आशुतोष चतुर्वेदी

  • जनसंख्या नियंत्रण की चुनौती

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में देश की बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर हमें विचार करना होगा. सीमित परिवार से न केवल हम अपना, बल्कि देश का भी भला करेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि जो छोटे परिवार की अहमियत समझ रहे हैं और लोगों को समझा रहे हैं, उन्हें सम्मानित करने की जरूरत है. छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चे को लाते वक्त हम नहीं सोचते कि उसे कैसा जीवन देंगे, उसकी शिक्षा का क्या इंतजाम करेंगे, उसके पोषण का सामर्थ्य हमारे पास है भी या नहीं.

  • जन पत्रकारिता के 35 साल

    प्रभात खबर अपनी यात्रा के 35 वर्ष पूरे कर रहा है. यह एक बड़ी उपलब्धि है. 14 अगस्त, 1984 को प्रभात खबर ने रांची से अपने सफर की शुरुआत की थी, लेकिन कुछ ही समय में प्रभात खबर ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना ली. आज प्रभात खबर दस स्थानों- रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, कोलकाता और सिलीगुड़ी से एक साथ प्रकाशित होता है. 2019 के इंडियन रीडरशिप सर्वे के मुताबिक प्रभात खबर के पाठकों की संख्या 1.41 करोड़ है.

  • सामाजिक ताना-बाना बनाये रखें

    जब किसी के सर्विस के मामले में धार्मिक आधार पर फैसला किया जाने लगे, तो निश्चित रूप से यह गहरी चिंता का विषय है. इसे एक महज एक अलग-थलग घटना मान कर नजरअंदाज किया जाना उचित नहीं है.

  • बड़बोले और झूठे हैं राष्ट्रपति ट्रंप

    यह आश्चर्यजनक, किंतु सत्य है कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति अक्सर असत्य बोलता है. यह बात अमेरिकी मीडिया खुलेआम कहता आया है और अब धीरे-धीरे दुनिया यह जानने लगी है कि राष्ट्रपति ट्रंप न केवल बड़बोले हैं, बल्कि वह अक्सर झूठ भी बोलते हैं.

  • युवा प्रतिभाओं का हो सम्मान

    कुछ समय पहले 10वीं और 12वीं के नतीजे आये थे. इन परीक्षाओं में बच्चे पूरी ताकत से जुटते हैं, रात-दिन पढ़ते हैं, जम कर मेहनत करते हैं. नतीजे बताते हैं कि उनकी मेहनत रंग लायी है और सभी बोर्डों के नतीजे इस बार अच्छे रहे हैं.

  • मझधार में कांग्रेस पार्टी

    किसी भी लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी होता है, लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और अन्य दलों की जो गत हुई है, उसने विपक्ष को बेहद कमजोर कर दिया है. अब हालत यह है कि 1885 में स्थापित कांग्रेस पार्टी आज अपनी प्रासंगिकता के लिए संघर्ष कर रही है. राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी को मझधार में छोड़ कर चले गये हैं.

  • प्रभात खबर पटना यात्रा के 23 वर्ष पूरे : अपनी पाठकों का भरोसा ही हमारी ताकत

    प्रभात खबर ने पटना में अपनी यात्रा के 23 वर्ष पूरे कर लिये हैं. प्रभात खबर ने एक सुदूर पिछड़े इलाके रांची से अपने सफर की शुरुआत की थी. लेकिन कुछ ही समय में प्रभात खबर ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना ली. आज प्रभात खबर 10 स्थानों- पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, कोलकाता और सिलीगुड़ी से एक साथ प्रकाशित होता है.

  • बेमिसाल हैं महेंद्र सिंह धौनी

    महेंद्र सिंह धौनी 38 वर्ष के हो गये. ऐसी अटकलें हैं कि वह विश्व कप के बाद संन्यास की घोषणा कर सकते हैं. वैसे हमेशा से एक लॉबी धौनी के खिलाफ सक्रिय रही है और वह सोशल मीडिया में एक सुनियोजित अभियान चलाती रही है.

  • सरकार का विजन दस्तावेज

    कोई भी सरकार जब अपना बजट पेश करती है, तो वह आर्थिक बही खाते के साथ साथ एक राजनीतिक संदेश भी देती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट के भी कई निहितार्थ हैं. सबसे पहले तो उन्होंने परंपरा से अलग हटते हुए बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में न लेकर एक लाल रंग के कपड़े में रखा, जिसके ऊपर अशोक स्तंभ का चिह्न लगा था.

  • हमें भीड़ तंत्र से बचना होगा

    आजादी के 70 साल बाद देश में भीड़ की हिंसा जैसे मुद्दे हमारे सामने आ खड़े हुए हैं. सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं है. समाज को इस पर चिंतन करना होगा कि भीड़ तंत्र हमें किस दिशा में ले जायेगा. हम भीड़ की हिंसा को रोकने की बजाय उसका हिस्सा बन जाते हैं. यह गंभीर स्थिति है. इन घटनाओं से सीधे तौर से हम और आप जैसे आम लोग जुड़े हैं, प्राथमिक रूप से इनसे कोई राजनेता नहीं जुड़ा है.

  • मनमोहन सिंह की मौन विदाई

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल बजट सत्र से ठीक पहले 14 जून को समाप्त हो गया. वह 28 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे. उनकी विदाई को लेकर कोई आयोजन नहीं हुआ.

  • समाज में बुजुर्गों की अनदेखी

    देश की बड़ी आबादी तेजी से बुजुर्ग हो रही है. बेहतर खान पान और स्वास्थ्य सेवाओं ने लोगों की उम्र बढ़ा दी है, लेकिन हालात बदल रहे हैं और पुराना सामाजिक तानाबाना टूटता जा रहा है. संयुक्त परिवारों का दौर चला गया. एकल परिवारों में मां-बाप के लिए स्थान नहीं है.

  • जल संकट को लेकर चेत जाएं

    पूरे देश में जल संकट गहराता जा रहा है. हम सब लोग बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं. केरल से थोड़ी राहत की खबर आयी है कि देर से ही सही, वहां मॉनसून पहुंच गया है. दूसरी ओर जल संकट को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से विचलित कर देने वाली खबरें सामने आ रही हैं.

  • प्रचंड गर्मी और बढ़ता जल संकट, देश के 10 राज्यों में तापमान 44 डिग्री से पार

    इन दिनों आसमान से जैसे आग बरस रही है. एक ओर तो प्रचंड गर्मी का प्रकोप है, तो दूसरी ओर हमारे गांव, कस्बे और शहर पानी की कमी से जूझ रहे हैं. चापाकल सूखने लगे हैं. कूपों का जल स्तर गिर गया है. गर्मी के साथ-साथ पेय जल का भारी संकट भी उत्पन्न हो गया है. इन दिनों लगभग आधा देश प्रचंड गर्मी की चपेट में है. देश के 10 राज्यों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है.

  • चिंताजनक है कांग्रेस का पराभव

    संपादकीय प्रभात आशुतोष चतुर्वेदी प्रधान संपादक, प्रभात खबर ashutosh.chaturvedi सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल है कि अगर आप मुंबई के चर्च गेट से उत्तर भारत की ओर जा रहे हैं, तो आपको पंजाब से पहले कांग्रेस का कोई सांसद नहीं मिल पायेगा. मैसेज भले ही एक तंज हो, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद निराशाजनक हैं. कई राज्यों में तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ है. ऐसे राज्यों की सूची खासी लंबी है. कांग्रेस दिल्ली, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, ओड़िशा, त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, दमन दीव, दादर नगर हवेली, लक्षद्वीप और चंडीगढ़ में अपना खाता तक नहीं खोल पायी. और तो और, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी अमेठी सीट को भी नहीं बचा पाये. इसके पहले राहुल गांधी अमेठी से लगातार तीन बार सांसद चुने गये थे. अमेठी से पहले भी गांधी परिवार लड़ता रहा हैं. इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में संजय गांधी के हारने के बाद यह दूसरा मौका है, जब अमेठी से गांधी परिवार का कोई सदस्य हारा है. एक और रोचक तथ्य है कि इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनावों में राज नारायण ने इंदिरा गांधी को रायबरेली से हरा दिया था. इसके बाद से इस परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं हारा था. इस बार कांग्रेस को पूरे देश में मात्र 52 सीटें मिलीं. 80 सीटों वाले उप्र से मात्र रायबरेली से सोनिया गांधी जीत पायीं. कांग्रेस की इन सीटों में 19 केरल और तमिलनाडु की 10 सीटें हटा दें, तो वह बाकी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मात्र 23 सीटें जीत पायी हैं. कांग्रेस को इस बार भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने का मौका नहीं मिलेगा. इसके लिए कम-से-कम 55 सीटें जरूरी हैं. यह दूसरा मौका होगा, जब लोकसभा में विपक्ष का नेता नहीं होगा. 2014 में भी कांग्रेस को 44 सीटें ही मिली थीं. लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी होता है. लिहाजा कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना चिंताजनक है. 1885 में स्थापित यह पार्टी आज अपनी प्रासंगिकता के लिए संघर्ष कर रही है. चुनाव में इस बार बहुत दिलचस्प बातें देखीं. कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों से दूरी बनाते हुए नरम हिंदुत्व की राह पकड़ी थी. राहुल गांधी हर छोटे-बड़े मंदिर में मत्था टेकते नजर आ रहे थे, जबकि कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों की तरफदारी के आरोप लगते रहे हैं. कांग्रेस ने इस बार उनसे दूरी बनाये रखी. राहुल गांधी ने चुनाव में पार्टी की हार स्वीकार करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को बधाई दी. कहा, इस पराजय की 100 फीसदी जिम्मेदारी उनकी है. लड़ाई विचारधारा की है और पार्टी की विचाराधारा जीतेगी. इन सबके बावजूद कांग्रेस के लिए ये नतीजे खतरे की घंटी हैं. वह अपने गढ़ों- कर्नाटक, राजस्थान, मप्र और छत्तीसगढ़ में भी बुरी तरह हारी है. उप्र में कांग्रेस का हश्र तो हम सबके सामने है. इस लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार की कमान खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संभाली थी और उन्होंने आक्रामक प्रचार भी किया था. उन्होंने कर्ज माफी, ''न्याय'' और राफेल को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की. सैकड़ों रैलियां और रोड शो किये. इनमें भीड़ भी जुट रही थी. इससे आभास हुआ था कि राहुल गांधी कांग्रेस को पुनर्जीवित करने में सफल हो जायेंगे, पर ऐसा नहीं हुआ. भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो पायी. राहुल ने सबसे ज्यादा प्रचार उप्र में किया, जहां कांग्रेस केवल एक सीट रायबरेली से जीत पायी. प्रियंका गांधी को पूर्वी उप्र और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उप्र की कमान सौंपे जाने की रणनीति भी कामयाब नहीं हो पायी. राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं. कुछ समय पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने एक ऐतिहासिक अवसर आया था, जब वह मप्र और राजस्थान में सत्ता की कमान युवाओं को सौंप सकते थे, लेकिन राहुल गांधी ने यह ऐतिहासिक मौका गंवा दिया. उन्होंने मप्र की कमान 72 वर्षीय कमलनाथ को सौंपी और जस्थान में 67 वर्षीय अशोक गहलौत को मुख्यमंत्री बना दिया, जबकि राहुल गांधी युवा नेतृत्व को मौका देकर राजनीतिक जोखिम उठा सकते थे. इन नतीजों का एक और संदेश भी है कि वंशवाद की राजनीति का दौर उतार पर है. इसे जितनी जल्दी कांग्रेस स्वीकार कर लेगी, उसके लिए उतना बेहतर होगा. एक बात और स्पष्ट हो गयी है कि लगातार प्रयासों के बावजूद राहुल गांधी को देश की जनता कांग्रेस के नेता के बतौर स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. प्रियंका गांधी भी कुछ कमाल नहीं दिखा पायीं. परिवारवाद की राजनीति से आने वाले सभी बड़े नेता इन चुनावों में हार गये. इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, महबूबा मुफ्ती, डिंपल यादव, मीसा भारती, जयंत चौधरी, वैभव गहलौत, अशोक चव्हाण, मिलिंद देवड़ा और राहुल गांधी आदि शामिल हैं. सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन के बावजूद एनडीए उप्र में 64 सीटों जीतने में कामयाब रहा. आंकड़ों के अनुसार भाजपा को यूपी में 49.5% वोट मिले हैं, जबकि महागठबंधन को 38.97% हासिल हुए हैं. कांग्रेस का वोट प्रतिशत मात्र 6.26% रहा. माना जा रहा था कि गठबंधन उप्र में भाजपा का विजयी रथ रोकने में कामयाब हो जायेगा, लेकिन सपा-बसपा का वोट आपस में ट्रांसफर नहीं हुआ और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला. नतीजों से स्पष्ट है कि कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने का नुकसान भी गठबंधन को हुआ. आकलन के अनुसार यदि कांग्रेस गठबंधन में शामिल होती, तो भाजपा की आठ सीटें कम हो जातीं. कांग्रेस बार-बार यह कह रही थी कि वह गठबंधन के वोट नहीं काटेगी, लेकिन भाजपा प्रत्याशियों को मिली जीत के अंतर से पता चलता है कि कांग्रेस ने गठबंधन के वोट ज्यादा काटे हैं. एक बात और, कांग्रेस ने कई राज्यों में गठबंधन किये. इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं, लेकिन इन प्रदेशों में आखिरी वक्त तक सीट को लेकर सहयोगियों से सामंजस्य का अभाव रहा. कुछ महीने पहले राजस्थान, मप्र और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, उन राज्यों में भी पार्टी का प्रदर्शन 2014 से भी खराब रहा. मौजूदा लोकसभा चुनाव कांग्रेसी नेताओं के सामने बड़ा अवसर था, लेकिन खींचतान की खबरें खूब सामने आयीं थीं. जैसा कि कांग्रेसी भी कहते हैं, उन्हें विपक्ष की जरूरत नहीं होती, उनकी अपनी पार्टी के लोग इस कमी को पूरा कर देते हैं. इन चुनावों में मतदाताओं ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा नहीं है, लेकिन कांग्रेस का ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि नेहरू-गांधी परिवार के बिना कांग्रेस का वजूद नहीं रहेगा. कांग्रेस को यदि प्रासंगिक रहना है, तो उसे नेतृत्व, संगठन, रणनीति और कार्य संस्कृति में तत्काल बदलाव करने होंगे, अन्यथा उसके अप्रासंगिक होने का खतरा है.

  • सीमित चरणों में हों आम चुनाव

    चुनाव किसी भी लोकतंत्र के आधार स्तंभ होते हैं. हर आम चुनाव लोकतंत्र को समृद्ध कर जाता है. सदियों तक सत्ता परिवर्तन हमेशा रक्तरंजित रहा है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था ने सत्ता परिवर्तन को सहज कर दिया है. लोकसभा चुनाव वास्तव में लोकतंत्र का महाकुंभ है. इतनी व्यापकता, इतनी विविधता की मिसाल दुनियाभर में कहीं नहीं है.

  • परीक्षा के अंक नहीं हैं जिंदगी का पैमाना

    हाल में बिहार, झारखंड, सीबीएसइ और आइसीएससी बोर्ड के नतीजे आये हैं. साथ ही कई बच्चों के आत्महत्या करने की दुखद खबरें भी आयीं. ऐसी खबरें इसी साल आयीं हों, ऐसा नहीं हैं. ये खबरें साल-दर-साल आ रही हैं.

  • फेक न्यूज के दौर में विश्वसनीय हैं अखबार

    इन दिनों सोशल मीडिया पर फेक न्यूज की भरमार है. यह भेद कर पाना बेहद कठिन है कि कौन-सी खबर सच है, कौन-सी खबर फर्जी है. व्हाट्सएप के दौर में सुबह से शाम तक खबरों का आदान प्रदान होता है और पता ही नहीं चलता कि कितनी तेजी से फेक न्यूज के आप शिकार हो गये और आपने उसे आगे बढ़ा कर कितने और लोगों को प्रभावित कर दिया. एक और मुश्किल है कि इसके स्रोत का पता ही नहीं चलता है. यह फॉरवर्ड होती हुई आप तक पहुंचती है.

  • प्रभात खबर से विशेष बातचीत : पीएम मोदी ने कहा, मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करना भारत की बड़ी जीत

    गुरुवार को प्रधानमंत्री ने 7, लोक कल्याण मार्ग, नयी दिल्ली स्थित अपने आवास पर प्रभात खबर से विशेष बातचीत की. राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि इस विषय को राजनीतिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता है. इसे वोट बैंक पॉलिटिक्स से बाहर लाना पड़ेगा. मसूद अजहर को यूनाइटेड नेशंस द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किये जाने पर प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बड़ी जीत बतायी है. बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल पर भी उन्होंने बातें कीं. उन्होंने कहा कि देश का भला तब होगा, जब पूर्वी भारत का विकास होगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और उत्तर-पूर्व के राज्य, इन्हें देश का ग्रोथ इंजन बनना चाहिए.

  • प्रभात खबर से विशेष बातचीत : पीएम मोदी ने कहा- जमीन पर न करंट, न अंडरकरंट, बल्कि एनडीए के पक्ष में है सुपर करंट

    गुरुवार को प्रधानमंत्री ने 7, लोक कल्याण मार्ग, नयी दिल्ली स्थित अपने आवास पर प्रभात खबर से विशेष बातचीत की. राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि इस विषय को राजनीतिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता है. बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल पर भी उन्होंने बातें कीं. उन्होंने कहा कि देश का भला तब होगा, जब पूर्वी भारत का विकास होगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और उत्तर-पूर्व के राज्य, इन्हें देश का ग्रोथ इंजन बनना चाहिए. पढ़ें पीएम मोदी से प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी का पूरा साक्षत्‍कार.......