अभिषेक कुमार सिंह

  • रेलवे के खानपान की पेचीदगी

    देश का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में रेलवे पर आश्रित है, लेकिन उसकी सेवा को लेकर किसी के पास कहने के लिए शायद ही कोई सकारात्मक बात होगी. पिछले कुछ वर्षों से रेलवे की खानपान सेवा को सुधारने की कई कोशिशें होती रही हैं, पर इसे लेकर विवादों का कोई अंत नहीं दिख रहा है. मुसाफिर इसकी बढ़ती दरों और क्वॉलिटी को लेकर हमेशा ही शिकायत करते रहे हैं.

  • भारतीय विज्ञान की प्रामाणिकता !

    जालंधर में संपन्न भारतीय राष्ट्रीय साइंस कांग्रेस की 106वीं बैठक की उपलब्धियों की चर्चा जब होगी, तब होगी, फिलहाल वह विज्ञान के मिथकीय उल्लेखों का अखाड़ा बन गयी. इसमें एक बार फिर प्राचीन मिथकों के हवाले से कहा गया कि रामायण-महाभारत कोई मिथकीय ग्रंथ नहीं, बल्कि इतिहास हैं और इनमें वर्णित विमान आदि के संदर्भ वैज्ञानिक हैं.