैं.

  • डांस बार के बहाने एक बहस

    डांस बार की परंपरा तथा संस्कृति का जन्म मुंबई- खासकर केंद्रीय मुंबई के आसपास के क्षेत्रों में हुआ था. बाद में भले ही इसका प्रचलन मुंबई के उपनगरीय से लेकर उसके बाहरी क्षेत्रों में फैल गया हो, पर यह चीज उसी इलाके की है.

  • तय होती है सुधारों की जीत

    वर्ष 2016 में केरल में हुए विधानसभा चुनावों के फलस्वरूप वहां वाम मोर्चे की सरकार बनी. कांग्रेसनीत मोर्चे की पराजय हुई और उसके सात प्रतिशत मत उसके पाले से खिसक गये. यही नहीं, वाम मोर्चे की विजय के बावजूद उसके मतों में भी दो प्रतिशत की गिरावट आ गयी.

  • क्या यही देशभक्ति है!

    हमारे देश को हमसे क्या उम्मीदे हैं? जनवरी, 1961 को अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में अपने देशवासियों से कहा था, ''यह मत पूछिए कि आपका देश आपके लिए क्या कर सकता है, बल्कि यह पूछिए कि आप अपने देश के लिए क्या कर सकते हैं.''

  • आज के नतीजों के निहितार्थ

    राज्यों के हालिया चुनावों के संदर्भ में जनमत सर्वेक्षणों से मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव परिणामों की कोई साफ तस्वीर नहीं उभर सकी कि इन दोनों राज्यों में किसकी सरकार बनने जा रही है. मतदान के बाद प्रकाशित नौ जनमत सर्वेक्षणों में से आठ ने यह बताया कि कांग्रेस राजस्थान में, जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति तेलंगाना में सफल रहेगी. मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के विषय में इन सर्वेक्षण नतीजों ने अनिश्चितता ही दिखायी. तथ्य यह है कि इन सर्वेक्षणों के औसत नतीजों ने यह बताया कि छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी अपना बहुमत हार बैठेगी.

  • मंदिर आंदोलन के निहितार्थ

    छह दिसंबर, 1992 को मेरी उम्र के 23 वर्ष पूरे होने में कुछ दिन ही कम थे. उस शाम मैं अपने दोस्त राजीव देसाई के घर पर था, जब उसने मुझसे कहा कि बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी है. मैं यह सोचकर उत्साहित था कि कुछ नया और परिवर्तनकामी घटित हुआ है.

  • राजनीतिक भाषा की मर्यादा

    बीते हफ्ते मेरे कार्यालय में छापा मारने आये जांच एजेंसी के एक व्यक्ति से मेरी बातचीत हुई थी. वह ठीक मेरी उम्र का था और उसने जो कुछ भी कहा, उससे मैं आश्चर्यचकित था.

  • हिंदू राष्ट्र बनने की आशंका निराधार

    वर्ष 2019 के आम चुनाव को लेकर लोगों की चिंताओं में ''हिंदू राष्ट्र'' की चिंता भी शामिल है. यह अवधारणा भारत को वर्तमान संविधान, जो धार्मिक नहीं है, से दूर ले जायेगी और एक धार्मिक संविधान के निकट लायेगी.

  • कश्मीर समस्या का समाधान

    अगर जवाहरलाल नेहरू कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र में लेकर नहीं गये होते, तो क्या यह समस्या सुलझ गयी होती? क्या शिमला समझौते से समाधान हमारे पक्ष में हो सका? ये दो ऐसे प्रश्न हैं, जो हमारा पीछा छोड़ते नहीं दिखते और इसलिए इनके संबंध में कुछ करना जरूरी है.