आशुतोष चतुर्वेदी

  • यूपी, बिहार में जनसंख्या की चुनौती

    संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2019 में दुनिया की आबादी बढ़ कर 7.7 अरब हो गयी है, जबकि 2018 में यह आबादी 7.6 अरब थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 से 2019 के बीच भारत की जनसंख्या चीन की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है. भारत की जनसंख्या 1.2 फीसदी औसत वार्षिक दर से बढ़ कर 136 करोड़ हो गयी है.

  • ऑनलाइन गेम की गिरफ्त में बच्चे

    हम लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि टेक्नोलॉजी युवा पीढ़ी को कितनी तेजी से अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है. पिछले दिनों एक बेहद चिंताजनक खबर आयी कि हैदराबाद के मलकाजगिरी में एक 16 वर्षीय लड़के को ऑनलाइन गेम पबजी (प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड्स) खेलने को लेकर मां ने डांटा, तो उसने आत्महत्या कर ली. मां-बाप ने पुलिस को दिये बयान में कहा है कि बच्चे का अगले दिन अंग्रेजी का इम्तिहान था और वह पबजी खेल रहा था. इस पर मां ने उसे डांटा.

  • आइए, वोट करें और देश गढ़ें

    चुनाव किसी भी लोकतंत्र का आधार स्तंभ होता हैं. इसलिए इसे लोकतंत्र का महापर्व कहा जाता है. इसकी खूबसूरती यह है कि हर खासोआम के वोटों से सरकार का चयन होता है. इसलिए मतदाता लोकतंत्र की रीढ़ माने जाते हैं. हर शख्स को यह समझना चाहिए कि उसके वोट का कितना महत्व है.

  • राजनीति में युवाओं को मौका मिले

    जीवन के हर क्षेत्र में पीढ़ियों का परिवर्तन हमेशा मुश्किल होता है. इसके लिए साहसिक पहल की जरूरत होती है. भारत आज विश्व में सब से अधिक युवा आबादी वाला देश है. इतनी युवा आबादी किसी देश के पास नहीं हैं, लेकिन हर क्षेत्र में युवाओं की अनदेखी की जा रही है. दलील दी जाती है कि उनके पास अनुभव की कमी है.

  • और अब श्वेत आतंकवाद का उभार

    न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 50 लोगों की जान लेने की घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है. मौत का खेल खेलने वाले श्वेत आतंकवादी ब्रेंटन टैरेंट को जब कोर्ट में पेश किया गया और हत्या के आरोप तय किये गये, तो वह कोर्ट में खड़ा मुस्कुरा रहा था. उसे किसी तरह का पछतावा नहीं था. 28 वर्षीय आतंकी ब्रेंटन टैरेंट ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला है और उसने न्यूजीलैंड में इस घटना को अंजाम दिया.

  • आखिर हम चिंतित क्यों नहीं होते

    प्रदूषण को लेकर एक के बाद एक रिपोर्टें आ रही हैं, जिनमें भारत के शहरों की चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा किया जा रहा है. बावजूद इसके, हम इस ओर आंख मूंदे हैं. कोई चिंता नहीं जतायी जा रही है. समाज में भी इसको लेकर कोई विमर्श नहीं हो रहा है.

  • सैन्य कार्रवाई की नयी लक्ष्मण रेखा

    विंग कमांडर अभिनंदन की सकुशल वापसी से पूरा देश प्रसन्न है. होना भी चाहिए. अभिनंदन ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सीमा में घुसे पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था, लेकिन इस संघर्ष में उनका मिग-21 विमान भी गिर गया और वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जा पहुंचे.

  • सबक सिखाना है, पर धैर्य न खोएं

    पुलवामा हमले के बाद पूरा देश उद्वेलित हैं. देश के लोगों में आतंकवादियों और पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा है. इतनी बड़ी संख्या में हमारे सुरक्षा बल के भाइयों के शहीद होने से हम आप सभी का उद्वेलित होना स्वाभाविक है, लेकिन इस उत्तेजना में हम आप आपा न खोएं. इससे हमें बचना है. पिछले दिनों कुछ स्थानों से ऐसी खबरें आयीं कि देश में कश्मीरियों को निशाना बनाया गया. यह चिंताजनक स्थिति है. ऐसी घटनाओं को तत्काल रोकना होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीरियों पर हुए हमले की सही वक्त पर निंदा की है.

  • वोट करें, देश गढ़ें : लोकतंत्र के महाकुंभ में भागीदार बनें

    चु नाव किसी भी लोकतंत्र का आधारस्तंभ होता है. विसंगतियों के बावजूद हर आम चुनाव हमारे लोकतंत्र को समृद्ध कर जाता है. यह सही है कि हरेक आम चुनाव राजनीति का एक नया संदेश देकर भी जाता है और पार्टियों के लिए तो आम चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न होते हैं. हर दल पूरी ताकत झोंक कर उसे जीतने की कोशिश करता है.

  • आतंकी हमले से उद्वेलित देश

    जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल है. पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों को ले जा रही एक बस से आइडी से भरी कार को टकरा दिया गया, जिससे हुए धमाके में 40 जवान शहीद हो गये और अन्य अनेक घायल हो गये. यह पहली बार है कि आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को सुरक्षाबलों की गाड़ी से टकरा दिया. ऐसी घटनाएं अफगानिस्तान अथवा इराक में तो अक्सर होती रहती हैं, लेकिन भारत में अब तक ऐसी घटनाएं नहीं हुई थीं.

  • जलवायु परिवर्तन का कहर

    इन दिनों दुनियाभर में सर्दी ने कहर बरपा रखा है. अगर आपने पिछले कुछ दिनों की दिल्ली और उससे सटे इलाकों की तस्वीरें देखी हों, तो उनमें सड़कें और पार्क ओलों से पटे नजर आ रहे हैं. ऐसा दृश्य इससे पहले हाल-फिलहाल में देखने को नहीं मिला. जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हर साल बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार तो इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. जम्मू कश्मीर में सर्दी का करीब तीन दशक पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. इस बार उन पहाड़ी इलाकों में भी बर्फबारी हुई है, जहां पिछले एक दशक में बर्फ नहीं गिरी थी.

  • किसानों को मिले दीर्घकालिक हल

    मोदी सरकार की ओर से पेश किया गया अंतरिम बजट वैसे तो समाज के हर वर्ग को साधने वाला है, लेकिन यह छोटे किसानों पर विशेष मेहरबान है. अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट में किसानों, मजदूरों और मध्य वर्ग को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाओं का एलान किया. यह मौजूदा सरकार का अंतिम बजट था. वैसे तो अंतरिम बजट में अगली सरकार चुने जाने तक के खर्च की योजना और लेखा-जोखा होता है, लेकिन इस बजट में उससे कहीं अधिक है. इस साल अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने की उम्मीद है और मई के अंत तक नयी सरकार सत्ता संभाल लेगी.

  • इवीएम पर सवाल उठाना बंद करें

    दुनिया कंप्यूटर और इंटरनेट के दौर से आगे निकल चुकी है. माना जा रहा है कि अगली सदी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की है. ऐसे में हमारे कुछेक राजनेता हमें पुराने दौर में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

  • धौनी को कितने इम्तिहान देने होंगे

    पिछले कुछ समय में किसी क्रिकेट खिलाड़ी पर इतने सवाल नहीं उठाये गये हैं, जितने महेंद्र सिंह धौनी पर. पहले भी यह बात सामने आयी है कि धौनी के खिलाफ, खास कर सोशल मीडिया पर, एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. इसमें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि अब वह चुक गये हैं और टीम पर बोझ बन गये हैं.

  • महिलाओं का सम्मान करना सीखें

    पिछले दिनों महिलाओं के अपमान की कई घटनाएं सामने आयी हैं. ये घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि देश में यह धारणा अब भी मजबूत है कि स्‍त्री का दर्जा दोयम है और पुरुष से नीचे है. आश्चर्य तब होता है, जब जाने-माने लोग भी सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देते नजर आते हैं. यह अवधारणा अचानक प्रकट नहीं हुई है. दरअसल, हमारी सामाजिक संरचना ऐसी है, जिसमें बचपन से ही यह बात बच्चों के मन में स्थापित कर दी जाती है कि लड़का, लड़की से बेहतर है.

  • मीडिया को तो बख्श दीजिए

    मीडिया पर एकतरफा टीका-टिप्पणी करने का चलन इधर बढ़ता जा रहा है. कोई भी और कभी भी पूरे मीडिया जगत के विषय में बयान दे देता है और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देता है.

  • नये साल के संकल्प

    एक और साल ने दस्तक दी है. पुराना साल खट्टी-मीठी यादें छोड़ कर जा रहा है और नया साल नयी उम्मीदों के साथ हमारे सामने है. नया साल इस मायने में अहम है, क्योंकि इसमें लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव आम चुनाव होने जा रहे हैं. आम चुनाव देश की राजनीतिक दिशा और दशा तय करते हैं. इन चुनावों के माध्यम से हम और आप सत्ता की कुंजी किसी दल और व्यक्ति को सौंपते हैं.

  • विराट कोहली को बदलना होगा

    आक्रामक और अहंकारी होने के बीच बहुत बारीक रेखा है. भारतीय कप्तान विराट कोहली इस रेखा को अक्सर पार करते नजर आते हैं. वह विरोधी खिलाड़ियों से उलझते हैं, कई बार विरोधी बल्लेबाज के आउट होने पर उस पर टिप्पणी करते हैं और अंपायर के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं.

  • युवा देश में युवाओं की अनदेखी

    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने इतिहास ने एक अवसर प्रदान किया था कि वह राज्यों की कमान युवाओं को सौंपते, लेकिन राहुल गांधी ने यह मौका खो दिया. उन्होंने मध्य प्रदेश की कमान 72 वर्षीय कमलनाथ को और राजस्थान में 67 वर्षीय अशोक गहलौत को सौंपी.

  • जनता ने सुना दी अपने मन की बात

    हर चुनाव राजनीति को एक नया संदेश देकर जाता है. इन विधानसभा चुनावों से संदेश निकला है कि भाजपा को हराया जा सकता है. वह अपराजेय नहीं है. इन नतीजों से साफ है कि भाजपा को भी आत्मचिंतन करने की जरूरत है. दूसरा संदेश है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को इतनी जल्दी खारिज नहीं किया जा सकता. इस चुनाव का एक संदेश और है कि मिजोरम में बुरी तरह हार के बाद उत्तर पूर्व पूरी तरह कांग्रेस मुक्त हो गया है. यही एक राज्य था, जिसकी बदौलत कांग्रेस इस क्षेत्र में सत्ता में थी